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भोपाल के 3 डॉक्टरों के खिलाफ जिला कोर्ट में परिवाद:लिंग जांच से जुड़े नियमों की अनदेखी, स्वास्थ्य विभाग पहुंचा कोर्ट; एक डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक भी शामिल

भोपाल के 3 डॉक्टरों के खिलाफ जिला कोर्ट में परिवाद:लिंग जांच से जुड़े नियमों की अनदेखी, स्वास्थ्य विभाग पहुंचा कोर्ट; एक डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक भी शामिल

भोपाल में गर्भ में बच्चे का लिंग पता लगाने पर रोक से जुड़े पीसीपीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कदम उठाया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) भोपाल और पीसीपीएनडीटी एक्ट के समुचित प्राधिकारी ने तीन डॉक्टरों और एक डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायालय में परिवाद दायर किया है। आरोप है कि इन लोगों ने सोनोग्राफी से जुड़े जरूरी दस्तावेजों का सही तरीके से रिकॉर्ड नहीं रखा और एक्ट के नियमों का पालन नहीं किया। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। इसके बाद पहले संबंधित केंद्रों की मान्यता निरस्त की गई और मशीनें सील की गईं। अब मामले को अदालत में ले जाकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कोर्ट के आदेश के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस चलेगा। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत दायर परिवाद में एयरपोर्ट रोड गांधीनगर स्थित न्यू लाइफ डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक मोहम्मद दानिश अली और रेडियोलॉजिस्ट डॉ. ईशांत जाटव को आरोपी बनाया है। इसके अलावा एक अन्य मामले में मार्वल अस्पताल के संचालक डॉ. विशाल श्रीवास्तव और डॉ. कृति श्रीवास्तव को भी आरोपी बनाया है। इन सभी के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और पीसीपीएनडीटी एक्ट 1994 की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कराया है। हालांकि, कोर्ट ने तीनों चिकित्सकों एवं डायग्नोस्टिक सेंटर संचालक को जमानत दे दी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा परिवाद में दिए गए विवरण एवं तथ्यों के आधार पर जांच जारी रहेगी।
पहले ही रद्द की जा चुकी थी मान्यता स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन संस्थानों की गतिविधियां पहले से ही संदिग्ध पाई गई थीं। जांच में एक्ट के नियमों का उल्लंघन मिलने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय ने संबंधित संस्थाओं की मान्यता पहले ही निरस्त कर दी थी। मंगलवार को सीएमएचओ भोपाल डॉ. मनीष शर्मा खुद जिला एवं सत्र न्यायालय में पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ परिवाद पत्र प्रस्तुत किया। अदालत के आदेश के बाद अब सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। निरीक्षण में मिली थीं कई गड़बड़ियां इस साल 22 जनवरी को सीएमएचओ कार्यालय की निरीक्षण टीम ने मार्वल अस्पताल में संचालित सोनोग्राफी सेंटर की जांच की थी। जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। सबसे बड़ी गड़बड़ी यह मिली कि यहां फॉर्म-एफ का सही तरीके से संधारण नहीं किया जा रहा था। इसके अलावा एएनसी रजिस्टर में भी प्रविष्टियां ठीक ढंग से दर्ज नहीं की गई थीं। नियमों के उल्लंघन को देखते हुए टीम ने जरूरी दस्तावेज जब्त कर लिए और सोनोग्राफी मशीन को सील कर दिया था। न्यू लाइफ डायग्नोस्टिक सेंटर में भी नियमों की अनदेखी न्यू लाइफ डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच में भी कई खामियां मिली थीं। यहां खाली एफ-फॉर्म पर रेडियोलॉजिस्ट डॉ. ईशांत जाटव के सील और साइन पाए गए। इसके अलावा एएनसीफॉर्म और एफ-फॉर्म भी अधूरे भरे हुए मिले। यह स्थिति पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन मानी गई। इसके बाद सीएमएचओ ने डॉ. ईशांत जाटव को नोटिस जारी कर उनके द्वारा सोनोग्राफी करने पर रोक लगा दी थी। साथ ही सेंटर की पीसीपीएनडीटी मान्यता भी निरस्त कर दी गई थी। लिंग चयन पर रोक के लिए सख्त कानून स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार पीसीपीएनडीटी एक्ट का उद्देश्य भ्रूण के लिंग की जांच और उसके आधार पर होने वाले भ्रूण हत्या जैसे अपराधों को रोकना है। इस कानून के तहत सोनोग्राफी से जुड़े हर परीक्षण का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होता है। नियमों का पालन नहीं करने पर संबंधित डॉक्टर और संस्थान के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है।

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पहले ही रद्द की जा चुकी थी मान्यता स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन संस्थानों की गतिविधियां पहले से ही संदिग्ध पाई गई थीं। जांच में एक्ट के नियमों का उल्लंघन मिलने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय ने संबंधित संस्थाओं की मान्यता पहले ही निरस्त कर दी थी। मंगलवार को सीएमएचओ भोपाल डॉ. मनीष शर्मा खुद जिला एवं सत्र न्यायालय में पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ परिवाद पत्र प्रस्तुत किया। अदालत के आदेश के बाद अब सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। निरीक्षण में मिली थीं कई गड़बड़ियां इस साल 22 जनवरी को सीएमएचओ कार्यालय की निरीक्षण टीम ने मार्वल अस्पताल में संचालित सोनोग्राफी सेंटर की जांच की थी। जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। सबसे बड़ी गड़बड़ी यह मिली कि यहां फॉर्म-एफ का सही तरीके से संधारण नहीं किया जा रहा था। इसके अलावा एएनसी रजिस्टर में भी प्रविष्टियां ठीक ढंग से दर्ज नहीं की गई थीं। नियमों के उल्लंघन को देखते हुए टीम ने जरूरी दस्तावेज जब्त कर लिए और सोनोग्राफी मशीन को सील कर दिया था। न्यू लाइफ डायग्नोस्टिक सेंटर में भी नियमों की अनदेखी न्यू लाइफ डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच में भी कई खामियां मिली थीं। यहां खाली एफ-फॉर्म पर रेडियोलॉजिस्ट डॉ. ईशांत जाटव के सील और साइन पाए गए। इसके अलावा एएनसीफॉर्म और एफ-फॉर्म भी अधूरे भरे हुए मिले। यह स्थिति पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन मानी गई। इसके बाद सीएमएचओ ने डॉ. ईशांत जाटव को नोटिस जारी कर उनके द्वारा सोनोग्राफी करने पर रोक लगा दी थी। साथ ही सेंटर की पीसीपीएनडीटी मान्यता भी निरस्त कर दी गई थी। लिंग चयन पर रोक के लिए सख्त कानून स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार पीसीपीएनडीटी एक्ट का उद्देश्य भ्रूण के लिंग की जांच और उसके आधार पर होने वाले भ्रूण हत्या जैसे अपराधों को रोकना है। इस कानून के तहत सोनोग्राफी से जुड़े हर परीक्षण का पूरा रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होता है। नियमों का पालन नहीं करने पर संबंधित डॉक्टर और संस्थान के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है।

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