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The Centre decides to revoke the detention of Sonam Wangchuk with immediate effect under the National Security Act:

The Centre decides to revoke the detention of Sonam Wangchuk with immediate effect under the National Security Act:
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नई दिल्ली1 मिनट पहले

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लेह प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक 21 दिनों तक अनशन पर रहे थे। यह फोटो 24 सितंबर 2025 की है।

केंद्र ने शनिवार को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक पर लगा नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) हटा दिया। सरकार ने कहा कि यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया। गृह मंत्रालय के अनुसार, सोनम ने NSA एक्ट के तहत अपनी हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है।

सरकार ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की याचिका पर अंतिम सुनवाई (10 मार्च) के दो दिन पहले लिया। कोर्ट इस दिन सुनवाई के दौरान वे वीडियो और फोटो देखे देखेगा, जिनके आधार पर सरकार ने उन पर NSA लगाया था।

जोधपुर सेंट्रल जेल अधीक्षक प्रदीप लखावत ने बताया, ‘उन्हें भी प्रेस नोट के जरिए ही इसकी सूचना मिली है। अभी तक किसी तरह का कोई ऑर्डर नहीं मिला है। ऑर्डर आने के बाद जेल नियम के हिसाब से आगे की कार्यवाही की जाएगी।’

दरअसल, सोनम के अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह हिंसा हुई थी। दो दिन बाद 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत वांगचुक को हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें फौरन जोधपुर शिफ्ट कर दिया था। 170 दिन से वे जोधपुर जेल में हैं। अब उनकी रिहाई होगी।

NSA सरकार को ऐसे लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो। इसके तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है।

सरकार बोली- बातचीत का माहौल बनाने लिए फैसला लिया

  • केंद्र सरकार ने कहा कि यह फैसला लद्दाख में शांति, स्थिरता और संवाद का माहौल बनाने के लिए लिया गया है।
  • लद्दाख में विभिन्न समुदायों और नेताओं के साथ लगातार बातचीत की जा रही है।
  • हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों का असर छात्रों, नौकरी चाहने वालों, व्यापार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा था।
  • क्षेत्र की चिंताओं को दूर करने के लिए हाई-पावर्ड कमेटी के जरिए बातचीत जारी रहेगी।

दो दिन पहले वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था

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लद्दाख के लिए ईमानदार संवाद आवश्यक है। मैंने एक्टिविज्म से दूरी नहीं बनाई है। लद्दाख के प्रति मेरी प्रतिबद्धता पहले जैसी ही है। इसका उद्देश्य लद्दाख के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी भविष्य है।

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4 फरवरी को केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड कमेटी की बैठक में लद्दाख के दो प्रमुख संगठन लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेट्स अलायंस ने वांगचुक की रिहाई की मांग के साथ-साथ अपनी अन्य मांगें भी दोहराई थीं।

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे सोनम

सोनम को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। वह लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे।

आंदोलन के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद उनकी गिरफ्तारी की गई थी। इन प्रदर्शनों में 4 लोगों की मौत हुई थी। 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने इस हिंसा को भड़काया।

वांगचुक ने जन्म लद्दाख में हुआ, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की

वांगचुक का जन्म 1966 में लेह जिले के अल्ची के पास, लद्दाख में हुआ था। उनके गांव में स्कूल न होने के कारण 9 साल की उम्र तक उनका किसी स्कूल में दाखिला नहीं हुआ। इस दौरान उनकी मां ने उन्हें बुनियादी शिक्षा दी।

9 साल की उम्र में उन्हें श्रीनगर ले जाया गया और वहां एक स्कूल में दाखिला दिलाया गया। बाद में दिल्ली के विशेष केंद्रीय स्कूल में भी उन्होंने पढ़ाई की। फिर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NIT, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech किया।

शिक्षा में सुधार के लिए SECMOL बनाया

इंजीनियरिंग के बाद वांगचुक ने साल 1988 में अपने भाई और पांच साथियों के साथ मिलकर स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख यानी SECMOL की शुरुआत की। इसका उद्देश्य लद्दाख के सरकारी स्कूलों की शिक्षा में सुधार लाना है। इसके लिए लद्दाख के सासपोल में मौजूद सरकारी हाई स्कूल में स्कूल सुधार के प्रयोग किए गए।

इसके बाद, SECMOL ने ‘ऑपरेशन न्यू होप’ की शुरुआत की। इसके तहत सरकारी स्कूलों में एजुकेशन रिफॉर्म और लोकलाइज्ड टेक्स्टबुक्स, टीचर्स की ट्रेनिंग और गांव-स्तरीय शिक्षा समितियों के गठन की पहल शुरू की गई। फिर इसे शिक्षा विभाग और गांव की जनता के सहयोग से आगे बढ़ाया गया।

जून 1993 से वांगचुक ने प्रिंट मैगजीन ‘लद्दाख्स मेलोंग’ की शुरुआत की। अगस्त 2005 तक लद्दाख की एकमात्र प्रिंट मैगजीन के एडिटर के रूप में काम किया। साल 2004 में हिल काउंसिल सरकार में शिक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया।

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ये खबर भी पढ़ें

भास्कर इंटरव्यू: वांगचुक की पत्नी बोलीं- सच सामने आएगा, वे रिहा होंगे: लद्दाख हिंसा के सबूतों से छेड़छाड़ हुई

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत लेह हिंसक प्रदर्शन के बाद 26 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। दैनिक भास्कर ने सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो से बात की। उन्होंने बताया कि सोनम की गिरफ्तारी के बाद शुरुआती 3 हफ्तों तक एक कार मेरा पीछा करती रही। इसके बाद जब मैंने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया तो यह गतिविधि धीरे-धीरे कम हो गई। पूरी खबर पढ़ें..

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लेह प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक 21 दिनों तक अनशन पर रहे थे। यह फोटो 24 सितंबर 2025 की है।

केंद्र ने शनिवार को लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक पर लगा नेशनल सिक्युरिटी एक्ट (NSA) हटा दिया। सरकार ने कहा कि यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू हो गया। गृह मंत्रालय के अनुसार, सोनम ने NSA एक्ट के तहत अपनी हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया है।

सरकार ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक की याचिका पर अंतिम सुनवाई (10 मार्च) के दो दिन पहले लिया। कोर्ट इस दिन सुनवाई के दौरान वे वीडियो और फोटो देखे देखेगा, जिनके आधार पर सरकार ने उन पर NSA लगाया था।

जोधपुर सेंट्रल जेल अधीक्षक प्रदीप लखावत ने बताया, ‘उन्हें भी प्रेस नोट के जरिए ही इसकी सूचना मिली है। अभी तक किसी तरह का कोई ऑर्डर नहीं मिला है। ऑर्डर आने के बाद जेल नियम के हिसाब से आगे की कार्यवाही की जाएगी।’

दरअसल, सोनम के अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह हिंसा हुई थी। दो दिन बाद 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत वांगचुक को हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें फौरन जोधपुर शिफ्ट कर दिया था। 170 दिन से वे जोधपुर जेल में हैं। अब उनकी रिहाई होगी।

NSA सरकार को ऐसे लोगों को हिरासत में लेने का अधिकार देता है, जिनसे देश की सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा हो। इसके तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक नजरबंद रखा जा सकता है।

सरकार बोली- बातचीत का माहौल बनाने लिए फैसला लिया

  • केंद्र सरकार ने कहा कि यह फैसला लद्दाख में शांति, स्थिरता और संवाद का माहौल बनाने के लिए लिया गया है।
  • लद्दाख में विभिन्न समुदायों और नेताओं के साथ लगातार बातचीत की जा रही है।
  • हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों का असर छात्रों, नौकरी चाहने वालों, व्यापार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा था।
  • क्षेत्र की चिंताओं को दूर करने के लिए हाई-पावर्ड कमेटी के जरिए बातचीत जारी रहेगी।

दो दिन पहले वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था

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लद्दाख के लिए ईमानदार संवाद आवश्यक है। मैंने एक्टिविज्म से दूरी नहीं बनाई है। लद्दाख के प्रति मेरी प्रतिबद्धता पहले जैसी ही है। इसका उद्देश्य लद्दाख के लिए न्यायपूर्ण और स्थायी भविष्य है।

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4 फरवरी को केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड कमेटी की बैठक में लद्दाख के दो प्रमुख संगठन लेह अपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेट्स अलायंस ने वांगचुक की रिहाई की मांग के साथ-साथ अपनी अन्य मांगें भी दोहराई थीं।

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे थे सोनम

सोनम को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। वह लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे।

आंदोलन के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद उनकी गिरफ्तारी की गई थी। इन प्रदर्शनों में 4 लोगों की मौत हुई थी। 90 लोग घायल हुए थे। सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने इस हिंसा को भड़काया।

वांगचुक ने जन्म लद्दाख में हुआ, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की

वांगचुक का जन्म 1966 में लेह जिले के अल्ची के पास, लद्दाख में हुआ था। उनके गांव में स्कूल न होने के कारण 9 साल की उम्र तक उनका किसी स्कूल में दाखिला नहीं हुआ। इस दौरान उनकी मां ने उन्हें बुनियादी शिक्षा दी।

9 साल की उम्र में उन्हें श्रीनगर ले जाया गया और वहां एक स्कूल में दाखिला दिलाया गया। बाद में दिल्ली के विशेष केंद्रीय स्कूल में भी उन्होंने पढ़ाई की। फिर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NIT, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech किया।

शिक्षा में सुधार के लिए SECMOL बनाया

इंजीनियरिंग के बाद वांगचुक ने साल 1988 में अपने भाई और पांच साथियों के साथ मिलकर स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख यानी SECMOL की शुरुआत की। इसका उद्देश्य लद्दाख के सरकारी स्कूलों की शिक्षा में सुधार लाना है। इसके लिए लद्दाख के सासपोल में मौजूद सरकारी हाई स्कूल में स्कूल सुधार के प्रयोग किए गए।

इसके बाद, SECMOL ने ‘ऑपरेशन न्यू होप’ की शुरुआत की। इसके तहत सरकारी स्कूलों में एजुकेशन रिफॉर्म और लोकलाइज्ड टेक्स्टबुक्स, टीचर्स की ट्रेनिंग और गांव-स्तरीय शिक्षा समितियों के गठन की पहल शुरू की गई। फिर इसे शिक्षा विभाग और गांव की जनता के सहयोग से आगे बढ़ाया गया।

जून 1993 से वांगचुक ने प्रिंट मैगजीन ‘लद्दाख्स मेलोंग’ की शुरुआत की। अगस्त 2005 तक लद्दाख की एकमात्र प्रिंट मैगजीन के एडिटर के रूप में काम किया। साल 2004 में हिल काउंसिल सरकार में शिक्षा सलाहकार नियुक्त किया गया।

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भास्कर इंटरव्यू: वांगचुक की पत्नी बोलीं- सच सामने आएगा, वे रिहा होंगे: लद्दाख हिंसा के सबूतों से छेड़छाड़ हुई

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत लेह हिंसक प्रदर्शन के बाद 26 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। दैनिक भास्कर ने सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो से बात की। उन्होंने बताया कि सोनम की गिरफ्तारी के बाद शुरुआती 3 हफ्तों तक एक कार मेरा पीछा करती रही। इसके बाद जब मैंने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया तो यह गतिविधि धीरे-धीरे कम हो गई। पूरी खबर पढ़ें..

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