Friday, 04 Sep 2026 | 10:54 PM

Trending :

EXCLUSIVE

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

क्या आपको पता है कि दुनिया का जो नक्शा हम बचपन से देखते आए हैं, उसमें देशों का आकार असल में वैसा नहीं दिखता जैसा जमीन पर है? अगर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश प्रस्ताव पास हो जाता है, तो दुनिया का नक्शा काफी अलग नजर आ सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा शुक्रवार को एक प्रस्ताव पर मतदान करेगी। इसमें दुनिया का ऐसा नक्शा अपनाने की बात है, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनकी वास्तविक जमीन के हिसाब से ज्यादा सही दिखे। इस मुहिम की अगुआई अफ्रीकी देश कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा नक्शे ने सदियों से अफ्रीका और दुनिया के दूसरे हिस्सों को उनके वास्तविक आकार से छोटा दिखाया है। मौजूदा नक्शे में क्या गड़बड़ी है? आज दुनिया के बहुत से नक्शे मर्केटर प्रोजेक्शन पर आधारित हैं। इसे यूरोपीय नक्शानवीस जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था। यह नक्शा समुद्री यात्रा और नेविगेशन के लिए काफी उपयोगी है। इसकी वजह यह है कि इसमें उत्तर-दक्षिण की दिशा वाली रेखाएं भूमध्य रेखा के मुकाबले सही दिशा बनाए रखती हैं। लेकिन पूरी दुनिया को एक साथ दिखाने के लिए इसमें एक बड़ी समस्या है—देशों का आकार वास्तविकता से अलग दिखाई देता है। जैसे-जैसे कोई जगह भूमध्य रेखा से दूर होती जाती है, नक्शे पर उसका आकार जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखने लगता है। इसका सबसे चर्चित उदाहरण ग्रीनलैंड है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका से भी बड़ा दिखाई देता है और उसका आकार अफ्रीका के आसपास नजर आता है। लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है। ग्रीनलैंड लगभग कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जितना बड़ा है, जबकि अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। यानी नक्शे को देखकर किसी को लग सकता है कि ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग एक ही आकार के हैं, जबकि जमीन पर दोनों के क्षेत्रफल में बहुत बड़ा अंतर है। अफ्रीकी देशों ने उठाया सवाल अफ्रीकी देशों का कहना है कि यह सिर्फ नक्शे की तकनीकी समस्या नहीं है। इसका असर इस बात पर भी पड़ता है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों को लोग किस नजर से देखते हैं। संयुक्त राष्ट्र के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि मौजूदा नक्शे में अफ्रीका का छोटा दिखाई देना लोगों की सामूहिक सोच में भी उसके महत्व और आकार को कम कर सकता है। प्रस्ताव में इस विकृति को ‘सांकेतिक रूप से छोटा दिखाना’ बताया गया है। इसके अलावा प्रस्ताव में कहा गया है कि नक्शे की यह असमानता अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया के आकार को लोगों की नजर में कम कर सकती है। इससे इन क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, बुनियादी ढांचे की जरूरत, विकास की क्षमता और समृद्धि को लेकर भी दुनिया की समझ प्रभावित हो सकती है। अफ्रीकी देशों का यह भी मानना है कि ऐसी धारणाएं पर्यावरण, भू-राजनीति और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पूर्वाग्रह को बढ़ावा दे सकती हैं। खबर अपडेट हो रही है…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
जाकिर खान अस्पताल में एडमिट:छोटे भाई अरबाज के रमजान व्लॉग में लीलावती हॉस्पिटल में दिखे कॉमेडियन

March 15, 2026/
1:07 pm

कॉमेडियन जाकिर खान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें वह अस्पताल में भर्ती दिखाई दिए हैं।...

रिपोर्ट: ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने सुप्रीम लीडर को इस्तीफा भेजा:इस्लामिक सेना के कंट्रोल से नाराज, कहा- बड़े फैसलों में शामिल नहीं किया जाता

June 1, 2026/
6:41 am

ईरान में राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने इस्तीफा दे दिया है। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने देश के सर्वोच्च...

खरगोन मंडी में डॉलर चना के दाम पर हंगामा:कम भाव से नाराज किसानों का चक्काजाम, एसडीएम की समझाइश पर खुला रास्ता

March 2, 2026/
4:23 pm

खरगोन मंडी में डॉलर चना के कम भाव मिलने से नाराज किसानों ने सोमवार दोपहर प्रदर्शन किया। नीलामी में डॉलर...

बड़े डायरेक्टर्स को लगा था धुरंधर-2 सोमवार को बैठ जाएगी:फिल्म मेकर कुणाल कोहली का दावा, कहा- इंडस्ट्री ने इस फिल्म का सपोर्ट नहीं किया

April 14, 2026/
5:44 pm

आदित्य धर के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बना रही है। इसी बीच...

Palakkad reported a voter turnout of 79.22% this assembly elections.

May 4, 2026/
2:21 pm

आखरी अपडेट:04 मई, 2026, 14:21 IST शुरुआती रुझानों से संकेत मिलता है कि एनडीए 30 सदस्यीय विधानसभा में 11 सीटों...

RBSE Rajasthan Board Shala Darpan 5th, 8th Result 2026 at rajshaladarpan.nic.in.

March 24, 2026/
11:11 pm

आखरी अपडेट:24 मार्च 2026, 23:11 IST टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, ठाकरे ने 2022 में शिवसेना में विभाजन के बाद...

पश्चिम बंगाल के नए CM: 'मैं नहीं चलाऊंगा नई सरकार...', CM पद फाइनल होने के बाद क्यों बोले शुभेंदु अधिकारी?

May 8, 2026/
8:39 pm

पश्चिम बंगाल में आजादी के बाद पहली बार भाजपा गठबंधन सरकार बनने जा रही है। प्रमुख दल की बैठक में...

केरलम में आज सीएम का ऐलान:दोपहर में विधायक दल की बैठक; 4 राज्यों में सीएम शपथ ले चुके, बस केरलम में बाकी

May 14, 2026/
5:04 am

केरलम सहित पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आए 10 दिन हो गए हैं। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, UN में आज वोटिंग:अफ्रीका को फायदा, यूरोप, रूस और कनाडा का साइज छोटा होगा

क्या आपको पता है कि दुनिया का जो नक्शा हम बचपन से देखते आए हैं, उसमें देशों का आकार असल में वैसा नहीं दिखता जैसा जमीन पर है? अगर संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश प्रस्ताव पास हो जाता है, तो दुनिया का नक्शा काफी अलग नजर आ सकता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा शुक्रवार को एक प्रस्ताव पर मतदान करेगी। इसमें दुनिया का ऐसा नक्शा अपनाने की बात है, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनकी वास्तविक जमीन के हिसाब से ज्यादा सही दिखे। इस मुहिम की अगुआई अफ्रीकी देश कर रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा नक्शे ने सदियों से अफ्रीका और दुनिया के दूसरे हिस्सों को उनके वास्तविक आकार से छोटा दिखाया है। मौजूदा नक्शे में क्या गड़बड़ी है? आज दुनिया के बहुत से नक्शे मर्केटर प्रोजेक्शन पर आधारित हैं। इसे यूरोपीय नक्शानवीस जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था। यह नक्शा समुद्री यात्रा और नेविगेशन के लिए काफी उपयोगी है। इसकी वजह यह है कि इसमें उत्तर-दक्षिण की दिशा वाली रेखाएं भूमध्य रेखा के मुकाबले सही दिशा बनाए रखती हैं। लेकिन पूरी दुनिया को एक साथ दिखाने के लिए इसमें एक बड़ी समस्या है—देशों का आकार वास्तविकता से अलग दिखाई देता है। जैसे-जैसे कोई जगह भूमध्य रेखा से दूर होती जाती है, नक्शे पर उसका आकार जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखने लगता है। इसका सबसे चर्चित उदाहरण ग्रीनलैंड है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका से भी बड़ा दिखाई देता है और उसका आकार अफ्रीका के आसपास नजर आता है। लेकिन हकीकत बिल्कुल अलग है। ग्रीनलैंड लगभग कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य जितना बड़ा है, जबकि अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। यानी नक्शे को देखकर किसी को लग सकता है कि ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग एक ही आकार के हैं, जबकि जमीन पर दोनों के क्षेत्रफल में बहुत बड़ा अंतर है। अफ्रीकी देशों ने उठाया सवाल अफ्रीकी देशों का कहना है कि यह सिर्फ नक्शे की तकनीकी समस्या नहीं है। इसका असर इस बात पर भी पड़ता है कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों को लोग किस नजर से देखते हैं। संयुक्त राष्ट्र के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि मौजूदा नक्शे में अफ्रीका का छोटा दिखाई देना लोगों की सामूहिक सोच में भी उसके महत्व और आकार को कम कर सकता है। प्रस्ताव में इस विकृति को ‘सांकेतिक रूप से छोटा दिखाना’ बताया गया है। इसके अलावा प्रस्ताव में कहा गया है कि नक्शे की यह असमानता अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया के आकार को लोगों की नजर में कम कर सकती है। इससे इन क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति, बुनियादी ढांचे की जरूरत, विकास की क्षमता और समृद्धि को लेकर भी दुनिया की समझ प्रभावित हो सकती है। अफ्रीकी देशों का यह भी मानना है कि ऐसी धारणाएं पर्यावरण, भू-राजनीति और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पूर्वाग्रह को बढ़ावा दे सकती हैं। खबर अपडेट हो रही है…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.