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Sensex Nifty Market Update | Auto Banking Shares Buying Surge

Sensex Nifty Market Update | Auto Banking Shares Buying Surge

2 मिनट पहले कॉपी लिंक शेयर बाजार में आज यानी 10 अगस्त को शेयर बाजार में बढ़त है। सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ 78,600 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी करीब 50 अंक ऊपर है, ये 24,600 पर कारोबार कर रहा है। ऑटो, IT और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में भी बढ़त इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज कोस्पी (साउथ कोरिया) 6307 +57 +0.77% निक्केई (जापान) 66931 +1325 +2.02% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 25821 +153 +0.59% 7 अगस्त को अमेरिकी बाजारों में बढ़त रही थी इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज डाउ जोन्स 54037 +152 +0.28% नैस्डैक 26691 +342 +1.30% S&P 500 7758 +48 +0.62% विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 1,966 करोड़ के शेयर खरीदे कैटेगरी लेटेस्ट बीते 7 दिन बीते 30 दिन DII +236 +6,196 +31,601 FII/FPI +480 +1,966 -7,464 शुक्रवार को बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले पिछले शुक्रवार यानी 7 अगस्त को बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 455 की गिरावट के साथ 78,499 पर बंद हुआ था। निफ्टी में 65 अंकों की गिरावट रही, ये 24,570 के स्तर पर आ गया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Sensex Nifty Market Update | Auto Banking Shares Buying Surge

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2 मिनट पहले कॉपी लिंक शेयर बाजार में आज यानी 10 अगस्त को शेयर बाजार में बढ़त है। सेंसेक्स 100 अंक से ज्यादा की बढ़त के साथ 78,600 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी करीब 50 अंक ऊपर है, ये 24,600 पर कारोबार कर रहा है। ऑटो, IT और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा खरीदारी है। एशियाई बाजारों में भी बढ़त इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज कोस्पी (साउथ कोरिया) 6307 +57 +0.77% निक्केई (जापान) 66931 +1325 +2.02% हैंगसेंग (हॉन्गकॉन्ग) 25821 +153 +0.59% 7 अगस्त को अमेरिकी बाजारों में बढ़त रही थी इंडेक्स लेवल पॉइंट चेंज परसेंट चेंज डाउ जोन्स 54037 +152 +0.28% नैस्डैक 26691 +342 +1.30% S&P 500 7758 +48 +0.62% विदेशी निवेशकों ने 7 दिन में 1,966 करोड़ के शेयर खरीदे कैटेगरी लेटेस्ट बीते 7 दिन बीते 30 दिन DII +236 +6,196 +31,601 FII/FPI +480 +1,966 -7,464 शुक्रवार को बाजार में रही थी गिरावट इससे पहले पिछले शुक्रवार यानी 7 अगस्त को बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 455 की गिरावट के साथ 78,499 पर बंद हुआ था। निफ्टी में 65 अंकों की गिरावट रही, ये 24,570 के स्तर पर आ गया था। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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India Market Cap & FMCG Price Hike

India Market Cap & FMCG Price Hike

6 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर महंगाई से जुड़ी रही। देश में जल्द ही रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान यानी FMCG प्रोडक्ट के दाम बढ़ सकते हैं। वहीं बीते हफ्ते देश की टॉप 10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 के मार्केट कैपिटलाइजेशन में कुल लगभग 1.43 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज तेजी देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। मोलबायो डायग्नोस्टिक्स और धूत ट्रांसमिशन के IPO ओपन होंगे। 1. टॉप-10 में 4 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹1.43 लाख करोड़ बढ़ा: SBI टॉप गेनर, वैल्यू ₹63,922 करोड़ बढ़ी; LIC को सबसे ज्यादा नुकसान बीते हफ्ते देश की टॉप 10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 के मार्केट कैपिटलाइजेशन में कुल लगभग 1.43 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। हफ्ते के दौरान मार्केट कैप बढ़ाने वाली 4 कंपनियों में SBI के अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, TCS और लार्सन एंड टुब्रो शामिल रहीं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. हाइब्रिड-EV कारें 1 अप्रैल 2027 से सस्ती होंगी: पेट्रोल-डीजल गाड़ियां महंगी मिलेंगी, ज्यादा प्रदूषण वाली कारों पर लगेगा जुर्माना; नई पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी केंद्र सरकार ने यात्री वाहनों के लिए नए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी मानकों का मसौदा यानी ड्राफ्ट जारी किया है। ये नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य कारों की ईंधन दक्षता यानी माइलेज बढ़ाना और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना है। इससे एथेनॉल, हाइब्रिड और EV कारें सस्ती हो सकती हैं और ज्यादा प्रदूषण वाली पेट्रोल-डीजल कारें महंगी हो सकती हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजें महंगी होंगी: बिस्किट से लेकर साबुन-तेल सबकी कीमतें बढ़ेंगी, कच्चे माल के दाम बढ़ना कारण देश में जल्द ही रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान यानी FMCG प्रोडक्ट के दाम बढ़ सकते हैं।जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे माल की लागत यानी इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए देश की प्रमुख FMCG कंपनियां चालू यानी सितंबर तिमाही में अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। इससे पहले पिछली यानी अप्रैल-जून तिमाही में कंपनियों ने औसतन 2 से 5% तक दाम बढ़ाए थे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. अगस्त के पहले-हफ्ते में विदेशी-निवेशकों ने ₹12,921 करोड़ निवेश किए: जुलाई में भारतीय बाजार में ₹20,200 करोड़ आए थे, वजह- क्रूड सस्ता हुआ पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर पर चार्जशीट दाखिल:4 NHAI रोड प्रोजेक्ट्स से ₹187 करोड़ की हेराफेरी का आरोप, फर्जी बिल और डायमंड इम्पोर्ट के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, उसके पूर्व डायरेक्टर सतीश सेठ और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम PMLA के तहत चार्जशीट दाखिल की है। यह कार्रवाई नई दिल्ली के द्वारका जिला अदालत स्थित विशेष PMLA कोर्ट में 8 अगस्त को की गई। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… शुक्रवार के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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India Market Cap & FMCG Price Hike

India Market Cap & FMCG Price Hike

24 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर महंगाई से जुड़ी रही। देश में जल्द ही रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान यानी FMCG प्रोडक्ट के दाम बढ़ सकते हैं। वहीं बीते हफ्ते देश की टॉप 10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 के मार्केट कैपिटलाइजेशन में कुल लगभग 1.43 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज तेजी देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। मोलबायो डायग्नोस्टिक्स और धूत ट्रांसमिशन के IPO ओपन होंगे। 1. टॉप-10 में 4 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹1.43 लाख करोड़ बढ़ा: SBI टॉप गेनर, वैल्यू ₹63,922 करोड़ बढ़ी; LIC को सबसे ज्यादा नुकसान बीते हफ्ते देश की टॉप 10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 के मार्केट कैपिटलाइजेशन में कुल लगभग 1.43 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। हफ्ते के दौरान मार्केट कैप बढ़ाने वाली 4 कंपनियों में SBI के अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, TCS और लार्सन एंड टुब्रो शामिल रहीं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. हाइब्रिड-EV कारें 1 अप्रैल 2027 से सस्ती होंगी: पेट्रोल-डीजल गाड़ियां महंगी मिलेंगी, ज्यादा प्रदूषण वाली कारों पर लगेगा जुर्माना; नई पॉलिसी का ड्राफ्ट जारी केंद्र सरकार ने यात्री वाहनों के लिए नए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी मानकों का मसौदा यानी ड्राफ्ट जारी किया है। ये नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य कारों की ईंधन दक्षता यानी माइलेज बढ़ाना और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना है। इससे एथेनॉल, हाइब्रिड और EV कारें सस्ती हो सकती हैं और ज्यादा प्रदूषण वाली पेट्रोल-डीजल कारें महंगी हो सकती हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजें महंगी होंगी: बिस्किट से लेकर साबुन-तेल सबकी कीमतें बढ़ेंगी, कच्चे माल के दाम बढ़ना कारण देश में जल्द ही रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान यानी FMCG प्रोडक्ट के दाम बढ़ सकते हैं।जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे माल की लागत यानी इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए देश की प्रमुख FMCG कंपनियां चालू यानी सितंबर तिमाही में अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। इससे पहले पिछली यानी अप्रैल-जून तिमाही में कंपनियों ने औसतन 2 से 5% तक दाम बढ़ाए थे। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. अगस्त के पहले-हफ्ते में विदेशी-निवेशकों ने ₹12,921 करोड़ निवेश किए: जुलाई में भारतीय बाजार में ₹20,200 करोड़ आए थे, वजह- क्रूड सस्ता हुआ पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर पर चार्जशीट दाखिल:4 NHAI रोड प्रोजेक्ट्स से ₹187 करोड़ की हेराफेरी का आरोप, फर्जी बिल और डायमंड इम्पोर्ट के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, उसके पूर्व डायरेक्टर सतीश सेठ और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम PMLA के तहत चार्जशीट दाखिल की है। यह कार्रवाई नई दिल्ली के द्वारका जिला अदालत स्थित विशेष PMLA कोर्ट में 8 अगस्त को की गई। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… शुक्रवार के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Reliance Infrastructure Money Laundering Case

Reliance Infrastructure Money Laundering Case

Hindi News Business Reliance Infrastructure Money Laundering Case | NHAI Projects Chargesheet 1 मिनट पहले कॉपी लिंक रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप इस कंपनी पर यह कार्रवाई नई दिल्ली के द्वारका जिला अदालत स्थित विशेष PMLA कोर्ट में की गई। (फाइल फोटर) प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, उसके पूर्व डायरेक्टर सतीश सेठ और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम PMLA के तहत चार्जशीट दाखिल की है। यह कार्रवाई नई दिल्ली के द्वारका जिला अदालत स्थित विशेष PMLA कोर्ट में 8 अगस्त को की गई। ED ने इस मामले में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर पर आरोप लगाया है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI की चार रोड प्रोजेक्ट्स के सार्वजनिक पैसों का इस्तेमाल सड़क निर्माण में करने के बजाय फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए कहीं और ट्रांसफर कर दिया गया। फर्जी बिल और डायमंड इम्पोर्ट के बहाने मनी लॉन्ड्रिंग इस मामले की नींव मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा 11 फरवरी 2026 को दर्ज की गई FIR (सं. 172/2026) पर टिकी है। EOW की जांच में सामने आया था कि फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों की मदद से कई शेल कंपनियां बनाई गईं। इन शेल कंपनियों का इस्तेमाल जाली इनवॉइस यानी फर्जी बिल और अत्यधिक कीमत पर हीरे इम्पोर्ट दिखाने के बहाने फंड की आवाजाही और विदेश पैसे भेजने के लिए किया जा रहा था। इसी FIR के आधार पर ED ने PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। 4 हाईवे प्रोजेक्ट्स के पैसों का हुआ डायवर्जन ED की जांच के अनुसार, NHAI द्वारा अलॉट की गई चार प्रमुख टोल-रोड परियोजनाओं में जनता और बैंकों का पैसा लगा हुआ था। ये चार प्रोजेक्ट्स निम्नलिखित हैं: तिरुचि-करूर (NH-67) तिरुचि-डिंडीगुल (NH-45) सालेम-उलुंदूरपेट (NH-68) जयपुर-रींगस (NH-11) इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए NHAI से अनुदान और बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थानों से लोन लिया गया था। जांच में सामने आया कि सितंबर से अक्टूबर 2010 के बीच लगभग ₹187 करोड़ की रकम बैक-डेटेड यानी पुराने समय की संविदाओं और फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग व्यवस्थाओं के जरिए कंपनी से बाहर निकाली गई। कैसे घुमाया गया फंड: कंस्ट्रक्शन से डायमंड ट्रेडर्स तक मनी ट्रेल ₹187 करोड़ की संपत्ति अटैच, सतीश सेठ जेल में जांच एजेंसी ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 3 अगस्त को ₹187 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को प्रोविजनली यानी अस्थायी रूप से अटैच कर लिया था। अटैच की गई संपत्तियों में अचल संपत्तियां, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के पास मौजूद रिलायंस पावर लिमिटेड के इक्विटी शेयर और क्षीराब्ध कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड की जमीन शामिल है। मामले में आरोपी सतीश सेठ को ED ने 12 जून को गिरफ्तार किया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत (जेल) में हैं। आगे की कार्रवाई: अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी ED का कहना है कि इस मामले में अन्य व्यक्तियों, अधिकारियों और सहयोगियों की भूमिका की आगे जांच जारी है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्षों के आधार पर पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है। क्या होती है शेल कंपनी? शेल कंपनियां कागज पर होती हैं। छोटे-छोटे लोगों को उनका डायरेक्टर बनाकर कारोबार किया जाता है। एंट्री द्वारा ब्लैक मनी को व्हाइट करने का खेल खेला जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Reliance Infrastructure Money Laundering Case

Reliance Infrastructure Money Laundering Case

Hindi News Business Reliance Infrastructure Money Laundering Case | NHAI Projects Chargesheet 30 मिनट पहले कॉपी लिंक रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप इस कंपनी पर यह कार्रवाई नई दिल्ली के द्वारका जिला अदालत स्थित विशेष PMLA कोर्ट में की गई। (फाइल फोटर) प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप की प्रमुख कंपनी रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, उसके पूर्व डायरेक्टर सतीश सेठ और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम PMLA के तहत चार्जशीट दाखिल की है। यह कार्रवाई नई दिल्ली के द्वारका जिला अदालत स्थित विशेष PMLA कोर्ट में 8 अगस्त को की गई। ED ने इस मामले में रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर पर आरोप लगाया है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI की चार रोड प्रोजेक्ट्स के सार्वजनिक पैसों का इस्तेमाल सड़क निर्माण में करने के बजाय फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए कहीं और ट्रांसफर कर दिया गया। फर्जी बिल और डायमंड इम्पोर्ट के बहाने मनी लॉन्ड्रिंग इस मामले की नींव मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा 11 फरवरी 2026 को दर्ज की गई FIR (सं. 172/2026) पर टिकी है। EOW की जांच में सामने आया था कि फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों की मदद से कई शेल कंपनियां बनाई गईं। इन शेल कंपनियों का इस्तेमाल जाली इनवॉइस यानी फर्जी बिल और अत्यधिक कीमत पर हीरे इम्पोर्ट दिखाने के बहाने फंड की आवाजाही और विदेश पैसे भेजने के लिए किया जा रहा था। इसी FIR के आधार पर ED ने PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। 4 हाईवे प्रोजेक्ट्स के पैसों का हुआ डायवर्जन ED की जांच के अनुसार, NHAI द्वारा अलॉट की गई चार प्रमुख टोल-रोड परियोजनाओं में जनता और बैंकों का पैसा लगा हुआ था। ये चार प्रोजेक्ट्स निम्नलिखित हैं: तिरुचि-करूर (NH-67) तिरुचि-डिंडीगुल (NH-45) सालेम-उलुंदूरपेट (NH-68) जयपुर-रींगस (NH-11) इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए NHAI से अनुदान और बैंकों व अन्य वित्तीय संस्थानों से लोन लिया गया था। जांच में सामने आया कि सितंबर से अक्टूबर 2010 के बीच लगभग ₹187 करोड़ की रकम बैक-डेटेड यानी पुराने समय की संविदाओं और फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग व्यवस्थाओं के जरिए कंपनी से बाहर निकाली गई। कैसे घुमाया गया फंड: कंस्ट्रक्शन से डायमंड ट्रेडर्स तक मनी ट्रेल ₹187 करोड़ की संपत्ति अटैच, सतीश सेठ जेल में जांच एजेंसी ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 3 अगस्त को ₹187 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को प्रोविजनली यानी अस्थायी रूप से अटैच कर लिया था। अटैच की गई संपत्तियों में अचल संपत्तियां, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के पास मौजूद रिलायंस पावर लिमिटेड के इक्विटी शेयर और क्षीराब्ध कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड की जमीन शामिल है। मामले में आरोपी सतीश सेठ को ED ने 12 जून को गिरफ्तार किया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत (जेल) में हैं। आगे की कार्रवाई: अन्य लोगों की भूमिका की जांच जारी ED का कहना है कि इस मामले में अन्य व्यक्तियों, अधिकारियों और सहयोगियों की भूमिका की आगे जांच जारी है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्षों के आधार पर पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट भी दाखिल की जा सकती है। क्या होती है शेल कंपनी? शेल कंपनियां कागज पर होती हैं। छोटे-छोटे लोगों को उनका डायरेक्टर बनाकर कारोबार किया जाता है। एंट्री द्वारा ब्लैक मनी को व्हाइट करने का खेल खेला जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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अगस्त के पहले-हफ्ते में FPI ने ₹12,921 करोड़ निवेश किए:जुलाई में भारतीय बाजार में ₹20,200 करोड़ आए थे, वजह- क्रूड सस्ता हुआ

अगस्त के पहले-हफ्ते में FPI ने ₹12,921 करोड़ निवेश किए:जुलाई में भारतीय बाजार में ₹20,200 करोड़ आए थे, वजह- क्रूड सस्ता हुआ

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने अगस्त के पहले हफ्ते में भारतीय शेयर बाजार में ₹12,921 करोड़ का भारी निवेश किया है। भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की बेहतर होती स्थिति, अमेरिका में ब्याज दरें घटने की उम्मीद, कच्चे तेल के गिरते दाम और स्थिर रुपए के कारण विदेशी निवेशकों की लिवाली जारी है। जुलाई में हुए ₹20,200 करोड़ के निवेश के बाद लगातार दूसरे महीने भारतीय बाजार में पॉजिटिव फंड फ्लो देखा जा रहा है। लगातार 4 महीने की बिकवाली के बाद ट्रेंड बदला जून में ₹49,340 करोड़, मई में ₹32,963 करोड़, अप्रैल में ₹60,847 करोड़ और मार्च में ₹1.17 लाख करोड़ रुपए की रिकॉर्ड बिकवाली के बाद जुलाई से बाजार में ट्रेंड बदला है। CDSL के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से जून तक लगातार चार महीनों की बिकवाली से पहले FPIs ने फरवरी में ₹22,615 करोड़ का निवेश किया था। इसके बाद जुलाई में ₹20,200 करोड़ का इनफ्लो दर्ज किया गया, जिससे भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी देखने को मिली है। 2026 में अब तक ₹2.41 लाख करोड़ निकाले हालिया खरीदारी के बावजूद, विदेशी निवेशक 2026 में अब तक भारतीय इक्विटी में कुल मिलाकर नेट सेलर बने हुए हैं। इस साल अब तक FPIs भारतीय शेयर बाजार से ₹2.41 लाख करोड़ रुपए निकाल चुके हैं। यह आंकड़ा पूरे साल 2025 में हुई ₹1.66 लाख करोड़ रुपए की कुल बिकवाली से भी ज्यादा हो चुका है। सेकेंडरी मार्केट और लिस्टेड कंपनियों में रुचि बढ़ी इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म Trackk के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते ने बताया कि हालिया निवेश बाजार में सुधरते सेंटिमेंट का नतीजा है। अमेरिका में रेट कट की उम्मीद, कच्चे तेल की घटती कीमतें और स्थिर रुपए ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। वेदांत गुप्ते ने कहा कि RBI द्वारा ग्रोथ और महंगाई को लेकर दिए गए बेहतर आउटलुक ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। भारतीय शेयरों में विदेशी हिस्सेदारी फिलहाल निचले स्तर पर है, जिससे नए फंड्स के लिए काफी गुंजाइश बची हुई है। इसके अलावा, हालिया खरीदारी का बड़ा हिस्सा सिर्फ IPO के बजाय सेकेंडरी मार्केट से आ रहा है, जो लिस्टेड कंपनियों में विदेशी निवेशकों की गहरी रुचि को दर्शाता है। भू-राजनीतिक तनाव घटने से सेंटिमेंट सुधरा बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पबित्रो मुखर्जी का मानना है कि FIIs और DIIs की ओर से लगातार जारी खरीदारी के पीछे भू-राजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) तनाव का कम होना एक मुख्य वजह है। तनाव कम होने से वैश्विक निवेशकों का सेंटिमेंट पॉजिटिव हुआ है, जिससे भारतीय शेयर बाजार को मजबूत सहारा मिला है। ऑटो-हेल्थकेयर सेक्टर बने पहली पसंद जिओजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार ने बताया कि FPIs की खरीदारी में एक खास ट्रेंड देखा जा रहा है। विदेशी निवेशक ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर्स पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं और इनमें तेजी से अलॉटमेंट बढ़ा रहे हैं। डेट मार्केट में भी पैसा लगा रहे विदेशी निवेशक शेयर बाजार के साथ-साथ विदेशी निवेशकों का रुझान भारतीय डेट मार्केट में भी लगातार बना हुआ है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान FPIs ने जनरल रूट के जरिए भारतीय डेट मार्केट में ₹622 करोड़ का निवेश किया है। क्या होता है फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट? ऐसे विदेशी निवेशक या संस्थाएं जो किसी देश के शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या डेट मार्केट में वित्तीय लाभ के लिए पैसा लगाते हैं। वे कंपनियों में सीधे मैनेजमेंट या ऑपरेशनल कंट्रोल नहीं लेते। क्या होता है सेकेंडरी मार्केट? वह वित्तीय बाजार जहां पहले से लिस्टेड शेयरों की खरीद-बिक्री निवेशकों के बीच होती है (जैसे BSE या NSE)। इसमें पैसा सीधे कंपनी को न जाकर बेचने वाले निवेशक के पास जाता है।

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FMCG Product Price Hike | Biscuit Soap Oil Costly Due To Inflation

FMCG Product Price Hike | Biscuit Soap Oil Costly Due To Inflation

4 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में जल्द ही रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान यानी FMCG प्रोडक्ट के दाम बढ़ सकते हैं।जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे माल की लागत यानी इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए देश की प्रमुख FMCG कंपनियां चालू यानी सितंबर तिमाही में अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। इससे पहले पिछली यानी अप्रैल-जून तिमाही में कंपनियों ने औसतन 2 से 5% तक दाम बढ़ाए थे। इस तिमाही यानी जुलाई-सितेबर में कंपनियां सीधे तौर पर रेट बढ़ाने के अलावा ‘श्रिंकफ्लेशन’ का सहारा ले रही हैं। यानी सामान की कीमत वही रहेगी, लेकिन पैकेट में उसकी मात्रा यानी वजन कम कर दिया जाएगा। कंपनियों का कहना है कि पाम ऑयल, चीनी और क्रूड ऑयल के दामों में उतार-चढ़ाव से मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है। भारत में प्रमुख FMCG कंपनियां जैसे हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), आईटीसी, नेस्ले, डाबर, ब्रिटानिया आदि इन प्रोडक्ट्स में सक्रिय हैं। FMCG वे रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान हैं जो जल्दी बिकते और खर्च हो जाते हैं। ब्रिटानिया: ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैकेट का वजन घटेगा देश की प्रमुख बेकरी और स्नैक कंपनी ब्रिटानिया चालू तिमाही में ‘श्रिंकफ्लेशन’ के जरिए कीमतों में 1.5 से 2% की और बढ़ोतरी कर सकती है। यह कटौती मुख्य रूप से कंपनी के ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैक्स में देखने को मिलेगी। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ रक्षित हरगवे ने बताया कि चीनी और पाम ऑयल जैसे कच्चे माल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। पहली तिमाही में हमारी ग्रोथ काफी हद तक श्रिंकफ्लेशन पर निर्भर थी। चालू तिमाही में भी इस ट्रेंड को जारी रखना पड़ेगा। हालांकि, मार्केट में डिमांड का माहौल अभी भी काफी मजबूत दिख रहा है। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड: 2 से 5% तक बढ़ सकती है महंगाई हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड भी अपने अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी में कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही है। कंपनी का अनुमान है कि जून तिमाही के मुकाबले सितंबर तिमाही में 2 से 5% प्र गोदरेज कंज्यूमर: क्रूड के स्थिर होने का इंतजार गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने जून तिमाही में औसतन 5% दाम बढ़ाए थे। कंपनी का कहना है कि वह चालू तिमाही में फिलहाल तुरंत बड़े प्राइस हाइक से बच रही है और कमोडिटी मार्केट के स्थिर होने का इंतजार कर रही है। कंपनी के सीईओ सुधीर सीतापति ने बताया कि गोदरेज के कई इनपुट कॉस्ट कच्चे तेल से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड फिलहाल 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। अगर क्रूड इसी रेंज में रहता है तो हमें किसी बड़े प्राइस हाइक की जरूरत नहीं पड़ेगी। हम FY27 के लिए अपने रेवेन्यू टारगेट को आसानी से हासिल कर लेंगे। डाबर इंडिया: वॉल्यूम पर दिख सकता है असर डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती लागत आने वाले दिनों में भी बनी रह सकती है। कंपनियों के पास इस लागत का बोझ कंज्यूमर्स पर डालने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचा है। टाटा कंज्यूमर और नेस्ले: वेस्ट एशिया संकट और एल-नीनो पर नजर टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के एमडी सुनील डी’सूजा ने बताया कि लागत का असर काफी डायनेमिक है। अगर जरूरत पड़ी तो कंपनी आगे कीमतों में बदलाव करेगी। वहीं नेस्ले इंडिया ने अपने इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन में सचेत किया है कि शॉर्ट-टर्म में ओवरऑल कंजम्पशन थोड़ा सुस्त हो सकता है। कंपनी ने कहा कि वेस्ट एशिया का संघर्ष और मानसून पर एल-नीनो का संभावित असर फूड एंड बेवरेज सेक्टर के लिए चिंता का विषय है। आगे क्या: प्रीमियम प्रोडक्ट्स और बेहतर डिलीवरी से मार्जिन बचाने की कोशिश कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद एफएमसीजी सेक्टर को भरोसा है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में खपत बनी रहेगी। कंपनियां अपने ऑपरेटिंग खर्चों को घटाने, प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं, ताकि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान अपने मार्जिन को बरकरार रख सकें। क्या होता है ‘अल नीनो’ और ‘इनपुट कॉस्ट’? अल नीनो: यह प्रशांत महासागर में समुद्र के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की एक भौगोलिक घटना है। इसके कारण भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे सूखा पड़ने या कम बारिश होने का खतरा रहता है। बारिश कम होने से फसलों का उत्पादन घटता है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं। इनपुट कॉस्ट: किसी भी प्रोडक्ट को तैयार करने या बनाने में लगने वाले कच्चे माल, ईंधन, ट्रांसपोर्टेशन और मजदूरी के कुल खर्च को इनपुट कॉस्ट कहते हैं। जब यह लागत बढ़ती है, तो कंपनियों को अपना प्रॉफिट मार्जिन बचाने के लिए अंतिम प्रोडक्ट के दाम बढ़ाने पड़ते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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FMCG Product Price Hike | Biscuit Soap Oil Costly Due To Inflation

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36 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में जल्द ही रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान यानी FMCG प्रोडक्ट के दाम बढ़ सकते हैं।जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण कच्चे माल की लागत यानी इनपुट कॉस्ट लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए देश की प्रमुख FMCG कंपनियां चालू यानी सितंबर तिमाही में अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। इससे पहले पिछली यानी अप्रैल-जून तिमाही में कंपनियों ने औसतन 2 से 5% तक दाम बढ़ाए थे। इस तिमाही यानी जुलाई-सितेबर में कंपनियां सीधे तौर पर रेट बढ़ाने के अलावा ‘श्रिंकफ्लेशन’ का सहारा ले रही हैं। यानी सामान की कीमत वही रहेगी, लेकिन पैकेट में उसकी मात्रा यानी वजन कम कर दिया जाएगा। कंपनियों का कहना है कि पाम ऑयल, चीनी और क्रूड ऑयल के दामों में उतार-चढ़ाव से मार्जिन पर दबाव बढ़ रहा है। भारत में प्रमुख FMCG कंपनियां जैसे हिंदुस्तान यूनिलीवर (HUL), आईटीसी, नेस्ले, डाबर, ब्रिटानिया आदि इन प्रोडक्ट्स में सक्रिय हैं। FMCG वे रोजमर्रा के उपभोक्ता सामान हैं जो जल्दी बिकते और खर्च हो जाते हैं। ब्रिटानिया: ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैकेट का वजन घटेगा देश की प्रमुख बेकरी और स्नैक कंपनी ब्रिटानिया चालू तिमाही में ‘श्रिंकफ्लेशन’ के जरिए कीमतों में 1.5 से 2% की और बढ़ोतरी कर सकती है। यह कटौती मुख्य रूप से कंपनी के ₹5 और ₹10 वाले बिस्किट पैक्स में देखने को मिलेगी। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ रक्षित हरगवे ने बताया कि चीनी और पाम ऑयल जैसे कच्चे माल की कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। पहली तिमाही में हमारी ग्रोथ काफी हद तक श्रिंकफ्लेशन पर निर्भर थी। चालू तिमाही में भी इस ट्रेंड को जारी रखना पड़ेगा। हालांकि, मार्केट में डिमांड का माहौल अभी भी काफी मजबूत दिख रहा है। हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड: 2 से 5% तक बढ़ सकती है महंगाई हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड भी अपने अलग-अलग प्रोडक्ट कैटेगरी में कीमतें बढ़ाने पर विचार कर रही है। कंपनी का अनुमान है कि जून तिमाही के मुकाबले सितंबर तिमाही में 2 से 5% प्र गोदरेज कंज्यूमर: क्रूड के स्थिर होने का इंतजार गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड ने जून तिमाही में औसतन 5% दाम बढ़ाए थे। कंपनी का कहना है कि वह चालू तिमाही में फिलहाल तुरंत बड़े प्राइस हाइक से बच रही है और कमोडिटी मार्केट के स्थिर होने का इंतजार कर रही है। कंपनी के सीईओ सुधीर सीतापति ने बताया कि गोदरेज के कई इनपुट कॉस्ट कच्चे तेल से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड फिलहाल 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। अगर क्रूड इसी रेंज में रहता है तो हमें किसी बड़े प्राइस हाइक की जरूरत नहीं पड़ेगी। हम FY27 के लिए अपने रेवेन्यू टारगेट को आसानी से हासिल कर लेंगे। डाबर इंडिया: वॉल्यूम पर दिख सकता है असर डाबर इंडिया के ग्लोबल सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती लागत आने वाले दिनों में भी बनी रह सकती है। कंपनियों के पास इस लागत का बोझ कंज्यूमर्स पर डालने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचा है। टाटा कंज्यूमर और नेस्ले: वेस्ट एशिया संकट और एल-नीनो पर नजर टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के एमडी सुनील डी’सूजा ने बताया कि लागत का असर काफी डायनेमिक है। अगर जरूरत पड़ी तो कंपनी आगे कीमतों में बदलाव करेगी। वहीं नेस्ले इंडिया ने अपने इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन में सचेत किया है कि शॉर्ट-टर्म में ओवरऑल कंजम्पशन थोड़ा सुस्त हो सकता है। कंपनी ने कहा कि वेस्ट एशिया का संघर्ष और मानसून पर एल-नीनो का संभावित असर फूड एंड बेवरेज सेक्टर के लिए चिंता का विषय है। आगे क्या: प्रीमियम प्रोडक्ट्स और बेहतर डिलीवरी से मार्जिन बचाने की कोशिश कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद एफएमसीजी सेक्टर को भरोसा है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में खपत बनी रहेगी। कंपनियां अपने ऑपरेटिंग खर्चों को घटाने, प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बिक्री बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं, ताकि वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान अपने मार्जिन को बरकरार रख सकें। क्या होता है ‘अल नीनो’ और ‘इनपुट कॉस्ट’? अल नीनो: यह प्रशांत महासागर में समुद्र के पानी के असामान्य रूप से गर्म होने की एक भौगोलिक घटना है। इसके कारण भारत में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे सूखा पड़ने या कम बारिश होने का खतरा रहता है। बारिश कम होने से फसलों का उत्पादन घटता है और खाने-पीने की चीजें महंगी हो जाती हैं। इनपुट कॉस्ट: किसी भी प्रोडक्ट को तैयार करने या बनाने में लगने वाले कच्चे माल, ईंधन, ट्रांसपोर्टेशन और मजदूरी के कुल खर्च को इनपुट कॉस्ट कहते हैं। जब यह लागत बढ़ती है, तो कंपनियों को अपना प्रॉफिट मार्जिन बचाने के लिए अंतिम प्रोडक्ट के दाम बढ़ाने पड़ते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Home Buying Tips 2026 | Check Property Strength & Low Interest Rates

Home Buying Tips 2026 | Check Property Strength & Low Interest Rates

2 मिनट पहले कॉपी लिंक अगर आप घर या प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे है, तो बारिश का मौसम इसके लिए सही समय रहेगा। इस मौसम में मकान और उसके आसपास के इलाके वैसे नहीं रह जाते जैसे ये सालभर दिखाई देते हैं। इस मौसम में घर और प्रॉपर्टी को सही तरह से परखा जा सकता है। साथ ही, इस समय बैंक की होम लोन की ब्याज दरें भी कम हैं। इन 4 कारणों से जाने इस समय घर खरीदना कैसे बेहतर है… 1. मकान की बनावट का नहीं मजबूती का भी पता चलेगा मकान की खूबसूरत से ज्यादा उसकी मजबूती जरूरी है। बरसात में प्रॉपर्टी की क्वालिटी का सही पता लगाया जा सकता है। छत या दीवारों पर सीलन, जमीन, खिड़की, दरवाजों और खासतौर पर बाथरूम में नमी नजर आ रही है, तो न खरीदना ही बेहतर होगा। वहीं बरसात में कई जगहों पर पानी भरने की समस्या रहती है इसीलिए ये देखे की पानी निकासी की व्यवस्था है या नहीं। 2. रास्ते की सही स्थिति पता चलेगी घर खरीदते वक्त आसपास की सुविधाएं और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देना चाहिए। बारिश के मौसम में कुछ सड़कों पर पानी भरने, ट्रैफिक और बिजली की समस्या होती है। खासतौर पर मकान या कॉलोनी निर्माताओं द्वारा मुख्य सड़क जोड़े रखने वाली अच्छी सड़क के कई वादे किए जाते हैं, पर असलियत कई बार यह नहीं होती। सड़क असुविधाजनक या जोख़िम भरी हुई तो नहीं है, इसका ध्यान ज़रूर रखें। इन सुविधाओं का अंदाजा बारिश में ही लग सकता है। 3. होम लोन की ब्याज दरों में कटौती पिछले साल 4 बार RBI के रेपो रेट में कटौती के बाद कई बैंकों ने होम लोन की ब्याज में कटौती की। बैंक ऑफ इंडिया 7.10% की सालाना ब्याज दर पर होम लोन दे रहा है। देश का सबसे बड़ा बैंक SBI भी इस समय 7.25% सलाना ब्याज पर लोन दे रहा है। 4. बिजली की परेशानी पर दें ध्यान कई बार देखा जाता है कि बरसात होते ही बिजली चली जाती है। कुछ इलाके ऐसे हैं जहां कई घंटों तक बिजली भी गुल रहती है। आप जिस प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं वहां ऐसी हालत तो नहीं है इसका पता करें। अगर बिजली जाती भी है तो कैंपस और पार्किंग के लिए जनरेटर की सुविधा है या नहीं इस पर सवाल कर सकते हैं। खासतौर पर जब आप आउटर या शांत इलाके में मकान ले रहे हैं तो इसे नजर अंदाज न करें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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