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crude oil surges 27% in a week of Iran-Israel conflict, 20% of global oil at risk as Hormuz blockade halts ships

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नई दिल्ली3 दिन पहले

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज रूट से क्रूड ऑयल की ग्लोबल सप्लाई में रुकावट की वजह से क्रूड ऑयल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच कच्चे तेल की कीमत एक हफ्ते में लगभग 27% बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव करीब 92.69 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। यह अप्रैल 2024 के बाद इसका उच्चतम स्तर भी है।

28 फरवरी को जंग की शुरूआत हुई थी, तब क्रूड ऑयल की कीमत 72.87 डॉलर प्रति बैरल थी। तब से अब तक यानी 8 दिन में क्रूड ऑयल की कीमत करीब 20 डॉलर प्रति बैरल बढ़ी है।

होर्मुज रूट प्रभावित होने से तेल के दाम लगातार बढ़ रहे

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज रूट से क्रूड ऑयल की ग्लोबल सप्लाई में रुकावट की वजह से क्रूड ऑयल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। होर्मुज रूट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से 20% ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर असर पड़ा रहा है। वहीं भारत को हर महीने होने वाली क्रूड ऑयल सप्लाई का आधा हिस्सा यानी 50% प्रभावित हुआ है।

भारत समेत कई एशियाई देशों को भी इस रूट से होने वाली सप्लाई पर भी असर पड़ा है। ग्लोबल लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई भी इस रूट से होती है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है, तो पूरी दुनिया में तेल और गैस की किल्लत हो सकती है।

200 से ज्यादा जहाज फंसे, भारत के 38 जहाज शामिल

होर्मुज रूट प्रभावित होने की वजह से फारस की खाड़ी में दुनिया के कई देशों के 200 से ज्यादा जहाज फंसे हुए हैं, जबकि 150 से ज्यादा जहाज इस रूट के बाहर इंतजार कर रहे हैं।

वहीं भारत के भी करीब 38 जहाज इस क्षेत्र में अटके हुए हैं। इनमें रूस से भारत आ रहे कच्चे तेल के टैंकर भी शामिल हैं। इंश्योरेंस और शिपिंग कंपनियां भी अब रिस्क का दोबारा आकलन कर रही हैं, जिससे देरी और बढ़ सकती है।

1. ग्लोबल-एशियाई देशों और भारत पर क्या असर?

होर्मुज रूट प्रभावित होने का असर पूरी दुनिया में दिखना शुरू हो गया है…

  • ग्लोबल मार्केट: कच्चे तेल की कीमतों में 20% का उछाल आया है। ग्लोबल शिपिंग रूट डाइवर्ट होने से माल ढुलाई की लागत 30-40% तक बढ़ गई है। अमेरिका और यूरोप में महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
  • एशियाई देश: चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 70-90% तक खाड़ी देशों पर निर्भर हैं। सप्लाई रुकने से वहां की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और पावर प्लांट्स पर संकट खड़ा हो गया है।
  • भारत पर असर: भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल इम्पोर्ट करता है। तेल महंगा होने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे रुपया कमजोर हो सकता है। अगर कीमतें इसी स्तर पर रहीं, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी तय है।

2. सभी देशों के पास क्या-क्या विकल्प हैं?

सप्लाई चेन टूटने के बाद अब अलग-अलग देश वैकल्पिक रास्तों और अन्य विकल्पों पर काम कर रहे हैं…

  • स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) का इस्तेमाल: भारत, अमेरिका और चीन जैसे देश अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से तेल निकालने की तैयारी कर रहे हैं। भारत के पास करीब 45 दिनों का इमरजेंसी स्टॉक है।
  • वैकल्पिक रूट की तलाश: जहाजों को अब ‘केप ऑफ गुड होप’ (अफ्रीका के नीचे से) होकर भेजा जा रहा है। हालांकि, इसमें समय और पैसा ज्यादा लगता है। सऊदी अरब और यूएई अपनी पाइपलाइनों के जरिए लाल सागर तक तेल पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि होर्मुज रूट को बाईपास किया जा सके।
  • नए सप्लायर्स से संपर्क: भारत समेत एशियाई देश अब रूस अमेरिका, ब्राजील, गुयाना और अफ्रीकी देशों से ज्यादा तेल खरीदने के लिए बातचीत कर रहे हैं ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता कम हो सके।

3. स्थिति बिगड़ी तो आगे क्या-क्या हो सकता है?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर यह तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है:

  • क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार: अगर होर्मुज रूट लंबे समय तक बंद रहता है, तो कच्चा तेल 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।
  • महंगाई का बढ़ना: क्रूड महंगा होने से फर्टिलाइजर, प्लास्टिक और ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा, जिसका सीधा असर आम आदमी की थाली पर भी पड़ेगा। खाने-पीने की चीजों के दाम 10-15% तक बढ़ सकते हैं।
  • ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद खत्म: महंगाई बढ़ने की वजह से दुनिया भर के सेंट्रल बैंक (जैसे RBI और US फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों में कटौती करने का फैसला टाल सकते हैं, जिससे लोन और महंगे रहेंगे।
  • एनर्जी ट्रांजिशन में तेजी: इस संकट के बाद देश सोलर, विंड और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की तरफ और तेजी से कदम बढ़ाएंगे ताकि भविष्य में ऐसे तेल संकटों से बचा जा सके।
होर्मुज स्ट्रेट से जब मालवाहक जहाज गुजरते हैं, तो ईरानी सेना निगरानी करती है।

होर्मुज स्ट्रेट से जब मालवाहक जहाज गुजरते हैं, तो ईरानी सेना निगरानी करती है।

होर्मुज स्ट्रेट के बारे में जानिए..

भारत के लिए अहम क्यों होर्मुज स्ट्रेट ?

ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे देशों से मंगवाता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 26 लाख बैरल कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) रोजाना इसी रास्ते से मंगवाता है।

केपलर के डेटा के मुताबिक, जनवरी-फरवरी में भारत के कुल मंथली ऑयल इंपोर्ट का करीब 50% हिस्सा होर्मुज के रास्ते ही आया है। नवंबर-दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा 40% था, जो अब बढ़ गया है।

होर्मुज स्ट्रेट क्या है?

होर्मुज स्ट्रेट एक संकरा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से और आगे अरब सागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान सटा है। दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE है। इसके आसपास सभी तेल उत्पादक देश हैं। इसलिए इस जलीय रास्ते से दुनियाभर में तेल की सप्लाई होती है।

होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा है। इसके दोनों मुहाने करीब 50 किमी चौड़े हैं, जबकि सबसे संकरा हिस्सा करीब 33 किमी चौड़ा है। इसमें आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक के लिए 3 किमी चौड़ी शिपिंग लेन तय है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए अहम क्यों है?

अमेरिका के एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी EIA के मुताबिक, दुनिया के कुल पेट्रोलियम में से करीब 20% होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। हर दिन लगभग 1.78 करोड़ बैरल से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इस रूट से जाता है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी IEA के मुताबिक, ईरान खुद रोजाना 17 लाख बैरेल पेट्रोलियम इस रूट से निर्यात करता है।

इस रास्ते से गुजरने वाली कॉमर्शियल शिप की सुरक्षा अमेरिकी नेवी की एक टुकड़ी करती है। ईरान के अलावा दूसरे गल्फ देश जैसे ईराक, कुवैत, सऊदी अरब और UAE भी इसे रास्ते से अपना ज्यादातर तेल निर्यात करते हैं। इसमें से ज्यादातर निर्यात एशियाई देशों को होता है। 2022 में होर्मुज से गुजरने वाले कुल तेल का 82% एशियाई देशों में गया था।

ये खबर भी पढ़ें…

घरेलू सिलेंडर के दाम 60 रुपए बढ़े: ईरान जंग से रसोई गैस की किल्लत की आशंका; सरकार का LPG प्रोडक्शन बढ़ाने का आदेश

केंद्र सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए महंगा कर दिया है। दिल्ली में 14.2 किलोग्राम की LPG गैस अब 913 रुपए की मिलेगी। पहले यह 853 रुपए की थी। वहीं 19 किग्रा वाले कॉमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपए का इजाफा किया गया है। यह अब 1883 रुपए का मिलेगा। बढ़ी हुई कीमतें 7 मार्च से लागू हो गई है।

इससे पहले सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को घरेलू सिलेंडर के दामों में 50 रुपए का इजाफा किया था। यानी ये बढ़ोतरी करीब एक साल बाद की गई है। वहीं 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 31 रुपए तक बढ़ाए गए थे। सरकार ने गैस के दामों में बढ़ोत्तरी ऐसे वक्त की है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते देश में गैस किल्लत की आशंका जताई गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज रूट से क्रूड ऑयल की ग्लोबल सप्लाई में रुकावट की वजह से क्रूड ऑयल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच कच्चे तेल की कीमत एक हफ्ते में लगभग 27% बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव करीब 92.69 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। यह अप्रैल 2024 के बाद इसका उच्चतम स्तर भी है।

28 फरवरी को जंग की शुरूआत हुई थी, तब क्रूड ऑयल की कीमत 72.87 डॉलर प्रति बैरल थी। तब से अब तक यानी 8 दिन में क्रूड ऑयल की कीमत करीब 20 डॉलर प्रति बैरल बढ़ी है।

होर्मुज रूट प्रभावित होने से तेल के दाम लगातार बढ़ रहे

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज रूट से क्रूड ऑयल की ग्लोबल सप्लाई में रुकावट की वजह से क्रूड ऑयल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। होर्मुज रूट से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से 20% ग्लोबल ऑयल सप्लाई पर असर पड़ा रहा है। वहीं भारत को हर महीने होने वाली क्रूड ऑयल सप्लाई का आधा हिस्सा यानी 50% प्रभावित हुआ है।

भारत समेत कई एशियाई देशों को भी इस रूट से होने वाली सप्लाई पर भी असर पड़ा है। ग्लोबल लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई भी इस रूट से होती है। अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहता है, तो पूरी दुनिया में तेल और गैस की किल्लत हो सकती है।

200 से ज्यादा जहाज फंसे, भारत के 38 जहाज शामिल

होर्मुज रूट प्रभावित होने की वजह से फारस की खाड़ी में दुनिया के कई देशों के 200 से ज्यादा जहाज फंसे हुए हैं, जबकि 150 से ज्यादा जहाज इस रूट के बाहर इंतजार कर रहे हैं।

वहीं भारत के भी करीब 38 जहाज इस क्षेत्र में अटके हुए हैं। इनमें रूस से भारत आ रहे कच्चे तेल के टैंकर भी शामिल हैं। इंश्योरेंस और शिपिंग कंपनियां भी अब रिस्क का दोबारा आकलन कर रही हैं, जिससे देरी और बढ़ सकती है।

1. ग्लोबल-एशियाई देशों और भारत पर क्या असर?

होर्मुज रूट प्रभावित होने का असर पूरी दुनिया में दिखना शुरू हो गया है…

  • ग्लोबल मार्केट: कच्चे तेल की कीमतों में 20% का उछाल आया है। ग्लोबल शिपिंग रूट डाइवर्ट होने से माल ढुलाई की लागत 30-40% तक बढ़ गई है। अमेरिका और यूरोप में महंगाई बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
  • एशियाई देश: चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 70-90% तक खाड़ी देशों पर निर्भर हैं। सप्लाई रुकने से वहां की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और पावर प्लांट्स पर संकट खड़ा हो गया है।
  • भारत पर असर: भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल इम्पोर्ट करता है। तेल महंगा होने से भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ेगा, जिससे रुपया कमजोर हो सकता है। अगर कीमतें इसी स्तर पर रहीं, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी तय है।

2. सभी देशों के पास क्या-क्या विकल्प हैं?

सप्लाई चेन टूटने के बाद अब अलग-अलग देश वैकल्पिक रास्तों और अन्य विकल्पों पर काम कर रहे हैं…

  • स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) का इस्तेमाल: भारत, अमेरिका और चीन जैसे देश अपने स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से तेल निकालने की तैयारी कर रहे हैं। भारत के पास करीब 45 दिनों का इमरजेंसी स्टॉक है।
  • वैकल्पिक रूट की तलाश: जहाजों को अब ‘केप ऑफ गुड होप’ (अफ्रीका के नीचे से) होकर भेजा जा रहा है। हालांकि, इसमें समय और पैसा ज्यादा लगता है। सऊदी अरब और यूएई अपनी पाइपलाइनों के जरिए लाल सागर तक तेल पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि होर्मुज रूट को बाईपास किया जा सके।
  • नए सप्लायर्स से संपर्क: भारत समेत एशियाई देश अब रूस अमेरिका, ब्राजील, गुयाना और अफ्रीकी देशों से ज्यादा तेल खरीदने के लिए बातचीत कर रहे हैं ताकि खाड़ी देशों पर निर्भरता कम हो सके।

3. स्थिति बिगड़ी तो आगे क्या-क्या हो सकता है?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर यह तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है:

  • क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार: अगर होर्मुज रूट लंबे समय तक बंद रहता है, तो कच्चा तेल 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।
  • महंगाई का बढ़ना: क्रूड महंगा होने से फर्टिलाइजर, प्लास्टिक और ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा, जिसका सीधा असर आम आदमी की थाली पर भी पड़ेगा। खाने-पीने की चीजों के दाम 10-15% तक बढ़ सकते हैं।
  • ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद खत्म: महंगाई बढ़ने की वजह से दुनिया भर के सेंट्रल बैंक (जैसे RBI और US फेडरल रिजर्व) ब्याज दरों में कटौती करने का फैसला टाल सकते हैं, जिससे लोन और महंगे रहेंगे।
  • एनर्जी ट्रांजिशन में तेजी: इस संकट के बाद देश सोलर, विंड और इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की तरफ और तेजी से कदम बढ़ाएंगे ताकि भविष्य में ऐसे तेल संकटों से बचा जा सके।
होर्मुज स्ट्रेट से जब मालवाहक जहाज गुजरते हैं, तो ईरानी सेना निगरानी करती है।

होर्मुज स्ट्रेट से जब मालवाहक जहाज गुजरते हैं, तो ईरानी सेना निगरानी करती है।

होर्मुज स्ट्रेट के बारे में जानिए..

भारत के लिए अहम क्यों होर्मुज स्ट्रेट ?

ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे देशों से मंगवाता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है। भारत अपनी जरूरत का करीब 26 लाख बैरल कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) रोजाना इसी रास्ते से मंगवाता है।

केपलर के डेटा के मुताबिक, जनवरी-फरवरी में भारत के कुल मंथली ऑयल इंपोर्ट का करीब 50% हिस्सा होर्मुज के रास्ते ही आया है। नवंबर-दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा 40% था, जो अब बढ़ गया है।

होर्मुज स्ट्रेट क्या है?

होर्मुज स्ट्रेट एक संकरा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से और आगे अरब सागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान सटा है। दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE है। इसके आसपास सभी तेल उत्पादक देश हैं। इसलिए इस जलीय रास्ते से दुनियाभर में तेल की सप्लाई होती है।

होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा है। इसके दोनों मुहाने करीब 50 किमी चौड़े हैं, जबकि सबसे संकरा हिस्सा करीब 33 किमी चौड़ा है। इसमें आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक के लिए 3 किमी चौड़ी शिपिंग लेन तय है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के लिए अहम क्यों है?

अमेरिका के एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी EIA के मुताबिक, दुनिया के कुल पेट्रोलियम में से करीब 20% होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। हर दिन लगभग 1.78 करोड़ बैरल से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इस रूट से जाता है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी IEA के मुताबिक, ईरान खुद रोजाना 17 लाख बैरेल पेट्रोलियम इस रूट से निर्यात करता है।

इस रास्ते से गुजरने वाली कॉमर्शियल शिप की सुरक्षा अमेरिकी नेवी की एक टुकड़ी करती है। ईरान के अलावा दूसरे गल्फ देश जैसे ईराक, कुवैत, सऊदी अरब और UAE भी इसे रास्ते से अपना ज्यादातर तेल निर्यात करते हैं। इसमें से ज्यादातर निर्यात एशियाई देशों को होता है। 2022 में होर्मुज से गुजरने वाले कुल तेल का 82% एशियाई देशों में गया था।

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इससे पहले सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को घरेलू सिलेंडर के दामों में 50 रुपए का इजाफा किया था। यानी ये बढ़ोतरी करीब एक साल बाद की गई है। वहीं 1 मार्च 2026 को कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 31 रुपए तक बढ़ाए गए थे। सरकार ने गैस के दामों में बढ़ोत्तरी ऐसे वक्त की है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते देश में गैस किल्लत की आशंका जताई गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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