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आयुर्वेद में इन 9 दालों को सेहत के लिए माना सुपरफूड, चिकन, अंडा से भी दोगुना प्रोटीन, ये हैं जबरदस्त फायदे, सेवन का तरीका

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शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए पौष्टिक भोजन का सेवन करना बहुत जरूरी है. दाल उन्हीं में से एक है, जिसे खाना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. आयुर्वेद में दाल को सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि दवा बताया गया है, जिसके सेवन से स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं. भारत में विभिन्न प्रकार की दालों की खेती की जाती है, जिनमें मूंग, मसूर, उड़द, अरहर, चना, राजमा, सफेद चना (काबुली), काला चना और सूखी मटर शामिल हैं. आयुर्वेद ने इन दालों के फायदे और परहेज के बारे में बताया है.

अरहर दाल: अरहर दाल को खाना अधिकांश लोगों को काफी पसंद होता है. यह स्वाद में शानदार होने के साथ पौष्टिक होती है, जो शरीर की सामान्य कमजोरी को दूर करने में मदद करती है. एसिडिटी की समस्या वाले इसे रात के समय तेज मसालों के साथ खाने से परहेज करें.

चना दाल: चना दाल में भूख नियंत्रण गुण होता है. इसलिए जिन लोगों को बहुत ज्यादा भूख लगती है, वे चना दाल को अपने भोजन में शामिल करें. इसे डायबिटीज के मरीज भी खा सकते हैं. कमजोर पाचन शक्ति वाले इस दाल को रात में खाने से बचें.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

उड़द दाल: इसे खाने से जोड़ों की ताकत बढ़ती है. ये कमजोरी को दूर करने में मदद करता है, हालांकि मोटापा, हाई कफ, बलगम, बुखार और एसिडिटी की समस्या से जुझ रहे लोग खाने से परहेज करें.

मूंग दाल: मूंग हल्की और आसानी से पचने वाली दालों में से एक है, जिसकी तासीर ठंडी होती है. इसका सेवन कमजोर पाचन, एसिडिटी, डायबिटीज, पीसीओएस और थायरॉइड मरीजों के लिए उत्तम बताया गया है. हालांकि, बहुत ज्यादा कफ, सर्दी-जुखाम और अत्यधिक ठंड के मौसम में इस दाल को रात में खाने से बचना चाहिए.

मसूर दाल: इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे मुख्य रूप से शरीर को गर्म रखने, वजन घटाने और फैटी लिवर को कम करने के लिए खाया जाता है. जिन लोगों को जोड़ों में दर्द, बवासीर, पाचन या किडनी से जुड़ी समस्या हो, उन्हें मसूर दाल का सेवन न के बराबर करना चाहिए.

राजमा: प्रोटीन और फाइबर का बेहतरीन स्रोत राजमा को खाना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है, लेकिन गैस, आईबीएस, थायरॉइड और वजन घटाने वाले इस दाल को खाने से बचें.

सफेद चना: सफेद चना या काबुली चना एक ऐसी दाल है, जो मसल बिल्डिंग में काफी फायदेमंद होती है. वहीं कब्ज, एसिडिटी और पीसीओएस की समस्या से जूझ रही महिलाओं को इसे संतुलित मात्रा में खाना चाहिए.

काला चना: काले चने में स्टैमिना और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इसलिए इसका सेवन सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. जिन लोगों को गैस, पेट फूलने, जोड़ों में दर्द जैसी समस्या है, उन्हें इस दाल का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए.

सूखी मटर: प्रोटीन और एनर्जी से भरपूर सूखी मटर की दाल का सेवन सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है, लेकिन सर्दी, बलगम, गैस और कमजोर पाचन वाले लोग इसे कम या न के बराबर खाने की कोशिश करें.

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शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए पौष्टिक भोजन का सेवन करना बहुत जरूरी है. दाल उन्हीं में से एक है, जिसे खाना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. आयुर्वेद में दाल को सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि दवा बताया गया है, जिसके सेवन से स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं. भारत में विभिन्न प्रकार की दालों की खेती की जाती है, जिनमें मूंग, मसूर, उड़द, अरहर, चना, राजमा, सफेद चना (काबुली), काला चना और सूखी मटर शामिल हैं. आयुर्वेद ने इन दालों के फायदे और परहेज के बारे में बताया है.

अरहर दाल: अरहर दाल को खाना अधिकांश लोगों को काफी पसंद होता है. यह स्वाद में शानदार होने के साथ पौष्टिक होती है, जो शरीर की सामान्य कमजोरी को दूर करने में मदद करती है. एसिडिटी की समस्या वाले इसे रात के समय तेज मसालों के साथ खाने से परहेज करें.

चना दाल: चना दाल में भूख नियंत्रण गुण होता है. इसलिए जिन लोगों को बहुत ज्यादा भूख लगती है, वे चना दाल को अपने भोजन में शामिल करें. इसे डायबिटीज के मरीज भी खा सकते हैं. कमजोर पाचन शक्ति वाले इस दाल को रात में खाने से बचें.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

उड़द दाल: इसे खाने से जोड़ों की ताकत बढ़ती है. ये कमजोरी को दूर करने में मदद करता है, हालांकि मोटापा, हाई कफ, बलगम, बुखार और एसिडिटी की समस्या से जुझ रहे लोग खाने से परहेज करें.

मूंग दाल: मूंग हल्की और आसानी से पचने वाली दालों में से एक है, जिसकी तासीर ठंडी होती है. इसका सेवन कमजोर पाचन, एसिडिटी, डायबिटीज, पीसीओएस और थायरॉइड मरीजों के लिए उत्तम बताया गया है. हालांकि, बहुत ज्यादा कफ, सर्दी-जुखाम और अत्यधिक ठंड के मौसम में इस दाल को रात में खाने से बचना चाहिए.

मसूर दाल: इसकी तासीर गर्म होती है, इसलिए इसे मुख्य रूप से शरीर को गर्म रखने, वजन घटाने और फैटी लिवर को कम करने के लिए खाया जाता है. जिन लोगों को जोड़ों में दर्द, बवासीर, पाचन या किडनी से जुड़ी समस्या हो, उन्हें मसूर दाल का सेवन न के बराबर करना चाहिए.

राजमा: प्रोटीन और फाइबर का बेहतरीन स्रोत राजमा को खाना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है, लेकिन गैस, आईबीएस, थायरॉइड और वजन घटाने वाले इस दाल को खाने से बचें.

सफेद चना: सफेद चना या काबुली चना एक ऐसी दाल है, जो मसल बिल्डिंग में काफी फायदेमंद होती है. वहीं कब्ज, एसिडिटी और पीसीओएस की समस्या से जूझ रही महिलाओं को इसे संतुलित मात्रा में खाना चाहिए.

काला चना: काले चने में स्टैमिना और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है. इसलिए इसका सेवन सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है. जिन लोगों को गैस, पेट फूलने, जोड़ों में दर्द जैसी समस्या है, उन्हें इस दाल का सेवन कम से कम मात्रा में करना चाहिए.

सूखी मटर: प्रोटीन और एनर्जी से भरपूर सूखी मटर की दाल का सेवन सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है, लेकिन सर्दी, बलगम, गैस और कमजोर पाचन वाले लोग इसे कम या न के बराबर खाने की कोशिश करें.

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