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Bihar Bridge Collapse Video; Bhagalpur Vikramshila Setu

Bihar Bridge Collapse Video; Bhagalpur Vikramshila Setu

भागलपुर9 मिनट पहले

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बिहार के भागलपुर में 4.7 किमी लंबे विक्रमशिला सेतु का 34 मीटर हिस्सा रविवार देर रात गंगा में गिर गया। राहत की बात रही कि प्रशासन ने पहले ही ट्रैफिक रोक दिया था, जिससे बड़ा हादसा टल गया।

इस घटना से सीमांचल समेत करीब 16 जिलों की कनेक्टिविटी प्रभावित हुई है और रोजाना करीब 1 लाख लोगों के आवागमन पर असर पड़ा है। पिछले 10 साल में इस पुल की तीन बार मरम्मत हो चुकी है, और हाल ही में मार्च 2026 में भी रिपेयर वर्क हुआ था।

लापरवाही को लेकर पथ निर्माण विभाग ने एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सस्पेंड किया है। बिहार राज्य पुल निगम लिमिटेड के अध्यक्ष डॉ चंद्रशेखर ने बताया, ‘भागलपुर पुलिस प्रशासन, जिला प्रशासन की सजगता से बड़ी घटना होने से बचा है। अगर समय रहते पुलिस प्रशासन सजग नहीं होती तो कई लोगों की जान माल का नुकसान हो जाता। DPR बनाकर हम लोगों ने मेंटेनेंस के लिए भेजा था।

मुख्यमंत्री जी ने रक्षा मंत्री से बात की है। पुल मरम्मत के काम में आर्मी की मदद की कोशिश की जा रही है। स्थानीय लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जी रही है।

अब सिलसिलेवार जानिए पूरा घटनाक्रम…

विक्रमशिला ब्रिज का 34 मीटर स्लैब टूटकर गंगा में समा गया।

विक्रमशिला ब्रिज का 34 मीटर स्लैब टूटकर गंगा में समा गया।

पहले गैप बढ़ा फिर पुल धंसा

बताया जा रहा है कि शाम को पहले 10 इंच का जॉइंट सस्पेंशन धंसा। इसके बाद देर रात एक स्लैब गंगा में समा गया। उस समय पुल पर वाहनों की लंबी कतार लगी थी। हालांकि, पुलिस की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। पुल निगम के अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

DM डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया,

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रविवार की रात 12.35 बजे से स्लैब धंसना शुरू हो गया। उससे पहले ही गाड़ियों को वहां से हटा दिया गया था। इस सतर्कता के कारण कोई दुर्घटना नहीं हुई। पुल की मरम्मत के लिए जल्द ही हाई लेवल कमेटी यहां आएगी। इससे पहले आई कमेटी ने पुल की जांच की थी। उसे पुल की स्थिति के बारे में जिला प्रशासन ने पूरी जानकारी दी थी।

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ट्रैफिक DSP संजय कुमार ने कहा,

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जैसे ही स्ट्रीट लाइट पोल संख्या 133 के पास एक्सपेंशन जॉइंट के गैप की बढ़ने की सूचना मिली, दोनों ओर से गाड़ियों के आवागमन पर रोक लगा दी गई थी।

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ये पुल उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ता है।

ये पुल उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ता है।

पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग की गई

सिटी DSP-1 अजय चौधरी ने बताया, पुल के पास बैरिकेडिंग कर दी गई है। गाड़ियों को मुंगेर पुल की ओर मोड़ दिया गया है। नवगछिया और भागलपुर दोनों ओर पुलिस तैनात की गई है, ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना को रोका जा सके। नेशनल हाईवे के SDO सुधीर कुमार ने कहा कि नया स्लैब बनाकर चढ़ाने में कम से कम 15 दिन लगेंगे।

सीमांचल समेत 16 जिलों को भागलपुर से जोड़ता है ये पुल

विक्रमशिला सेतु पर हर दिन करीब एक लाख लोगों की आवाजाही होती है। करीब 50 हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन इस पुल से गुजरते हैं। सीमांचल समेत 16 जिलों को यह सेतु भागलपुर से जोड़ता है। इसका निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल में कराया गया था।

पुल में लगातार जॉइंट और एक्सपेंशन गैप की समस्या को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आखिरी बार 2020 में पुल की मरम्मत कराई गई थी।

कुछ दिन पहले ही वॉल वायरिंग क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि प्रशासन ने उस समय इसे खारिज करते हुए कहा था कि पुल पर किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।

विक्रमशिला पुल बंद होने से लोग नाव के सहारे एक ओर से दूसरी ओर जा रहे हैं।

विक्रमशिला पुल बंद होने से लोग नाव के सहारे एक ओर से दूसरी ओर जा रहे हैं।

नाव के सहारे गंगा पार कर रहे लोग

पुल बंद होने के बाद बरारी घाट पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है। नवगछिया, बिहपुर, कटिहार, पूर्णिया की ओर जाने वाले यात्री नाव के सहारे इस पार से उस पार जा रहे हैं। नाव से सफर कर रहे प्रकाश ने बताया कि घाट के किनारे नाव से उतरकर पैदल ही 5 किलोमीटर तक जाना पड़ेगा। समय से मेंटेंनेंस नहीं होने के कारण पुल गिरा है।

इधर नेता प्रतिपक्ष ने पूरे मामले पर सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा- ‘विगत महीने हम लोगों ने सरकार को आगाह किया था कि यह पुल गिर सकता है लेकिन आदतन सरकार ने अपनी भ्रष्ट व्यवस्था का बचाव करते हुए पल्ला झाड़ लिया।’

30 दिन पहले विक्रमशिला सेतु के 3 पिलर्स की प्रोटेक्शन वॉल टूटी थी

30 दिन पहले विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या 17, 18 और 19 की प्रोटेक्शन वॉल तेज बहाव की वजह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। एक पिलर की प्रोटेक्शन वॉल पूरी तरह से ध्वस्त हो गई थी।

उस वक्त इंजीनियर्स ने कहा था, गंगा नदी के तेज बहाव, बड़े जहाजों और भारी नावों की आवाजाही के कारण पिलरों पर लगातार दबाव पड़ता है। इस स्थिति में प्रोटेक्शन वॉल क्षतिग्रस्त हुई है। इसका असर पिलर्स पर पड़ेगा। बाढ़ के समय यह दबाव और बढ़ जाता है, जिससे जोखिम कई गुना बढ़ सकती है।

इससे पहले भी विक्रमशिला सेतु के अलग-अलग स्पैन के बीच एक्सपेंशन जॉइंट का गैप बढ़ने का मामला सामने आया था। यह गैप 1 से 2 इंच था, जो बढ़कर करीब 6 इंच तक पहुंच गया था।

30 दिन पहले सेतु के पिलर की प्रोटेक्शन वॉल पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी।

30 दिन पहले सेतु के पिलर की प्रोटेक्शन वॉल पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी।

विक्रमशिला पुल का 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने उद्घाटन किया था।

विक्रमशिला पुल का 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने उद्घाटन किया था।

2001 में हुआ था उद्घाटन, 4.7 किमी लंबा है पुल

  • विक्रमशिला सेतु का निर्माण 680 करोड़ की लगात से हुआ था।
  • विक्रमशिला सेतु भारत के सबसे लंबे पानी पर बने पुलों में से एक गिना जाता है, इसकी कुल लंबाई करीब 4.7 किलोमीटर है।
  • यह भागलपुर को नवगछिया और कोसी-सीमांचल क्षेत्र से जोड़ता है।
  • विक्रमशिला सेतु दक्षिणी छोर पर NH-80 और उत्तरी छोर पर NH-31 को जोड़ता है। इससे बिहार के उत्तर और दक्षिण हिस्सों के बीच डायरेक्ट कनेक्टिविटी बनी।
  • रोजाना करीब एक लाख लोग इससे आना-जाना करते हैं।
  • इस सेतु के जरिए पूर्वोत्तर राज्यों (जैसे असम और बंगाल) के साथ व्यापार और माल ढुलाई में आसानी होती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
  • इसका नाम प्राचीन विक्रमशिला महाविहार के नाम पर रखा गया है, जिसकी स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल ने की थी। यह विश्वविद्यालय कभी नालंदा की तरह ही शिक्षा का बड़ा केंद्र था।
  • मार्च 2026 में पुल के पिलर संख्या 17, 18 और 19 के आसपास बनी सुरक्षा दीवारें (फॉल्स स्टेनिंग) क्षतिग्रस्त पाई गईं। इससे पुल की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे।
  • 2016 में पुल की बड़े पैमाने पर मरम्मत की गई थी। इस दौरान बियरिंग बदले गए और कई हिस्सों में कार्बन प्लेट लगाकर संरचना को मजबूत किया गया। 2020 में भी मरम्मती का काम हुआ था।

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ट्रैफिक DSP संजय कुमार ने कहा,

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जैसे ही स्ट्रीट लाइट पोल संख्या 133 के पास एक्सपेंशन जॉइंट के गैप की बढ़ने की सूचना मिली, दोनों ओर से गाड़ियों के आवागमन पर रोक लगा दी गई थी।

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ये पुल उत्तर बिहार को दक्षिण बिहार से जोड़ता है।

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पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग की गई

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सीमांचल समेत 16 जिलों को भागलपुर से जोड़ता है ये पुल

विक्रमशिला सेतु पर हर दिन करीब एक लाख लोगों की आवाजाही होती है। करीब 50 हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन इस पुल से गुजरते हैं। सीमांचल समेत 16 जिलों को यह सेतु भागलपुर से जोड़ता है। इसका निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल में कराया गया था।

पुल में लगातार जॉइंट और एक्सपेंशन गैप की समस्या को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आखिरी बार 2020 में पुल की मरम्मत कराई गई थी।

कुछ दिन पहले ही वॉल वायरिंग क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि प्रशासन ने उस समय इसे खारिज करते हुए कहा था कि पुल पर किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।

विक्रमशिला पुल बंद होने से लोग नाव के सहारे एक ओर से दूसरी ओर जा रहे हैं।

विक्रमशिला पुल बंद होने से लोग नाव के सहारे एक ओर से दूसरी ओर जा रहे हैं।

नाव के सहारे गंगा पार कर रहे लोग

पुल बंद होने के बाद बरारी घाट पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है। नवगछिया, बिहपुर, कटिहार, पूर्णिया की ओर जाने वाले यात्री नाव के सहारे इस पार से उस पार जा रहे हैं। नाव से सफर कर रहे प्रकाश ने बताया कि घाट के किनारे नाव से उतरकर पैदल ही 5 किलोमीटर तक जाना पड़ेगा। समय से मेंटेंनेंस नहीं होने के कारण पुल गिरा है।

इधर नेता प्रतिपक्ष ने पूरे मामले पर सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा- ‘विगत महीने हम लोगों ने सरकार को आगाह किया था कि यह पुल गिर सकता है लेकिन आदतन सरकार ने अपनी भ्रष्ट व्यवस्था का बचाव करते हुए पल्ला झाड़ लिया।’

30 दिन पहले विक्रमशिला सेतु के 3 पिलर्स की प्रोटेक्शन वॉल टूटी थी

30 दिन पहले विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या 17, 18 और 19 की प्रोटेक्शन वॉल तेज बहाव की वजह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। एक पिलर की प्रोटेक्शन वॉल पूरी तरह से ध्वस्त हो गई थी।

उस वक्त इंजीनियर्स ने कहा था, गंगा नदी के तेज बहाव, बड़े जहाजों और भारी नावों की आवाजाही के कारण पिलरों पर लगातार दबाव पड़ता है। इस स्थिति में प्रोटेक्शन वॉल क्षतिग्रस्त हुई है। इसका असर पिलर्स पर पड़ेगा। बाढ़ के समय यह दबाव और बढ़ जाता है, जिससे जोखिम कई गुना बढ़ सकती है।

इससे पहले भी विक्रमशिला सेतु के अलग-अलग स्पैन के बीच एक्सपेंशन जॉइंट का गैप बढ़ने का मामला सामने आया था। यह गैप 1 से 2 इंच था, जो बढ़कर करीब 6 इंच तक पहुंच गया था।

30 दिन पहले सेतु के पिलर की प्रोटेक्शन वॉल पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी।

30 दिन पहले सेतु के पिलर की प्रोटेक्शन वॉल पूरी तरह ध्वस्त हो गई थी।

विक्रमशिला पुल का 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने उद्घाटन किया था।

विक्रमशिला पुल का 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने उद्घाटन किया था।

2001 में हुआ था उद्घाटन, 4.7 किमी लंबा है पुल

  • विक्रमशिला सेतु का निर्माण 680 करोड़ की लगात से हुआ था।
  • विक्रमशिला सेतु भारत के सबसे लंबे पानी पर बने पुलों में से एक गिना जाता है, इसकी कुल लंबाई करीब 4.7 किलोमीटर है।
  • यह भागलपुर को नवगछिया और कोसी-सीमांचल क्षेत्र से जोड़ता है।
  • विक्रमशिला सेतु दक्षिणी छोर पर NH-80 और उत्तरी छोर पर NH-31 को जोड़ता है। इससे बिहार के उत्तर और दक्षिण हिस्सों के बीच डायरेक्ट कनेक्टिविटी बनी।
  • रोजाना करीब एक लाख लोग इससे आना-जाना करते हैं।
  • इस सेतु के जरिए पूर्वोत्तर राज्यों (जैसे असम और बंगाल) के साथ व्यापार और माल ढुलाई में आसानी होती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
  • इसका नाम प्राचीन विक्रमशिला महाविहार के नाम पर रखा गया है, जिसकी स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल ने की थी। यह विश्वविद्यालय कभी नालंदा की तरह ही शिक्षा का बड़ा केंद्र था।
  • मार्च 2026 में पुल के पिलर संख्या 17, 18 और 19 के आसपास बनी सुरक्षा दीवारें (फॉल्स स्टेनिंग) क्षतिग्रस्त पाई गईं। इससे पुल की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे।
  • 2016 में पुल की बड़े पैमाने पर मरम्मत की गई थी। इस दौरान बियरिंग बदले गए और कई हिस्सों में कार्बन प्लेट लगाकर संरचना को मजबूत किया गया। 2020 में भी मरम्मती का काम हुआ था।

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