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बेटी बोली थी…पापा आप भी साथ चलो:…और मैं उसकी चिता भी नहीं देख पाया, इंदौर अग्निकांड में पत्नी-बच्चों को खोने वाले बिहार के राजेश का दर्द

बेटी बोली थी...पापा आप भी साथ चलो:...और मैं उसकी चिता भी नहीं देख पाया, इंदौर अग्निकांड में पत्नी-बच्चों को खोने वाले बिहार के राजेश का दर्द

इंदौर में भीषण अग्निकांड ने एक पिता की पूरी दुनिया उजाड़ दी। बिहार में रहने वाले राजेश जैन ने कभी नहीं सोचा था कि जिन बच्चों और पत्नी को उन्होंने सुरक्षित सफर के लिए अपने चचेरे भाई के साथ भेजा था, वे सभी एक ही हादसे में हमेशा के लिए उनसे दूर हो जाएंगे। इस दर्दनाक घटना में उनकी पत्नी रुचिका, बेटी राशि, बेटा तन्मय और चचेरा भाई कार्तिक समेत 8 लोगों की मौत हो गई। राजेश हादसे में मारे गए बिहार के विजय जैन के दामाद हैं। परिवार से मिलने आई थी रुचिका, साथ भेजा था कार्तिक रुचिका के पति राजेश जैन ने बताया कि उनकी पत्नी बच्चों के साथ अपने माता-पिता से मिलने इंदौर आई थीं। 15 तारीख को वे बिहार से निकले और 17 की सुबह इंदौर पहुंचे थे। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कार्तिक को भी उनके साथ भेजा गया था। राजेश ने बताया, “इतनी लंबी यात्रा में पत्नी और छोटे बच्चों के साथ एक लड़का होना जरूरी समझा, इसलिए छोटू को साथ भेजा था, लेकिन वह भी इस हादसे का शिकार हो गया।” बच्चों की पढ़ाई और छुट्टियों का था प्लान राजेश के मुताबिक बेटी राशि कक्षा 5वीं और बेटा तन्मय कक्षा 1 में बाल मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ते थे। वहीं कार्तिक ने हाल ही में 10वीं बोर्ड की परीक्षा दी थी और उसकी छुट्टियां चल रही थीं।
रुचिका बच्चों को नाना-नानी से मिलाने और पिता की देखभाल के लिए इंदौर आई थीं। योजना थी कि स्कूल खुलने से पहले सभी वापस लौट जाएंगे। आखिरी बातचीत के बाद सब खत्म राजेश ने बताया कि 17 तारीख की रात करीब 8 बजे उनकी रुचिका से आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने घर का हाल-चाल पूछा और वापसी टिकट को लेकर चर्चा की। रुचिका ने रात 10 बजे फिर कॉल करने की बात कही थी, लेकिन उसके बाद बात नहीं हो सकी। सुबह साले का फोन आया और हादसे की खबर मिली जिसने सब कुछ खत्म कर दिया। बच्चे कह रहे थे “पापा आप भी साथ चलो…” राजेश भावुक होकर बताते हैं कि उनकी बेटी राशि ने उनसे इंदौर चलने की जिद की थी। “उसने कहा था पापा आप भी हमारे साथ चलो, हम घूमकर वापस आ जाएंगे। लेकिन काम के चलते मैं नहीं जा सका। मुझे क्या पता था कि अब मेरा परिवार कभी वापस नहीं आएगा।” माता-पिता के इलाज के लिए आई थी रुचिका रुचिका के पिता विजय सेठिया और मां सुमन इंदौर में इलाज के लिए रुके हुए थे। ऐसे में रुचिका ने बच्चों के साथ इंदौर आने की इच्छा जताई थी, ताकि वह पिता की देखभाल भी कर सके और बच्चे भी नाना-नानी से मिल सकें। अंतिम दर्शन भी नसीब नहीं हुए राजेश ने रुंधे गले से बताया कि वह अपने परिवार को आखिरी बार देख भी नहीं सके। हादसे की सूचना मिलते ही उन्होंने फ्लाइट बुक करने की कोशिश की, लेकिन सीधी उड़ान नहीं मिली। वह बिहार से कोलकाता होते हुए घटना के दिन बुधवार रात 9:30 बजे इंदौर पहुंचे, तब तक परिवार का अंतिम संस्कार किया जा चुका था। परिजनों ने बताया कि शवों की हालत खराब होने के कारण देर करना संभव नहीं था। घटनाक्रम से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें इंदौर में EV ब्लास्ट, एक साथ 7 चिताएं जलीं:घर के डिजिटल लॉक नहीं खुलने से 8 की मौत इंदौर में इलेक्ट्रिक कार टाटा पंच में चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई, जिसने तीन मंजिला मकान को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में रबर कारोबारी मनोज पुगलिया, उनकी गर्भवती बहू सिमरन समेत 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 लोग घायल हैं। मारे गए लोगों में से 6 मनोज के रिश्तेदार थे, जो मंगलवार को बिहार के किशनगंज से आए थे। घटना बुधवार तड़के 3.30 से 4 बजे के बीच बंगाली चौराहे के पास ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी की है। मुक्तिधाम में एक साथ 7 चिताएं जलीं इंदौर पहुंचे सीएम, अग्निकांड पीड़ितों से मिले:बेटा बोला- आग ईवी नहीं बिजली के पोल से लगी बेटे का दावा-EV से नहीं इलेक्ट्रिक पोल से निकली चिंगारी, बिजली बंद किए बिना पानी डाला; यही मौतों की वजह वक्त सबकुछ छीन सकता है…स्टेटस लिखकर सोए थे मनोज:फायर ब्रिगेड कर्मी ने काट दिया था प्रत्यक्षदर्शी का फोन

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रुचिका बच्चों को नाना-नानी से मिलाने और पिता की देखभाल के लिए इंदौर आई थीं। योजना थी कि स्कूल खुलने से पहले सभी वापस लौट जाएंगे। आखिरी बातचीत के बाद सब खत्म राजेश ने बताया कि 17 तारीख की रात करीब 8 बजे उनकी रुचिका से आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने घर का हाल-चाल पूछा और वापसी टिकट को लेकर चर्चा की। रुचिका ने रात 10 बजे फिर कॉल करने की बात कही थी, लेकिन उसके बाद बात नहीं हो सकी। सुबह साले का फोन आया और हादसे की खबर मिली जिसने सब कुछ खत्म कर दिया। बच्चे कह रहे थे “पापा आप भी साथ चलो…” राजेश भावुक होकर बताते हैं कि उनकी बेटी राशि ने उनसे इंदौर चलने की जिद की थी। “उसने कहा था पापा आप भी हमारे साथ चलो, हम घूमकर वापस आ जाएंगे। लेकिन काम के चलते मैं नहीं जा सका। मुझे क्या पता था कि अब मेरा परिवार कभी वापस नहीं आएगा।” माता-पिता के इलाज के लिए आई थी रुचिका रुचिका के पिता विजय सेठिया और मां सुमन इंदौर में इलाज के लिए रुके हुए थे। ऐसे में रुचिका ने बच्चों के साथ इंदौर आने की इच्छा जताई थी, ताकि वह पिता की देखभाल भी कर सके और बच्चे भी नाना-नानी से मिल सकें। अंतिम दर्शन भी नसीब नहीं हुए राजेश ने रुंधे गले से बताया कि वह अपने परिवार को आखिरी बार देख भी नहीं सके। हादसे की सूचना मिलते ही उन्होंने फ्लाइट बुक करने की कोशिश की, लेकिन सीधी उड़ान नहीं मिली। वह बिहार से कोलकाता होते हुए घटना के दिन बुधवार रात 9:30 बजे इंदौर पहुंचे, तब तक परिवार का अंतिम संस्कार किया जा चुका था। परिजनों ने बताया कि शवों की हालत खराब होने के कारण देर करना संभव नहीं था। घटनाक्रम से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें इंदौर में EV ब्लास्ट, एक साथ 7 चिताएं जलीं:घर के डिजिटल लॉक नहीं खुलने से 8 की मौत इंदौर में इलेक्ट्रिक कार टाटा पंच में चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट होने से आग लग गई, जिसने तीन मंजिला मकान को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में रबर कारोबारी मनोज पुगलिया, उनकी गर्भवती बहू सिमरन समेत 8 लोगों की मौत हो गई, जबकि 4 लोग घायल हैं। मारे गए लोगों में से 6 मनोज के रिश्तेदार थे, जो मंगलवार को बिहार के किशनगंज से आए थे। घटना बुधवार तड़के 3.30 से 4 बजे के बीच बंगाली चौराहे के पास ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी की है। मुक्तिधाम में एक साथ 7 चिताएं जलीं इंदौर पहुंचे सीएम, अग्निकांड पीड़ितों से मिले:बेटा बोला- आग ईवी नहीं बिजली के पोल से लगी बेटे का दावा-EV से नहीं इलेक्ट्रिक पोल से निकली चिंगारी, बिजली बंद किए बिना पानी डाला; यही मौतों की वजह वक्त सबकुछ छीन सकता है…स्टेटस लिखकर सोए थे मनोज:फायर ब्रिगेड कर्मी ने काट दिया था प्रत्यक्षदर्शी का फोन

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