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हेल्थकेयर सर्विसेज महंगी, स्टार्टअप्स सस्ते विकल्प दे रहे:अमेरिका में आधे खर्च में पूरे शरीर का एमआरआई स्कैन, ब्लड टेस्ट की सुविधा, ताकि बड़ी बीमारियों का शुरुआत में ही पता लग सके

हेल्थकेयर सर्विसेज महंगी, स्टार्टअप्स सस्ते विकल्प दे रहे:अमेरिका में आधे खर्च में पूरे शरीर का एमआरआई स्कैन, ब्लड टेस्ट की सुविधा, ताकि बड़ी बीमारियों का शुरुआत में ही पता लग सके

अमेरिका में महंगी स्वास्थ्य व्यवस्था को टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स से चुनौती मिल रही है। ये कंपनियां डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, वर्चुअल क्लीनिक और एआई आधारित सुविधाओं के जरिये इलाज, जांच और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं मुहैया करा रही हैं। हेल्थकेयर की बढ़ती लागत के बीच मरीज भी अब इलाज के नए विकल्प तलाश रहे हैं।
स्टार्टअप्स की फंडिंग भी बढ़ी है। 2025 में अमेरिका के डिजिटल हेल्थ स्टार्टअप्स की वेंचर कैपिटल फंडिंग 35% बढ़कर 1.3 लाख करोड़ रुपए हो गई। ये पब्लिक हेल्थ सिस्टम में बदलाव का संकेत है। हालांकि पहले ऐसे प्रयोग विफल हो चुके हैं। जेपी मॉर्गन चेज और बर्कशायर हैथवे ने मिलकर 2018 में ‘हेवन’ नाम की पहल शुरू की थी, जिसे 3 साल में ही बंद करना पड़ा। स्वास्थ्य सेवाओं में टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स की पैठ बढ़ने के बड़े कारण 20% सरकारी खर्च स्वास्थ्य पर, फिर भी 33% लोग लागत नहीं उठा पा रहे अमेरिकी सरकार हर साल स्वास्थ्य सेवाओं पर करीब 463 लाख करोड़ रुपए खर्च करती है। यह अमेरिका की जीडीपी का पांचवां हिस्सा यानी तकरीबन 20 फीसदी है। इलाज इतना महंगा है कि करीब एक तिहाई (33%) लोगों ने बीते एक साल में बेहिसाब खर्च के कारण या तो इलाज नहीं कराया या टाल दिया। खर्च बढ़ने का असर हेल्थ इंश्योरेंस पर भी दिख रहा है। अमेरिका में 65 साल से कम उम्र के ज्यादातर लोग प्राइवेट बीमा पर निर्भर हैं। गैर-लाभकारी संस्था केएफएफ के मुताबिक, 2015 से परिवार के लिए सालाना इंश्योरेंस प्रीमियम (बीमे की लागत) 50% बढ़ गया है। 45 फीसदी अमेरिकियों को हेल्थ सिस्टम पर भरोसा नहीं, अब वे विकल्प तलाश रहे अमेरिकी जनता का हेल्थ सिस्टम पर भरोसा साल दर साल घट रहा है। गैलप की एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड महामारी की शुरुआत में जहां मरीजों को डॉक्टरों पर 75% भरोसा था, वहीं 2025 में यह घटकर 55% रह गया। यानी 45% अमेरिकी हेल्थ सिस्टम पर भरोसा नहीं करते। डॉक्टर अपॉइंटमेंट से लेकर, बीमा कंपनी चुनने तक पूरी चेन डिजिटल प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल प्लेटफॉर्म बदलाव ला रहे हैं। ‘सेसम’ और ‘वन मेडिकल’ जैसे प्लेटफॉर्म डॉक्टर से सस्ते ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने में मदद कर रहे हैं। वीसी फर्म जनरल कैटलिस्ट ने हॉस्पिटल और हेल्थ केयर चेन सुम्मा हेल्थ का अधिग्रहण किया है। ये कंपनी बीमा चुनने से लेकर इलाज और बिल पेमेंट तक पूरे सिस्टम को डिजिटली कनेक्ट कर रही है। अब वर्चुअल क्लिनिक; कंसल्टेशन, दवाइयों के प्रिस्क्रिप्शन भी दे रहे कई स्टार्टअप मरीजों को नई टेक्नोलॉजी के जरिये हेल्थ सर्विस दे रहे हैं। ‘हिम्स एंड हर्स’ और ‘रो’ जैसे वर्चुअल क्लीनिक ऑनलाइन कंसल्टेशन व दवाइयों के प्रिस्क्रिप्शन दे रहे हैं। ‘प्रीनुवो’ और ‘फंक्शन हेल्थ’ लगभग आधे खर्च 1,000 से 4,500 डॉलर (4 लाख रुपए तक) में पूरे शरीर का एमआरआई और ब्लड टेस्ट की सुविधा दे रहे हैं, ताकि बड़ी बीमारियां पकड़ में आ सकें। एआई – एक चौथाई यूजर कम से कम एक सवाल स्वास्थ्य संबंधी पूछ रहे हेल्थ सेक्टर में जेनरेटिव एआई की भूमिका बढ़ी है। चैटजीपीटी के डेवलपर्स का कहना है कि उनके करीब 80 करोड़ साप्ताहिक यूजर्स में से एक चौथाई से ज्यादा कम से कम एक सवाल स्वास्थ्य संबंधी पूछते हैं। ओपनएआई में हेल्थ केयर लीड कर रहे डॉ. नेट ग्रॉस का कहना है कि जेनरेटिव एआई इंटरनेट स्क्रॉल करने के पुराने तरीके में बड़ा सुधार ला रहा है। अब यूजर्स ऐसे सॉफ्टवेयर से सीधे बातचीत कर सकते हैं जो उनके लक्षणों, उम्र और मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखते हुए उन्हें सलाह देता है।

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हेल्थकेयर सर्विसेज महंगी, स्टार्टअप्स सस्ते विकल्प दे रहे:अमेरिका में आधे खर्च में पूरे शरीर का एमआरआई स्कैन, ब्लड टेस्ट की सुविधा, ताकि बड़ी बीमारियों का शुरुआत में ही पता लग सके

हेल्थकेयर सर्विसेज महंगी, स्टार्टअप्स सस्ते विकल्प दे रहे:अमेरिका में आधे खर्च में पूरे शरीर का एमआरआई स्कैन, ब्लड टेस्ट की सुविधा, ताकि बड़ी बीमारियों का शुरुआत में ही पता लग सके

अमेरिका में महंगी स्वास्थ्य व्यवस्था को टेक कंपनियों और स्टार्टअप्स से चुनौती मिल रही है। ये कंपनियां डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म, वर्चुअल क्लीनिक और एआई आधारित सुविधाओं के जरिये इलाज, जांच और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएं मुहैया करा रही हैं। हेल्थकेयर की बढ़ती लागत के बीच मरीज भी अब इलाज के नए विकल्प तलाश रहे हैं।
स्टार्टअप्स की फंडिंग भी बढ़ी है। 2025 में अमेरिका के डिजिटल हेल्थ स्टार्टअप्स की वेंचर कैपिटल फंडिंग 35% बढ़कर 1.3 लाख करोड़ रुपए हो गई। ये पब्लिक हेल्थ सिस्टम में बदलाव का संकेत है। हालांकि पहले ऐसे प्रयोग विफल हो चुके हैं। जेपी मॉर्गन चेज और बर्कशायर हैथवे ने मिलकर 2018 में ‘हेवन’ नाम की पहल शुरू की थी, जिसे 3 साल में ही बंद करना पड़ा। स्वास्थ्य सेवाओं में टेक कंपनियों, स्टार्टअप्स की पैठ बढ़ने के बड़े कारण 20% सरकारी खर्च स्वास्थ्य पर, फिर भी 33% लोग लागत नहीं उठा पा रहे अमेरिकी सरकार हर साल स्वास्थ्य सेवाओं पर करीब 463 लाख करोड़ रुपए खर्च करती है। यह अमेरिका की जीडीपी का पांचवां हिस्सा यानी तकरीबन 20 फीसदी है। इलाज इतना महंगा है कि करीब एक तिहाई (33%) लोगों ने बीते एक साल में बेहिसाब खर्च के कारण या तो इलाज नहीं कराया या टाल दिया। खर्च बढ़ने का असर हेल्थ इंश्योरेंस पर भी दिख रहा है। अमेरिका में 65 साल से कम उम्र के ज्यादातर लोग प्राइवेट बीमा पर निर्भर हैं। गैर-लाभकारी संस्था केएफएफ के मुताबिक, 2015 से परिवार के लिए सालाना इंश्योरेंस प्रीमियम (बीमे की लागत) 50% बढ़ गया है। 45 फीसदी अमेरिकियों को हेल्थ सिस्टम पर भरोसा नहीं, अब वे विकल्प तलाश रहे अमेरिकी जनता का हेल्थ सिस्टम पर भरोसा साल दर साल घट रहा है। गैलप की एक सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड महामारी की शुरुआत में जहां मरीजों को डॉक्टरों पर 75% भरोसा था, वहीं 2025 में यह घटकर 55% रह गया। यानी 45% अमेरिकी हेल्थ सिस्टम पर भरोसा नहीं करते। डॉक्टर अपॉइंटमेंट से लेकर, बीमा कंपनी चुनने तक पूरी चेन डिजिटल प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल प्लेटफॉर्म बदलाव ला रहे हैं। ‘सेसम’ और ‘वन मेडिकल’ जैसे प्लेटफॉर्म डॉक्टर से सस्ते ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने में मदद कर रहे हैं। वीसी फर्म जनरल कैटलिस्ट ने हॉस्पिटल और हेल्थ केयर चेन सुम्मा हेल्थ का अधिग्रहण किया है। ये कंपनी बीमा चुनने से लेकर इलाज और बिल पेमेंट तक पूरे सिस्टम को डिजिटली कनेक्ट कर रही है। अब वर्चुअल क्लिनिक; कंसल्टेशन, दवाइयों के प्रिस्क्रिप्शन भी दे रहे कई स्टार्टअप मरीजों को नई टेक्नोलॉजी के जरिये हेल्थ सर्विस दे रहे हैं। ‘हिम्स एंड हर्स’ और ‘रो’ जैसे वर्चुअल क्लीनिक ऑनलाइन कंसल्टेशन व दवाइयों के प्रिस्क्रिप्शन दे रहे हैं। ‘प्रीनुवो’ और ‘फंक्शन हेल्थ’ लगभग आधे खर्च 1,000 से 4,500 डॉलर (4 लाख रुपए तक) में पूरे शरीर का एमआरआई और ब्लड टेस्ट की सुविधा दे रहे हैं, ताकि बड़ी बीमारियां पकड़ में आ सकें। एआई – एक चौथाई यूजर कम से कम एक सवाल स्वास्थ्य संबंधी पूछ रहे हेल्थ सेक्टर में जेनरेटिव एआई की भूमिका बढ़ी है। चैटजीपीटी के डेवलपर्स का कहना है कि उनके करीब 80 करोड़ साप्ताहिक यूजर्स में से एक चौथाई से ज्यादा कम से कम एक सवाल स्वास्थ्य संबंधी पूछते हैं। ओपनएआई में हेल्थ केयर लीड कर रहे डॉ. नेट ग्रॉस का कहना है कि जेनरेटिव एआई इंटरनेट स्क्रॉल करने के पुराने तरीके में बड़ा सुधार ला रहा है। अब यूजर्स ऐसे सॉफ्टवेयर से सीधे बातचीत कर सकते हैं जो उनके लक्षणों, उम्र और मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखते हुए उन्हें सलाह देता है।

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