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Ayurvedic Upay for Piles, nagdon leaves benefits, Piles treatment in Ayurveda

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Ayurvedic Upay for Piles: डॉ विपिन सिंह के मुताबिक, नागदोन के पत्ते पाइल्स के इलाज में काफी कारगर माने जाते हैं. अगर इसके पांच ताजे पत्ते लगातार तीन दिनों तक चबाए जाएं, तो शुरुआती अवस्था की पाइल्स में राहत मिल सकती है.

सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में पाए जाने वाले औषधीय पौधों में नागदोन का विशेष महत्व माना जाता है. आयुर्वेद में इसका उपयोग वर्षों से विभिन्न रोगों के उपचार के लिए किया जाता रहा है. नागदोन की पत्तियां, डंठल और जड़ें औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती हैं और यह पौधा प्राकृतिक रूप से ग्रामीण इलाकों में आसानी से मिल जाता है. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि आज के समय में बड़ी संख्या में लोग पाइल्स की समस्या से जूझ रहे हैं. युवाओं में भी यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है. पाइल्स को बवासीर या हेमोरॉइड्स भी कहा जाता है, जिसमें मलद्वार के आसपास की नसों में सूजन आ जाती है. इस कारण मल त्याग के दौरान दर्द, जलन और कई बार खून आने जैसी समस्या भी हो सकती है, जिसे खूनी बवासीर कहा जाता है.

डॉक्टर के अनुसार, कब्ज, लंबे समय तक बैठकर काम करना, फाइबर युक्त आहार की कमी और लगातार तनाव इसके प्रमुख कारण हैं. समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर रूप ले सकती है. ऐसे में आयुर्वेदिक उपचार राहत देने में सहायक साबित हो सकते हैं. डॉ सिंह के मुताबिक, नागदोन के पत्ते पाइल्स में काफी कारगर माने जाते हैं. यदि नागदोन के पांच ताजे पत्ते सुबह खाली पेट लगातार तीन दिनों तक चबाए जाएं, तो शुरुआती अवस्था की बीमारी में राहत मिल सकती है. उन्होंने बताया कि इन पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं, जो सूजन, जलन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं. खूनी बवासीर की स्थिति में भी इससे ब्लीडिंग में कमी आ सकती है.

सूजी हुई नसों को शांत करने में सहायक
उन्होंने आगे बताया कि नागदोन मलद्वार की सूजी हुई नसों को शांत करने में सहायक होता है और धीरे-धीरे सूजन कम करता है. नियमित उपयोग से कुछ ही दिनों में फर्क महसूस होने लगता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू या आयुर्वेदिक उपचार को अपनाने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य से सलाह जरूर लेनी चाहिए. इसके अलावा संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन और फाइबर युक्त भोजन भी बवासीर से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पुरानी या गंभीर समस्या होने पर स्वयं उपचार करने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है. नागदोन एक सस्ता और प्राकृतिक विकल्प जरूर है लेकिन सही जीवनशैली और चिकित्सकीय सलाह के साथ ही इसका उपयोग बेहतर परिणाम दे सकता है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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सीधी. मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में पाए जाने वाले औषधीय पौधों में नागदोन का विशेष महत्व माना जाता है. आयुर्वेद में इसका उपयोग वर्षों से विभिन्न रोगों के उपचार के लिए किया जाता रहा है. नागदोन की पत्तियां, डंठल और जड़ें औषधीय गुणों से भरपूर मानी जाती हैं और यह पौधा प्राकृतिक रूप से ग्रामीण इलाकों में आसानी से मिल जाता है. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ विपिन सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि आज के समय में बड़ी संख्या में लोग पाइल्स की समस्या से जूझ रहे हैं. युवाओं में भी यह परेशानी तेजी से बढ़ रही है. पाइल्स को बवासीर या हेमोरॉइड्स भी कहा जाता है, जिसमें मलद्वार के आसपास की नसों में सूजन आ जाती है. इस कारण मल त्याग के दौरान दर्द, जलन और कई बार खून आने जैसी समस्या भी हो सकती है, जिसे खूनी बवासीर कहा जाता है.

डॉक्टर के अनुसार, कब्ज, लंबे समय तक बैठकर काम करना, फाइबर युक्त आहार की कमी और लगातार तनाव इसके प्रमुख कारण हैं. समय पर इलाज न मिलने पर स्थिति गंभीर रूप ले सकती है. ऐसे में आयुर्वेदिक उपचार राहत देने में सहायक साबित हो सकते हैं. डॉ सिंह के मुताबिक, नागदोन के पत्ते पाइल्स में काफी कारगर माने जाते हैं. यदि नागदोन के पांच ताजे पत्ते सुबह खाली पेट लगातार तीन दिनों तक चबाए जाएं, तो शुरुआती अवस्था की बीमारी में राहत मिल सकती है. उन्होंने बताया कि इन पत्तों में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल और दर्द निवारक गुण पाए जाते हैं, जो सूजन, जलन और दर्द को कम करने में मदद करते हैं. खूनी बवासीर की स्थिति में भी इससे ब्लीडिंग में कमी आ सकती है.

सूजी हुई नसों को शांत करने में सहायक
उन्होंने आगे बताया कि नागदोन मलद्वार की सूजी हुई नसों को शांत करने में सहायक होता है और धीरे-धीरे सूजन कम करता है. नियमित उपयोग से कुछ ही दिनों में फर्क महसूस होने लगता है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू या आयुर्वेदिक उपचार को अपनाने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदाचार्य से सलाह जरूर लेनी चाहिए. इसके अलावा संतुलित आहार, पर्याप्त पानी का सेवन और फाइबर युक्त भोजन भी बवासीर से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पुरानी या गंभीर समस्या होने पर स्वयं उपचार करने के बजाय चिकित्सकीय परामर्श लेना जरूरी है. नागदोन एक सस्ता और प्राकृतिक विकल्प जरूर है लेकिन सही जीवनशैली और चिकित्सकीय सलाह के साथ ही इसका उपयोग बेहतर परिणाम दे सकता है.

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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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