Sunday, 26 Jul 2026 | 03:21 PM

Trending :

1970 film ‘Aranyer Din Ratri’ in news again in New York

1970 film 'Aranyer Din Ratri' in news again in New York

द न्यूयॉर्क टाइम्स8 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

फिल्म की शूटिंग झारखंड के जंगलों में हुई थी, जिसे रे ने अपनी जादुई दृष्टि से ‘मोहक जादुई जंगल’ जैसा बना दिया था।

अमेरिका में 1970 की बंगाली फिल्म ‘अरण्येर दिन रात्रि’ को डिजिटल अवतार में री-लॉन्च किया गया है। मशहूर फिल्म निर्माता सत्यजित रे की इस फिल्म को नए 4के रूप में मैनहैटन के प्रसिद्ध आर्ट‑हाउस सिनेमाघर फिल्म फोरम में दो हफ्ते के लिए दोबारा दिखाया जा रहा है।

पुरानी फिल्मों को संरक्षित करने वाली संस्था ‘द फिल्म फाउंडेशन’, फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन और जानस फिल्म्स ने मिलकर इसे नए रूप में सजाया-संवारा है। इसे पिछले साल न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया था और अब आम दर्शकों के लिए यह खुला है।

कोलकाता के शहरी माहौल में रहे चार दोस्तों की मस्ती के पीछे छिपी पुरुष सत्ता और जातिगत अहंकार की कहानी पर आधारित अरण्येर दिन रात्रि 1970 में जितनी प्रासंगिक थी, आज भी उतनी ही सटीक है। फिल्म में कोलकाता (तब कलकत्ता) के उच्च जाति के पढ़े‑लिखे, अंग्रेजी बोलने वाले अविवाहित युवकों- अशीम, संजय, हरी और शेखर की कहानी है, जो शहर के शोर से दूर झारखंड में पलामू के जंगलों की यात्रा पर जाते हैं। यहां उनका सामना संथाल इलाके में आदिवासी समाज और गांवों से होता है। वे बिना बुकिंग सरकारी गेस्ट हाउस पर पहुंचकर चौकीदार को घूस देकर कमरे हथिया लेते हैं और हंसी उड़ाते हुए अंग्रेजी में कहते हैं- ‘भ्रष्टाचार के लिए ईश्वर को धन्यवाद।’

हॉलीवुड फिल्म समीक्षक जे. होबरमैन कहते हैं, ‘यह फिल्म केवल एक यात्रा की कहानी नहीं है, बल्कि यह बंगाल के मध्यम वर्ग का एक ऐसा चित्रण है, जो अपनी सुविधाओं के खोल में कैद है। इसका नया संस्करण आज की पीढ़ी को यह समझने में मदद करेगा कि क्यों सत्यजीत रे को विश्व सिनेमा का जादुई चितेरा कहा जाता है।’ ‘अरण्येर दिनरात्रि’ को 1970 में बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ‘गोल्डन बियर’ के लिए नामांकित किया गया था। इस फिल्म की शूटिंग झारखंड के जंगलों में हुई थी, जिसे रे ने अपनी जादुई दृष्टि से ‘मोहक जादुई जंगल’ जैसा बना दिया था।

नई चमक के साथ पर्दे पर लौटी, आज भी जादू बरकरार

री‑रिलीज के साथ एक तरह से सवाल भी लौट आया है- क्या भारतीय सिनेमा ने आज तक रे की इस फिल्म की तरह ईमानदारी से अपने ‘कन्फर्टेबल’ मध्य वर्ग, मर्दाना हठधर्मिता और आदिवासी समुदायों के प्रति नजरिये को स्क्रीन पर पूरी शिद्दत से रखा है? न्यूयॉर्क, लॉस एंजिलिस और अन्य शहरों के शो के बाहर युवा दर्शक जिस तरह फिल्म की पॉलिटिक्स और जेंडर पर चर्चा करते दिख रहे हैं, वे बताते हैं कि 1970 की यह यात्रा सिर्फ चार दोस्तों की पिकनिक नहीं, हमारी सामाजिक स्मृति की भी एक जरूरी वापसी है। नई चमक के साथ लौटी इस क्लासिकल फिल्म का जादू 56 साल बाद भी कायम है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
‘जब खुली किताब’ का ट्रेलर आउट:पंकज कपूर और डिंपल कपाड़िया लीड रोल में आएंगे नजर, 6 मार्च को जी5 पर स्ट्रीम होगी फिल्म

March 3, 2026/
4:20 pm

एप्लॉज एंटरटेनमेंट की फिल्म ‘जब खुली किताब’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है। फिल्म में दिग्गज एक्टर पंकज कपूर और...

बाबा सिद्दीकी की मौत से टूट गए थे सलमान:को-स्टार बोले- दर्द में कुर्सी से उठ नहीं पाते थे, धमकियां मिलीं, फिर भी शूटिंग करने आए

June 19, 2026/
4:00 pm

सलमान खान के करीबी दोस्त बाबा सिद्दीकी की 2024 में हत्या कर दी गई। उस समय सलमान फिल्म सिंकदर शूट...

IPL 2026 DC Vipraj Nigam; State League

April 17, 2026/
2:42 pm

स्पोर्ट्स डेस्क1 घंटे पहले कॉपी लिंक IPL जैसी दुनिया की सबसे तेज और हाई-प्रेशर लीग में खेलने के लिए यंग...

24 घंटे में गारंटी के साथ पार्सल की डिलीवरी:देरी होने पर मिलेगा पूरा पैसा, डाक विभाग की 3 प्रीमियम सर्विस लॉन्च

March 17, 2026/
3:53 pm

अब आप इंडिया पोस्ट के जरिए अपने जरूरी डॉक्युमेंट्स या पार्सल 24 घंटे के अंदर भेज सकेंगे। भारतीय डाक विभाग...

शाजापुर में गौरी गार्डन के पीछे झाड़ियों में आग:पुलिस-फायर ब्रिगेड ने डेढ़ घंटे में बुझाई

April 28, 2026/
7:06 am

शाजापुर जिले के लालघाटी थाना क्षेत्र में गौरी गार्डन के पीछे खेत की मेड़ पर सूखी और बांस की झाड़ियों...

Hours after the press conference, Chadha, Pathak and Mittal went to the BJP headquarters in New Delhi and joined the ruling party.

April 25, 2026/
9:42 am

आखरी अपडेट:25 अप्रैल, 2026, 09:42 IST कांग्रेस की गणना यह है कि अगर भगवंत मान सरकार गिरती है, तो आम...

Rajgarh Collector: No Eligible Voter Left Out

April 28, 2026/
9:18 pm

राजगढ़ जिले में मतदाता सूची पुनरीक्षण 2026 को लेकर जिले में प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। कलेक्टर डॉ....

पंत से छिन सकती है लखनऊ की कप्तानी:टॉम मूडी बोले- दबाव झेलने में फेल रहे, टीम आखिरी लीग मैच भी हारी

May 24, 2026/
2:10 pm

टीम इंडिया के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत से IPL की टीम लखनऊ सुपर जायंट्स की कप्तानी छिन सकती है। टीम...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

1970 film ‘Aranyer Din Ratri’ in news again in New York

1970 film 'Aranyer Din Ratri' in news again in New York

द न्यूयॉर्क टाइम्स8 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

फिल्म की शूटिंग झारखंड के जंगलों में हुई थी, जिसे रे ने अपनी जादुई दृष्टि से ‘मोहक जादुई जंगल’ जैसा बना दिया था।

अमेरिका में 1970 की बंगाली फिल्म ‘अरण्येर दिन रात्रि’ को डिजिटल अवतार में री-लॉन्च किया गया है। मशहूर फिल्म निर्माता सत्यजित रे की इस फिल्म को नए 4के रूप में मैनहैटन के प्रसिद्ध आर्ट‑हाउस सिनेमाघर फिल्म फोरम में दो हफ्ते के लिए दोबारा दिखाया जा रहा है।

पुरानी फिल्मों को संरक्षित करने वाली संस्था ‘द फिल्म फाउंडेशन’, फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन और जानस फिल्म्स ने मिलकर इसे नए रूप में सजाया-संवारा है। इसे पिछले साल न्यूयॉर्क फिल्म फेस्टिवल में दिखाया गया था और अब आम दर्शकों के लिए यह खुला है।

कोलकाता के शहरी माहौल में रहे चार दोस्तों की मस्ती के पीछे छिपी पुरुष सत्ता और जातिगत अहंकार की कहानी पर आधारित अरण्येर दिन रात्रि 1970 में जितनी प्रासंगिक थी, आज भी उतनी ही सटीक है। फिल्म में कोलकाता (तब कलकत्ता) के उच्च जाति के पढ़े‑लिखे, अंग्रेजी बोलने वाले अविवाहित युवकों- अशीम, संजय, हरी और शेखर की कहानी है, जो शहर के शोर से दूर झारखंड में पलामू के जंगलों की यात्रा पर जाते हैं। यहां उनका सामना संथाल इलाके में आदिवासी समाज और गांवों से होता है। वे बिना बुकिंग सरकारी गेस्ट हाउस पर पहुंचकर चौकीदार को घूस देकर कमरे हथिया लेते हैं और हंसी उड़ाते हुए अंग्रेजी में कहते हैं- ‘भ्रष्टाचार के लिए ईश्वर को धन्यवाद।’

हॉलीवुड फिल्म समीक्षक जे. होबरमैन कहते हैं, ‘यह फिल्म केवल एक यात्रा की कहानी नहीं है, बल्कि यह बंगाल के मध्यम वर्ग का एक ऐसा चित्रण है, जो अपनी सुविधाओं के खोल में कैद है। इसका नया संस्करण आज की पीढ़ी को यह समझने में मदद करेगा कि क्यों सत्यजीत रे को विश्व सिनेमा का जादुई चितेरा कहा जाता है।’ ‘अरण्येर दिनरात्रि’ को 1970 में बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ‘गोल्डन बियर’ के लिए नामांकित किया गया था। इस फिल्म की शूटिंग झारखंड के जंगलों में हुई थी, जिसे रे ने अपनी जादुई दृष्टि से ‘मोहक जादुई जंगल’ जैसा बना दिया था।

नई चमक के साथ पर्दे पर लौटी, आज भी जादू बरकरार

री‑रिलीज के साथ एक तरह से सवाल भी लौट आया है- क्या भारतीय सिनेमा ने आज तक रे की इस फिल्म की तरह ईमानदारी से अपने ‘कन्फर्टेबल’ मध्य वर्ग, मर्दाना हठधर्मिता और आदिवासी समुदायों के प्रति नजरिये को स्क्रीन पर पूरी शिद्दत से रखा है? न्यूयॉर्क, लॉस एंजिलिस और अन्य शहरों के शो के बाहर युवा दर्शक जिस तरह फिल्म की पॉलिटिक्स और जेंडर पर चर्चा करते दिख रहे हैं, वे बताते हैं कि 1970 की यह यात्रा सिर्फ चार दोस्तों की पिकनिक नहीं, हमारी सामाजिक स्मृति की भी एक जरूरी वापसी है। नई चमक के साथ लौटी इस क्लासिकल फिल्म का जादू 56 साल बाद भी कायम है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.