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Arshad Warsi, Disha Patani on Welcome to the Jungle Shoot

Arshad Warsi, Disha Patani on Welcome to the Jungle Shoot

54 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी

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‘वेलकम टू द जंगल’ में बड़ी स्टारकास्ट के बीच काम करने का अनुभव कलाकारों के लिए सिर्फ शूटिंग तक सीमित नहीं रहा। दिशा पाटनी ने इसे सीखने और समझने का मौका बताया, जबकि अरशद वारसी के मुताबिक सेट का माहौल इतना सहज था कि काम का दबाव महसूस ही नहीं हुआ। दैनिक भास्कर से बातचीत में दोनों कलाकारों ने बताया कि इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत कलाकारों के बीच बना तालमेल और साथ बिताया समय रहा।

दिशा पाटनी ने शूटिंग का अनुभव साझा करते हुए कहा कि इतने बड़े कलाकारों के साथ काम किया, लेकिन सेट पर कभी दूरी महसूस नहीं हुई।

दिशा पाटनी ने शूटिंग का अनुभव साझा करते हुए कहा कि इतने बड़े कलाकारों के साथ काम किया, लेकिन सेट पर कभी दूरी महसूस नहीं हुई।

सवाल: दिशा, इतने अनुभवी कलाकारों के साथ काम करना आपके लिए कितना अलग अनुभव था?

जवाब/दिशा पाटनी: शुरुआत में जिम्मेदारी जरूर महसूस होती है क्योंकि इतने अनुभवी लोगों के साथ काम कर रहे होते हैं, लेकिन यहां माहौल ऐसा था कि किसी ने दबाव महसूस नहीं होने दिया। खुशी इसलिए थी क्योंकि हर दिन कुछ नया सीखने को मिल रहा था।

सवाल: सबसे बड़ी सीख क्या रही?

जवाब/दिशा पाटनी: सबसे बड़ी चीज जो मैंने सीखी वो ये थी कि अनुभव आने के बाद भी लोग काम को हल्के में नहीं लेते। इतने साल काम करने के बाद भी लोग तैयारी और मेहनत के साथ आते हैं, लेकिन माहौल हल्का रखते हैं। यही बैलेंस सबसे जरूरी लगा।

सवाल: सेट पर किस चीज ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया?

जवाब/दिशा पाटनी: सबका एक-दूसरे के साथ व्यवहार। इतने बड़े कलाकार थे लेकिन कोई दूरी महसूस नहीं हुई। सब साथ बैठते थे, खाना खाते थे और बातचीत करते थे। मुझे लगता है यही बॉन्डिंग फिल्म में भी नजर आएगी।

सवाल: इतने कलाकारों के बीच क्या कभी खुद को साबित करने का दबाव महसूस हुआ?

जवाब/दिशा पाटनी: मुझे ऐसा नहीं लगा। यहां माहौल बहुत सहज था। हर कोई एक-दूसरे को बेहतर करने में मदद कर रहा था, इसलिए किसी तरह की प्रतिस्पर्धा महसूस नहीं हुई।

जवाब/अरशद वारसी: यहां कोई किसी को पीछे छोड़ने नहीं आया था। सबका फोकस सिर्फ इस बात पर था कि फिल्म अच्छी बने और लोग एंटरटेन हों।

सवाल: अरशद, इतने कॉमेडी कलाकारों के बीच काम करने का अनुभव कैसा रहा?

जवाब/अरशद वारसी: अगर आप पूरी टीम को देखें तो हर किसी का सेंस ऑफ ह्यूमर कमाल का है। कोई एक आदमी माहौल नहीं बना रहा था, हर कोई कुछ न कुछ जोड़ रहा था। मेरे लिए तो ये काम जैसा महसूस ही नहीं हुआ।

अरशद वारसी ने कहा कि ऑफ कैमरा बॉन्डिंग ही फिल्म की असली ताकत थी।

अरशद वारसी ने कहा कि ऑफ कैमरा बॉन्डिंग ही फिल्म की असली ताकत थी।

सवाल: आपने कहा था कि शूटिंग काम जैसी नहीं लग रही थी, ऐसा क्यों?

जवाब/अरशद वारसी: मैं मजाक में कहता था कि मैं छुट्टी पर आया हूं। मुझे शूटिंग का इंतजार नहीं होता था, मुझे सेट पर जाकर लोगों से मिलने का इंतजार होता था। ऑफ कैमरा भी उतना ही मजा चलता था।

सवाल: क्या कभी लगा कि शूटिंग से ज्यादा ये साथ समय बिताने जैसा हो गया है?

जवाब/अरशद वारसी: हां, क्योंकि यहां सिर्फ कैमरा ऑन होने पर लोग एक्ट नहीं कर रहे थे। हम बैठकर बातें कर रहे होते थे, हंस रहे होते थे और फिर अचानक कोई बोल देता था कि शॉट तैयार है। इतने लोगों के साथ काम करने का मौका रोज नहीं मिलता।

सवाल: फिल्म से जुड़ी सबसे खास याद क्या रहेगी?

जवाब/दिशा पाटनी: मेरे लिए सबसे अच्छी याद यही रहेगी कि इतने लंबे समय तक सबके साथ समय बिताने का मौका मिला। शूट खत्म होने के बाद वही चीज सबसे ज्यादा याद आती है।

जवाब/अरशद वारसी: मुझे लगता है सबसे ज्यादा हम लोग एक-दूसरे को मिस करेंगे। इतनी बड़ी टीम के साथ इतना समय बिताना बहुत कम होता है और यही इस फिल्म की सबसे बड़ी याद रहेगी।

_______________________

यह इंटरव्यू भी पढ़ें..

अक्षय कुमार बोले- हिट-फ्लॉप बाद की बात:ढाई साल साथ काम कर बना खास रिश्ता; सुनील शेट्टी बोले- ऐसी स्टारकास्ट फिर शायद न मिले

फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ सिर्फ मल्टीस्टारर फिल्म नहीं, बल्कि कलाकारों के लिए यादों और रिश्तों का सफर भी रही। दैनिक भास्कर से बातचीत में अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी ने फिल्म से जुड़े किस्से साझा किए। अक्षय ने बताया कि बड़े स्टारकास्ट के साथ काम करना पिकनिक जैसा अनुभव था, जहां शूटिंग के साथ मस्ती भी हुई।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..

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दिशा पाटनी ने शूटिंग का अनुभव साझा करते हुए कहा कि इतने बड़े कलाकारों के साथ काम किया, लेकिन सेट पर कभी दूरी महसूस नहीं हुई।

दिशा पाटनी ने शूटिंग का अनुभव साझा करते हुए कहा कि इतने बड़े कलाकारों के साथ काम किया, लेकिन सेट पर कभी दूरी महसूस नहीं हुई।

सवाल: दिशा, इतने अनुभवी कलाकारों के साथ काम करना आपके लिए कितना अलग अनुभव था?

जवाब/दिशा पाटनी: शुरुआत में जिम्मेदारी जरूर महसूस होती है क्योंकि इतने अनुभवी लोगों के साथ काम कर रहे होते हैं, लेकिन यहां माहौल ऐसा था कि किसी ने दबाव महसूस नहीं होने दिया। खुशी इसलिए थी क्योंकि हर दिन कुछ नया सीखने को मिल रहा था।

सवाल: सबसे बड़ी सीख क्या रही?

जवाब/दिशा पाटनी: सबसे बड़ी चीज जो मैंने सीखी वो ये थी कि अनुभव आने के बाद भी लोग काम को हल्के में नहीं लेते। इतने साल काम करने के बाद भी लोग तैयारी और मेहनत के साथ आते हैं, लेकिन माहौल हल्का रखते हैं। यही बैलेंस सबसे जरूरी लगा।

सवाल: सेट पर किस चीज ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया?

जवाब/दिशा पाटनी: सबका एक-दूसरे के साथ व्यवहार। इतने बड़े कलाकार थे लेकिन कोई दूरी महसूस नहीं हुई। सब साथ बैठते थे, खाना खाते थे और बातचीत करते थे। मुझे लगता है यही बॉन्डिंग फिल्म में भी नजर आएगी।

सवाल: इतने कलाकारों के बीच क्या कभी खुद को साबित करने का दबाव महसूस हुआ?

जवाब/दिशा पाटनी: मुझे ऐसा नहीं लगा। यहां माहौल बहुत सहज था। हर कोई एक-दूसरे को बेहतर करने में मदद कर रहा था, इसलिए किसी तरह की प्रतिस्पर्धा महसूस नहीं हुई।

जवाब/अरशद वारसी: यहां कोई किसी को पीछे छोड़ने नहीं आया था। सबका फोकस सिर्फ इस बात पर था कि फिल्म अच्छी बने और लोग एंटरटेन हों।

सवाल: अरशद, इतने कॉमेडी कलाकारों के बीच काम करने का अनुभव कैसा रहा?

जवाब/अरशद वारसी: अगर आप पूरी टीम को देखें तो हर किसी का सेंस ऑफ ह्यूमर कमाल का है। कोई एक आदमी माहौल नहीं बना रहा था, हर कोई कुछ न कुछ जोड़ रहा था। मेरे लिए तो ये काम जैसा महसूस ही नहीं हुआ।

अरशद वारसी ने कहा कि ऑफ कैमरा बॉन्डिंग ही फिल्म की असली ताकत थी।

अरशद वारसी ने कहा कि ऑफ कैमरा बॉन्डिंग ही फिल्म की असली ताकत थी।

सवाल: आपने कहा था कि शूटिंग काम जैसी नहीं लग रही थी, ऐसा क्यों?

जवाब/अरशद वारसी: मैं मजाक में कहता था कि मैं छुट्टी पर आया हूं। मुझे शूटिंग का इंतजार नहीं होता था, मुझे सेट पर जाकर लोगों से मिलने का इंतजार होता था। ऑफ कैमरा भी उतना ही मजा चलता था।

सवाल: क्या कभी लगा कि शूटिंग से ज्यादा ये साथ समय बिताने जैसा हो गया है?

जवाब/अरशद वारसी: हां, क्योंकि यहां सिर्फ कैमरा ऑन होने पर लोग एक्ट नहीं कर रहे थे। हम बैठकर बातें कर रहे होते थे, हंस रहे होते थे और फिर अचानक कोई बोल देता था कि शॉट तैयार है। इतने लोगों के साथ काम करने का मौका रोज नहीं मिलता।

सवाल: फिल्म से जुड़ी सबसे खास याद क्या रहेगी?

जवाब/दिशा पाटनी: मेरे लिए सबसे अच्छी याद यही रहेगी कि इतने लंबे समय तक सबके साथ समय बिताने का मौका मिला। शूट खत्म होने के बाद वही चीज सबसे ज्यादा याद आती है।

जवाब/अरशद वारसी: मुझे लगता है सबसे ज्यादा हम लोग एक-दूसरे को मिस करेंगे। इतनी बड़ी टीम के साथ इतना समय बिताना बहुत कम होता है और यही इस फिल्म की सबसे बड़ी याद रहेगी।

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