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शिवराज बोले-ममता दीदी को 'प्रधानमंत्री' के नाम से आपत्ति:बंगाल में रोकीं केंद्र की योजनाएं; जलने वाले जलें, हम किसानों का भाग्य बदलकर रहेंगे

शिवराज बोले-ममता दीदी को 'प्रधानमंत्री' के नाम से आपत्ति:बंगाल में रोकीं केंद्र की योजनाएं; जलने वाले जलें, हम किसानों का भाग्य बदलकर रहेंगे

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। शिवराज ने सीधे शब्दों में कहा कि बंगाल की सरकार को जनहित से ज्यादा राजनीति प्यारी है। उन्होंने कहा, “विपक्ष तख्तियां लेकर हाय-हाय करता रहे, लेकिन दुनिया भारत की कृषि नीतियों की वाह-वाह कर रही है। जलने वाले जला करें, हम किसानों का भाग्य बदलकर ही दम लेंगे।” सदन में जो लोग नारे लगा रहे हैं, उन्होंने बंगाल में प्राकृतिक खेती मिशन तक लागू नहीं किया। उन्हें किसानों के पसीने की कद्र नहीं है। बंगाल की जनता ममता बनर्जी को इस धोखे के लिए कभी माफ नहीं करेगी। हेडलाइन के मुख्य 3 तीखे पॉइंट्स: नाम की राजनीति: ‘प्रधानमंत्री’ शब्द से परहेज शिवराज ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में ‘प्रधानमंत्री कृषि धन धान्य’ जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं सिर्फ इसलिए लागू नहीं की गईं क्योंकि उनके नाम के आगे ‘प्रधानमंत्री’ जुड़ा है। उन्होंने इसे किसानों के साथ “खुला अन्याय और पाप” करार दिया। वोट बैंक बनाम किसान की सेहत मंत्री ने सदन में कहा कि टीएमसी सरकार को मिट्टी की उर्वरता और जनता के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है। प्राकृतिक खेती मिशन को ठंडे बस्ते में डालना इस बात का सबूत है कि उन्हें सिर्फ अपने वोट बैंक को साधना है। चीन को पछाड़ा, गोदाम भरे शिवराज ने गर्व से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ दिया है। देश का खाद्यान्न उत्पादन 357 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर है। उन्होंने तंज कसा— “एक समय था जब हम अनाज मांगते थे, आज चिंता यह है कि रिकॉर्ड पैदावार को रखें कहां!”

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