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कंप्यूटर लैब में सिस्टम बंद, फिर भी छात्रों का प्रैक्टिकल:RDVV के छात्र बोले- सालों से ऐसा हो रहा; कांग्रेस विधायक ने विधासभा में उठाया मुद्दा

कंप्यूटर लैब में सिस्टम बंद, फिर भी छात्रों का प्रैक्टिकल:RDVV के छात्र बोले- सालों से ऐसा हो रहा; कांग्रेस विधायक ने विधासभा में उठाया मुद्दा

जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग में गुरुवार को डिजिटल फॉरेंसिक थर्ड सेमेस्टर का फाइनल वाइवा और प्रैक्टिकल आयोजित हुआ, जिसके लिए कंप्यूटर आवश्यक थे। लेकिन छात्रों का आरोप है कि एक घंटे की लिखित परीक्षा के बाद जब उन्होंने प्रैक्टिकल के लिए कंप्यूटर मांगे तो शिक्षकों ने कह दिया कि उनका प्रैक्टिकल पूरा हो चुका है। इस पर छात्र कक्षा से बाहर निकल आए और नाराजगी जताई। उनका कहना है कि तीन सेमेस्टर में एक बार भी कंप्यूटर ठीक से चालू नहीं हुए, जबकि हर साल हजारों रुपये फीस ली जाती है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि पढ़ाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। बिना लैब के तकनीकी पढ़ाई पर सवाल यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लिकेशन (UICSA), जहां BCA और MCA जैसे अहम तकनीकी कोर्स संचालित होते हैं, वहां की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। AICTE से मान्यता प्राप्त इन पाठ्यक्रमों में करीब 150 से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन आरोप है कि उन्हें बुनियादी लैब सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। छात्रों का कहना है कि प्रैक्टिकल के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं और वास्तविक प्रयोगशाला अभ्यास के बिना ही उन्हें डिग्री लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप दैनिक भास्कर की टीम को सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर देखा गया कि 23 छात्र-छात्राएं कक्षा में वाइवा परीक्षा दे रहे थे। करीब एक घंटे बाद उन्हें यह कहकर बाहर कर दिया गया कि प्रैक्टिकल पूरा हो चुका है और अंक परिणाम में जोड़ दिए जाएंगे। एमसीए थर्ड सेमेस्टर की छात्रा रिषिका नामदेव ने बताया कि डिजिटल फॉरेंसिक का फाइनल एग्जाम था, जिसमें वाइवा और प्रैक्टिकल दोनों होना था, लेकिन किसी भी छात्र को कंप्यूटर सिस्टम उपलब्ध नहीं कराया गया। कक्षा में लैब मौजूद है और लगभग 30 सिस्टम रखे हैं, पर छात्रों का कहना है कि एक भी कंप्यूटर चालू हालत में नहीं है। रिषिका के मुताबिक प्रैक्टिकल परीक्षा के लिए कंप्यूटर संचालन का ज्ञान जरूरी होता है, लेकिन तीन सेमेस्टर गुजरने के बाद भी छात्रों को लैब में काम करने का मौका नहीं मिला। उनका कहना है कि एचओडी से लेकर वीसी और रजिस्ट्रार तक से कई बार सिस्टम उपलब्ध कराने की मांग की गई, मगर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि शिक्षकों ने अपनी ओर से कुछ मदद करते हुए लैपटॉप पर सीमित जानकारी दी, लेकिन छात्रों के अनुसार वह पर्याप्त नहीं थी। 17 हजार फीस, पर पढ़ाई शून्य अखिलेश मिश्रा ने दैनिक भास्कर को बताया कि हर छात्र से प्रति सेमेस्टर करीब 17 हजार रुपए फीस ली जाती है और तीन साल में लगभग 54 हजार रुपए जमा कर चुके हैं, लेकिन पढ़ाई की स्थिति बेहद खराब है। उनका कहना है कि छात्र हर साल पास तो हो जाते हैं, मगर वास्तविक ज्ञान नहीं मिल रहा, जो उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसा है। छात्रों के अनुसार फाइनल परीक्षा के दिन भी किसी को लैब में नहीं ले जाया गया। उनका दावा है कि विभाग शुरू होने के बाद से ही सिस्टम बंद पड़े हैं और इसी तरह औपचारिक रूप से प्रैक्टिकल कराकर छात्रों को पास कर दिया जाता है, जबकि कंप्यूटर का व्यावहारिक अनुभव उन्हें नहीं मिल पाता। नियामक मानकों पर उठे सवाल AICTE के नियमों के मुताबिक तकनीकी पाठ्यक्रम चलाने वाले संस्थानों में पर्याप्त आधुनिक कंप्यूटर, लाइसेंस प्राप्त सॉफ्टवेयर और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ होना अनिवार्य है। निर्धारित मानक के अनुसार स्नातक स्तर पर 10 छात्रों पर एक कंप्यूटर और स्नातकोत्तर स्तर पर 4 छात्रों पर एक कंप्यूटर उपलब्ध होना चाहिए। डिजिटल युग में विडंबना
एक ओर देश डिजिटल इंडिया और आईटी क्रांति की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं विश्वविद्यालय में डिजिटल फॉरेंसिक जैसे विषय का प्रैक्टिकल बिना कंप्यूटर सम्पन्न होना शिक्षा व्यवस्था की गंभीर विडंबना को उजागर करता है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के नियमानुसार लेकिन, विश्वविद्यालय प्रशासन इन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा है। NAAC की पीयर टीम द्वारा बार-बार आधुनिक लैब्स और अपडेटेड कंप्यूटरों की जरूरत जताने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया! क्या यह प्रशासन की लापरवाही नहीं, बल्कि छात्रों के भविष्य से धोखाधड़ी नहीं है ?। टैंडर जारी कर दिया है बिना सिस्टम के छात्रों ने वाइवा के साथ प्रैक्टिकल दे दिया। मामले पर कुलसचिव डा सुरेंद्र सिंह का कहा कि सिस्टम को और अधिक बेहतर करने के लिए पीएम उषा योजना के तहत 200 से अधिक कंप्यूटर खरीदे जा रहे है, जिसका टैंडर भी जारी कर दिया है। अब किसी भी छात्र को सिस्टम के चलते परेशानी नहीं होगी। विधानसभा में उठा मुद्दा पूरे मामले की गूंज विधानसभा तक पहुंच चुकी है। जबलपुर पूर्व के कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने सदन में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के UICSA विभाग में उपलब्ध कंप्यूटर और तकनीकी संसाधनों की स्थिति को लेकर प्रश्न उठाया था। उन्होंने सरकार से विभाग में संचालित बीसीए और एमसीए पाठ्यक्रमों के लिए उपलब्ध लैब, कंप्यूटर एवं अन्य तकनीकी सुविधाओं की विस्तृत जानकारी मांगी थी। इस पर उच्च शिक्षा मंत्री ने BCA MCA के लिए 25 कंप्यूटर एवं संसाधनों की उपलब्धता और खरीद प्रक्रिया जारी होने की बात कही, लेकिन जमीनी हकीकत और छात्रों के आरोपों ने इस जवाब पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लीकेशन विभाग में गुरुवार को डिजिटल फॉरेंसिक थर्ड सेमेस्टर का फाइनल वाइवा और प्रैक्टिकल आयोजित हुआ, जिसके लिए कंप्यूटर आवश्यक थे। लेकिन छात्रों का आरोप है कि एक घंटे की लिखित परीक्षा के बाद जब उन्होंने प्रैक्टिकल के लिए कंप्यूटर मांगे तो शिक्षकों ने कह दिया कि उनका प्रैक्टिकल पूरा हो चुका है। इस पर छात्र कक्षा से बाहर निकल आए और नाराजगी जताई। उनका कहना है कि तीन सेमेस्टर में एक बार भी कंप्यूटर ठीक से चालू नहीं हुए, जबकि हर साल हजारों रुपये फीस ली जाती है। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि पढ़ाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। बिना लैब के तकनीकी पढ़ाई पर सवाल यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड एप्लिकेशन (UICSA), जहां BCA और MCA जैसे अहम तकनीकी कोर्स संचालित होते हैं, वहां की व्यवस्थाएं सवालों के घेरे में हैं। AICTE से मान्यता प्राप्त इन पाठ्यक्रमों में करीब 150 से अधिक छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन आरोप है कि उन्हें बुनियादी लैब सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। छात्रों का कहना है कि प्रैक्टिकल के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं और वास्तविक प्रयोगशाला अभ्यास के बिना ही उन्हें डिग्री लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप दैनिक भास्कर की टीम को सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर देखा गया कि 23 छात्र-छात्राएं कक्षा में वाइवा परीक्षा दे रहे थे। करीब एक घंटे बाद उन्हें यह कहकर बाहर कर दिया गया कि प्रैक्टिकल पूरा हो चुका है और अंक परिणाम में जोड़ दिए जाएंगे। एमसीए थर्ड सेमेस्टर की छात्रा रिषिका नामदेव ने बताया कि डिजिटल फॉरेंसिक का फाइनल एग्जाम था, जिसमें वाइवा और प्रैक्टिकल दोनों होना था, लेकिन किसी भी छात्र को कंप्यूटर सिस्टम उपलब्ध नहीं कराया गया। कक्षा में लैब मौजूद है और लगभग 30 सिस्टम रखे हैं, पर छात्रों का कहना है कि एक भी कंप्यूटर चालू हालत में नहीं है। रिषिका के मुताबिक प्रैक्टिकल परीक्षा के लिए कंप्यूटर संचालन का ज्ञान जरूरी होता है, लेकिन तीन सेमेस्टर गुजरने के बाद भी छात्रों को लैब में काम करने का मौका नहीं मिला। उनका कहना है कि एचओडी से लेकर वीसी और रजिस्ट्रार तक से कई बार सिस्टम उपलब्ध कराने की मांग की गई, मगर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि शिक्षकों ने अपनी ओर से कुछ मदद करते हुए लैपटॉप पर सीमित जानकारी दी, लेकिन छात्रों के अनुसार वह पर्याप्त नहीं थी। 17 हजार फीस, पर पढ़ाई शून्य अखिलेश मिश्रा ने दैनिक भास्कर को बताया कि हर छात्र से प्रति सेमेस्टर करीब 17 हजार रुपए फीस ली जाती है और तीन साल में लगभग 54 हजार रुपए जमा कर चुके हैं, लेकिन पढ़ाई की स्थिति बेहद खराब है। उनका कहना है कि छात्र हर साल पास तो हो जाते हैं, मगर वास्तविक ज्ञान नहीं मिल रहा, जो उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ जैसा है। छात्रों के अनुसार फाइनल परीक्षा के दिन भी किसी को लैब में नहीं ले जाया गया। उनका दावा है कि विभाग शुरू होने के बाद से ही सिस्टम बंद पड़े हैं और इसी तरह औपचारिक रूप से प्रैक्टिकल कराकर छात्रों को पास कर दिया जाता है, जबकि कंप्यूटर का व्यावहारिक अनुभव उन्हें नहीं मिल पाता। नियामक मानकों पर उठे सवाल AICTE के नियमों के मुताबिक तकनीकी पाठ्यक्रम चलाने वाले संस्थानों में पर्याप्त आधुनिक कंप्यूटर, लाइसेंस प्राप्त सॉफ्टवेयर और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ होना अनिवार्य है। निर्धारित मानक के अनुसार स्नातक स्तर पर 10 छात्रों पर एक कंप्यूटर और स्नातकोत्तर स्तर पर 4 छात्रों पर एक कंप्यूटर उपलब्ध होना चाहिए। डिजिटल युग में विडंबना
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