Tuesday, 20 Oct 2026 | 11:20 AM

Trending :

EXCLUSIVE

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

क्या आपको पता है कि दुनिया का जो नक्शा हम बचपन से देखते आए हैं, उसमें देशों का आकार असल में वैसा नहीं दिखता जैसा जमीन पर है? अगर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश प्रस्ताव पास हो जाता है, तो दुनिया का नक्शा काफी अलग नजर आ सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा शुक्रवार को एक प्रस्ताव पर मतदान करेगी। इसमें दुनिया का ऐसा नक्शा अपनाने की बात है, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनकी वास्तविक जमीन के हिसाब से ज्यादा सही दिखे। इस मुहिम की अगुआई अफ्रीकी देश कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा नक्शे ने सदियों से अफ्रीका और दुनिया के दूसरे हिस्सों को उनके वास्तविक आकार से छोटा दिखाया है। मौजूदा नक्शे में क्या गड़बड़ी है? आज दुनिया के बहुत से नक्शे मर्केटर प्रोजेक्शन पर आधारित हैं। इसे यूरोपीय नक्शानवीस जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था। यह नक्शा समुद्री यात्रा और नेविगेशन के लिए काफी उपयोगी है। इसकी वजह यह है कि इसमें उत्तर-दक्षिण की दिशा वाली रेखाएं भूमध्य रेखा के मुकाबले सही दिशा बनाए रखती हैं। लेकिन पूरी दुनिया को एक साथ दिखाने के लिए इसमें एक बड़ी समस्या है—देशों का आकार वास्तविकता से अलग दिखाई देता है। जैसे-जैसे कोई जगह भूमध्य रेखा से दूर होती जाती है, नक्शे पर उसका आकार जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखने लगता है। इसका सबसे चर्चित उदाहरण ग्रीनलैंड है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका से भी बड़ा दिखाई देता है और उसका आकार अफ्रीका के आसपास नजर आता है। लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है। ग्रीनलैंड लगभग कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जितना बड़ा है, जबकि अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। यानी नक्शे को देखकर किसी को लग सकता है कि ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग एक ही आकार के हैं, जबकि जमीन पर दोनों के क्षेत्रफल में बहुत बड़ा अंतर है। अफ्रीकी देशों ने उठाया सवाल अफ्रीकी देशों का कहना है कि यह सिर्फ नक्शे की तकनीकी समस्या नहीं है। इसका असर इस बात पर भी पड़ता है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों को लोग किस नजर से देखते हैं। संयुक्त राष्ट्र के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि मौजूदा नक्शे में अफ्रीका का छोटा दिखाई देना लोगों की सामूहिक सोच में भी उसके महत्व और आकार को कम कर सकता है। प्रस्ताव में इस विकृति को ‘सांकेतिक रूप से छोटा दिखाना’ बताया गया है। इसके अलावा प्रस्ताव में कहा गया है कि नक्शे की यह असमानता अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया के आकार को लोगों की नजर में कम कर सकती है। इससे इन क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, बुनियादी ढांचे की जरूरत, विकास की क्षमता और समृद्धि को लेकर भी दुनिया की समझ प्रभावित हो सकती है। अफ्रीकी देशों का यह भी मानना है कि ऐसी धारणाएं पर्यावरण, भू-राजनीति और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पूर्वाग्रह को बढ़ावा दे सकती हैं। खबर अपडेट हो रही है…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया:तीन दिन की बातचीत बेनतीजा; पीएम कार्नी बोले- US ने आखिरी समय शर्तें बदली

August 22, 2026/
9:59 am

अमेरिका और कनाडा के बीच 3 दिन तक चली ट्रेड डील की बातचीत नाकाम रही। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड...

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से कतर का गैस निर्यात ठप:इकोनॉमी 8.6% गिर सकती है; यहां से ही भारत का सबसे ज्यादा LPG आयात

May 18, 2026/
3:55 pm

कतर फारस की खाड़ी में मौजूद एक छोटा-सा रेगिस्तानी देश था, जहां ज्यादातर लोग मोती निकालने और समुद्र से जुड़े...

RBI New FD Rules for Small Finance Banks

August 4, 2026/
2:27 pm

नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश के प्रमुख स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) में...

Piyush Mishra Slams Naseeruddin Shah Over Protest Silence

August 10, 2026/
10:30 am

2 घंटे पहले कॉपी लिंक सीनियर एक्टर पीयूष मिश्रा ने झारखंड प्रोटेस्ट में पहुंचकर नसीरुद्दीन शाह के एक बयान पर...

World News Updates; US Iran Israel Japan Earthquake

May 20, 2026/
8:32 am

9 मिनट पहले कॉपी लिंक जापान के कागोशिमा क्षेत्र में बुधवार को 5.9 तीव्रता का भूकंप आया। तेज झटकों से...

दावा- शीर्ष अमेरिकी वैज्ञानिक ने वुहान लैब को फंडिंग दी:अमेरिका की पूर्व खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने कहा- डॉ. फॉसी ने कसम खाकर झूठ बोला

June 20, 2026/
5:38 am

अमेरिका की पूर्व खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने कार्यालय में अपने अंतिम दिन बड़े वैज्ञानिक डॉ. एंथनी फॉसी पर गंभीर...

Trump received a red carpet welcome by China at Beijing airport.

May 13, 2026/
7:17 pm

आखरी अपडेट:13 मई, 2026, 19:17 IST दोनों नेता शीर्ष पद के लिए दावा करने वालों में सबसे आगे हैं, जिससे...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

क्या आपको पता है कि दुनिया का जो नक्शा हम बचपन से देखते आए हैं, उसमें देशों का आकार असल में वैसा नहीं दिखता जैसा जमीन पर है? अगर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश प्रस्ताव पास हो जाता है, तो दुनिया का नक्शा काफी अलग नजर आ सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा शुक्रवार को एक प्रस्ताव पर मतदान करेगी। इसमें दुनिया का ऐसा नक्शा अपनाने की बात है, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनकी वास्तविक जमीन के हिसाब से ज्यादा सही दिखे। इस मुहिम की अगुआई अफ्रीकी देश कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा नक्शे ने सदियों से अफ्रीका और दुनिया के दूसरे हिस्सों को उनके वास्तविक आकार से छोटा दिखाया है। मौजूदा नक्शे में क्या गड़बड़ी है? आज दुनिया के बहुत से नक्शे मर्केटर प्रोजेक्शन पर आधारित हैं। इसे यूरोपीय नक्शानवीस जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था। यह नक्शा समुद्री यात्रा और नेविगेशन के लिए काफी उपयोगी है। इसकी वजह यह है कि इसमें उत्तर-दक्षिण की दिशा वाली रेखाएं भूमध्य रेखा के मुकाबले सही दिशा बनाए रखती हैं। लेकिन पूरी दुनिया को एक साथ दिखाने के लिए इसमें एक बड़ी समस्या है—देशों का आकार वास्तविकता से अलग दिखाई देता है। जैसे-जैसे कोई जगह भूमध्य रेखा से दूर होती जाती है, नक्शे पर उसका आकार जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखने लगता है। इसका सबसे चर्चित उदाहरण ग्रीनलैंड है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका से भी बड़ा दिखाई देता है और उसका आकार अफ्रीका के आसपास नजर आता है। लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है। ग्रीनलैंड लगभग कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जितना बड़ा है, जबकि अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। यानी नक्शे को देखकर किसी को लग सकता है कि ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग एक ही आकार के हैं, जबकि जमीन पर दोनों के क्षेत्रफल में बहुत बड़ा अंतर है। अफ्रीकी देशों ने उठाया सवाल अफ्रीकी देशों का कहना है कि यह सिर्फ नक्शे की तकनीकी समस्या नहीं है। इसका असर इस बात पर भी पड़ता है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों को लोग किस नजर से देखते हैं। संयुक्त राष्ट्र के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि मौजूदा नक्शे में अफ्रीका का छोटा दिखाई देना लोगों की सामूहिक सोच में भी उसके महत्व और आकार को कम कर सकता है। प्रस्ताव में इस विकृति को ‘सांकेतिक रूप से छोटा दिखाना’ बताया गया है। इसके अलावा प्रस्ताव में कहा गया है कि नक्शे की यह असमानता अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया के आकार को लोगों की नजर में कम कर सकती है। इससे इन क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, बुनियादी ढांचे की जरूरत, विकास की क्षमता और समृद्धि को लेकर भी दुनिया की समझ प्रभावित हो सकती है। अफ्रीकी देशों का यह भी मानना है कि ऐसी धारणाएं पर्यावरण, भू-राजनीति और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पूर्वाग्रह को बढ़ावा दे सकती हैं। खबर अपडेट हो रही है…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.