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टॉप-10 में 4 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹1.43 लाख करोड़ बढ़ा:SBI टॉप गेनर, वैल्यू ₹63,922 करोड़ बढ़ी; LIC को सबसे ज्यादा नुकसान

टॉप-10 में 4 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹1.43 लाख करोड़ बढ़ा:SBI टॉप गेनर, वैल्यू ₹63,922 करोड़ बढ़ी; LIC को सबसे ज्यादा नुकसान

बीते हफ्ते देश की टॉप 10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 के मार्केट कैपिटलाइजेशन में कुल लगभग 1.43 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। हफ्ते के दौरान मार्केट कैप बढ़ाने वाली 4 कंपनियों में SBI के अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, TCS और लार्सन एंड टुब्रो शामिल रहीं। SBI के मार्केट कैप में ₹63,922.03 करोड़ की सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही बैंक की कुल मार्केट वैल्युएशन बढ़कर ₹10.12 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई। रिलायंस की वैल्यू ₹32,816 करोड़ बढ़ी वहीं रिलायंस की मार्केट वैल्यू ₹32,816.4 करोड़ बढ़कर ₹18,01,925.19 करोड़ हो गई। इसके अलावा TCS की वैल्यू में ₹31,875.35 करोड़ का उछाल आया और इसका टोटल मार्केट कैप ₹8.87 लाख करोड़ पर पहुंच गया। वहीं LT का मार्केट कैप ₹14,637.76 करोड़ बढ़कर ₹5,56,482.45 करोड़ हो गया है। LIC को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ दूसरी तरफ टॉप-10 में शामिल अन्य 6 बड़ी कंपनियों की वैल्युएशन कुल मिलाकर ₹1.23 लाख करोड़ घटी है। यह 6 कंपनियां भारती एयरटेल, HDFC बैंक, ICICI बैंक, बजाज फाइनेंस, LIC और हिंदुस्तान यूनिलीवर हैं। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

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टॉप-10 में 4 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹1.43 लाख करोड़ बढ़ा:SBI टॉप गेनर, वैल्यू ₹63,922 करोड़ बढ़ी; LIC को सबसे ज्यादा नुकसान

टॉप-10 में 4 कंपनियों का मार्केट-कैप ₹1.43 लाख करोड़ बढ़ा:SBI टॉप गेनर, वैल्यू ₹63,922 करोड़ बढ़ी; LIC को सबसे ज्यादा नुकसान

बीते हफ्ते देश की टॉप 10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 के मार्केट कैपिटलाइजेशन में कुल लगभग 1.43 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली कंपनी बनकर उभरी है। हफ्ते के दौरान मार्केट कैप बढ़ाने वाली 4 कंपनियों में SBI के अलावा रिलायंस इंडस्ट्रीज, TCS और लार्सन एंड टुब्रो शामिल रहीं। SBI के मार्केट कैप में ₹63,922.03 करोड़ की सबसे बड़ी बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही बैंक की कुल मार्केट वैल्युएशन बढ़कर ₹10.12 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई। रिलायंस की वैल्यू ₹32,816 करोड़ बढ़ी वहीं रिलायंस की मार्केट वैल्यू ₹32,816.4 करोड़ बढ़कर ₹18,01,925.19 करोड़ हो गई। इसके अलावा TCS की वैल्यू में ₹31,875.35 करोड़ का उछाल आया और इसका टोटल मार्केट कैप ₹8.87 लाख करोड़ पर पहुंच गया। वहीं LT का मार्केट कैप ₹14,637.76 करोड़ बढ़कर ₹5,56,482.45 करोड़ हो गया है। LIC को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ दूसरी तरफ टॉप-10 में शामिल अन्य 6 बड़ी कंपनियों की वैल्युएशन कुल मिलाकर ₹1.23 लाख करोड़ घटी है। यह 6 कंपनियां भारती एयरटेल, HDFC बैंक, ICICI बैंक, बजाज फाइनेंस, LIC और हिंदुस्तान यूनिलीवर हैं। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है।

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New Vehicle Fuel Norms 2027

New Vehicle Fuel Norms 2027

Hindi News Business New Vehicle Fuel Norms 2027 | Petrol Diesel Cars Costlier Hybrid EV Cheaper नई दिल्ली16 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्र सरकार ने यात्री वाहनों के लिए नए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी मानकों का मसौदा यानी ड्राफ्ट जारी किया है। ये नए नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू होंगे। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य कारों की ईंधन दक्षता यानी माइलेज बढ़ाना और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना है। इससे एथेनॉल, हाइब्रिड और EV कारें सस्ती हो सकती हैं और ज्यादा प्रदूषण वाली पेट्रोल-डीजल कारें महंगी हो सकती हैं। सस्ती क्यों हो सकती हैं नई पॉलिसी में सरकार कंपनियों को EV और हाइब्रिड कारें बेचने पर ‘सुपर क्रेडिट’ देगी। अगर कोई कंपनी एक इलेक्ट्रिक कार बेचती है, तो उसे कागजों पर 3 कारों के बराबर गिना जाएगा। एक हाइब्रिड कार को 1.6 कारों के बराबर गिना जाएगा। इससे कंपनियों के लिए अपना प्रदूषण कम करने का लक्ष्य पूरा करना आसान हो जाएगा। ऐसे में कंपनियां इन कारों को आकर्षक कीमतों या ऑफर्स के साथ बेच सकती हैं ताकि ये ज्यादा बिकें। महंगी क्यों हो सकती हैं: ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाली (यानी कम माइलेज वाली) कारें कंपनियों के लिए मुसीबत बनेंगी। अगर किसी कंपनी की कारों का औसत प्रदूषण तय सीमा से ज्यादा होता है, तो उसे घाटा होगा। इस घाटे को भरने के लिए कंपनियों को दूसरी कंपनियों या सरकार से क्रेडिट खरीदने होंगे, जिनकी कीमत 2,500 रुपए से लेकर 4,500 रुपए प्रति ग्राम कार्बन डाई ऑक्साइड तक होगी। कंपनियां इस भारी जुर्माने का बोझ अपनी जेब से नहीं भरेंगी, बल्कि वे ज्यादा प्रदूषण वाली कारों की कीमत बढ़ाकर इसे ग्राहकों से वसूलेंगी। इन बदलावों से ऑटो कंपनियों की पूरी रणनीति बदल जाएगी। वे पर्यावरण के अनुकूल तकनीक वाले मॉडल ज्यादा लॉन्च करेंगी। पेट्रोल-डीजल मॉडल पीछे छूटेंगे। E85 और E100 एथेनॉल वाली कारें लेने पर भी फायदा होगा ई85, ई100 कारों पर क्या असर होगा? फ्लेक्स फ्यूल कारें यानी 85%-100% तक एथेनॉल पर चलने वाली पेट्रोल कारें। इन्हें 22.3% की छूट मिलेगी। कंपनी एक फ्लेक्स फ्यूल कार बेचेगी तो कागजों पर 1.1 के बराबर गिना जाएगा। ई20 पेट्रोल कारें कैसे प्रभावित होंगी? नई पॉलिसी में अगर आप ई20 वाली कार खरीदते हैं, तो सरकार कंपनी के खाते में उस कार से निकलने वाले धुएं (CO2) को 8% कम मानेगी। यानी प्रदूषण लक्ष्य पाने में मददगार होंगी। ई20 वाली कारें सस्ती होंगी या महंगी? कारों में ईंधन बचाने वाली नई तकनीकें (जैसे टायर प्रेशर मॉनिटरिंग, एलईडी लाइट्स, बेहतर गियरबॉक्स) अनिवार्य होंगे। शुरुआती कीमत बढ़ सकती है। क्या पुरानी कार पर कोई असर पड़ेगा? नहीं। यह नियम केवल 1 अप्रैल 2027 के बाद बनने वाली या विदेश से आयात होने वाली नई कारों (एम1 कैटेगरी) पर ही लागू किया जाएगा। क्या कारों का गियर सिस्टम भी बदलेगा? पॉलिसी में 6-स्पीड या उससे ज्यादा गियर वाले बॉक्स को बढ़ावा दिया गया है, क्योंकि ये 5% तक तेल बचाता है। क्या माइलेज अलग ढंग से नापा जाएगा? हां, अब भारत पुराने एमआईडीसी सिस्टम से हटकर वैश्विक स्तर के डब्ल्यूएलटीपी की ओर बढ़ेगा, जो असली माइलेज के ज्यादा करीब है। कंपनियों की ‘पासबुक’ का क्या मतलब? हर कंपनी का एक खाता होगा, जिसे ‘पासबुक’ कहा जाएगा। इसमें उनके अच्छे प्रदर्शन (क्रेडिट) या खराब प्रदर्शन (डेबिट) का पूरा हिसाब होगा। क्या ‘क्रेडिट’ खरीदा-बेचा जा सकेगा? हां, पॉलिसी में ‘पूलिंग’ का विकल्प है, ज्यादा क्लीन कारें बेचने वाली कंपनी दूसरी कंपनी को बचत बेच सकती है। नए नियम किन पर लागू नहीं होंगे? जो कंपनियां साल में 1,000 से कम कारें बेचती हैं, उन्हें इससे छूट मिलेगी। इस पॉलिसी का अंतिम लक्ष्य क्या है? सरकार का मकसद भारत की तेल आयात पर निर्भरता कम करना, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाना और 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य हासिल करना है। क्या डीजल कारें बंद हो सकती हैं? नई पॉलिसी डीजल कारें बंद होने की बात नहीं कहती, लेकिन उन्हें कंपनियों के लिए ‘घाटे का सौदा’ बना देती है। डीजल को पेट्रोल की तरह फिक्स छूट नहीं मिलती। इसे ज्यादा ईंधन पीने वाला माना जाता है। जुर्माने से बचने को कंपनियां डीजल कारों के दाम बढ़ा सकती हैं, जिससे बिक्री पर असर संभव। ये खबर भी पढ़ें… रेडमी नोट 17 स्मार्टफोन 8,000mAh बैटरी के साथ लॉन्च: शुरुआती कीमत ₹27,999; 7 इंच एमोलेड डिस्प्ले और स्नैपड्रैगन 4 जेन 4 प्रोसेसर मिलेगा शाओमी ने भारत में अपना नया मिड-रेंज स्मार्टफोन रेडमी नोट 17 लॉन्च कर दिया है। इस फोन में 8,000mAh की बड़ी बैटरी, स्नैपड्रैगन 4 जेन 4 चिपसेट और 6.9-inch का AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। फोन की शुरुआती कीमत 27,999 रुपए है। इसकी बिक्री 12 अगस्त से शुरू होगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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मूड खराब तो छुट्टी; मानसिक सेहत का इलाज या कामचोरी?:चीन की 'अनहैप्पी लीव' से छिड़ी बहस, उद्योगपति गोयनका बोले- भारत में भी बहस जरूरी

मूड खराब तो छुट्टी; मानसिक सेहत का इलाज या कामचोरी?:चीन की 'अनहैप्पी लीव' से छिड़ी बहस, उद्योगपति गोयनका बोले- भारत में भी बहस जरूरी

क्या दफ्तर न आने के लिए सिर्फ ‘मन नहीं है’ कहना काफी है? न मेडिकल सर्टिफिकेट, न परिवार में इमरजेंसी, न बॉस को लंबी सफाई- बस इतना कहना कि आज मूड ठीक नहीं, और छुट्टी मंजूर। यह सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन चीन की एक रिटेल कंपनी ने ऐसी व्यवस्था लागू कर रखी है। अब यह आइडिया भारत में भी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि उद्योगपति हर्ष गोयनका ने इसे सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए सवाल किया- क्या भारत को भी ऐसी ‘अनहैप्पी लीव’ की जरूरत है? गोयनका ने अपनी पोस्ट में लिखा कि चीनी रिटेलर पैंग डॉन्ग लाई अपने कर्मचारियों को 10 दिन की पेड ‘अनहैप्पी लीव’ देती है। कंपनी के संस्थापक यू डोंगलाई का फलसफा सीधा है- ‘अगर खुश नहीं हो, तो काम पर मत आओ।’ सबसे दिलचस्प बात यह कि मैनेजर इस छुट्टी को मना नहीं कर सकते। ने आगे लिखा कि यह भले ही गैर-व्यावहारिक कदम नजर आए, लेकिन भारतीय संदर्भ में इस पर व्यापक बहस जरूरी है- या फिर बर्नआउट रोकने और लोगों को दफ्तर आने के लिए उत्साहित करने का कोई बेहतर तरीका खोजा जाए। पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर यूजर्स बंट गए। एक यूजर ने दिलचस्प तर्क दिया कि दफ्तर की नाखुशी हमेशा दफ्तर की वजह से नहीं होती- निजी जिंदगी भी साथ चलती है। ऐसे में कुछ दिन का ब्रेक दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद हो सकता है। एक और यूजर ने इसे ‘जीनियस आइडिया’ बताते हुए कहा कि अगर भारतीय कंपनियां यह लागू करें, तो आधे कर्मचारी पहले से ज्यादा खुश होकर दफ्तर आएंगे, क्योंकि बर्नआउट को वफादारी नहीं समझा जाना चाहिए। एक यूजर ने प्रैक्टिकल एंगल दिया- यह पॉलिसी असल में इसलिए बनाई जाती है, ताकि कर्मचारी छुट्टी के लिए झूठे बहाने न गढ़ें; ईमानदारी से बताने पर कोई सवाल नहीं पूछा जाता। लेकिन हर कोई इससे सहमत नहीं। एक यूजर ने तीखा जवाब दिया कि 10 दिन की छुट्टी साल भर की खराब वर्क कल्चर को ठीक नहीं कर सकती। कर्मचारी इसकी जगह बेहतर काम के घंटे और समय की इज्जत करने वाले मैनेजर चुनना पसंद करेंगे। पैंग डॉन्ग लाई की ‘अनहैप्पी लीव’ पॉलिसी में काम के घंटे 7 साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, यह पॉलिसी 2024 में कंपनी के संस्थापक यू डोंगलाई ने शुरू की थी। कर्मचारी बिना विस्तृत वजह बताए साल में 10 अतिरिक्त ‘पेड लीव’ ले सकते हैं, और मैनेजर इसे मना नहीं कर सकते। मना करना नियम का उल्लंघन माना जाता है। यही नहीं, कर्मचारी एक दिन में सिर्फ सात घंटे काम करते हैं, वीकेंड पर पूरी छुट्टी मिलती है, सालाना 30-40 दिन की छुट्टियां मिलती हैं, और चीनी नववर्ष पर पांच अतिरिक्त दिन अलग से दिए जाते हैं।

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3-6-9 Rule for Salaried and Freelancers

3-6-9 Rule for Salaried and Freelancers

18 मिनट पहले कॉपी लिंक किसी भी अचानक आई मुसीबत जैसे मेडिकल इमरजेंसी, कार खराबी या नौकरी जाने की स्थिति में आपकी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और पुरानी सेविंग्स प्रभावित न हों, इसके लिए ‘इमरजेंसी फंड’ होना बहुत जरूरी है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही फाइनेंशियल प्लानिंग वही है, जिसमें इमरजेंसी फंड अलग से रखा जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर मुख्य सेविंग्स पर असर न पड़े। टैक्स और फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म ‘क्लियर टैक्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक सैलरीड क्लास और इरेगुलर इनकम जैसे फ्रीलांसर्स वाले लोग इमरजेंसी फंड तैयार करने के लिए 3-6-9 रूल का इस्तेमाल कर सकते हैं। आइए समझते हैं कि यह रूल कैसे काम करता है और आपको कितना फंड बनाना चाहिए… क्या है इमरजेंसी फंड का 3-6-9 रूल? 3-6-9 रूल एक आसान नियम है, जो आपको अपनी लाइफस्टाइल और जॉब प्रोफाइल के हिसाब से यह बताता है कि आपको कितने महीने का खर्च बचाकर रखना चाहिए: 3 महीने का खर्च: अगर आप सिंगल हैं और आपकी इनकम बिल्कुल स्टेबल (स्थिर सैलरी) है। 6 महीने का खर्च: अगर आपकी इनकम स्टेबल है, लेकिन आपके ऊपर परिवार या अन्य निर्भर (Dependents) लोग हैं। 9 महीने का खर्च: अगर आप सिंगल हैं, लेकिन आपकी कमाई अनिश्चित या इरेगुलर है (जैसे फ्रीलांसर्स या प्रोजेक्ट बेस्ड काम)। 12 महीने का खर्च: अगर आपकी कमाई इरेगुलर है और साथ ही परिवार की जिम्मेदारी भी आपके ही कंधों पर है। इसके अलावा, अगर परिवार में कोई गंभीर बीमारी है या लोन/ईएमआई चल रही है, तो इमरजेंसी फंड का साइज और बड़ा रखा जा सकता है। एग्जांपल से समझें: कितना पैसा जमा करना होगा? मान लीजिए आपका हर महीने का जरूरी खर्च ₹25,000 है: 3 महीने के लिए: ₹25,000 × 3 = ₹75,000 6 महीने के लिए: ₹25,000 × 6 = ₹1,50,000 9 महीने के लिए: ₹25,000 × 9 = ₹2,25,000 12 महीने के लिए: ₹25,000 × 12 = ₹3,00,000 शुरुआत छोटे से करें, फिर धीरे-धीरे फंड बढ़ाएं अगर एक बार में बड़ा फंड बनाना मुश्किल लग रहा है, तो छोटे टारगेट से शुरुआत करें। सबसे पहले 3 महीने के खर्च का लक्ष्य रखें। आप हर महीने ₹500 से ₹1,000 या अपनी क्षमतानुसार सेविंग शुरू कर सकते हैं। अपने बैंक अकाउंट से FD या लिक्विड म्यूचुअल फंड में ऑटो-डेबिट (SIP) लगा दें, ताकि हर महीने पैसा अपने आप कट जाए। ऑफिस बोनस, टैक्स रिफंड या साइड इनकम से मिले एक्स्ट्रा पैसे को सीधा इमरजेंसी फंड में डालें। समय-समय पर फंड का रिव्यू करना भी जरूरी महंगाई, लोन की किस्तें या जीवनशैली बदलने के साथ हर महीने का खर्च भी बदलता रहता है। इसलिए हर 6 महीने या एक साल में अपने खर्चों का दोबारा हिसाब लगाएं और उसके हिसाब से अपने इमरजेंसी फंड का टारगेट अपडेट करते रहें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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3-6-9 Rule for Salaried and Freelancers

3-6-9 Rule for Salaried and Freelancers

38 मिनट पहले कॉपी लिंक किसी भी अचानक आई मुसीबत जैसे मेडिकल इमरजेंसी, कार खराबी या नौकरी जाने की स्थिति में आपकी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और पुरानी सेविंग्स प्रभावित न हों, इसके लिए ‘इमरजेंसी फंड’ होना बहुत जरूरी है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि सही फाइनेंशियल प्लानिंग वही है, जिसमें इमरजेंसी फंड अलग से रखा जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर मुख्य सेविंग्स पर असर न पड़े। टैक्स और फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म ‘क्लियर टैक्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक सैलरीड क्लास और इरेगुलर इनकम जैसे फ्रीलांसर्स वाले लोग इमरजेंसी फंड तैयार करने के लिए 3-6-9 रूल का इस्तेमाल कर सकते हैं। आइए समझते हैं कि यह रूल कैसे काम करता है और आपको कितना फंड बनाना चाहिए… क्या है इमरजेंसी फंड का 3-6-9 रूल? 3-6-9 रूल एक आसान नियम है, जो आपको अपनी लाइफस्टाइल और जॉब प्रोफाइल के हिसाब से यह बताता है कि आपको कितने महीने का खर्च बचाकर रखना चाहिए: 3 महीने का खर्च: अगर आप सिंगल हैं और आपकी इनकम बिल्कुल स्टेबल (स्थिर सैलरी) है। 6 महीने का खर्च: अगर आपकी इनकम स्टेबल है, लेकिन आपके ऊपर परिवार या अन्य निर्भर (Dependents) लोग हैं। 9 महीने का खर्च: अगर आप सिंगल हैं, लेकिन आपकी कमाई अनिश्चित या इरेगुलर है (जैसे फ्रीलांसर्स या प्रोजेक्ट बेस्ड काम)। 12 महीने का खर्च: अगर आपकी कमाई इरेगुलर है और साथ ही परिवार की जिम्मेदारी भी आपके ही कंधों पर है। इसके अलावा, अगर परिवार में कोई गंभीर बीमारी है या लोन/ईएमआई चल रही है, तो इमरजेंसी फंड का साइज और बड़ा रखा जा सकता है। एग्जांपल से समझें: कितना पैसा जमा करना होगा? मान लीजिए आपका हर महीने का जरूरी खर्च ₹25,000 है: 3 महीने के लिए: ₹25,000 × 3 = ₹75,000 6 महीने के लिए: ₹25,000 × 6 = ₹1,50,000 9 महीने के लिए: ₹25,000 × 9 = ₹2,25,000 12 महीने के लिए: ₹25,000 × 12 = ₹3,00,000 शुरुआत छोटे से करें, फिर धीरे-धीरे फंड बढ़ाएं अगर एक बार में बड़ा फंड बनाना मुश्किल लग रहा है, तो छोटे टारगेट से शुरुआत करें। सबसे पहले 3 महीने के खर्च का लक्ष्य रखें। आप हर महीने ₹500 से ₹1,000 या अपनी क्षमतानुसार सेविंग शुरू कर सकते हैं। अपने बैंक अकाउंट से FD या लिक्विड म्यूचुअल फंड में ऑटो-डेबिट (SIP) लगा दें, ताकि हर महीने पैसा अपने आप कट जाए। ऑफिस बोनस, टैक्स रिफंड या साइड इनकम से मिले एक्स्ट्रा पैसे को सीधा इमरजेंसी फंड में डालें। समय-समय पर फंड का रिव्यू करना भी जरूरी महंगाई, लोन की किस्तें या जीवनशैली बदलने के साथ हर महीने का खर्च भी बदलता रहता है। इसलिए हर 6 महीने या एक साल में अपने खर्चों का दोबारा हिसाब लगाएं और उसके हिसाब से अपने इमरजेंसी फंड का टारगेट अपडेट करते रहें। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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खतरे में फेसबुक-इंस्टाग्राम की कानूनी सुरक्षा:पब्लिशर माना गया तो होगी सीधी कार्रवाई, मेटा को इंसानी निगरानी बढ़ाने के निर्देश

खतरे में फेसबुक-इंस्टाग्राम की कानूनी सुरक्षा:पब्लिशर माना गया तो होगी सीधी कार्रवाई, मेटा को इंसानी निगरानी बढ़ाने के निर्देश

सोशल मीडिया कंपनी मेटा और भारत सरकार के बीच चल रही बैठकों के बाद एक बड़ा कानूनी और तकनीकी सवाल खड़ा हो गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक मुख्य मुद्दा यह है कि क्या मेटा के रिकमेंडेशन सिस्टम और पैसों के बदले कंटेंट का प्रमोशन उसे एक साधारण प्लेटफॉर्म बनाए रखते हैं या फिर वह पब्लिशर की भूमिका में आ जाती है। यदि कोई प्लेटफॉर्म यह खुद तय करता है कि किस यूजर को क्या कंटेंट दिखाया जाएगा और पैसे लेकर कंटेंट को प्रमोट करता है, तो उसे पब्लिशर माना जा सकता है। ऐसा होने पर कंपनी को अपने प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाले कंटेंट की पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी और IT एक्ट के तहत मिलने वाली कानूनी छूट यानी सेफ हार्बर स्टेटस गंवाना पड़ सकता है। क्या है ‘सेफ हार्बर’ प्रोटेक्शन और क्यों खतरे में है मेटा का स्टेटस? IT एक्ट की धारा 79 सोशल मीडिया कंपनियों को ‘सेफ हार्बर’ यानी कानूनी सुरक्षा कवच देती है। इसके तहत किसी यूजर द्वारा पोस्ट की गई विवादित या गलत जानकारी के लिए प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक या इंस्टाग्राम को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता। हालांकि, यह छूट तभी तक मिलती है जब तक कंपनी पूरी तरह ‘ड्यू डिलिजेंस’ यानी कानूनी नियमों और सावधानियों का पालन करे। सरकारी सूत्रों का कहना है कि अगर प्लेटफॉर्म खुद एल्गोरिदम के जरिए यह तय कर रहा है कि क्या कंटेंट किसको दिखेगा, तो यह पब्लिशिंग यानी प्रकाशन के दायरे में आता है। नियमों का पालन न करने पर आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता के तहत कंपनी पर सीधी कार्रवाई की जा सकती है। पीएम मोदी की पोस्ट हटाने पर मार्क जुकरबर्ग की तरफ से मांगी गई माफी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट को अस्थायी रूप से हटाने यानी रिस्ट्रिक्ट करने के बाद सरकार ने मेटा के ग्लोबल अफेयर्स हेड जोएल कपलान को समन भेजा था। इसके बाद कपलान की टीम ने आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी सचिव एस. कृष्णन से मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, पीएम की पोस्ट हटने और प्लेटफॉर्म पर डीपफेक व अन्य गड़बड़ियों को लेकर मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग की ओर से माफी मांगी गई है। संसदीय स्थायी समिति ने भी इस घटना पर नाराजगी जताते हुए जुकरबर्ग से 3 दिनों के भीतर माफी मांगने को कहा था और ऐसा न करने पर कानूनी सुरक्षा वापस लेने की चेतावनी दी थी। डीपफेक और चाइल्ड अब्यूज कंटेंट पर सरकार का सख्त रुख दो दिनों तक चले कड़े सवालों-जवाबों के बाद शुक्रवार को सरकार और मेटा के अधिकारियों के बीच तकनीकी चर्चा हुई। सरकार ने मेटा से पूछा कि फ्लैग (रिपोर्ट) किए जाने के बाद भी एआई-जनरेटेड हानिकारक कंटेंट और डीपफेक वीडियो बार-बार प्लेटफॉर्म पर क्यों दिखने लगते हैं। साथ ही, आईटी नियमों के तहत एआई या सिंथेटिक कंटेंट पर ‘लेबल’ लगाना अनिवार्य है, लेकिन बिना लेबल वाले एआई वीडियो अभी भी कैसे सर्कुलेट हो रहे हैं? मेटा ने माना कि ये गंभीर मुद्दे हैं और इन्हें सुलझाने के लिए लगातार काम करने का भरोसा दिया है। भारतीय भाषाओं को समझने के लिए ‘ह्यूमन ओवरसाइट’ बढ़ाने के निर्देश बैठक के दौरान सरकार ने मेटा से स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह केवल ऑटोमेटेड या एआई सिस्टम पर निर्भर न रहे। कंटेंट मॉडरेशन के लिए इंसानी निगरानी यानी ह्यूमन ओवरसाइ को बढ़ाया जाए। सरकार ने कहा कि मेटा को भारत की स्थानीय बारीकियों, संस्कृतियों और विभिन्न भारतीय भाषाओं की बेहतर समझ रखने वाली टीमों को तैनात करना होगा, ताकि सही समय पर आपत्तिजनक कंटेंट को हटाया जा सके।

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Gold Silver Price Hike | India Market Update 2026

Gold Silver Price Hike | India Market Update 2026

नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी की कीमत में इस हफ्ते शानदार तेजी देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, इस हफ्ते के पांच कारोबारी दिन में 10 ग्राम 24 कैरेट सोने के दाम 7,064 रुपए बढ़कर 1,49,621 रुपए और एक किलो चांदी की कीमत 14,094 रुपए बढ़कर 2,31,381 रुपए पर पहुंच गई है। पांच दिन पहले यानी सोमवार को सोना की कीमत 1,42,557 रुपए और चांदी के दाम 2,17,287 रुपए पर थे। वहीं इस हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन, शुक्रवार को सोने के दाम 1,181 रुपए और चांदी की कीमत 5,707 रुपए बढ़ी है। इससे एक दिन पहले गुरुवार को सोना की कीमत 1,48,361 रुपए और चांदी के दाम 2,25,674 रुपए पर थे। सोना-चांदी की कीमतों में आई तेजी के 5 बड़े कारण… ग्लोबल तनाव और जियोपॉलिटिकल क्राइसिस: दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण निवेशकों का भरोसा सुरक्षित निवेश यानी सोने और चांदी की तरफ तेजी से बढ़ा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले: यूएस फेड की ओर से ब्याज दरों में कटौती के संकेतों और नरम रुख के चलते ग्लोबल बाजारों में सोने-चांदी को भारी सपोर्ट मिल रहा है। डॉलर इंडेक्स में गिरावट: अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने से अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए कीमती धातुओं में निवेश करना सस्ता और आकर्षक हो गया है। सेंट्रल बैंकों की रिकॉर्ड खरीदारी: दुनिया भर के केंद्रीय बैंक जैसे- आरबीआई और अन्य वैश्विक बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार में डिमांड बनी हुई है। इंडस्ट्रियल मांग में उछाल: चांदी की कीमतों में हुई तेज बढ़त का एक बड़ा कारण रिन्यूएबल एनर्जी (सोलर पैनल) और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से आने वाली भारी इंडस्ट्रियल डिमांड है। इस साल सोने में अब तक तेजी रही इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 16 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.49 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में इस साल अब तक 1 हजार रुपए की तेजी है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.31 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर रहे हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। सोने-चांदी में ETF के जरिए कर सकते हैं निवेश एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सोने और चांदी के गिरते-चढ़ते भावों पर बेस्ड होते हैं। गोल्ड ETF या सिल्वर ETF की खरीद-बिक्री शेयर की ही तरह BSE और NSE पर की जा सकती है। हालांकि, इसमें आपको सोना या चांदी नहीं मिलता। आप जब इससे निकलना चाहें तब आपको उस समय के सोने-चांदी के भाव के बराबर पैसा मिल जाएगा। इसमें 500 रुपए से भी कम में निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें कैसे कर सकते हैं निवेश? ETF खरीदने के लिए आपको अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट खोलना होता है। इसमें NSE पर उपलब्ध ETF के यूनिट आप खरीद सकते हैं और उसके बराबर की राशि आपके डीमैट अकाउंट से जुड़े बैंक अकाउंट से कट जाएगी। आपके डीमैट अकाउंट में ऑर्डर लगाने के दो दिन बाद ETF आपके अकाउंट में डिपॉजिट हो जाते हैं। ट्रेडिंग खाते के जरिए ही ETF को बेचा जाता है। ये खबर भी पढ़ें… आम ग्राहकों के लिए UPI फ्री ही रहेगा: विवाद पर वित्त मंत्री की सफाई; ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट चार्ज संभव भारत में रोजाना फल-सब्जी खरीदने से लेकर कैब के किराए तक के लिए करोड़ों लोग यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में संसद में पेश हुए नए बिल के बाद एक बहस शुरू हो गई है कि क्या भविष्य में यूपीआई पेमेंट करने पर ग्राहकों को शुल्क देना होगा। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्थिति साफ की है। वित्त मंत्री ने कहा है कि आम ग्राहकों को डरने की कोई जरूरत नहीं है, यूपीआई उनके लिए फ्री ही रहेगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Dabur Products Ban Lifted | USA Becomes Top LPG Supplier to India

Dabur Products Ban Lifted | USA Becomes Top LPG Supplier to India

नई दिल्ली12 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर मेटा से जुड़ी रही। सरकार ने मेटा को जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2015 के मैगी विवाद में दुकानदारों के खिलाफ दर्ज सभी केस रद्द कर दिए हैं। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार आज शनिवार की छुट्‌टी के चलते बंद रहेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. सरकार बोली- Meta डीपफेक और प्रोपेगैंडा कंटेंट तेजी से हटाए: कंपनी ने माना उनके सिस्टम में कमियां, काम के तरीके में बदलाव की जरूरत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा को जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी से एक डिटेल्ड रोडमैप भी मांगा है। इस रोडमैप में कंपनी को यह स्पष्ट करना होगा कि वह अपने प्लेटफॉर्म्स से प्रोपेगैंडा, डीपफेक और अवैध कंटेंट को वायरल होने से रोकने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. डाबर के ‘100% प्योर’ दावे वाले प्रोडक्ट्स पर बैन टला: FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश पर हाईकोर्ट का स्टे; डाबर हनी-घी बिकते रहेंगे दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने को कहा था। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जब तक मामले में अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक FSSAI का बैन ऑर्डर सस्पेंड रहेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. मैगी विवाद में दुकानदारों पर लगे सभी क्रिमिनल केस हटे: हाईकोर्ट बोला- लैब जांच में लेड लिमिट में मिला, अब केस का कोई आधार नहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2015 के मैगी विवाद में दुकानदारों के खिलाफ दर्ज सभी केस रद्द कर दिए हैं। यह सभी क्रिमिनल केस मैगी में लेड और मोनोसोडियम ग्लूटामेट की ज्यादा मात्रा पाए जाने के आरोपों के बाद दर्ज किए गए थे। जस्टिस मधु जैन की बेंच ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI) की जांच में मैगी के सैंपल सुरक्षित पाए जा चुके हैं, तो दुकानदारों पर मुकदमा चलाना उनके साथ अन्याय होगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बना: सबसे ज्यादा LNG भी US से आ रही; कतर से सप्लाई 91% घटी अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बन गया है। होर्मुज संकट के बाद भारत की जरूरत की लगभग 67% कुकिंग गैस यानी LPG अमेरिका से ही आ रही। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के कार्यक्रम में शुक्रवार को यह बात कही है। मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज स्ट्रैट में सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पॉलिसी में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। वहीं इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका कतर को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लायर भी हो गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. आम ग्राहकों के लिए UPI फ्री ही रहेगा: विवाद पर वित्त मंत्री की सफाई; ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट चार्ज संभव भारत में रोजाना फल-सब्जी खरीदने से लेकर कैब के किराए तक के लिए करोड़ों लोग यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में संसद में पेश हुए नए बिल के बाद एक बहस शुरू हो गई है कि क्या भविष्य में यूपीआई पेमेंट करने पर ग्राहकों को शुल्क देना होगा। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्थिति साफ की है। वित्त मंत्री ने कहा है कि आम ग्राहकों को डरने की कोई जरूरत नहीं है, यूपीआई उनके लिए फ्री ही रहेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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Dabur Products Ban Lifted | USA Becomes Top LPG Supplier to India

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नई दिल्ली1 घंटे पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर मेटा से जुड़ी रही। सरकार ने मेटा को जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2015 के मैगी विवाद में दुकानदारों के खिलाफ दर्ज सभी केस रद्द कर दिए हैं। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार आज शनिवार की छुट्‌टी के चलते बंद रहेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. सरकार बोली- Meta डीपफेक और प्रोपेगैंडा कंटेंट तेजी से हटाए: कंपनी ने माना उनके सिस्टम में कमियां, काम के तरीके में बदलाव की जरूरत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म मेटा को जरूरी बदलाव करने और कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कंपनी से एक डिटेल्ड रोडमैप भी मांगा है। इस रोडमैप में कंपनी को यह स्पष्ट करना होगा कि वह अपने प्लेटफॉर्म्स से प्रोपेगैंडा, डीपफेक और अवैध कंटेंट को वायरल होने से रोकने के लिए क्या कदम उठाने जा रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. डाबर के ‘100% प्योर’ दावे वाले प्रोडक्ट्स पर बैन टला: FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश पर हाईकोर्ट का स्टे; डाबर हनी-घी बिकते रहेंगे दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने को कहा था। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जब तक मामले में अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक FSSAI का बैन ऑर्डर सस्पेंड रहेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. मैगी विवाद में दुकानदारों पर लगे सभी क्रिमिनल केस हटे: हाईकोर्ट बोला- लैब जांच में लेड लिमिट में मिला, अब केस का कोई आधार नहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2015 के मैगी विवाद में दुकानदारों के खिलाफ दर्ज सभी केस रद्द कर दिए हैं। यह सभी क्रिमिनल केस मैगी में लेड और मोनोसोडियम ग्लूटामेट की ज्यादा मात्रा पाए जाने के आरोपों के बाद दर्ज किए गए थे। जस्टिस मधु जैन की बेंच ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI) की जांच में मैगी के सैंपल सुरक्षित पाए जा चुके हैं, तो दुकानदारों पर मुकदमा चलाना उनके साथ अन्याय होगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. अमेरिका भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बना: सबसे ज्यादा LNG भी US से आ रही; कतर से सप्लाई 91% घटी अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बन गया है। होर्मुज संकट के बाद भारत की जरूरत की लगभग 67% कुकिंग गैस यानी LPG अमेरिका से ही आ रही। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के कार्यक्रम में शुक्रवार को यह बात कही है। मिडिल ईस्ट संकट और होर्मुज स्ट्रैट में सप्लाई प्रभावित होने के बाद भारत की एनर्जी सिक्योरिटी पॉलिसी में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। वहीं इक्विरस सिक्योरिटीज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका कतर को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लायर भी हो गया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. आम ग्राहकों के लिए UPI फ्री ही रहेगा: विवाद पर वित्त मंत्री की सफाई; ₹2,000 से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट चार्ज संभव भारत में रोजाना फल-सब्जी खरीदने से लेकर कैब के किराए तक के लिए करोड़ों लोग यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करते हैं। हाल ही में संसद में पेश हुए नए बिल के बाद एक बहस शुरू हो गई है कि क्या भविष्य में यूपीआई पेमेंट करने पर ग्राहकों को शुल्क देना होगा। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्थिति साफ की है। वित्त मंत्री ने कहा है कि आम ग्राहकों को डरने की कोई जरूरत नहीं है, यूपीआई उनके लिए फ्री ही रहेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… कल के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

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