Sunday, 26 Jul 2026 | 12:47 PM

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Gold Silver Price Surge | Pakistan Petrol Hike & Trump Tariff Update

Gold Silver Price Surge | Pakistan Petrol Hike & Trump Tariff Update

नई दिल्ली49 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर मारुति से जुड़ी रही। अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाएं अगले दो साल तक बिना किसी ड्यूटी के जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। वहीं, सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 21 जुलाई को तेजी रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 2,256 रुपए बढ़कर 2.25 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,146 रुपए चढ़कर 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज गिरावट देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान: 2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगले दो साल तक ये दवाएं बिना किसी ड्यूटी के अमेरिका जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. चांदी ₹2256 महंगी होकर ₹2.25 लाख पर पहुंची: 3 दिन में कीमत ₹5,885 बढ़ी, सोना आज ₹2,146 बढ़कर ₹1.45 लाख पर पहुंचा सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 21 जुलाई को तेजी रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 2,256 रुपए बढ़कर 2.25 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,146 रुपए चढ़कर 1.45 लाख रुपए पर पहुंच गया है। 3 दिन में सोना 3,029 रुपए और 5,885 रुपए चांदी महंगी हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. पहली तिमाही में BPCL को ₹3,962 करोड़ का घाटा: कच्चे तेल के दाम बढ़ने का असर; लेकिन रेवेन्यू 23% बढ़कर ₹1.59 लाख करोड़ पहुंचा भारत पेट्रोलियम ने आज 22 जुलाई को जून तिमाही के नतीजे जारी किए। इस तिमाही में कंपनी को ₹3,962 करोड़ का घाटा हुआ है। पिछले साल की इसी तिमाही में ₹6,124 करोड़ का मुनाफा हुआ था। वहीं मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का मुनाफा हुआ था। बीपीसीएल का रेवेन्यू ₹1.59 लाख करोड़ रहा। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 23% ज्यादा है। तब कंपनी का ₹1.29 लाख करोड़ का रेवेन्यू रहा था। तिमाही दर तिमाही आधार पर देखें तो मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ के मुकाबले रेवेन्यू में 18% बढ़ा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. अडाणी पावर का पहली तिमाही में मुनाफा 42% बढ़ा: यह ₹4,806 करोड़ रहा, रेवेन्यू भी 34% बढ़ा; नतीजों के बाद शेयर 1% गिरा अडाणी पावर का अप्रैल-जून तिमाही में कंसॉलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 42% बढ़कर ₹4,806 करोड़ पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹3,385 करोड़ का मुनाफा हुआ था। आज 22 जुलाई को कंपनी ने नतीजे जारी किए। कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू 34% बढ़कर 18,901 करोड़ रुपए हो गया है। पिछले साल की समान तिमाही में यह 14,109 करोड़ रुपए रहा था। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. पाकिस्तान में पेट्रोल 4.93 और डीजल 7.15 रुपया महंगा: पेट्रोल 320.73 और हाई-स्पीड डीजल 367.21 रुपया लीटर मिल रहा, नई कीमतें 22 जुलाई से लागू पाकिस्तानी सरकार ने पेट्रोल के दाम में 4.93 रुपया प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल (HSD) में 7.15 रुपया प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। नई दरें 22 जुलाई से लागू हो गई हैं। दामों में इस बदलाव के बाद अब बाजार में पेट्रोल की नई कीमत 320.73 रुपया लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 367.21 रुपया प्रति लीटर हो गई है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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ICICI Prudential Flexicap Fund Benefits; NAV Growth - Return Investment

ICICI Prudential Flexicap Fund Benefits; NAV Growth – Return Investment

Hindi News Business ICICI Prudential Flexicap Fund Benefits; NAV Growth Return Investment | Rajeev Arora 3 मिनट पहले कॉपी लिंक ICICI प्रूडेंशियल फ्लेक्सीकैप फंड को लॉन्च हुए पांच साल हो गए हैं; इस दौरान इसकी NAV 10 से बढ़कर 20 हो गई है। एक फ्लेक्सीकैप फड होने के नाते, इसे लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेश करने की आजादी है, और यह उन जगहों पर अपने पोर्टफोलियो मिक्स को बदलता रहता है जहां सबसे अच्छे मौके दिखते हैं। यह फंड ‘बॉटम-अप’, ‘हाई-कनविक्शन’ निवेश शैली अपनाता है, जो इसके बेंचमार्क के मुकाबले 60% से जयादा के ‘एक्टिव शेयर’ से पता चलता है। यह वीडियो फंड की मुख्य सोच, पांच सालों में इसके विकास और इक्विटी निवेशकों के लिए लंबे समय के निवेश के महत्व के बारे में बताता है। यह उन लोगों के लिए एक छोटा और आसान वीडियो है जो यह समझना चाहते हैं कि कैसे सोच-समझकर चुने गए स्टॉक्स ने समय के साथ लगातार वेल्थ बनाने में मदद की है। वीडियो में अल्फानॉमिक्स कैपिटल के फाउंडर राजीव अरोड़ा ने क्या कहा जानने के लिए ऊपर वीडियो पर क्लिक करें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगले दो साल तक ये दवाएं बिना किसी ड्यूटी के अमेरिका जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रम्प के इस फैसले का भारतीय फार्मा इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा और अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया है, इसे 12 आसान सवाल-जवाब में समझिए… सवाल 1: ट्रम्प ने जेनेरिक दवाओं के टैरिफ को लेकर क्या ऐलान किया है? जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो सालों तक शून्य टैरिफ जारी रहेगा। दो साल बाद अगले एक साल के लिए टैरिफ 100% और उसके बाद इसे 200% हो जाएगा। सवाल 2: ट्रम्प प्रशासन ने इतना भारी टैरिफ लगाने की क्या वजह बताई है? जवाब: ट्रम्प के मुताबिक, इस नीति का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अमेरिका के भीतर वापस लाना है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को समय सीमा दी गई है, अगर वे अमेरिका के भीतर अपने प्लांट और उपकरण नहीं लगाती हैं, तो उन्हें पेनल्टी के रूप में टैरिफ चुकाना होगा। हालांकि, पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति पहले की तरह ही बनी रहेगी। सवाल 3: अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में जेनेरिक दवाओं का कितना इस्तेमाल होता है? जवाब: अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में डॉक्टरों की लिखी जाने वाली कुल दवाओं में 90% से अधिक हिस्सेदारी जेनेरिक दवाओं की ही होती है। वहां का हेल्थकेयर सिस्टम काफी हद तक सस्ती जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। सवाल 4: इस फैसले का भारत पर क्या और कितना असर पड़ेगा? जवाब: भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। अगर टैरिफ बढ़ाकर 100% और 200% किया जाता है, तो भारतीय दवाओं की लागत अमेरिकी बाजार में काफी बढ़ जाएगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार: साल 2025 में भारत ने कुल 25.8 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹2.49 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात किया। इसमें से 9.7 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹0.94 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात अकेले अमेरिका को हुआ। ये कुल दवाओं का 38% हैं। हेल्थकेयर एनालिटिक्स फर्म IQVIA के मुताबिक, अमेरिकी फार्मेसियों में बिकने वाली कुल जेनेरिक दवाओं के 47% प्रिस्क्रिप्शन भारतीय कंपनियां ही पूरी करती हैं। सवाल 5: क्या 100% या 200% टैरिफ के बाद भी भारतीय दवाएं अमेरिका में टिक पाएंगी? जवाब: हां, भारतीय जेनेरिक दवाएं फिर भी प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती हैं। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय जेनेरिक दवाएं अमेरिका में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 7 से 10 गुना सस्ती बिकती हैं। ऐसे में अगर 100% टैरिफ भी लगा दिया जाता है, तब भी भारतीय दवाएं वहां की ब्रांडेड दवाओं से सस्ती ही रहेंगी। इस अतिरिक्त लागत का अधिकांश हिस्सा अंततः अमेरिकी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मरीजों पर पड़ेगा, न कि भारतीय निर्यात पूरी तरह खत्म होगा। सवाल 6: क्या प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों के पास पहले से अमेरिका में प्लांट हैं? जवाब: हां, भारत की कुछ कंपनियों जैसे सन फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेस, लुपिन, अरबिंदो फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज जैसी प्रमुख कंपनियां अमेरिका में अपने प्लांट संचालित करती हैं। मैसाचुसेट्स और न्यूयॉर्क में सिप्ला अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता बढ़ा रही है। डॉ. रेड्डीज ने कहा है कि कॉमर्शियली फायदेमंद होने पर वे अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। सन फार्मा का कहना है कि अमेरिका में उनका मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त है। सवाल 7: क्या अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन शिफ्ट करना आसान है? जवाब: नहीं, यह बहुत मुश्किल और महंगा सौदा है। जेनेरिक दवाओं का कारोबार ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर है। विशेष रूप से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के लिए कंपनियां भारत और चीन पर निर्भर हैं। अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए भारी पूंजी की जरूरत होगी, जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। सवाल 8: इस पूरी स्थिति से निपटने के लिए भारत को क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब: GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का सुझाव है कि भारत को दो मोर्चों पर काम करना होगा: सवाल 9: अमेरिकी हेल्थकेयर को भारतीय दवाओं से कितनी बचत होती है? जवाब: अमेरिकी लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, इंफेक्शियस डिजीज और मेंटल हेल्थ जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर भारतीय जेनेरिक दवाएं लेते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दवाओं ने अकेले 2022 में अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम के 219 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹21.14 लाख करोड़ बचाए थे। पिछले एक दशक में यह बचत $1.3 ट्रिलियन रही है। सवाल 10: अमेरिका में कौन-कौन सी भारतीय फार्मा कंपनियों की दवाएं ज्यादा बिकती है? जवाब: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला और सन फार्मा जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में सप्लाई करती हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाली भारतीय जेनेरिक दवाओं में शामिल हैं: सवाल 11: क्या यह फैसला ट्रम्प की व्यापक टैरिफ रणनीति का हिस्सा है? जवाब: हां, ट्रम्प प्रशासन का मुख्य जोर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने पर है। इससे पहले भी ब्रांडेड दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन करने या कीमतें कम करने के बदले टैरिफ छूट दी गई थी। इसके अलावा, अमेरिका करीब 60 देशों पर 10% से 12.5% का नया टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिसके दायरे में भारत भी आ सकता है। सवाल 12: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर इसका क्या असर होगा? जवाब: अमेरिका और भारत लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। ऐसे समय में जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने के इस नए ऐलान ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। नॉलेज पार्ट: क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं? जब कोई कंपनी रिसर्च करके नई दवा बनाती है, तो उसे कुछ सालों के लिए पेटेंट मिलता है। इसे ब्रांडेड दवा कहते हैं। पेटेंट खत्म होने के बाद अन्य कंपनियां उसी साल्ट/फार्मूले से सस्ती दवाएं बनाती हैं, जिन्हें ‘जेनेरिक दवा’ कहा जाता है। इनकी गुणवत्ता और असर ब्रांडेड दवा जैसा ही होता

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अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिका में जेनेरिक दवाओं पर ट्रम्प का नया टैरिफ प्लान:2 साल 0%, फिर 100% और 200% ड्यूटी; भारत की फार्मा कंपनियों पर असर संभव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में आयात होने वाली जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अगले दो साल तक ये दवाएं बिना किसी ड्यूटी के अमेरिका जा सकेंगी, लेकिन इसके बाद 100% और फिर 200% तक टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रम्प के इस फैसले का भारतीय फार्मा इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा और अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया है, इसे 12 आसान सवाल-जवाब में समझिए… सवाल 1: ट्रम्प ने जेनेरिक दवाओं के टैरिफ को लेकर क्या ऐलान किया है? जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर बताया कि 1 अगस्त 2026 से अमेरिका में आने वाली सभी जेनेरिक दवाओं पर अगले दो सालों तक शून्य टैरिफ जारी रहेगा। दो साल बाद अगले एक साल के लिए टैरिफ 100% और उसके बाद इसे 200% हो जाएगा। सवाल 2: ट्रम्प प्रशासन ने इतना भारी टैरिफ लगाने की क्या वजह बताई है? जवाब: ट्रम्प के मुताबिक, इस नीति का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक दवाओं के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट अमेरिका के भीतर वापस लाना है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों को समय सीमा दी गई है, अगर वे अमेरिका के भीतर अपने प्लांट और उपकरण नहीं लगाती हैं, तो उन्हें पेनल्टी के रूप में टैरिफ चुकाना होगा। हालांकि, पेटेंटेड, ब्रांडेड या इनोवेटिव दवाओं पर मौजूदा नीति पहले की तरह ही बनी रहेगी। सवाल 3: अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम में जेनेरिक दवाओं का कितना इस्तेमाल होता है? जवाब: अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में डॉक्टरों की लिखी जाने वाली कुल दवाओं में 90% से अधिक हिस्सेदारी जेनेरिक दवाओं की ही होती है। वहां का हेल्थकेयर सिस्टम काफी हद तक सस्ती जेनेरिक दवाओं पर निर्भर है। सवाल 4: इस फैसले का भारत पर क्या और कितना असर पड़ेगा? जवाब: भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ कहा जाता है। अगर टैरिफ बढ़ाकर 100% और 200% किया जाता है, तो भारतीय दवाओं की लागत अमेरिकी बाजार में काफी बढ़ जाएगी। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार: साल 2025 में भारत ने कुल 25.8 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹2.49 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात किया। इसमें से 9.7 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹0.94 लाख करोड़ की दवाओं का निर्यात अकेले अमेरिका को हुआ। ये कुल दवाओं का 38% हैं। हेल्थकेयर एनालिटिक्स फर्म IQVIA के मुताबिक, अमेरिकी फार्मेसियों में बिकने वाली कुल जेनेरिक दवाओं के 47% प्रिस्क्रिप्शन भारतीय कंपनियां ही पूरी करती हैं। सवाल 5: क्या 100% या 200% टैरिफ के बाद भी भारतीय दवाएं अमेरिका में टिक पाएंगी? जवाब: हां, भारतीय जेनेरिक दवाएं फिर भी प्रतिस्पर्धी बनी रह सकती हैं। GTRI की रिपोर्ट के अनुसार, कई भारतीय जेनेरिक दवाएं अमेरिका में ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 7 से 10 गुना सस्ती बिकती हैं। ऐसे में अगर 100% टैरिफ भी लगा दिया जाता है, तब भी भारतीय दवाएं वहां की ब्रांडेड दवाओं से सस्ती ही रहेंगी। इस अतिरिक्त लागत का अधिकांश हिस्सा अंततः अमेरिकी हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मरीजों पर पड़ेगा, न कि भारतीय निर्यात पूरी तरह खत्म होगा। सवाल 6: क्या प्रमुख भारतीय दवा कंपनियों के पास पहले से अमेरिका में प्लांट हैं? जवाब: हां, भारत की कुछ कंपनियों जैसे सन फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेस, लुपिन, अरबिंदो फार्मा, सिप्ला और डॉ. रेड्डीज लेबोरेटरीज जैसी प्रमुख कंपनियां अमेरिका में अपने प्लांट संचालित करती हैं। मैसाचुसेट्स और न्यूयॉर्क में सिप्ला अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता बढ़ा रही है। डॉ. रेड्डीज ने कहा है कि कॉमर्शियली फायदेमंद होने पर वे अमेरिका में उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। सन फार्मा का कहना है कि अमेरिका में उनका मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त है। सवाल 7: क्या अमेरिका में जेनेरिक दवाओं का उत्पादन शिफ्ट करना आसान है? जवाब: नहीं, यह बहुत मुश्किल और महंगा सौदा है। जेनेरिक दवाओं का कारोबार ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर है। विशेष रूप से एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के लिए कंपनियां भारत और चीन पर निर्भर हैं। अमेरिका में नया मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम खड़ा करने के लिए भारी पूंजी की जरूरत होगी, जिससे अमेरिका में दवाओं की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी। सवाल 8: इस पूरी स्थिति से निपटने के लिए भारत को क्या कदम उठाने चाहिए? जवाब: GTRI के संस्थापक अजय श्रीवास्तव का सुझाव है कि भारत को दो मोर्चों पर काम करना होगा: सवाल 9: अमेरिकी हेल्थकेयर को भारतीय दवाओं से कितनी बचत होती है? जवाब: अमेरिकी लोग डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, कैंसर, इंफेक्शियस डिजीज और मेंटल हेल्थ जैसी बीमारियों के इलाज के लिए बड़े पैमाने पर भारतीय जेनेरिक दवाएं लेते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दवाओं ने अकेले 2022 में अमेरिकी हेल्थकेयर सिस्टम के 219 बिलियन डॉलर यानी करीब ₹21.14 लाख करोड़ बचाए थे। पिछले एक दशक में यह बचत $1.3 ट्रिलियन रही है। सवाल 10: अमेरिका में कौन-कौन सी भारतीय फार्मा कंपनियों की दवाएं ज्यादा बिकती है? जवाब: डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सिप्ला और सन फार्मा जैसी प्रमुख भारतीय कंपनियां अमेरिकी बाजार में सप्लाई करती हैं। अमेरिका में सबसे ज्यादा बिकने वाली भारतीय जेनेरिक दवाओं में शामिल हैं: सवाल 11: क्या यह फैसला ट्रम्प की व्यापक टैरिफ रणनीति का हिस्सा है? जवाब: हां, ट्रम्प प्रशासन का मुख्य जोर अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और विदेशी आयात पर निर्भरता घटाने पर है। इससे पहले भी ब्रांडेड दवा निर्माताओं को अमेरिका में उत्पादन करने या कीमतें कम करने के बदले टैरिफ छूट दी गई थी। इसके अलावा, अमेरिका करीब 60 देशों पर 10% से 12.5% का नया टैरिफ लगाने पर विचार कर रहा है, जिसके दायरे में भारत भी आ सकता है। सवाल 12: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर इसका क्या असर होगा? जवाब: अमेरिका और भारत लगातार यह कहते आ रहे हैं कि वे एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। ऐसे समय में जेनेरिक दवाओं पर भारी टैरिफ लगाने के इस नए ऐलान ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। नॉलेज पार्ट: क्या होती हैं जेनेरिक दवाएं? जब कोई कंपनी रिसर्च करके नई दवा बनाती है, तो उसे कुछ सालों के लिए पेटेंट मिलता है। इसे ब्रांडेड दवा कहते हैं। पेटेंट खत्म होने के बाद अन्य कंपनियां उसी साल्ट/फार्मूले से सस्ती दवाएं बनाती हैं, जिन्हें ‘जेनेरिक दवा’ कहा जाता है। इनकी गुणवत्ता और असर ब्रांडेड दवा जैसा ही होता

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Adani Power Q1 Results | Net Profit Rises 42% Share Price Slips

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नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक अडाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का अप्रैल-जून तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 42% बढ़कर ₹4,806 करोड़ पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹3,385 करोड़ का मुनाफा हुआ था। हालांकि, मुनाफे में इस बड़ी बढ़त के बावजूद बुधवार को कंपनी का शेयर करीब 1.39% गिरकर ₹217.31 पर आ गया है। कंपनी का रेवेन्यू 34% बढ़कर ₹18,901 करोड़ कंपनी की टोटल इनकम सालाना आधार पर 33% बढ़कर ₹19,322 करोड़ हो गई। यह पिछले साल की समान तिमाही में 14,573 करोड़ रुपए रही थी। वहीं कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू 34% बढ़कर 18,901 करोड़ रुपए हो गया है। पिछले साल की समान तिमाही में यह 14,109 करोड़ रुपए रहा था। कॉन्सोलिडेटेड मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन स्टैंडअलोन: यह केवल एक कंपनी या यूनिट के वित्तीय प्रदर्शन को दर्शाता है। इसमें उसकी आय, व्यय, और मुनाफा शामिल होता है। कॉन्सोलिडेटेड: यह पूरे ग्रुप या कंपनी की कुल वित्तीय स्थिति को दर्शाता है, जिसमें सभी सहायक कंपनियों और यूनिट्स का वित्तीय प्रदर्शन एक साथ दिखाए जाते हैं। अडाणी पावर का शेयर एक साल में 84% चढ़ा अडाणी पावर का शेयर पिछले एक महीने में 7% गिरा है। पिछले छह महीने में 54% चढ़ा और बीते एक साल में 84% चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 83.79 हजार करोड़ रुपए है। 1996 में हुई थी अडाणी पावर की शुरुआत अडाणी पावर लिमिटेड (APL) की शुरुआत 22 अगस्त 1996 को हुई थी। यह देश की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्टर थर्मल पावर प्रोड्यूसर है। कंपनी के पास 15,250 मेगावॉट पावर जनरेशन की क्षमता है। इसके थर्मल प्लांट्स गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और झारखंड में हैं। वहीं गुजरात में 40 मेगावॉट कैपेसिटी का सोलर प्लांट है। क्योटो प्रोटोकॉल के क्लीन डेवलपमेंट मीशन (CDM) के तहत रजिस्टर्ड कोयला-बेस्ड सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स बनाने वाली कंपनी है। ये खबर भी पढ़ें… चांदी ₹3034 महंगी होकर ₹2.26 लाख पर पहुंची: 3 दिन में कीमत ₹10764 बढ़ी, सोना आज ₹2,303 बढ़कर ₹1.43 लाख पर पहुंचा सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 21 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 3,034 रुपए बढ़कर 2.26 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,303 रुपए चढ़कर 1.43 लाख रुपए पर पहुंच गया है। 3 दिन में सोना 4,281 रुपए और 10,764 रुपए चांदी महंगी हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Adani Power Q1 Results | Net Profit Rises 42% Share Price Slips

Adani Power Q1 Results | Net Profit Rises 42% Share Price Slips

नई दिल्ली3 मिनट पहले कॉपी लिंक अडाणी पावर ने वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का अप्रैल-जून तिमाही में कॉन्सोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 42% बढ़कर ₹4,806 करोड़ पर पहुंच गया है। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी को ₹3,385 करोड़ का मुनाफा हुआ था। हालांकि, मुनाफे में इस बड़ी बढ़त के बावजूद बुधवार को कंपनी का शेयर करीब 1.39% गिरकर ₹217.31 पर आ गया है। कंपनी का रेवेन्यू 34% बढ़कर ₹18,901 करोड़ कंपनी की टोटल इनकम सालाना आधार पर 33% बढ़कर ₹19,322 करोड़ हो गई। यह पिछले साल की समान तिमाही में 14,573 करोड़ रुपए रही थी। वहीं कंपनी का ऑपरेशन से रेवेन्यू 34% बढ़कर 18,901 करोड़ रुपए हो गया है। पिछले साल की समान तिमाही में यह 14,109 करोड़ रुपए रहा था। कॉन्सोलिडेटेड मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन स्टैंडअलोन: यह केवल एक कंपनी या यूनिट के वित्तीय प्रदर्शन को दर्शाता है। इसमें उसकी आय, व्यय, और मुनाफा शामिल होता है। कॉन्सोलिडेटेड: यह पूरे ग्रुप या कंपनी की कुल वित्तीय स्थिति को दर्शाता है, जिसमें सभी सहायक कंपनियों और यूनिट्स का वित्तीय प्रदर्शन एक साथ दिखाए जाते हैं। अडाणी पावर का शेयर एक साल में 84% चढ़ा अडाणी पावर का शेयर पिछले एक महीने में 7% गिरा है। पिछले छह महीने में 54% चढ़ा और बीते एक साल में 84% चढ़ा है। कंपनी का मार्केट कैप 83.79 हजार करोड़ रुपए है। 1996 में हुई थी अडाणी पावर की शुरुआत अडाणी पावर लिमिटेड (APL) की शुरुआत 22 अगस्त 1996 को हुई थी। यह देश की सबसे बड़ी प्राइवेट सेक्टर थर्मल पावर प्रोड्यूसर है। कंपनी के पास 15,250 मेगावॉट पावर जनरेशन की क्षमता है। इसके थर्मल प्लांट्स गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और झारखंड में हैं। वहीं गुजरात में 40 मेगावॉट कैपेसिटी का सोलर प्लांट है। क्योटो प्रोटोकॉल के क्लीन डेवलपमेंट मीशन (CDM) के तहत रजिस्टर्ड कोयला-बेस्ड सुपरक्रिटिकल थर्मल पावर प्रोजेक्ट्स बनाने वाली कंपनी है। ये खबर भी पढ़ें… चांदी ₹3034 महंगी होकर ₹2.26 लाख पर पहुंची: 3 दिन में कीमत ₹10764 बढ़ी, सोना आज ₹2,303 बढ़कर ₹1.43 लाख पर पहुंचा सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 21 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 3,034 रुपए बढ़कर 2.26 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 2,303 रुपए चढ़कर 1.43 लाख रुपए पर पहुंच गया है। 3 दिन में सोना 4,281 रुपए और 10,764 रुपए चांदी महंगी हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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ICICI Prudential Flexicap Fund Performance

ICICI Prudential Flexicap Fund Performance

19 मिनट पहले कॉपी लिंक ICICI प्रूडेंशियल फ्लेक्सीकैप फंड को लॉन्च हुए पांच साल हो गए हैं; इस दौरान इसकी NAV 10 से बढ़कर 20 हो गई है। एक फ्लेक्सीकैप फड होने के नाते, इसे लार्ज-कैप, मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में निवेश करने की आजादी है, और यह उन जगहों पर अपने पोर्टफोलियो मिक्स को बदलता रहता है जहां सबसे अच्छे मौके दिखते हैं। यह फंड ‘बॉटम-अप’, ‘हाई-कनविक्शन’ निवेश शैली अपनाता है, जो इसके बेंचमार्क के मुकाबले 60% से जयादा के ‘एक्टिव शेयर’ से पता चलता है। यह वीडियो फंड की मुख्य सोच, पांच सालों में इसके विकास और इक्विटी निवेशकों के लिए लंबे समय के निवेश के महत्व के बारे में बताता है। यह उन लोगों के लिए एक छोटा और आसान वीडियो है जो यह समझना चाहते हैं कि कैसे सोच-समझकर चुने गए स्टॉक्स ने समय के साथ लगातार वेल्थ बनाने में मदद की है। वीडियो में अल्फानॉमिक्स कैपिटल के फाउंडर राजीव अरोड़ा ने क्या कहा जानने के लिए ऊपर वीडियो पर क्लिक करें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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The habit of plucking eyelashes has become a business worth Rs 77 crore.

The habit of plucking eyelashes has become a business worth Rs 77 crore.

Hindi News Business The Habit Of Plucking Eyelashes Has Become A Business Worth Rs 77 Crore. लंदन2 मिनट पहले कॉपी लिंक टिकटॉक शॉप के मुताबिक जून में यूके (ब्रिटेन) में उसकी बिक्री सालाना 30% से ज्यादा बढ़ी। अब हर दिन 6,000 से ज्यादा लाइवस्ट्रीम होते हैं।-प्रतीकात्मक फोटो डेजी केली वर्षों तक अपनी पलकें नोचती रहीं। कोविड महामारी के दौर में जब ब्यूटी सैलून बंद हो गए, तो उन्होंने पलकें दोबारा उगाने के लिए एक सीरम बनाया। 2020 में मां की रसोई की मेज से ‘ग्लो फॉर इट’ नाम का बिजनेस शुरू किया। आज यह कंपनी सालाना 60 लाख पाउंड (~77.30 करोड़) का बिजनेस करती है। इसकी 40% से ज्यादा बिक्री टिकटॉक शॉप यूके से आती है- खास तौर पर लाइवस्ट्रीम से। बीबीसी वर्ल्ड की रिपोर्ट में 27 साल की डेजी बताती हैं, ‘लाइव शॉपिंग लोगों को वह जुड़ाव देती है, जिसकी हम सबको चाहत है। 12 घंटे के एक टिकटॉक लाइव सेशन से हमने 1.29 करोड़ की कमाई कर ली।’ उनका स्टूडियो रोज कम से कम छह घंटे लाइव रहता है। अलग-अलग प्रेजेंटर प्रोडक्ट दिखाते और खरीदारों के सवालों के जवाब देते हैं। डेजी कहती हैं, ‘यह कुछ ऐसा है जैसे आपकी दुकान में एक साथ 500 लोग खड़े हों।’ इंस्टाग्राम लाइव, यूट्यूब शॉपिंग, ईबे और अमेजन लाइव जैसे कई प्लेटफॉर्म अब लाइव शॉपिंग की रेस में हैं। रिटेल एजेंसी सैवी मार्केटिंग के एक सर्वे के मुताबिक, 30% खरीदारों ने माना कि उन्होंने किसी लाइव शॉपिंग इवेंट से खरीदारी की है। सैवी की सीईओ कैथरीन शटलवर्थ कहती हैं, ‘बड़े रिटेलर्स को इसे गंभीरता से लेना होगा।’ टिकटॉक शॉप के मुताबिक जून में यूके (ब्रिटेन) में उसकी बिक्री सालाना 30% से ज्यादा बढ़ी। अब हर दिन 6,000 से ज्यादा लाइवस्ट्रीम होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वॉल्वरहैम्प्टन के हलाल बुचर मैनी मलिक ने महज एक स्मार्टफोन और लाइटिंग किट के सहारे एक टिकटॉक लाइव में करीब 200 दर्शक जुटा लिए। वे बताते हैं, “बीते हफ्ते तीन घंटे के लाइव में हमने करीब 10 लाख का मीट बेच दिया, जबकि दुकान में इतना बेचने में 3-4 दिन लग जाते।’ ज्वेलरी ब्रांड ‘एडोरिना’ की संस्थापक बुकेट सेविक ने नौकरी छोड़कर फरवरी में बिजनेस शुरू किया था। मई में टिकटॉक लाइव सेलिंग शुरू करने के बाद उनके ऑर्डर प्रति माह 50 से बढ़कर 500 प्रति हफ्ता हो गए। वे कहती हैं, ‘मैं जब चाहूं लाइव जा सकती हूं- बेटी को सुलाकर बस लाइव ऑन कर देती हूं।’ लेकिन इस चमक के पीछे चिंता भी है। सैवी के सर्वे में जेन-वाई (30-45 वर्ष) और जेन-जी (14-29 वर्ष) के 66% खरीदारों ने माना कि प्रोडक्ट के ‘सोल्ड आउट’ या वायरल होने से खरीदारी की इच्छा बढ़ जाती है। फ्री लोन सलाह सर्विस ‘मनी वेलनेस’ की रेबेका लैम्ब चेताती हैं, ‘हर बार डील झपटने पर दिमाग को वही डोपामाइन झटका मिलता है, जो जुए में मिलता है और वन-टैप पेमेंट में तो दिमाग को खर्च का एहसास होने से पहले ही पैसा निकल जाता है।’ लाइव शॉपिंग फ्री नहीं, 15% तक कमीशन लाइव शॉपिंग मुफ्त नहीं है। टिकटॉक शॉप यूके 9% तक कमीशन लेती है। ईबे के सामान्य मार्केटप्लेस सेलर्स को कैटेगरी के हिसाब से 7-15% तक कमीशन देने होते हैं। इसके लाइव सेलिंग फॉर्मेट ‘ईबे लाइव’ पर पेमेंट प्रोसेसिंग समेत कुल फीस 8.42% तक जाती है। मैनी मलिक कहती हैं, ‘मीट के धंधे में मार्जिन वैसे भी कम होता है। यह फीस भारी लगती है, पर मुनाफा फिर भी बचा है।’ दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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The habit of plucking eyelashes has become a business worth Rs 77 crore.

The habit of plucking eyelashes has become a business worth Rs 77 crore.

Hindi News Business The Habit Of Plucking Eyelashes Has Become A Business Worth Rs 77 Crore. लंदन19 मिनट पहले कॉपी लिंक टिकटॉक शॉप के मुताबिक जून में यूके (ब्रिटेन) में उसकी बिक्री सालाना 30% से ज्यादा बढ़ी। अब हर दिन 6,000 से ज्यादा लाइवस्ट्रीम होते हैं।-प्रतीकात्मक फोटो डेजी केली वर्षों तक अपनी पलकें नोचती रहीं। कोविड महामारी के दौर में जब ब्यूटी सैलून बंद हो गए, तो उन्होंने पलकें दोबारा उगाने के लिए एक सीरम बनाया। 2020 में मां की रसोई की मेज से ‘ग्लो फॉर इट’ नाम का बिजनेस शुरू किया। आज यह कंपनी सालाना 60 लाख पाउंड (~77.30 करोड़) का बिजनेस करती है। इसकी 40% से ज्यादा बिक्री टिकटॉक शॉप यूके से आती है- खास तौर पर लाइवस्ट्रीम से। बीबीसी वर्ल्ड की रिपोर्ट में 27 साल की डेजी बताती हैं, ‘लाइव शॉपिंग लोगों को वह जुड़ाव देती है, जिसकी हम सबको चाहत है। 12 घंटे के एक टिकटॉक लाइव सेशन से हमने 1.29 करोड़ की कमाई कर ली।’ उनका स्टूडियो रोज कम से कम छह घंटे लाइव रहता है। अलग-अलग प्रेजेंटर प्रोडक्ट दिखाते और खरीदारों के सवालों के जवाब देते हैं। डेजी कहती हैं, ‘यह कुछ ऐसा है जैसे आपकी दुकान में एक साथ 500 लोग खड़े हों।’ इंस्टाग्राम लाइव, यूट्यूब शॉपिंग, ईबे और अमेजन लाइव जैसे कई प्लेटफॉर्म अब लाइव शॉपिंग की रेस में हैं। रिटेल एजेंसी सैवी मार्केटिंग के एक सर्वे के मुताबिक, 30% खरीदारों ने माना कि उन्होंने किसी लाइव शॉपिंग इवेंट से खरीदारी की है। सैवी की सीईओ कैथरीन शटलवर्थ कहती हैं, ‘बड़े रिटेलर्स को इसे गंभीरता से लेना होगा।’ टिकटॉक शॉप के मुताबिक जून में यूके (ब्रिटेन) में उसकी बिक्री सालाना 30% से ज्यादा बढ़ी। अब हर दिन 6,000 से ज्यादा लाइवस्ट्रीम होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वॉल्वरहैम्प्टन के हलाल बुचर मैनी मलिक ने महज एक स्मार्टफोन और लाइटिंग किट के सहारे एक टिकटॉक लाइव में करीब 200 दर्शक जुटा लिए। वे बताते हैं, “बीते हफ्ते तीन घंटे के लाइव में हमने करीब 10 लाख का मीट बेच दिया, जबकि दुकान में इतना बेचने में 3-4 दिन लग जाते।’ ज्वेलरी ब्रांड ‘एडोरिना’ की संस्थापक बुकेट सेविक ने नौकरी छोड़कर फरवरी में बिजनेस शुरू किया था। मई में टिकटॉक लाइव सेलिंग शुरू करने के बाद उनके ऑर्डर प्रति माह 50 से बढ़कर 500 प्रति हफ्ता हो गए। वे कहती हैं, ‘मैं जब चाहूं लाइव जा सकती हूं- बेटी को सुलाकर बस लाइव ऑन कर देती हूं।’ लेकिन इस चमक के पीछे चिंता भी है। सैवी के सर्वे में जेन-वाई (30-45 वर्ष) और जेन-जी (14-29 वर्ष) के 66% खरीदारों ने माना कि प्रोडक्ट के ‘सोल्ड आउट’ या वायरल होने से खरीदारी की इच्छा बढ़ जाती है। फ्री लोन सलाह सर्विस ‘मनी वेलनेस’ की रेबेका लैम्ब चेताती हैं, ‘हर बार डील झपटने पर दिमाग को वही डोपामाइन झटका मिलता है, जो जुए में मिलता है और वन-टैप पेमेंट में तो दिमाग को खर्च का एहसास होने से पहले ही पैसा निकल जाता है।’ लाइव शॉपिंग फ्री नहीं, 15% तक कमीशन लाइव शॉपिंग मुफ्त नहीं है। टिकटॉक शॉप यूके 9% तक कमीशन लेती है। ईबे के सामान्य मार्केटप्लेस सेलर्स को कैटेगरी के हिसाब से 7-15% तक कमीशन देने होते हैं। इसके लाइव सेलिंग फॉर्मेट ‘ईबे लाइव’ पर पेमेंट प्रोसेसिंग समेत कुल फीस 8.42% तक जाती है। मैनी मलिक कहती हैं, ‘मीट के धंधे में मार्जिन वैसे भी कम होता है। यह फीस भारी लगती है, पर मुनाफा फिर भी बचा है।’ दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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