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संडे प्रोफाइल : मैथ्यू बर्गमैन:सोशल मीडिया कंपनियों केखिलाफ बर्गमैन की लड़ाई

संडे प्रोफाइल : मैथ्यू बर्गमैन:सोशल मीडिया कंपनियों केखिलाफ बर्गमैन की लड़ाई

अमेरिकी वकील मैथ्यू बर्गमैन इन दिनों बच्चों को सोशल मीडिया से होने वाले नुकसान के खिलाफ अपनी कानूनी मुहिम के कारण चर्चा में हैं। वे सोशल मीडिया विक्टिम्स लॉ सेंटर के संस्थापक हैं। अगस्त के अंतिम सप्ताह में मेटा ने अमेरिका के दर्जनों राज्यों की ओर से दायर मामलों को निपटाने के लिए 18 अरब डॉलर यानी करीब 1.70 लाख करोड़ रुपए के समझौते पर सहमति दी। इन मुकदमों में आरोप है कि सोशल मीडिया की लत किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। बर्गमैन इस मुख्य मुकदमे की कार्रवाई में गहराई से जुड़े रहे हैं। बर्गमैन के मुताबिक, मेटा लगातार यह दलील देती रही है कि उसके प्लेटफॉर्म लोगों को लती नहीं बनाते। कंपनी का तर्क रहा है कि अगर बच्चों को कोई नुकसान हुआ है तो उसके लिए बच्चे या उनके माता-पिता जिम्मेदार हैं। इसके विपरीत बर्गमैन का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्रोडक्ट से जुड़े जोखिमों के लिए जवाबदेह होना चाहिए। बर्गमैन का लगभग पूरा समय अब सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ मुकदमों में बीतता है। अमेरिका में कम्युनिकेशन डिसेंसी एक्ट की धारा 230 डिजिटल कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर मौजूद कंटेंट के लिए काफी हद तक कानूनी जिम्मेदारी से छूट देती है। यह प्रावधान लंबे समय से माता-पिता, वकीलों और पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी बाधा रहा है। बर्गमैन ने इसी के खिलाफ अलग कानूनी रास्ता अपनाया है। पिछले चार वर्षों में बर्गमैन इंस्टाग्राम, टिकटॉक और स्नैपचैट समेत प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ मामले लड़ चुके हैं। वे चार हजार से ज्यादा मुवक्किलों के करीब 1,500 मामलों से जुड़े हैं। सिएटल में पले-बढ़े बर्गमैन ने 1986 में ग्रेजुएशन के बाद कानून की डिग्री हासिल की। करिअर की शुरुआत उन्होंने सिएटल की एक बड़ी कानूनी फर्म से की। शुरुआत में वे एक एसबेस्टस कंपनी के वकील थे। बाद में उन्होंने पेसिफिक नॉर्थवेस्ट कंपनी बनाई, जो एसबेस्टस पीड़ितों को मुआवजा दिलाने के मामले लड़ती थी।
2021 में उन्होंने सोशल मीडिया लॉ सेंटर शुरू किया, जिसका फोकस बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले सोशल मीडिया मामलों पर है। बर्गमैन सोशल मीडिया कंपनियों की तुलना एसबेस्टस कंपनियों से करते हैं। उनका कहना है कि एसबेस्टस कंपनियां अपने प्रोडक्ट के खतरों से परिचित थीं, फिर भी सबूत छिपाती और वैज्ञानिक जानकारी को तोड़-मरोड़कर पेश करती थीं। उनके मुताबिक सोशल मीडिया कंपनियां भी कुछ इसी तरह के सवालों का सामना कर रही हैं।

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