Monday, 26 Oct 2026 | 06:52 PM

Trending :

Ranchi Coal India GM Ashok Kumar Studies Psychology After Retirement

Ranchi Coal India GM Ashok Kumar Studies Psychology After Retirement
  • Hindi News
  • Career
  • Ranchi Coal India GM Ashok Kumar Studies Psychology After Retirement

3 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

आपने सुना होगा कि सीखने की ललक जिंदा हो, तो उम्र महज एक आंकड़ा बनकर रह जाती है लेकिन इस कहावत को रांची के 68 वर्षीय डॉ. अशोक कुमार ने न सिर्फ सच साबित किया है, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के लिए एक नजीर भी पेश की है।

कोल इंडिया में जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए डॉ कुमार अब 68 साल की उम्र में सायकोलॉजी पढ़ रहे हैं।

रोज कंधे पर बैग टांगकर कॉलेज जाते हैं डॉ अशोक

वे रोज कंधे पर बैग टांगकर कॉलेज पहुंचते हैं, उन्हें देखकर क्लास के प्रोफेसर भी हैरान हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ इसलिए डिग्री नहीं लेना चाहता कि मैंने एडमिशन लिया है। मैं असल में समझना भी चाहता हूं कि आखिर हमारा मन कैसे काम करता है।

डॉ. अशोक किसी भी आम 20-22 साल के युवा छात्र की तरह हर दिन कंधे पर बैग टांगकर समय पर अपनी क्लास में पहुंचते हैं।

देश के दिग्गज संस्थानों से पढ़ाई, जीएम पद से रिटायर्ड

डॉ अशोक कोल इंडिया में 33 साल तक काम किया और 2018 में जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए। इसके बाद उन्होंने 2025 में दोबारा काम करने का मन बनाया। उन्होंने इंजीनियरिंग, मैन्यूफैक्चरिंग, सीमेंट से जुड़े ‘जेपी ग्रुप’ में वाइस प्रेसिडेंट और एडवाइजर के तौर पर काम करना शुरू किया। वहां से वे अक्टूबर 2025 को दूसरी बार रिटायर हुए।

अपने एम्प्लोई को समझने के लिए जरूरी

डॉ अशोक का मानना है कि किसी भी संस्थान में काम करने और अपने एम्प्लोयीज से काम कराने के लिए उनके व्यवहार को समझना बेहद जरूरी होता है। उनके कहना है कि किसी भी संस्थान में साथ काम कर रहे एम्प्लॉई को इसका फायदा मिलना चाहिए कि कैसे उनका कॉन्फिडेंस बूस्ट किया जाए। इसके लिए सायकोलॉजी को समझना बेहद जरूरी है और मैं चाहता हूं इसका मुझे फायदा मिले।

‘जीवनभर मशीनें समझीं, अब इंसान के मन को समझना है’

आमतौर पर दो-दो बार रिटायर होने के बाद लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं लेकिन डॉ. अशोक के मन की जिज्ञासा शांत नहीं हुई थी। जब उनसे इस उम्र में दोबारा कॉलेज की बेंच पर बैठने की वजह पूछी गई, तो उन्होंने कहा- ‘इंजीनियरिंग ने मुझे जीवनभर बड़ी-बड़ी मशीनें, पुर्जे और उनकी वर्किंग थ्योरी समझना सिखाया। अब मेरी जिज्ञासा इंसानी व्यवहार को जानने की है। मैं मनोविज्ञान के जरिए ये समझना चाहता हूं कि इंसान कैसे सोचता है, उसका मन कैसे काम करता है। मेरे लिए सीखना एक कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया है।’

पत्नी भी साथ पढ़ना चाहती थीं लेकिन एडमिशन नहीं ले सकीं वे कहते हैं कि इस फैसले से उनके परिवार या दोस्तों को कोई समस्या नहीं है बल्कि उन्होंने तो हमेशा मनोबल बढ़ाया है और साथ दिया है। डॉ अशोक ने बताया कि उनकी पत्नी भी पोस्ट ग्रेजुएशन में एडमिशन लेना चाहती थीं लेकिन कुछ पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते वो एडमिशन नहीं ले पाईं।

वो कहते हैं मैं क्लास में खुद को किसी स्टूडेंट्स की तरह ही देखते हैं न कि किसी पूर्व अधिकारी की तरह डॉ अशोक मूलरूप से बिहार के खगड़िया के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई की शुरुआत में फिजिक्स ऑनर्स में एडमिशन लिया था। लेकिन उसे बीच में ही छोड़ दिया।

लेखक- वरुण विश्वकर्मा

——————————-

ये खबर भी पढ़ें..

MBBS की 800 से ज्यादा सीटों पर कोई एडमिशन नहीं:एक्सपर्ट- सालाना फीस 25 लाख तक, इसीलिए स्टूडेंट्स NEET काउंसलिंग में हिस्सा नहीं ले रहे

NEET UG 2026 काउंसलिंग हाल ही में पूरी हुई है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के डेटा के मुताबिक कॉलेज-वाइज स्ट्रे वैकेंसी राउंड यानी आखिरी काउंसलिंग के बाद भी तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक में 800 से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं। पूरी खबर पढ़ें..

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
मालेगांव: मेयर पद से जुड़ी बड़ी खबर, इस्लाम पार्टी ने इस दल से मांगा समर्थन, चर्चा जारी

January 19, 2026/
3:50 pm

मालेगांव में मेयर पद के लिए किसी के पास बहुमत नहीं है। मेयर पद के लिए इस्लाम पार्टी (महाराष्ट्र की...

पहली भारतीय महिला मिमिक्री आर्टिस्ट आशा सिंह जयसवाल का निधन:मीना कुमारी की नकल से फेम मिला, बीआर चोपड़ा की महाभारत में द्रोणाचार्य की पत्नी बनी थीं

August 23, 2026/
5:18 pm

दिग्गज अभिनेत्री और भारत की पहली महिला मिमिक्री आर्टिस्ट आशा सिंह जायसवाल का निधन हो गया है। उन्होंने 22 अगस्त...

'फिल्म धुरंधर में दिखाई गई हर बात सच है':पाकिस्तानी पत्रकार बोले- जिस दौर की कहानी दिखाई गई, उस समय मैं वहां मौजूद था

May 31, 2026/
2:27 pm

पाकिस्तान के कराची में जन्मे पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ आजाकिया ने हाल ही में दावा किया कि रणवीर सिंह...

हिमाचल में कांग्रेस-BJP की ‘नेक टू नेक’ फाइट:सीनियर जर्नलिस्ट बोले- एंटी-इनकंबेंसी के बावजूद कांग्रेस ने सियासी जमीन बचाई; भाजपा मुकाबले से बाहर दिखी

May 18, 2026/
5:30 am

हिमाचल प्रदेश के 25 नगर परिषद चुनाव में कांग्रेस-भाजपा में मुकाबला लगभग बराबरी का रहा। सत्तारूढ़ कांग्रेस के खिलाफ साढ़े...

Vaibhav Surya: Team Win Over Century

May 29, 2026/
3:50 pm

11 मिनट पहले कॉपी लिंक राजस्थान के बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने कहा कि उनके लिए पर्सनल रिकॉर्ड से ज्यादा टीम...

100 कंटेस्टेंट, बिना दर्शकों का एरिना और दिमागी खेल:ऐसा है अनिल कपूर के ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट

September 4, 2026/
6:18 pm

मुंबई में ‘इंडिया के टॉप 1%’ का सेट किसी सामान्य क्विज शो के सेट जैसा नहीं है। यहां न दर्शकों...

लखनऊ में वकीलों पर लाठीचार्ज, पथराव:कोर्ट के बाहर चैंबर पर बुलडोजर चलता देख भड़के; पुलिस ने खदेड़ा

May 17, 2026/
9:43 am

लखनऊ जिला कोर्ट के बाहर रविवार दोपहर हंगामा हो गया। बुलडोजर से चैंबर तोड़े जाने के विरोध में वकील भड़क...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Ranchi Coal India GM Ashok Kumar Studies Psychology After Retirement

Ranchi Coal India GM Ashok Kumar Studies Psychology After Retirement
  • Hindi News
  • Career
  • Ranchi Coal India GM Ashok Kumar Studies Psychology After Retirement

3 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

आपने सुना होगा कि सीखने की ललक जिंदा हो, तो उम्र महज एक आंकड़ा बनकर रह जाती है लेकिन इस कहावत को रांची के 68 वर्षीय डॉ. अशोक कुमार ने न सिर्फ सच साबित किया है, बल्कि आज की युवा पीढ़ी के लिए एक नजीर भी पेश की है।

कोल इंडिया में जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए डॉ कुमार अब 68 साल की उम्र में सायकोलॉजी पढ़ रहे हैं।

रोज कंधे पर बैग टांगकर कॉलेज जाते हैं डॉ अशोक

वे रोज कंधे पर बैग टांगकर कॉलेज पहुंचते हैं, उन्हें देखकर क्लास के प्रोफेसर भी हैरान हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि मैं सिर्फ इसलिए डिग्री नहीं लेना चाहता कि मैंने एडमिशन लिया है। मैं असल में समझना भी चाहता हूं कि आखिर हमारा मन कैसे काम करता है।

डॉ. अशोक किसी भी आम 20-22 साल के युवा छात्र की तरह हर दिन कंधे पर बैग टांगकर समय पर अपनी क्लास में पहुंचते हैं।

देश के दिग्गज संस्थानों से पढ़ाई, जीएम पद से रिटायर्ड

डॉ अशोक कोल इंडिया में 33 साल तक काम किया और 2018 में जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए। इसके बाद उन्होंने 2025 में दोबारा काम करने का मन बनाया। उन्होंने इंजीनियरिंग, मैन्यूफैक्चरिंग, सीमेंट से जुड़े ‘जेपी ग्रुप’ में वाइस प्रेसिडेंट और एडवाइजर के तौर पर काम करना शुरू किया। वहां से वे अक्टूबर 2025 को दूसरी बार रिटायर हुए।

अपने एम्प्लोई को समझने के लिए जरूरी

डॉ अशोक का मानना है कि किसी भी संस्थान में काम करने और अपने एम्प्लोयीज से काम कराने के लिए उनके व्यवहार को समझना बेहद जरूरी होता है। उनके कहना है कि किसी भी संस्थान में साथ काम कर रहे एम्प्लॉई को इसका फायदा मिलना चाहिए कि कैसे उनका कॉन्फिडेंस बूस्ट किया जाए। इसके लिए सायकोलॉजी को समझना बेहद जरूरी है और मैं चाहता हूं इसका मुझे फायदा मिले।

‘जीवनभर मशीनें समझीं, अब इंसान के मन को समझना है’

आमतौर पर दो-दो बार रिटायर होने के बाद लोग आराम की जिंदगी चुनते हैं लेकिन डॉ. अशोक के मन की जिज्ञासा शांत नहीं हुई थी। जब उनसे इस उम्र में दोबारा कॉलेज की बेंच पर बैठने की वजह पूछी गई, तो उन्होंने कहा- ‘इंजीनियरिंग ने मुझे जीवनभर बड़ी-बड़ी मशीनें, पुर्जे और उनकी वर्किंग थ्योरी समझना सिखाया। अब मेरी जिज्ञासा इंसानी व्यवहार को जानने की है। मैं मनोविज्ञान के जरिए ये समझना चाहता हूं कि इंसान कैसे सोचता है, उसका मन कैसे काम करता है। मेरे लिए सीखना एक कभी न खत्म होने वाली प्रक्रिया है।’

पत्नी भी साथ पढ़ना चाहती थीं लेकिन एडमिशन नहीं ले सकीं वे कहते हैं कि इस फैसले से उनके परिवार या दोस्तों को कोई समस्या नहीं है बल्कि उन्होंने तो हमेशा मनोबल बढ़ाया है और साथ दिया है। डॉ अशोक ने बताया कि उनकी पत्नी भी पोस्ट ग्रेजुएशन में एडमिशन लेना चाहती थीं लेकिन कुछ पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते वो एडमिशन नहीं ले पाईं।

वो कहते हैं मैं क्लास में खुद को किसी स्टूडेंट्स की तरह ही देखते हैं न कि किसी पूर्व अधिकारी की तरह डॉ अशोक मूलरूप से बिहार के खगड़िया के रहने वाले हैं। उन्होंने अपनी पढ़ाई की शुरुआत में फिजिक्स ऑनर्स में एडमिशन लिया था। लेकिन उसे बीच में ही छोड़ दिया।

लेखक- वरुण विश्वकर्मा

——————————-

ये खबर भी पढ़ें..

MBBS की 800 से ज्यादा सीटों पर कोई एडमिशन नहीं:एक्सपर्ट- सालाना फीस 25 लाख तक, इसीलिए स्टूडेंट्स NEET काउंसलिंग में हिस्सा नहीं ले रहे

NEET UG 2026 काउंसलिंग हाल ही में पूरी हुई है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) के डेटा के मुताबिक कॉलेज-वाइज स्ट्रे वैकेंसी राउंड यानी आखिरी काउंसलिंग के बाद भी तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक में 800 से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं। पूरी खबर पढ़ें..

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.