Monday, 02 Nov 2026 | 05:48 PM

Trending :

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इमोशनल हुईं:सिंगर एमएस सुब्बुलक्ष्मी की जयंती पर गीत सुनते हुए आंखों में आए आंसू

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इमोशनल हुईं:सिंगर एमएस सुब्बुलक्ष्मी की जयंती पर गीत सुनते हुए आंखों में आए आंसू

बेंगलुरु में मंगलवार को महान कर्नाटक गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भावुक हो गईं। कार्यक्रम में गीत सुनते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए। दरअसल, यह कार्यक्रम बेंगलुरु के चौडैया मेमोरियल हॉल में आयोजित किया गया था। सीतारमण कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं। सुब्बुलक्ष्मी की परपोती एस ऐश्वर्या और एस सौंदर्या ने भी समारोह में प्रस्तुति दी थी। ऐश्वर्या और सौंदर्या ने अपनी परदादी की संगीत परंपरा को आगे बढ़ाया है। कार्यक्रम में उन्होंने सुब्बुलक्ष्मी की कुछ रचनाएं प्रस्तुत कीं। समारोह में संगीत प्रेमियों ने सुब्बुलक्ष्मी और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान को याद किया। सुब्बुलक्ष्मी की जिंदगी पर जल्द बायोपिक फिल्म आएगी एमएस सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै में हुआ था। वह भारत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल थीं। 1998 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। सुब्बुलक्ष्मी की जिंदगी पर जल्द एक बायोपिक फिल्म आएगी। रश्मिका मंदाना फिल्म में उनका किरदार निभाएंगी। फिल्म का आधिकारिक लॉन्च 16 सितंबर 2026 को उनकी 110वीं जयंती पर चेन्नई के द म्यूजिक एकेडमी में किया गया। गौतम तिन्ननुरी फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं, जिन्होंने पहले ‘जर्सी’ और ‘किंगडम’ जैसी फिल्में बनाई हैं। रश्मिका से पहले साई पल्लवी का नाम इस बायोपिक के लिए सामने आया था। रश्मिका पहली बार ऐसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शख्सियत का किरदार निभाएंगी, जिसकी पहचान मुख्य रूप से कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से जुड़ी है। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी थे फैन एस.एस.सुब्बूलक्ष्मी कर्नाटक की महान गायिका थीं, जिनके गाए हुए भजन विष्णु सहास्त्रनामम को यूट्यूब पर 10 करोड़ बार सुना जा चुका है। वहीं भजन गोविंदम को 17 मिलियन और श्री वेंकटेश्वरा सुप्रभातम को 47 मिलियन बार सुना गया है। पद्मश्री से लेकर भारत रत्न तक, ऐसा कोई नामी अवॉर्ड नहीं जो इनके नाम ना हो। आवाज में वो आकर्षण था कि महात्मा गांधी और पं. जवाहरलाल नेहरू भी इनके प्रशंसकों में से एक रहे। महात्मा गांधी खास फरमाइश पर इनसे रघुपति राघव राजा राम सुनते थे। नीली साड़ी इन पर इतनी जंचती थी कि इनके नाम पर ही उस रंग का नाम एमएस ब्लू रख दिया गया। जानिए कैसे देश की सबसे बड़ी गायिका बनीं एम.एस.सुब्बूलक्ष्मी? एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी उर्फ कुंजम्मा का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै (तमिलनाडु) में हुआ था। उनकी मां शानमुकावादिर अम्माल देवदासी समाज का हिस्सा थीं जो वीणा बजाती थीं और पिता सुब्रमण्यम अय्यर एक सिंगर। मां ने उनकी ट्रेनिंग मशहूर पं. नारायण राव व्यास से करवाई और महज 10 साल की उम्र में उन्होंने पहली रिकॉर्डिंग की। सुब्बुलक्ष्मी मां की स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान उनका साथ देते हुए भजन गाया करती थीं। उनकी पहली परफॉर्मेंस 1929 में मद्रास म्यूजिक एकेडमी के मंच पर हुई, तब वो महज 13 साल की थीं। द वायर को दिए इंटरव्यू में सुब्बुलक्ष्मी ने बताया था कि एक दिन वो घर के बाहर बैठीं मिट्टी का घर बना ही रही थीं कि कोई उन्हें उठाकर सीधे मां के पास मंच पर ले गया। मां करीब 50-100 लोगों के सामने परफॉर्म कर रही थीं और वो चाहती थीं कि सुब्बुलक्ष्मी भी चंद गाने सुनाएं। उन्होंने मिट्टी से सने हाथ पोछे और गाना शुरू किया, तो म्यूजिक एकेडमी तालियों से गूंज उठी। इसके बाद उन्हें लगातार गाने के मौके दिए जाने लगे। उस जमाने के मशहूर पत्रकार टी. सदाशिवम ने 1936 में हुई एक सुब्बुलक्ष्मी की इस परफॉर्मेंस के बाद तमिल वीकली मैगजीन आनंदा विकातम में फ्रंटपेज आर्टिकल लिखा, जिसके बाद उनके कॉन्सर्ट में भारी भीड़ पहुंचने लगी। काम के सिलसिले में हुई मुलाकात के बाद दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और परिवार के खिलाफ जाकर शादी की। सदाशिवम जानते थे कि सुब्बुलक्ष्मी का हुनर सिर्फ मंच तक सीमित रहने के लिए नहीं है। फिल्ममेकर के. सुब्रह्मण्यम से सिफारिश कर सदाशिवम ने सुब्बुलक्ष्मी को फिल्म सेवासदन में लीड रोल दिलवाया। 1938 की ये फिल्म जबरदस्त हिट रही और सुब्बुलक्ष्मी साउथ का बड़ा नाम बनकर उभरीं। सुब्बुलक्ष्मी के गानों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए पति सदाशिवम ने खुद पैसे लगाकर फिल्में बनाने का फैसला किया। सुब्बुलक्ष्मी के सुझाव पर सदाशिवम ने मीराबाई पर पहली फिल्म मीरा (1945) बनाई। फिल्म में सुब्बुलक्ष्मी को ही मीराबाई का लीड रोल दिया गया। मीरा का रोल निभाने के लिए सुब्बुलक्ष्मी खुद उन सभी जगहों पर जाकर रहीं, जहां मीरा ने कृष्ण भक्ति में समय बिताया था। 1944 में फिल्म की शूटिंग न्यूटोन स्टूडियो, मद्रास में शुरू हुई, जिसके बाद टीम ने जयपुर, वृंदावन, चित्तौड़ और द्वारका का चयन किया। फिल्म के कॉन्सेप्ट से प्रभावित होकर उदयपुर के महाराजा ने हाथी-घोड़ों के साथ फिल्म बनाने के लिए अपना पैलेस इस्तेमाल करने की इजाजत से लेकर हर तरह से मदद की। महाराजा के मंत्री की मदद से उन्हें शाही हाथी-घोड़े मिले और साथ ही महल में कहीं भी कभी भी शूटिंग करने की इजाजत भी। शूटिंग के लिए महल की शाही डांसर्स भी दी गईं। फिल्म में नजर आए कई एक्स्ट्रा कलाकार भी शाही लोग थे। 136 मिनट की फिल्म में थे सुब्बुलक्ष्मी के 20 गाने 3 नवंबर 1945 को दिवाली पर फिल्म मीरा रिलीज की गई। 136 मिनट की इस फिल्म में 20 गाने थे, जो सुब्बुलक्ष्मी ने ही गाए थे। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतनी बड़ी हिट रही कि दो साल बाद कुछ सीन को रीशूट कर 1947 में हिंदी में मीराबाई नाम से फिर रिलीज किया गया था। प्रीमियर में पहुंचे थे माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी, जवाहरलाल नेहरू 21 नवंबर 1947 को मीराबाई फिल्म रिलीज हुई, जिससे सुब्बुलक्ष्मी तमिल स्टार से नेशनल स्टार बन गईं। फिल्म में सरोजिनी नायडू ने सुब्बुलक्ष्मी का परिचय करवाते हुए उन्हें नाइटेंगल ऑफ इंडिया (भारत की बुलबुल) नाम दिया था। फिल्म के प्रीमियर में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी पहुंचे थे। इनके अलावा लॉर्ड माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, विजयालक्ष्मी पंडित और इंदिरा गांधी जैसी देश की अन्य बड़ी हस्तियां भी थीं। फिल्म देखने के बाद जवाहरलाल नेहरू और माउंटबेटन सुब्बुलक्ष्मी के फैन बन गए थे। फिल्म मीरा तमिल सिनेमा में म्यूजिकल कल्ट साबित हुई। ये फिल्म आज भी भारत की 100 सबसे महान फिल्मों की लिस्ट में शामिल है। मीरा हिट होने के बाद उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने फिल्मों से हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ लिया। जवाहरलाल नेहरू ने कहा था- आपके सामने मैं मामूली प्रधानमंत्री हूं द प्रिंट के अनुसार, 1953 में दिल्ली में हुए कर्नाटक समारोह में सुब्बुलक्ष्मी को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने गाने का मौका मिला। जवाहरलाल नेहरू इस बार खुद को उनकी तारीफ करने से नहीं रोक सके। उन्होंने सुब्बुलक्ष्मी के पास जाकर कहा- आपकी आवाज में दिलों के तार हिला देने की ताकत है, मैं आपके सामने क्या हूं, सिर्फ एक मामूली प्रधानमंत्री। गांधी जी भी फैन थे, सामने बैठाकर करते थे गाने की गुजारिश स्वतंत्रता संग्राम में साथ काम करते हुए महात्मा गांधी और सुब्बुलक्ष्मी की दोस्ती हो गई। गांधी जी को उनकी आवाज इतनी पसंद थी कि उन्होंने कई बार सुब्बुलक्ष्मी से सामने बैठकर रघुपति राघव राजा राम सुनाने की गुजारिश की। 2 अक्टूबर 1947 को महात्मा गांधी ने दिल्ली में सुब्बुलक्ष्मी के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन करवाया। दरअसल, गांधी जी सुब्बुलक्ष्मी की आवाज में अपना भजन ‘हरि तुम हरो’ सुनना चाहते थे। सुब्बुलक्ष्मी उसे ठीक तरह गा नहीं पा रही थीं, तो उन्होंने सुझाव दिया कि गाना किसी दूसरी गायिका को दिया जाए, लेकिन ये सुझाव खारिज कर दिया गया। किसी वजह से सुब्बुलक्ष्मी कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकीं। सुब्बुलक्ष्मी माफी चाहती थीं, इसके लिए उन्होंने 1 अक्टूबर की आधी रात तक कोशिश कर हरि तुम हरो रिकॉर्ड किया और सुबह वाली फ्लाइट से रिकॉर्डिंग महात्मा गांधी तक पहुंचाई। गांधी जी की हत्या के बाद कई महीनों तक नहीं गाया भजन जब 30 जनवरी 1948 को सुब्बुलक्ष्मी ने गांधी जी की हत्या की खबर सुनी तो वो बेहोश हो गईं। उन्हें इतना सदमा लगा कि उन्होंने कई महीनों तक हरि तुम हरो भजन नहीं गाया।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Amitabh Bachchan Meets Fans At Jalsa

October 26, 2026/
4:48 pm

25 मिनट पहले कॉपी लिंक मुंबई स्थित अमिताभ बच्चन के बंगले ‘जलसा’ को बम से उड़ाने की धमकी के बाद...

World Updates | Indonesia Earthquake 7.4 Magnitude

April 2, 2026/
8:08 am

52 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में पहली बार कोई राष्ट्रपति खुद सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में पहुंचा। ट्रम्प अपने...

AI Summit Chaos; PM Modi Aims India AI Superpower 2047

February 18, 2026/
4:00 am

नई दिल्ली3 दिन पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर AI से जुड़ी रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को...

Jemimah Rodrigues has scored a fifty against Australia (Picture credit: X @BCCIWomen)

March 6, 2026/
7:41 pm

आखरी अपडेट:मार्च 06, 2026, 19:41 IST सीक्वल की रिलीज़ ने व्यापक विवाद को जन्म दिया, आलोचकों और राजनीतिक हस्तियों ने...

ask search icon

April 6, 2026/
3:56 pm

  Bread and Diabetes: डायबिटीज के मरीजों के लिए ब्रेड खाने को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं. करनाल के डायबिटीज...

नीमच में बड़े भाई ने छोटे भाई को मारा चाकू:युवक की मौत, आरोपी भी घायल; जमीनी विवाद में किया वार

April 30, 2026/
1:07 pm

नीमच जिले की जीरण तहसील के ग्राम पावड़ा खुर्द में जमीन विवाद को लेकर हुए झगड़े में एक बड़े भाई...

एक्ट्रेस करिश्मा तन्ना ने प्रेग्नेंसी की खबर साझा की:पति वरुण बंगेरा के साथ खुशी जताई; फैंस और सेलेब्स ने दी बधाइयां

April 6, 2026/
4:08 pm

एक्ट्रेस करिश्मा तन्ना ने अपने फैंस को बड़ी खुशखबरी दी है। एक्ट्रेस ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी पहली प्रेग्नेंसी...

कंट्री काउंटर्स; दुनिया के सारे देश घूमने का ट्रेंड:भीड़ से ऊबे लोग अनछुए डेस्टिनेशन का रुख कर रहे, एक्सपर्ट- यह प्रतिष्ठा का प्रतीक

June 6, 2026/
5:30 pm

प्रशांत महासागर का छोटा सा द्वीपीय देश ‘तुवालु’… हवाई व ऑस्ट्रेलिया के बीच बसा यह देश दुनिया के उन गिने-चुने...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इमोशनल हुईं:सिंगर एमएस सुब्बुलक्ष्मी की जयंती पर गीत सुनते हुए आंखों में आए आंसू

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इमोशनल हुईं:सिंगर एमएस सुब्बुलक्ष्मी की जयंती पर गीत सुनते हुए आंखों में आए आंसू

बेंगलुरु में मंगलवार को महान कर्नाटक गायिका एमएस सुब्बुलक्ष्मी की 110वीं जयंती के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भावुक हो गईं। कार्यक्रम में गीत सुनते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए। दरअसल, यह कार्यक्रम बेंगलुरु के चौडैया मेमोरियल हॉल में आयोजित किया गया था। सीतारमण कार्यक्रम की मुख्य अतिथि थीं। सुब्बुलक्ष्मी की परपोती एस ऐश्वर्या और एस सौंदर्या ने भी समारोह में प्रस्तुति दी थी। ऐश्वर्या और सौंदर्या ने अपनी परदादी की संगीत परंपरा को आगे बढ़ाया है। कार्यक्रम में उन्होंने सुब्बुलक्ष्मी की कुछ रचनाएं प्रस्तुत कीं। समारोह में संगीत प्रेमियों ने सुब्बुलक्ष्मी और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनके योगदान को याद किया। सुब्बुलक्ष्मी की जिंदगी पर जल्द बायोपिक फिल्म आएगी एमएस सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै में हुआ था। वह भारत की सबसे सम्मानित गायिकाओं में शामिल थीं। 1998 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। सुब्बुलक्ष्मी की जिंदगी पर जल्द एक बायोपिक फिल्म आएगी। रश्मिका मंदाना फिल्म में उनका किरदार निभाएंगी। फिल्म का आधिकारिक लॉन्च 16 सितंबर 2026 को उनकी 110वीं जयंती पर चेन्नई के द म्यूजिक एकेडमी में किया गया। गौतम तिन्ननुरी फिल्म का निर्देशन कर रहे हैं, जिन्होंने पहले ‘जर्सी’ और ‘किंगडम’ जैसी फिल्में बनाई हैं। रश्मिका से पहले साई पल्लवी का नाम इस बायोपिक के लिए सामने आया था। रश्मिका पहली बार ऐसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक शख्सियत का किरदार निभाएंगी, जिसकी पहचान मुख्य रूप से कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से जुड़ी है। महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू भी थे फैन एस.एस.सुब्बूलक्ष्मी कर्नाटक की महान गायिका थीं, जिनके गाए हुए भजन विष्णु सहास्त्रनामम को यूट्यूब पर 10 करोड़ बार सुना जा चुका है। वहीं भजन गोविंदम को 17 मिलियन और श्री वेंकटेश्वरा सुप्रभातम को 47 मिलियन बार सुना गया है। पद्मश्री से लेकर भारत रत्न तक, ऐसा कोई नामी अवॉर्ड नहीं जो इनके नाम ना हो। आवाज में वो आकर्षण था कि महात्मा गांधी और पं. जवाहरलाल नेहरू भी इनके प्रशंसकों में से एक रहे। महात्मा गांधी खास फरमाइश पर इनसे रघुपति राघव राजा राम सुनते थे। नीली साड़ी इन पर इतनी जंचती थी कि इनके नाम पर ही उस रंग का नाम एमएस ब्लू रख दिया गया। जानिए कैसे देश की सबसे बड़ी गायिका बनीं एम.एस.सुब्बूलक्ष्मी? एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी उर्फ कुंजम्मा का जन्म 16 सितंबर 1916 को मदुरै (तमिलनाडु) में हुआ था। उनकी मां शानमुकावादिर अम्माल देवदासी समाज का हिस्सा थीं जो वीणा बजाती थीं और पिता सुब्रमण्यम अय्यर एक सिंगर। मां ने उनकी ट्रेनिंग मशहूर पं. नारायण राव व्यास से करवाई और महज 10 साल की उम्र में उन्होंने पहली रिकॉर्डिंग की। सुब्बुलक्ष्मी मां की स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान उनका साथ देते हुए भजन गाया करती थीं। उनकी पहली परफॉर्मेंस 1929 में मद्रास म्यूजिक एकेडमी के मंच पर हुई, तब वो महज 13 साल की थीं। द वायर को दिए इंटरव्यू में सुब्बुलक्ष्मी ने बताया था कि एक दिन वो घर के बाहर बैठीं मिट्टी का घर बना ही रही थीं कि कोई उन्हें उठाकर सीधे मां के पास मंच पर ले गया। मां करीब 50-100 लोगों के सामने परफॉर्म कर रही थीं और वो चाहती थीं कि सुब्बुलक्ष्मी भी चंद गाने सुनाएं। उन्होंने मिट्टी से सने हाथ पोछे और गाना शुरू किया, तो म्यूजिक एकेडमी तालियों से गूंज उठी। इसके बाद उन्हें लगातार गाने के मौके दिए जाने लगे। उस जमाने के मशहूर पत्रकार टी. सदाशिवम ने 1936 में हुई एक सुब्बुलक्ष्मी की इस परफॉर्मेंस के बाद तमिल वीकली मैगजीन आनंदा विकातम में फ्रंटपेज आर्टिकल लिखा, जिसके बाद उनके कॉन्सर्ट में भारी भीड़ पहुंचने लगी। काम के सिलसिले में हुई मुलाकात के बाद दोनों एक दूसरे को पसंद करने लगे और परिवार के खिलाफ जाकर शादी की। सदाशिवम जानते थे कि सुब्बुलक्ष्मी का हुनर सिर्फ मंच तक सीमित रहने के लिए नहीं है। फिल्ममेकर के. सुब्रह्मण्यम से सिफारिश कर सदाशिवम ने सुब्बुलक्ष्मी को फिल्म सेवासदन में लीड रोल दिलवाया। 1938 की ये फिल्म जबरदस्त हिट रही और सुब्बुलक्ष्मी साउथ का बड़ा नाम बनकर उभरीं। सुब्बुलक्ष्मी के गानों को आम जनता तक पहुंचाने के लिए पति सदाशिवम ने खुद पैसे लगाकर फिल्में बनाने का फैसला किया। सुब्बुलक्ष्मी के सुझाव पर सदाशिवम ने मीराबाई पर पहली फिल्म मीरा (1945) बनाई। फिल्म में सुब्बुलक्ष्मी को ही मीराबाई का लीड रोल दिया गया। मीरा का रोल निभाने के लिए सुब्बुलक्ष्मी खुद उन सभी जगहों पर जाकर रहीं, जहां मीरा ने कृष्ण भक्ति में समय बिताया था। 1944 में फिल्म की शूटिंग न्यूटोन स्टूडियो, मद्रास में शुरू हुई, जिसके बाद टीम ने जयपुर, वृंदावन, चित्तौड़ और द्वारका का चयन किया। फिल्म के कॉन्सेप्ट से प्रभावित होकर उदयपुर के महाराजा ने हाथी-घोड़ों के साथ फिल्म बनाने के लिए अपना पैलेस इस्तेमाल करने की इजाजत से लेकर हर तरह से मदद की। महाराजा के मंत्री की मदद से उन्हें शाही हाथी-घोड़े मिले और साथ ही महल में कहीं भी कभी भी शूटिंग करने की इजाजत भी। शूटिंग के लिए महल की शाही डांसर्स भी दी गईं। फिल्म में नजर आए कई एक्स्ट्रा कलाकार भी शाही लोग थे। 136 मिनट की फिल्म में थे सुब्बुलक्ष्मी के 20 गाने 3 नवंबर 1945 को दिवाली पर फिल्म मीरा रिलीज की गई। 136 मिनट की इस फिल्म में 20 गाने थे, जो सुब्बुलक्ष्मी ने ही गाए थे। ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर इतनी बड़ी हिट रही कि दो साल बाद कुछ सीन को रीशूट कर 1947 में हिंदी में मीराबाई नाम से फिर रिलीज किया गया था। प्रीमियर में पहुंचे थे माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, इंदिरा गांधी, जवाहरलाल नेहरू 21 नवंबर 1947 को मीराबाई फिल्म रिलीज हुई, जिससे सुब्बुलक्ष्मी तमिल स्टार से नेशनल स्टार बन गईं। फिल्म में सरोजिनी नायडू ने सुब्बुलक्ष्मी का परिचय करवाते हुए उन्हें नाइटेंगल ऑफ इंडिया (भारत की बुलबुल) नाम दिया था। फिल्म के प्रीमियर में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी पहुंचे थे। इनके अलावा लॉर्ड माउंटबेटन, राजेंद्र प्रसाद, विजयालक्ष्मी पंडित और इंदिरा गांधी जैसी देश की अन्य बड़ी हस्तियां भी थीं। फिल्म देखने के बाद जवाहरलाल नेहरू और माउंटबेटन सुब्बुलक्ष्मी के फैन बन गए थे। फिल्म मीरा तमिल सिनेमा में म्यूजिकल कल्ट साबित हुई। ये फिल्म आज भी भारत की 100 सबसे महान फिल्मों की लिस्ट में शामिल है। मीरा हिट होने के बाद उन्हें कई फिल्मों के ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने फिल्मों से हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ लिया। जवाहरलाल नेहरू ने कहा था- आपके सामने मैं मामूली प्रधानमंत्री हूं द प्रिंट के अनुसार, 1953 में दिल्ली में हुए कर्नाटक समारोह में सुब्बुलक्ष्मी को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने गाने का मौका मिला। जवाहरलाल नेहरू इस बार खुद को उनकी तारीफ करने से नहीं रोक सके। उन्होंने सुब्बुलक्ष्मी के पास जाकर कहा- आपकी आवाज में दिलों के तार हिला देने की ताकत है, मैं आपके सामने क्या हूं, सिर्फ एक मामूली प्रधानमंत्री। गांधी जी भी फैन थे, सामने बैठाकर करते थे गाने की गुजारिश स्वतंत्रता संग्राम में साथ काम करते हुए महात्मा गांधी और सुब्बुलक्ष्मी की दोस्ती हो गई। गांधी जी को उनकी आवाज इतनी पसंद थी कि उन्होंने कई बार सुब्बुलक्ष्मी से सामने बैठकर रघुपति राघव राजा राम सुनाने की गुजारिश की। 2 अक्टूबर 1947 को महात्मा गांधी ने दिल्ली में सुब्बुलक्ष्मी के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन करवाया। दरअसल, गांधी जी सुब्बुलक्ष्मी की आवाज में अपना भजन ‘हरि तुम हरो’ सुनना चाहते थे। सुब्बुलक्ष्मी उसे ठीक तरह गा नहीं पा रही थीं, तो उन्होंने सुझाव दिया कि गाना किसी दूसरी गायिका को दिया जाए, लेकिन ये सुझाव खारिज कर दिया गया। किसी वजह से सुब्बुलक्ष्मी कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकीं। सुब्बुलक्ष्मी माफी चाहती थीं, इसके लिए उन्होंने 1 अक्टूबर की आधी रात तक कोशिश कर हरि तुम हरो रिकॉर्ड किया और सुबह वाली फ्लाइट से रिकॉर्डिंग महात्मा गांधी तक पहुंचाई। गांधी जी की हत्या के बाद कई महीनों तक नहीं गाया भजन जब 30 जनवरी 1948 को सुब्बुलक्ष्मी ने गांधी जी की हत्या की खबर सुनी तो वो बेहोश हो गईं। उन्हें इतना सदमा लगा कि उन्होंने कई महीनों तक हरि तुम हरो भजन नहीं गाया।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.