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जेल से रिहा होकर राजपाल यादव बोले:मामला करोड़ों रुपए का नहीं, ईगो और जलन का था, मुश्किल दौर में भी अपनी लड़ाई जारी रखी

जेल से रिहा होकर राजपाल यादव बोले:मामला करोड़ों रुपए का नहीं, ईगो और जलन का था, मुश्किल दौर में भी अपनी लड़ाई जारी रखी

पैसों के विवाद में जेल जाने के बाद अभिनेता राजपाल यादव पहली बार खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि 10-12 साल से चल रहे इस मामले में वह हमेशा कोर्ट की शरण में रहे हैं और सच्चाई जनता तक पहुंचना जरूरी है। राजपाल का कहना है कि सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी फैलने से भ्रम पैदा हुआ, इसलिए उन्होंने खुद सामने आकर सफाई देना जरूरी समझा। उन्होंने कहा कि अगर किसी का पैसा समय पर नहीं दे पाए तो उसकी नाराजगी स्वीकार है, लेकिन कभी किसी से छिपने या भागने की जरूरत महसूस नहीं हुई। अभिनेता ने इसे अपनी जिंदगी का सिर्फ एक ‘एपिसोड’ बताते हुए कहा कि आगे जो भी होगा, वह कोर्ट और सच्चाई के आधार पर तय होगा। दैनिक भास्कर से बातचीत में राजपाल यादव ने कहा कि सच छिपाने की बजाय उसे जनता के सामने रखना ही एक कलाकार की जिम्मेदारी है। पैसे के विवाद, जेल जाने और सोशल मीडिया पर फैली बातों के बीच आपने खुद सामने आकर सफाई देना जरूरी क्यों समझा? आप इस पूरे मामले को किस नजर से देखते हैं? हमारे देश की जनता बहुत ईमानदार और सच्ची है। आप क्रिकेटर हों या अभिनेता लोग आपको दिल से प्यार करते हैं। लेकिन अगर उनके पास कोई अधूरी जानकारी पहुंचती है, तो उसे साफ करना हमारा कर्तव्य है, क्योंकि हम पब्लिक के आदमी हैं। मुझे लगा कि सच्चाई जनता तक पहुंचनी चाहिए। 10-12 साल से जो मामला चल रहा है, उसमें मैं हमेशा माननीय कोर्ट की शरण में था, हूं और रहूंगा। एक अभिनेता का करियर होता है। फिल्म फाइनेंस 100 साल पुराना रिश्ता है। एक शुक्रवार 500 रुपए का नहीं रहता 500 करोड़ के दरवाजे खोल देता है। यही सिनेमा है, यही उसका रोमांच है। 1896 में हॉलीवुड शुरू हुआ, 1913 के आसपास भारतीय सिनेमा शुरू हुआ। 100 साल से इंडस्ट्री चल रही है। अगर सब बेईमान होते, तो क्या इतने साल टिक पाती इंडस्ट्री ? राजपाल यादव एक कॉमन मैन का प्रतिनिधि आदमी है। मैं कहीं “बिलॉन्ग” नहीं करता, मैं जीता हूं। 20 साल तक मुझे नहीं मालूम था कि मैं अभिनेता बनूंगा। लेकिन मुझे खेती करना आता था गेहूं कैसे बोया जाता है, पानी कैसे चलाया जाता है, मेड़ कैसे बांधी जाती है। अगर मैं अभिनेता हूं, तो मुझे स्टेज मैनेजमेंट समझना होगा। अगर फिल्म अभिनेता हूं, तो फिल्म का क्राफ्ट समझना होगा। क्राफ्ट से गुजरना पड़ेगा। मैं 11 साल सेल्फ-डिपेंड रहा हूं। मेरे पिताजी और परिवार गवाह हैं। हमने अपनी किताबें मेहनत से खरीदीं। थोड़ा पिताजी ने काम किया, थोड़ा भाई ने, थोड़ा मैंने। आज एशिया से लेकर सातों समंदर तक लोग पहचानते हैं। मैंने कभी रिसर्च नहीं की, लेकिन 500-600 लोग तो जहां जाता हूं पहचान लेते हैं। अगर ऐसे आदमी पर कोई उंगली उठती है, तो ऑडियंस को सच्चाई पता चलनी चाहिए। लोग कह रहे थे करियर खत्म हो जाएगा, इंडस्ट्री क्या कहेगी, दुनिया क्या कहेगी, सब चौपट हो जाएगा। मैं कहता हूं खड़ा हूं, चौपट हो जाए तो हो जाए। मजाक करता हूं, लेकिन अंदर की गंभीरता शरीर से 10 गुना ज्यादा है। मैं शाहजहांपुर से दाल-चावल-रोटी का इंतजाम करके मुंबई आया था। सिर्फ रोटी कमाने नहीं आया था। मैं अपनी भूख मिटाने आया था कला की भूख। एक डायलॉग बोलने में खुशी मिलती है। 50 बार रिहर्सल करने में खुशी मिलती है। दो लोगों का खर्च उठाने में खुशी मिलती है। यह मेरा पैशन है। यह जो विवाद आया है, यह मेरी जिंदगी का सिर्फ एक एपिसोड है। मैंने 50 लोगों से लेन-देन किया है। जिसका पैसा समय पर नहीं दे पाया, उसकी गाली खाने को तैयार हूं इस केस में गाली मिली भी। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी का पैसा ले लिया और उसका फोन न उठाया हो। मुझे नहीं लगता कि ऐसी कोई जरूरत है कि मैं किसी से छिपूं या भागूं। जिन दो लोगों पर आपके 30 साल के करियर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश का आरोप है, क्या उनसे आउट ऑफ कोर्ट समझौते की कोई संभावना है? नहीं, अभी ऐसा कोई प्रश्न ही पैदा नहीं होता। जो भी होगा, माननीय कोर्ट के माध्यम से होगा। अगर उन्हें 5 करोड़ नहीं चाहिए थे, तो नाम तो हो गया ना उनका। तीन घंटे की चर्चा में उन्हें वही मिला जो चाहिए था पहचान। समझौता तब होता है जब दोनों तरफ से लड़ाई हो। यहां तो एक तरफ से पूरी तैयारी थी। स्टेडियम भी आपने बनाया, खिलाड़ी भी आपने खड़े किए, आउट भी आपने किया और पवेलियन भी आपने भेज दिया लेकिन अब मेरी बारी है। इन्होंने खुद सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर मुझे मेरी बारी दे दी। अब सच में मेरी बारी है। क्या आपको लगता है कि आपकी चुप्पी का फायदा उठाया गया? चुप्पी का फायदा उठाने की कोशिश हुई। लेकिन जिन्होंने इंटरव्यू दिए, उन्होंने खुद ही अपने शब्दों में कॉमा और विराम लगा दिए हैं। अब उनकी नियति और इरादा साफ हो चुका है पूर्ण विराम। मैं तो इसी की तलाश में था कि इनका इंटेंशन सामने आ जाए। इन्होंने कहा कि जिस दिन म्यूजिक रिलीज हुआ, अगले दिन फिल्म रुकवा दी। अरे, 20 करोड़ रुपये लगे हों और कोई फिल्म रुकवा दे? जबकि भुगतान फरवरी में होना था और बात सितंबर में की जा रही है। कभी-कभी यह सब पैसों से ज्यादा जलन और कुंठा का मामला भी हो जाता है। अगर उद्देश्य प्रसिद्धि पाना था, तो वह मिल गई। फेमस होना था हो गए। मैंने कुछ नया नहीं जोड़ा, बस वही कहा जो उनके अपने शब्दों और घटनाक्रम से साफ दिखाई देता है। आगे जो भी होगा, कानून और सच्चाई के आधार पर होगा। पैसे के विवाद में जेल जाने के बाद आपके जेल अनुभव को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें कही गईं। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे? जेल का अपना सिस्टम होता है, अपने नियम होते हैं। जेल देश की व्यवस्था का हिस्सा है। वहां के कानूनों का पालन करना धर्म है। बाहर जो लिखा जाता है, वह लोगों की कल्पना हो सकती है। कोई सोचता है काश ऐसा हो जाता, कोई कहता है काश वैसा हो जाता। वह उनका विषय है, मेरा नहीं। मैं जहां भी मिलूंगा, हंसते हुए मिलूंगा अपने आप से, समाज से, परिवार से। मुश्किल समय में आपके पिता ने कहा था कि अगर भैंसों से घिर जाओ तब भी शेर की तरह लड़ना। अगर आज वे होते, तो इस पूरे विवाद पर आपको क्या सलाह देते? वो यही कहते कि बेटा, अगर गलत हो तो तुरंत झुक जाओ। लेकिन अगर गलती नहीं है, तो दुनिया एक तरफ हो जाए, बिल्कुल मत झुकना। मुझे पता है यह दुनिया अपनी ही दुनिया है। आज अगर लोग आपको समझ रहे हैं या परख रहे हैं, तो कल आपके संस्कार ही आपकी परीक्षा लेंगे। अचानक कुछ भी नहीं होता। हर चीज के पीछे व्यवहार, आचरण और संस्कार होते हैं। मैं 30 साल पहले जैसा था, आज भी वैसा ही हूं। आगे भी कोशिश करूंगा कि और अच्छा काम करूं, ऐसे किरदार करूं जो मुझे खुद भी चौंका दें और देश-दुनिया में पहचान बनाएं।

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जेल से रिहा होकर राजपाल यादव बोले:मामला करोड़ों रुपए का नहीं, ईगो और जलन का था, मुश्किल दौर में भी अपनी लड़ाई जारी रखी

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राजपाल यादव एक कॉमन मैन का प्रतिनिधि आदमी है। मैं कहीं “बिलॉन्ग” नहीं करता, मैं जीता हूं। 20 साल तक मुझे नहीं मालूम था कि मैं अभिनेता बनूंगा। लेकिन मुझे खेती करना आता था गेहूं कैसे बोया जाता है, पानी कैसे चलाया जाता है, मेड़ कैसे बांधी जाती है। अगर मैं अभिनेता हूं, तो मुझे स्टेज मैनेजमेंट समझना होगा। अगर फिल्म अभिनेता हूं, तो फिल्म का क्राफ्ट समझना होगा। क्राफ्ट से गुजरना पड़ेगा। मैं 11 साल सेल्फ-डिपेंड रहा हूं। मेरे पिताजी और परिवार गवाह हैं। हमने अपनी किताबें मेहनत से खरीदीं। थोड़ा पिताजी ने काम किया, थोड़ा भाई ने, थोड़ा मैंने। आज एशिया से लेकर सातों समंदर तक लोग पहचानते हैं। मैंने कभी रिसर्च नहीं की, लेकिन 500-600 लोग तो जहां जाता हूं पहचान लेते हैं। अगर ऐसे आदमी पर कोई उंगली उठती है, तो ऑडियंस को सच्चाई पता चलनी चाहिए। लोग कह रहे थे करियर खत्म हो जाएगा, इंडस्ट्री क्या कहेगी, दुनिया क्या कहेगी, सब चौपट हो जाएगा। मैं कहता हूं खड़ा हूं, चौपट हो जाए तो हो जाए। मजाक करता हूं, लेकिन अंदर की गंभीरता शरीर से 10 गुना ज्यादा है। मैं शाहजहांपुर से दाल-चावल-रोटी का इंतजाम करके मुंबई आया था। सिर्फ रोटी कमाने नहीं आया था। मैं अपनी भूख मिटाने आया था कला की भूख। एक डायलॉग बोलने में खुशी मिलती है। 50 बार रिहर्सल करने में खुशी मिलती है। दो लोगों का खर्च उठाने में खुशी मिलती है। यह मेरा पैशन है। यह जो विवाद आया है, यह मेरी जिंदगी का सिर्फ एक एपिसोड है। मैंने 50 लोगों से लेन-देन किया है। जिसका पैसा समय पर नहीं दे पाया, उसकी गाली खाने को तैयार हूं इस केस में गाली मिली भी। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी का पैसा ले लिया और उसका फोन न उठाया हो। मुझे नहीं लगता कि ऐसी कोई जरूरत है कि मैं किसी से छिपूं या भागूं। जिन दो लोगों पर आपके 30 साल के करियर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश का आरोप है, क्या उनसे आउट ऑफ कोर्ट समझौते की कोई संभावना है? नहीं, अभी ऐसा कोई प्रश्न ही पैदा नहीं होता। जो भी होगा, माननीय कोर्ट के माध्यम से होगा। अगर उन्हें 5 करोड़ नहीं चाहिए थे, तो नाम तो हो गया ना उनका। तीन घंटे की चर्चा में उन्हें वही मिला जो चाहिए था पहचान। समझौता तब होता है जब दोनों तरफ से लड़ाई हो। यहां तो एक तरफ से पूरी तैयारी थी। स्टेडियम भी आपने बनाया, खिलाड़ी भी आपने खड़े किए, आउट भी आपने किया और पवेलियन भी आपने भेज दिया लेकिन अब मेरी बारी है। इन्होंने खुद सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर मुझे मेरी बारी दे दी। अब सच में मेरी बारी है। क्या आपको लगता है कि आपकी चुप्पी का फायदा उठाया गया? चुप्पी का फायदा उठाने की कोशिश हुई। लेकिन जिन्होंने इंटरव्यू दिए, उन्होंने खुद ही अपने शब्दों में कॉमा और विराम लगा दिए हैं। अब उनकी नियति और इरादा साफ हो चुका है पूर्ण विराम। मैं तो इसी की तलाश में था कि इनका इंटेंशन सामने आ जाए। इन्होंने कहा कि जिस दिन म्यूजिक रिलीज हुआ, अगले दिन फिल्म रुकवा दी। अरे, 20 करोड़ रुपये लगे हों और कोई फिल्म रुकवा दे? जबकि भुगतान फरवरी में होना था और बात सितंबर में की जा रही है। कभी-कभी यह सब पैसों से ज्यादा जलन और कुंठा का मामला भी हो जाता है। अगर उद्देश्य प्रसिद्धि पाना था, तो वह मिल गई। फेमस होना था हो गए। मैंने कुछ नया नहीं जोड़ा, बस वही कहा जो उनके अपने शब्दों और घटनाक्रम से साफ दिखाई देता है। आगे जो भी होगा, कानून और सच्चाई के आधार पर होगा। पैसे के विवाद में जेल जाने के बाद आपके जेल अनुभव को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की बातें कही गईं। इस पर आप क्या कहना चाहेंगे? जेल का अपना सिस्टम होता है, अपने नियम होते हैं। जेल देश की व्यवस्था का हिस्सा है। वहां के कानूनों का पालन करना धर्म है। बाहर जो लिखा जाता है, वह लोगों की कल्पना हो सकती है। कोई सोचता है काश ऐसा हो जाता, कोई कहता है काश वैसा हो जाता। वह उनका विषय है, मेरा नहीं। मैं जहां भी मिलूंगा, हंसते हुए मिलूंगा अपने आप से, समाज से, परिवार से। मुश्किल समय में आपके पिता ने कहा था कि अगर भैंसों से घिर जाओ तब भी शेर की तरह लड़ना। अगर आज वे होते, तो इस पूरे विवाद पर आपको क्या सलाह देते? वो यही कहते कि बेटा, अगर गलत हो तो तुरंत झुक जाओ। लेकिन अगर गलती नहीं है, तो दुनिया एक तरफ हो जाए, बिल्कुल मत झुकना। मुझे पता है यह दुनिया अपनी ही दुनिया है। आज अगर लोग आपको समझ रहे हैं या परख रहे हैं, तो कल आपके संस्कार ही आपकी परीक्षा लेंगे। अचानक कुछ भी नहीं होता। हर चीज के पीछे व्यवहार, आचरण और संस्कार होते हैं। मैं 30 साल पहले जैसा था, आज भी वैसा ही हूं। आगे भी कोशिश करूंगा कि और अच्छा काम करूं, ऐसे किरदार करूं जो मुझे खुद भी चौंका दें और देश-दुनिया में पहचान बनाएं।

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