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Sugar Option | Doctor Recomanded: चीनी के बदले क्या खाएं? प्री-डायबेटिक हैं तो जरूर जानें डॉक्टरों की ये 5 लिस्ट

Sugar Option | Doctor Recomanded: चीनी के बदले क्या खाएं? प्री-डायबेटिक हैं तो जरूर जानें डॉक्टरों की ये 5 लिस्ट

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Sugar Option: भारत में अधिकांश लोग प्री-डायबेटिक हैं. हालांकि इनमें से अधिकांश को पता ही नहीं. इसलिए अगर आप चाहते हैं कि डायबिटीज न हो या कुछ अन्य बीमारियों से भी बचे रहे हैं कि तो आपको चीनी से परहेज करना चाहिए. वैसे भी चीनी किसी भी मामले में सही नहीं है. यह अल्ट्रा प्रोसेस्ड चीज है जो शरीर में तुरंत ग्लूकोज बनाता है जो सीधा खून में चला जाता है. इससे कई तरह की अन्य दिक्कतें भी हो सकते हैं. ऐसे में हम यहां आपको चीनी का बेहतर विकल्प बता रहे हैं.डॉक्टरों ने ऐसी 5 प्राकृतिक चीजों की सूची तैयार की है जो आपकी ‘शुगर क्रेविंग’ को तो शांत करेंगी ही, साथ ही आपके इंसुलिन लेवल को भी नहीं बिगाड़ेंगी.

हम में से कई लोगों को सुबह चाय या कॉफी पीने की आदत है. आमतौर पर उसमें दो चम्मच चीनी डालते हैं. चीनी से तुरंत एनर्जी मिलती है. लेकिन ये ब्लड में ग्लूकोज लेवल को जल्दी बढ़ा देती है. पैंक्रियास उतनी तेजी से इंसुलिन नहीं बना पाता. इंसुलिन धीरे-धीरे ही रिलीज होता है. इसलिए ग्लूकोज लेवल भी अचानक न बढ़े, इसका ध्यान रखना चाहिए. इसी वजह से चीनी छोड़ना अच्छा है. चीनी से एक और समस्या है. वो एनर्जी देती है, लेकिन उस एनर्जी को तुरंत इस्तेमाल करना जरूरी है. यानी मेहनत करनी होगी. अगर चीनी से मिली एनर्जी का इस्तेमाल नहीं किया तो वो शरीर में जमा हो जाती है, जिससे वजन बढ़ सकता है और दिल की समस्याएं भी हो सकती हैं. AI Photo

2025 में आए स्टेट हेल्थ डेटा के मुताबिक तेलंगाना में करीब 13 प्रतिशत लोग डायबिटीज से परेशान हैं. अगर चीनी नहीं खानी है, तो क्या इस्तेमाल करें ये सवाल आता है. हमारी किस्मत से स्टेविया, मोंक फ्रूट समेत 5 तरह के विकल्प मौजूद हैं. इन्हें चीनी की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे टाइप 2 डायबिटीज को रोकने की पूरी कोशिश की जा सकती है.  AI Photo

आखिर चीनी क्यों कम करनी चाहिए?  देश में 10 करोड़ लोग डायबेटिक हैं और कितने प्री-डायबेटिक हैं. हमारे खाने में चीनी का इस्तेमाल ज्यादा होता है, क्योंकि हम मिठास को शुभ मानते हैं. इसलिए कई मौकों पर मिठाई खाते हैं. लेकिन ज्यादा चीनी खाने से कई लोगों में इंसुलिन बनना कम हो जाता है. उन्हें टाइप 2 डायबिटीज हो सकती है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की गाइडलाइन्स के मुताबिक, चीनी के विकल्प वजन ज्यादा कम नहीं करते, लेकिन डायबिटीज को रोकने और कंट्रोल करने के लिए ये सुरक्षित ऑप्शन हैं. अब जानते हैं कौन-कौन से हैं. AI Photo

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1. स्टीविया – जीरो कैलोरी सुपरस्टार: स्टीविया एक पौधे की पत्तियों से बनता है. ये चीनी से 200 से 300 गुना ज्यादा मीठा होता है, लेकिन इसमें कैलोरी बिल्कुल नहीं होती. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स जीरो है, यही इसकी खासियत है. इसलिए डायबिटीज वाले लोग इसे ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. हैदराबाद के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सुधीर कुमार ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया था, “चाय, कॉफी में स्टीविया ड्रॉप्स डालने से बहुत फायदा होगा. इससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ेगी. 2024 की मेटा एनालिसिस के मुताबिक डायबिटीज वालों के लिए स्टीविया सबसे अच्छा है. ये ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल करता है.100 ग्राम की कीमत करीब 200 रुपये तक होती है. आम चाय में 1-2 बूंद डालना काफी है.  AI Photo

2. मोंक फ्रूट -मोंक का मतलब साधु होता है. इस फल को यही नाम दिया गया है. इसे लुओ हान गुओ भी कहते हैं. इसमें मोग्रोसाइड्स नाम के नेचुरल कंपाउंड्स होते हैं. इसी वजह से ये फल चीनी से 150 से 300 गुना ज्यादा मीठा होता है. इसमें भी कैलोरी जीरो है. 2025 के न्यूट्रिएंट्स जर्नल PRISMA रिव्यू (Kaim et al.) के मुताबिक, इसे इस्तेमाल करने से खाने के बाद ग्लूकोज 10 से 18 प्रतिशत तक कम हो जाता है.  इसका पाउडर भी ऑनलाइन ई-कॉमर्स या सुपरमार्केट में मिलता है. 100 ग्राम की कीमत करीब 200 रुपये तक होती है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होने की वजह से कैंसर का रिस्क कम हो सकता है. कुछ ब्लेंड्स में एरिथ्रिटॉल हो सकता है. खरीदते वक्त लेबल चेक करें. ‘नो एरिथ्रिटॉल’ सर्च करें. AI Photo

3. एल्यूलोज़ (Allulose) – असली शुगर जैसा स्वाद देने वाला रेयर स्वीटनर है. इसे दुर्लभ चीनी कहा जाता है. ये चीनी से 70 प्रतिशत ज्यादा मीठा होता है. लेकिन इसमें कैलोरी सिर्फ 0.4 प्रति ग्राम होती है. ये शरीर में ग्लूकोज में नहीं बदलता. और ये यूरिन के जरिए बाहर निकल जाता है. इसलिए डायबिटीज का रिस्क बहुत कम है. PLoS One मेटा-एनालिसिस 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक इसे इस्तेमाल करने वालों में खाने के बाद ब्लड में शुगर लेवल कम होता है. साथ ही ये फैट भी कम कर सकता है. ऐसा कहा जा रहा है कि यह भविष्य में ये GLP-1 की तरह काम करेगा.  इसकी 100 ग्राम की कीमत करीब 180 रुपये है. ये बेकिंग के लिए सबसे अच्छा है. गुलाब जामुन, बेसन लड्डू जैसी चीजों में असली टेक्सचर देता है.  AI Photo

4. एरिथ्रिटोल (Erythritol) – चीनी जैसी टेक्सचर देने वाला विकल्प है. ये मकई को फर्मेंट करने से बनने वाला शुगर अल्कोहल है. चीनी से 70 प्रतिशत ज्यादा मीठा होता है. इसमें कैलोरी नहीं होती. दांतों को नुकसान नहीं पहुंचता. इसकी कीमत 100 ग्राम करीब 80 रुपये तक होती है. बेकिंग में ये बहुत अच्छा रहता है. बर्फी, लड्डू की टेक्सचर भी बहुत अच्छी होती है. लेकिन इसका सीमित मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिए कि क्योंकि क्लीवलैंड क्लिनिक और CU बाउल्डर स्टडीज के मुताबिक इसमें कुछ समस्याएं हो सकती हैं. इसे इस्तेमाल करने से खून में थक्का बनना (प्लेटलेट्स एक्टिव), हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक का रिस्क बढ़ सकता है.  इसलिए फिलहाल ये चलन में नहीं है. भविष्य में वैज्ञानिक इसमें से इन चीजों को निकालकर इसे खाने योग्य बना सकते हैं.  AI Photo

5. नारियल की शक्कर (Coconut Sugar)- हमें पता है कि गन्ने से गुड़ बनता है, लेकिन बहुत लोगों को नहीं पता कि नारियल के पेड़ से भी गुड़ जैसा कुछ मिलता है. नारियल के फूलों (पाम सैप) से खास तरह का पानी निकलता है, जिसे ध्यान से इकट्ठा किया जाता है. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 35 से 54 के बीच होता है, जो चीनी से कम है. चीनी का GI 65 तक होता है. नारियल की शक्कर में आयरन, जिंक और प्रीबायोटिक्स होते हैं, जो सेहत के लिए अच्छे हैं. इंडिया की लोकल स्टडीज और 2026 की रिव्यू के मुताबिक इसमें मौजूद मिनरल्स से पेट की सेहत बेहतर होती है. लेकिन इसमें कैलोरी होती है, इसलिए कम इस्तेमाल करें. इसकी कीमत 200 से 400 रुपए प्रति किलो तक होती है. भारतीय खाने में इसे इस्तेमाल किया जाता है.  AI Photo

चीनी से बेहतर ये विकल्प हैं. खासकर स्टेविया और मंक फ्रूट का इस्तेमाल ज्यादा लोग कर रहे हैं.  (डिस्क्लेमर: ऊपर दी गई सारी जानकारी एक्सपर्ट से बातचीत पर आधारित है लेकिन इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टरों की सलाह अवश्य लें. News18 ने इसकी पुष्टि नहीं की है.) AI Photo

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Sugar Option: भारत में अधिकांश लोग प्री-डायबेटिक हैं. हालांकि इनमें से अधिकांश को पता ही नहीं. इसलिए अगर आप चाहते हैं कि डायबिटीज न हो या कुछ अन्य बीमारियों से भी बचे रहे हैं कि तो आपको चीनी से परहेज करना चाहिए. वैसे भी चीनी किसी भी मामले में सही नहीं है. यह अल्ट्रा प्रोसेस्ड चीज है जो शरीर में तुरंत ग्लूकोज बनाता है जो सीधा खून में चला जाता है. इससे कई तरह की अन्य दिक्कतें भी हो सकते हैं. ऐसे में हम यहां आपको चीनी का बेहतर विकल्प बता रहे हैं.डॉक्टरों ने ऐसी 5 प्राकृतिक चीजों की सूची तैयार की है जो आपकी ‘शुगर क्रेविंग’ को तो शांत करेंगी ही, साथ ही आपके इंसुलिन लेवल को भी नहीं बिगाड़ेंगी.

हम में से कई लोगों को सुबह चाय या कॉफी पीने की आदत है. आमतौर पर उसमें दो चम्मच चीनी डालते हैं. चीनी से तुरंत एनर्जी मिलती है. लेकिन ये ब्लड में ग्लूकोज लेवल को जल्दी बढ़ा देती है. पैंक्रियास उतनी तेजी से इंसुलिन नहीं बना पाता. इंसुलिन धीरे-धीरे ही रिलीज होता है. इसलिए ग्लूकोज लेवल भी अचानक न बढ़े, इसका ध्यान रखना चाहिए. इसी वजह से चीनी छोड़ना अच्छा है. चीनी से एक और समस्या है. वो एनर्जी देती है, लेकिन उस एनर्जी को तुरंत इस्तेमाल करना जरूरी है. यानी मेहनत करनी होगी. अगर चीनी से मिली एनर्जी का इस्तेमाल नहीं किया तो वो शरीर में जमा हो जाती है, जिससे वजन बढ़ सकता है और दिल की समस्याएं भी हो सकती हैं. AI Photo

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2. मोंक फ्रूट -मोंक का मतलब साधु होता है. इस फल को यही नाम दिया गया है. इसे लुओ हान गुओ भी कहते हैं. इसमें मोग्रोसाइड्स नाम के नेचुरल कंपाउंड्स होते हैं. इसी वजह से ये फल चीनी से 150 से 300 गुना ज्यादा मीठा होता है. इसमें भी कैलोरी जीरो है. 2025 के न्यूट्रिएंट्स जर्नल PRISMA रिव्यू (Kaim et al.) के मुताबिक, इसे इस्तेमाल करने से खाने के बाद ग्लूकोज 10 से 18 प्रतिशत तक कम हो जाता है.  इसका पाउडर भी ऑनलाइन ई-कॉमर्स या सुपरमार्केट में मिलता है. 100 ग्राम की कीमत करीब 200 रुपये तक होती है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स होने की वजह से कैंसर का रिस्क कम हो सकता है. कुछ ब्लेंड्स में एरिथ्रिटॉल हो सकता है. खरीदते वक्त लेबल चेक करें. ‘नो एरिथ्रिटॉल’ सर्च करें. AI Photo

3. एल्यूलोज़ (Allulose) – असली शुगर जैसा स्वाद देने वाला रेयर स्वीटनर है. इसे दुर्लभ चीनी कहा जाता है. ये चीनी से 70 प्रतिशत ज्यादा मीठा होता है. लेकिन इसमें कैलोरी सिर्फ 0.4 प्रति ग्राम होती है. ये शरीर में ग्लूकोज में नहीं बदलता. और ये यूरिन के जरिए बाहर निकल जाता है. इसलिए डायबिटीज का रिस्क बहुत कम है. PLoS One मेटा-एनालिसिस 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक इसे इस्तेमाल करने वालों में खाने के बाद ब्लड में शुगर लेवल कम होता है. साथ ही ये फैट भी कम कर सकता है. ऐसा कहा जा रहा है कि यह भविष्य में ये GLP-1 की तरह काम करेगा.  इसकी 100 ग्राम की कीमत करीब 180 रुपये है. ये बेकिंग के लिए सबसे अच्छा है. गुलाब जामुन, बेसन लड्डू जैसी चीजों में असली टेक्सचर देता है.  AI Photo

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5. नारियल की शक्कर (Coconut Sugar)- हमें पता है कि गन्ने से गुड़ बनता है, लेकिन बहुत लोगों को नहीं पता कि नारियल के पेड़ से भी गुड़ जैसा कुछ मिलता है. नारियल के फूलों (पाम सैप) से खास तरह का पानी निकलता है, जिसे ध्यान से इकट्ठा किया जाता है. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स 35 से 54 के बीच होता है, जो चीनी से कम है. चीनी का GI 65 तक होता है. नारियल की शक्कर में आयरन, जिंक और प्रीबायोटिक्स होते हैं, जो सेहत के लिए अच्छे हैं. इंडिया की लोकल स्टडीज और 2026 की रिव्यू के मुताबिक इसमें मौजूद मिनरल्स से पेट की सेहत बेहतर होती है. लेकिन इसमें कैलोरी होती है, इसलिए कम इस्तेमाल करें. इसकी कीमत 200 से 400 रुपए प्रति किलो तक होती है. भारतीय खाने में इसे इस्तेमाल किया जाता है.  AI Photo

चीनी से बेहतर ये विकल्प हैं. खासकर स्टेविया और मंक फ्रूट का इस्तेमाल ज्यादा लोग कर रहे हैं.  (डिस्क्लेमर: ऊपर दी गई सारी जानकारी एक्सपर्ट से बातचीत पर आधारित है लेकिन इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टरों की सलाह अवश्य लें. News18 ने इसकी पुष्टि नहीं की है.) AI Photo

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