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ढाई बनाम छाछ: दही या छाछ… गर्मियों में स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प कौन सा है? जानिए खाने के फायदे

दही बनाम चास

दही v/s छाछ | छवि: फ्रीपिक

दही बनाम चास आंत स्वास्थ्य: भारतीय घरों में दही और छाछ रोज पी बनाई जाती है। ये दोनों दूध से बने उत्पाद प्रोबायोटिक्स से भरपूर होते हैं, जो कि स्वास्थ्यवर्धक के रूप में सामने आते हैं। लेकिन डस्माक्स, एसिडिटी, ब्लोटिंग या कब्ज जैसे मुद्दों में कौन कितना बेहतर और प्रभावशाली है, इसमें महत्वपूर्ण जानकारी सामने आती है।

वैसे तो दही और छाछ दोनों ही सेहत के लिए अच्छे होते हैं, वहीं दोनों के फायदे भी अलग-अलग होते हैं। आयुर्वेद और पुरातत्व संस्थान के खाते से दही और छाछ का ध्यान रखा जाए तो, दही और छाछ के अलग-अलग फायदे हैं। कुल मिलाकर दही और छाछ की तुलना की जाए तो, दोनों के अपने फायदे हैं।

दही के फायदे

दही दूध की मार्केटिंग फर्म द्वारा की जाती है। इसमें अधिकांश लाइव प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो माइक्रोबायोम को निर्धारित करते हैं। यह प्रोटीन, कैल्शियम से भरपूर है। कोल्ड स्टोरेज में या एंटीबायोटिक्स के बाद भी डेयरी से काफी मदद मिलती है। लेकिन कुछ लोगों को दही का सेवन भारी लग सकता है, खासकर रात के समय दही का सेवन करना भारी लग सकता है।

छाछ के फायदे

छाछ दही को पानी में घोलकर, फेंटकर बनाया जाता है। फैट कम, इसमें पानी सबसे ज्यादा होता है, जो शरीर को निर्धारित करता है। जीरा, अदरक या पुदीना से गैस और ब्लोटिंग कम होती है। यह हल्की और आसानी से पचने वाली होती है, गर्मियों में ठंडक मिलती है। आयुर्वेद में छाछ को सभी बॉडी टाइप के लिए उपयुक्त माना जाता है।

एसिडिटी और ब्लोटिंग में क्या लें?

एसिडिटी या पेट फूलने की समस्या में सबसे अच्छा विकल्प है। इसकी क्लासिक प्रकृति पेट पर लोड नहीं डालती और सॉसेज कम करती है। दही कुछ लोगों में भारी पड़ सकता है।

लूज मोशन या कंबोशन में क्या चीज़?

लूज मोशन में सादी दही सबसे ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि यह गुड क्वालिटी को मजबूत करता है। डॉक्टर भी अक्सर दही-चावल के डॉक्टर की सलाह देते हैं। वहीं, कंबाइनिंग में दोनों मदद करते हैं, लेकिन हाइड्रेशन के लिए बहुत बेहतर है।

कौन सबसे बेहतर?

दही को मुख्य रूप से प्रोबायोटिक्स और प्रोटीन के लिए चुना जाता है, लेकिन ऑक्सीडेटिव एसिडिटी, एसिडिटी या गर्म मौसम में छाछ को बेहतर माना जाता है। लेकिन कोशिश करें कि हमेशा ताजा ही दही और छाछ लें और बासी से बचें। ये पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थ सेहत को मजबूत बनाने में मदद करते हैं, साथ ही गर्मियों के दिनों में आप रोज दही और छाछ का सेवन कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें: केंद्र की राजनीति में नीतीश कुमार का हृदय से स्वागत- अमित शाह

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दही बनाम चास आंत स्वास्थ्य: भारतीय घरों में दही और छाछ रोज पी बनाई जाती है। ये दोनों दूध से बने उत्पाद प्रोबायोटिक्स से भरपूर होते हैं, जो कि स्वास्थ्यवर्धक के रूप में सामने आते हैं। लेकिन डस्माक्स, एसिडिटी, ब्लोटिंग या कब्ज जैसे मुद्दों में कौन कितना बेहतर और प्रभावशाली है, इसमें महत्वपूर्ण जानकारी सामने आती है।

वैसे तो दही और छाछ दोनों ही सेहत के लिए अच्छे होते हैं, वहीं दोनों के फायदे भी अलग-अलग होते हैं। आयुर्वेद और पुरातत्व संस्थान के खाते से दही और छाछ का ध्यान रखा जाए तो, दही और छाछ के अलग-अलग फायदे हैं। कुल मिलाकर दही और छाछ की तुलना की जाए तो, दोनों के अपने फायदे हैं।

दही के फायदे

दही दूध की मार्केटिंग फर्म द्वारा की जाती है। इसमें अधिकांश लाइव प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो माइक्रोबायोम को निर्धारित करते हैं। यह प्रोटीन, कैल्शियम से भरपूर है। कोल्ड स्टोरेज में या एंटीबायोटिक्स के बाद भी डेयरी से काफी मदद मिलती है। लेकिन कुछ लोगों को दही का सेवन भारी लग सकता है, खासकर रात के समय दही का सेवन करना भारी लग सकता है।

छाछ के फायदे

छाछ दही को पानी में घोलकर, फेंटकर बनाया जाता है। फैट कम, इसमें पानी सबसे ज्यादा होता है, जो शरीर को निर्धारित करता है। जीरा, अदरक या पुदीना से गैस और ब्लोटिंग कम होती है। यह हल्की और आसानी से पचने वाली होती है, गर्मियों में ठंडक मिलती है। आयुर्वेद में छाछ को सभी बॉडी टाइप के लिए उपयुक्त माना जाता है।

एसिडिटी और ब्लोटिंग में क्या लें?

एसिडिटी या पेट फूलने की समस्या में सबसे अच्छा विकल्प है। इसकी क्लासिक प्रकृति पेट पर लोड नहीं डालती और सॉसेज कम करती है। दही कुछ लोगों में भारी पड़ सकता है।

लूज मोशन या कंबोशन में क्या चीज़?

लूज मोशन में सादी दही सबसे ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि यह गुड क्वालिटी को मजबूत करता है। डॉक्टर भी अक्सर दही-चावल के डॉक्टर की सलाह देते हैं। वहीं, कंबाइनिंग में दोनों मदद करते हैं, लेकिन हाइड्रेशन के लिए बहुत बेहतर है।

कौन सबसे बेहतर?

दही को मुख्य रूप से प्रोबायोटिक्स और प्रोटीन के लिए चुना जाता है, लेकिन ऑक्सीडेटिव एसिडिटी, एसिडिटी या गर्म मौसम में छाछ को बेहतर माना जाता है। लेकिन कोशिश करें कि हमेशा ताजा ही दही और छाछ लें और बासी से बचें। ये पारंपरिक भारतीय खाद्य पदार्थ सेहत को मजबूत बनाने में मदद करते हैं, साथ ही गर्मियों के दिनों में आप रोज दही और छाछ का सेवन कर सकते हैं।

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