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Anil Ambani CBI ₹2220 Cr Fraud Case

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नई दिल्ली49 मिनट पहले

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अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) के खिलाफ CBI ने धोखाधड़ी का एक नया मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनी ने साल 2013 से 2017 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) के साथ 2,220 करोड़ रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी की है।

बैंक की शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने गुरुवार को अनिल अंबानी के घर और रिलायंस कम्युनिकेशन के दफ्तरों पर छापेमारी की, जहां से लोन ट्रांजैक्शन से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इससे पहले अनिल अंबानी आज एक अन्य मामले में ED के सामने पेश हुए थे।

अनिल अंबानी सुबह करीब 11 बजे जांच एजेंसी के दफ्तर पहुंचे। फोटो- PTI

अनिल अंबानी सुबह करीब 11 बजे जांच एजेंसी के दफ्तर पहुंचे। फोटो- PTI

फर्जी ट्रांजैक्शन के जरिए पैसा डायवर्ट करने का आरोप CBI के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बैंक से लोन लिया, लेकिन उस पैसे का इस्तेमाल तय काम के लिए करने के बजाय अपनी ही दूसरी कंपनियों (रिलेटेड पार्टीज) में फर्जी ट्रांजैक्शन दिखाकर डायवर्ट कर दिया। जांच में सामने आया है कि इस हेरफेर की वजह से बैंक ऑफ बड़ौदा को 2,220 करोड़ रुपए से अधिक का घाटा हुआ है।

हाई कोर्ट से स्टे हटने के बाद कार्रवाई अधिकारियों के मुताबिक, अनिल अंबानी की कंपनी का यह खाता 2017 में ही एनपीए (NPA) घोषित हो चुका था। हालांकि, अनिल अंबानी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद कोर्ट ने इस खाते को ‘फ्रॉड’ घोषित करने पर रोक लगा दी थी। यह स्टे 23 फरवरी 2026 को हटा लिया गया। स्टे हटते ही बैंक ऑफ बड़ौदा ने शिकायत दर्ज कराई और सीबीआई ने तुरंत एक्शन लेते हुए केस दर्ज कर लिया।

कहां गया लोन का पैसा? शिकायत के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM), रिलायंस इंफ्राटेल (RITL) और रिलायंस टेलीकॉम (RTL) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कुल 31,580 करोड़ रुपए जुटाए थे। इसमें से:

  • 6,265.85 करोड़ रुपए दूसरे बैंकों के लोन चुकाने में खर्च किए गए।
  • 5,501.56 करोड़ रुपए अपनी ही जुड़ी हुई कंपनियों को दिए गए।
  • 3,674.85 करोड़ रुपए फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए, जिन्हें तुरंत निकालकर दूसरी पार्टियों को भुगतान कर दिया गया।

बैंक का कहना है कि यह साफ तौर पर लोन की शर्तों का उल्लंघन है। रिलायंस इंफ्राटेल द्वारा जुटाए गए 1,783.65 करोड़ रुपए का इस्तेमाल भी RCOM ने अपनी देनदारियां चुकाने या जुड़ी हुई कंपनियों को ट्रांसफर करने में किया।

फॉरेंसिक जांच में हुआ खुलासा 5 जून 2017 को इस खाते को एनपीए घोषित किया गया था, क्योंकि कंपनी लोन चुकाने में नाकाम रही थी। बाद में हुई फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई कि फंड के साथ हेराफेरी की गई है और यह सब जानबूझकर धोखाधड़ी की नीयत से किया गया।

FIR में यह भी कहा गया है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों ने एक सोची-समझी आपराधिक साजिश के तहत बैंक को नुकसान पहुंचाया और खुद को फायदा देने के लिए पैसों का गबन किया।

SBI के केस से अलग है मामला SBI पहले से ही 11 बैंकों के समूह (कंसोर्टियम) की अगुवाई कर रहे एसबीआई (SBI) की शिकायत पर RCOM के खिलाफ एक केस दर्ज कर चुकी है। हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा उस ग्रुप का हिस्सा नहीं था। CBI ने साफ किया कि यह बैंक ऑफ बड़ौदा, तत्कालीन विजया बैंक और देना बैंक से लिए गए अलग लोन का मामला है।

ED के सामने भी पेश हुए अनिल अंबानी इससे पहले दिन में अनिल अंबानी कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश हुए। अधिकारियों ने बताया कि पीएमएलए (PMLA) के तहत उनका बयान दर्ज किया गया है।

इससे पहले अगस्त 2025 में भी उनसे पूछताछ हुई थी। यह जांच उनकी ग्रुप कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस द्वारा की गई 40,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़ी है।

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अनिल अंबानी और उनकी कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM) के खिलाफ CBI ने धोखाधड़ी का एक नया मामला दर्ज किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनी ने साल 2013 से 2017 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) के साथ 2,220 करोड़ रुपए से ज्यादा की धोखाधड़ी की है।

बैंक की शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने गुरुवार को अनिल अंबानी के घर और रिलायंस कम्युनिकेशन के दफ्तरों पर छापेमारी की, जहां से लोन ट्रांजैक्शन से जुड़े कई अहम दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इससे पहले अनिल अंबानी आज एक अन्य मामले में ED के सामने पेश हुए थे।

अनिल अंबानी सुबह करीब 11 बजे जांच एजेंसी के दफ्तर पहुंचे। फोटो- PTI

अनिल अंबानी सुबह करीब 11 बजे जांच एजेंसी के दफ्तर पहुंचे। फोटो- PTI

फर्जी ट्रांजैक्शन के जरिए पैसा डायवर्ट करने का आरोप CBI के अनुसार बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि रिलायंस कम्युनिकेशंस ने बैंक से लोन लिया, लेकिन उस पैसे का इस्तेमाल तय काम के लिए करने के बजाय अपनी ही दूसरी कंपनियों (रिलेटेड पार्टीज) में फर्जी ट्रांजैक्शन दिखाकर डायवर्ट कर दिया। जांच में सामने आया है कि इस हेरफेर की वजह से बैंक ऑफ बड़ौदा को 2,220 करोड़ रुपए से अधिक का घाटा हुआ है।

हाई कोर्ट से स्टे हटने के बाद कार्रवाई अधिकारियों के मुताबिक, अनिल अंबानी की कंपनी का यह खाता 2017 में ही एनपीए (NPA) घोषित हो चुका था। हालांकि, अनिल अंबानी ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसके बाद कोर्ट ने इस खाते को ‘फ्रॉड’ घोषित करने पर रोक लगा दी थी। यह स्टे 23 फरवरी 2026 को हटा लिया गया। स्टे हटते ही बैंक ऑफ बड़ौदा ने शिकायत दर्ज कराई और सीबीआई ने तुरंत एक्शन लेते हुए केस दर्ज कर लिया।

कहां गया लोन का पैसा? शिकायत के अनुसार, रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM), रिलायंस इंफ्राटेल (RITL) और रिलायंस टेलीकॉम (RTL) ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कुल 31,580 करोड़ रुपए जुटाए थे। इसमें से:

  • 6,265.85 करोड़ रुपए दूसरे बैंकों के लोन चुकाने में खर्च किए गए।
  • 5,501.56 करोड़ रुपए अपनी ही जुड़ी हुई कंपनियों को दिए गए।
  • 3,674.85 करोड़ रुपए फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए, जिन्हें तुरंत निकालकर दूसरी पार्टियों को भुगतान कर दिया गया।

बैंक का कहना है कि यह साफ तौर पर लोन की शर्तों का उल्लंघन है। रिलायंस इंफ्राटेल द्वारा जुटाए गए 1,783.65 करोड़ रुपए का इस्तेमाल भी RCOM ने अपनी देनदारियां चुकाने या जुड़ी हुई कंपनियों को ट्रांसफर करने में किया।

फॉरेंसिक जांच में हुआ खुलासा 5 जून 2017 को इस खाते को एनपीए घोषित किया गया था, क्योंकि कंपनी लोन चुकाने में नाकाम रही थी। बाद में हुई फॉरेंसिक जांच में पुष्टि हुई कि फंड के साथ हेराफेरी की गई है और यह सब जानबूझकर धोखाधड़ी की नीयत से किया गया।

FIR में यह भी कहा गया है कि अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों ने एक सोची-समझी आपराधिक साजिश के तहत बैंक को नुकसान पहुंचाया और खुद को फायदा देने के लिए पैसों का गबन किया।

SBI के केस से अलग है मामला SBI पहले से ही 11 बैंकों के समूह (कंसोर्टियम) की अगुवाई कर रहे एसबीआई (SBI) की शिकायत पर RCOM के खिलाफ एक केस दर्ज कर चुकी है। हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा उस ग्रुप का हिस्सा नहीं था। CBI ने साफ किया कि यह बैंक ऑफ बड़ौदा, तत्कालीन विजया बैंक और देना बैंक से लिए गए अलग लोन का मामला है।

ED के सामने भी पेश हुए अनिल अंबानी इससे पहले दिन में अनिल अंबानी कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सामने पेश हुए। अधिकारियों ने बताया कि पीएमएलए (PMLA) के तहत उनका बयान दर्ज किया गया है।

इससे पहले अगस्त 2025 में भी उनसे पूछताछ हुई थी। यह जांच उनकी ग्रुप कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस द्वारा की गई 40,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की कथित बैंक धोखाधड़ी से जुड़ी है।

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