Monday, 06 Apr 2026 | 04:24 AM

Trending :

EXCLUSIVE

AI will help in war, Pentagon’s Deals with US Tech Companies, AI Chatbots to Determine Which Targets Are Struck First

AI will help in war, Pentagon's Deals with US Tech Companies, AI Chatbots to Determine Which Targets Are Struck First
  • Hindi News
  • International
  • AI Will Help In War, Pentagon’s Deals With US Tech Companies, AI Chatbots To Determine Which Targets Are Struck First

न्यूयॉर्क46 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

अमेरिका अब युद्ध की रणनीति में एआई को एक ‘सलाहकार’ के रूप में जोड़ रहा है। – सिम्बॉलिक इमेज

युद्ध के मैदान में अब जनरल और सिपाही ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर एआई ‘चैटबॉट्स’ भी यह तय करेंगे कि पहले किस दुश्मन पर मिसाइल गिरानी है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने हाल ही में एक्सएआई और ओपनएआई के साथ गुप्त सैन्य नेटवर्क में एआई इस्तेमाल के लिए डील की है।

पेंटागन अब युद्ध की रणनीति में एआई को एक ‘सलाहकार’ के रूप में जोड़ रहा है। यह तकनीक अब केवल डेटा ही नहीं जुटाएगी, बल्कि इंसानों को युद्ध के दौरान यह सलाह भी देगी कि मौजूदा स्थिति और विमानों की लोकेशन के आधार पर सबसे पहले दुश्मन के किन ठिकानों को निशाना बनाया जाए। हालांकि अंतिम फैसला इंसान ही लेगा।

चैटबॉट्स के साथ सीधे बातचीत से तय होगी हमलों की प्राथमिकता

अब तक अमेरिकी सेना ‘मेवेन’ प्रोजेक्ट जैसी तकनीक से ड्रोन फुटेज और तस्वीरों के आधार पर लक्ष्य पहचानती थी। अब इसमें चैटजीपीटी और ग्रोक जैसे स्मार्ट चैटबॉट की नई परत जुड़ रही है। सैन्य अधिकारी के अनुसार सैनिक उनसे सीधे पूछ सकेंगे कि किन लक्ष्यों को पहले प्राथमिकता दी जाए। इससे प्रक्रिया तेज होती है, लेकिन चुनौती इन मशीनी सुझावों की सच्चाई परखना है, क्योंकि नया एआई डेटा के बजाय सीधे निष्कर्ष देता है।

आर्मी ऑपरेशंस में एआई का इस्तेमाल बढ़ा

अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान ही ईरान के स्कूल पर हाल ही में हुए हमले में 160 से ज्यादा लड़कियों की मौत हुई थी। हालांकि पेंटागन अभी इसकी जांच कर रहा है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला अमेरिकी मिसाइल से हुआ था। इस स्ट्राइक में पुराने और गलत डेटा का हाथ था। कुछ रिपोर्ट में इस लक्ष्य के फैसलों में ‘क्लॉड’ और ‘मेवेन’ तकनीक के इस्तेमाल की बात भी कही जा रही है। यही तकनीक वेनेजुएला ऑपरेशंस में भी की गई थी, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है।

चुनौती यह है कि कंपनियां अपने सिस्टम पर कुछ सीमाएं लगाती हैं, लेकिन युद्ध के दौरान वे कितनी कारगर होंगी, स्पष्ट नहीं। ट्रम्प ने कुछ कंपनियों को ‘सप्लाई चेन रिस्क’ तक बताया, यानी ऐसी तकनीकी निर्भरता जो युद्ध के समय काम बंद या हैक की जा सकती है।

चैटबॉट डेटा स्कैन कर लक्ष्य की प्राथमिकता तय करता है

युद्ध के दौरान ड्रोन, सैटेलाइट, रडार और खुफिया स्रोतों से हर सेकेंड भारी मात्रा में डेटा आता है। इस दौरान एआई चैटबॉट डेटा को तेजी से स्कैन कर पैटर्न पहचानता है। इसके बाद यह खतरे का आकलन कर प्राथमिकता तय करता है कि कौन सा लक्ष्य तुरंत हमला कर सकता है। चैटबॉट यह सुझाव भी देता है कि किसी लक्ष्य पर कौन-सा हथियार सबसे ज्यादा प्रभावी रहेगा, ताकि कार्रवाई सटीक तरीके से हो सके। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अंतिम मंजूरी मानव सैनिक ही देता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Rajya Sabha Election: 26 Leaders Uncontested

March 10, 2026/
2:19 am

नई दिल्ली6 घंटे पहले कॉपी लिंक 10 राज्यों की 37 सीटों के लिए हो रहे राज्यसभा चुनाव में 7 राज्यों...

Meta Launches Parent-Managed WhatsApp for Under-13s

March 12, 2026/
2:58 pm

नई दिल्ली24 मिनट पहले कॉपी लिंक वॉट्सएप को ऑपरेट करने वाली कंपनी मेटा ने ‘पेरेंट-मैनेज्ड’ अकाउंट मॉडल पेश किया है।...

तमिलनाडु चुनाव 2026: मतदाता सूची में नाम दर्ज का आज आखिरी दिन, EC ने की ये खास अपील

March 26, 2026/
10:38 am

तमिलनाडु चुनाव 2026: 23 अप्रैल को विधानसभा चुनाव की सूची के मतदान से पहले गुरुवार यानी आज गुरुवार को तमिल...

PM बोले-2047 तक भारत को AI सुपरपावर बनाने का लक्ष्य:इससे रोजगार खत्म नहीं पैदा होगा; तकनीक का मकसद सबका हित, सबकी खुशी

February 17, 2026/
7:40 pm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि भारत AI का सिर्फ उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता बनेगा। उन्होंने युवाओं को...

Iran Football Players Refugee Decision Changes

March 15, 2026/
10:52 am

17 मिनट पहले कॉपी लिंक ऑस्ट्रेलिया में शरण लेने का फैसला करने वाली सात ईरानी महिला फुटबॉल टीम की तीन...

IPBL शुरू, बैडमिंटन में एंटरटेनमेंट और स्टार्स का संगम:टीवी स्टार्स बनीं टीम ओनर, युवा खिलाड़ियों को मिला बड़ा मंच, मुकाबले होंगे रोमांचक और ग्लैमरस

April 4, 2026/
2:09 pm

स्पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट का अनोखा संगम लेकर इंडियन प्रो बैडमिंटन लीग (IPBL) सुर्खियों में है। इस लीग की सबसे खास...

New Zealand Vs South Africa Live Cricket Score, 3rd T20I: Stay updated with NZ vs SA Ball by Ball Match Updates and Live Scorecard from Auckland.

March 20, 2026/
2:32 pm

आखरी अपडेट:मार्च 20, 2026, 14:32 IST तेलंगाना के डॉ. बंदी पार्थ सारधी 5300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के...

राजनीति

AI will help in war, Pentagon’s Deals with US Tech Companies, AI Chatbots to Determine Which Targets Are Struck First

AI will help in war, Pentagon's Deals with US Tech Companies, AI Chatbots to Determine Which Targets Are Struck First
  • Hindi News
  • International
  • AI Will Help In War, Pentagon’s Deals With US Tech Companies, AI Chatbots To Determine Which Targets Are Struck First

न्यूयॉर्क46 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

अमेरिका अब युद्ध की रणनीति में एआई को एक ‘सलाहकार’ के रूप में जोड़ रहा है। – सिम्बॉलिक इमेज

युद्ध के मैदान में अब जनरल और सिपाही ही नहीं, बल्कि कंप्यूटर स्क्रीन पर एआई ‘चैटबॉट्स’ भी यह तय करेंगे कि पहले किस दुश्मन पर मिसाइल गिरानी है। अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने हाल ही में एक्सएआई और ओपनएआई के साथ गुप्त सैन्य नेटवर्क में एआई इस्तेमाल के लिए डील की है।

पेंटागन अब युद्ध की रणनीति में एआई को एक ‘सलाहकार’ के रूप में जोड़ रहा है। यह तकनीक अब केवल डेटा ही नहीं जुटाएगी, बल्कि इंसानों को युद्ध के दौरान यह सलाह भी देगी कि मौजूदा स्थिति और विमानों की लोकेशन के आधार पर सबसे पहले दुश्मन के किन ठिकानों को निशाना बनाया जाए। हालांकि अंतिम फैसला इंसान ही लेगा।

चैटबॉट्स के साथ सीधे बातचीत से तय होगी हमलों की प्राथमिकता

अब तक अमेरिकी सेना ‘मेवेन’ प्रोजेक्ट जैसी तकनीक से ड्रोन फुटेज और तस्वीरों के आधार पर लक्ष्य पहचानती थी। अब इसमें चैटजीपीटी और ग्रोक जैसे स्मार्ट चैटबॉट की नई परत जुड़ रही है। सैन्य अधिकारी के अनुसार सैनिक उनसे सीधे पूछ सकेंगे कि किन लक्ष्यों को पहले प्राथमिकता दी जाए। इससे प्रक्रिया तेज होती है, लेकिन चुनौती इन मशीनी सुझावों की सच्चाई परखना है, क्योंकि नया एआई डेटा के बजाय सीधे निष्कर्ष देता है।

आर्मी ऑपरेशंस में एआई का इस्तेमाल बढ़ा

अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान ही ईरान के स्कूल पर हाल ही में हुए हमले में 160 से ज्यादा लड़कियों की मौत हुई थी। हालांकि पेंटागन अभी इसकी जांच कर रहा है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला अमेरिकी मिसाइल से हुआ था। इस स्ट्राइक में पुराने और गलत डेटा का हाथ था। कुछ रिपोर्ट में इस लक्ष्य के फैसलों में ‘क्लॉड’ और ‘मेवेन’ तकनीक के इस्तेमाल की बात भी कही जा रही है। यही तकनीक वेनेजुएला ऑपरेशंस में भी की गई थी, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है।

चुनौती यह है कि कंपनियां अपने सिस्टम पर कुछ सीमाएं लगाती हैं, लेकिन युद्ध के दौरान वे कितनी कारगर होंगी, स्पष्ट नहीं। ट्रम्प ने कुछ कंपनियों को ‘सप्लाई चेन रिस्क’ तक बताया, यानी ऐसी तकनीकी निर्भरता जो युद्ध के समय काम बंद या हैक की जा सकती है।

चैटबॉट डेटा स्कैन कर लक्ष्य की प्राथमिकता तय करता है

युद्ध के दौरान ड्रोन, सैटेलाइट, रडार और खुफिया स्रोतों से हर सेकेंड भारी मात्रा में डेटा आता है। इस दौरान एआई चैटबॉट डेटा को तेजी से स्कैन कर पैटर्न पहचानता है। इसके बाद यह खतरे का आकलन कर प्राथमिकता तय करता है कि कौन सा लक्ष्य तुरंत हमला कर सकता है। चैटबॉट यह सुझाव भी देता है कि किसी लक्ष्य पर कौन-सा हथियार सबसे ज्यादा प्रभावी रहेगा, ताकि कार्रवाई सटीक तरीके से हो सके। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत अंतिम मंजूरी मानव सैनिक ही देता है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.