Sunday, 13 Sep 2026 | 03:23 PM

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वोडाफोन आईडिया का लॉस घटकर ₹3,754 करोड़ हुआ:पहली तिमाही में रेवेन्यू 6% बढ़ा; 200 से ज्यादा शहरों में 5G लाइव

वोडाफोन आईडिया का लॉस घटकर ₹3,754 करोड़ हुआ:पहली तिमाही में रेवेन्यू 6% बढ़ा; 200 से ज्यादा शहरों में 5G लाइव

देश की तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आईडिया ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर दिए हैं। 30 जून को खत्म हुई इस तिमाही में कंपनी का घाटा घटकर ₹3,754 करोड़ रह गया है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में कंपनी को ₹6,608 करोड़ का घाटा हुआ था। हायर एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) और 4G-5G सेवाओं से जुड़ने वाले यूजर्स की वजह से कंपनी के घाटे में यह कमी दर्ज की गई है। रेवेन्यू ₹11,660 करोड़ और EBITDA 9.1% बढ़ा कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ-साथ कमाई में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है… CEO बोले- विलय के बाद पहली बार ग्राहक बढ़े वोडाफोन आईडिया लिमिटेड के CEO अभिजीत किशोर ने वित्तीय नतीजों पर खुशी जताते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2027 हमारे लिए एग्जीक्यूशन का साल है। पहली तिमाही का यह मजबूत प्रदर्शन हमारी रणनीति और अनुशासन का सबूत है। अभिजीत किशोर ने आगे कहा कि विलय के बाद यह पहला मौका है जब हमने ग्राहक जोड़े हैं, जो कि हमारे लिए एक बड़ी उपलब्धि है। हम इस बढ़त को आगे भी बनाए रखेंगे। हमारा 5G नेटवर्क अब देश के 200 से अधिक शहरों में लाइव हो चुका है। ₹9,000 करोड़ के कैपेक्स ऑर्डर जारी कंपनी अपने नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भारी निवेश कर रही है… कॉन्सोलिडेटेड ​​​​​​मुनाफा मतलब पूरे ग्रुप का प्रदर्शन कंपनियों के रिजल्ट दो भाग में आते हैं- स्टैंडअलोन और कॉन्सोलिडेटेड। स्टैंडअलोन में केवल एक यूनिट का वित्तीय प्रदर्शन दिखाया जाता है, जबकि कॉन्सोलिडेटेड या समेकित फाइनेंशियल रिपोर्ट में पूरी कंपनी की रिपोर्ट दी जाती है। क्या होता है EBITDA और ARPU?

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सरकार का ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने का विचार नहीं:संसद में मंत्रालय ने कहा- खजाने पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा; 5 राज्यों की OPS फंड वापसी की मांग खारिज

सरकार का ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने का विचार नहीं:संसद में मंत्रालय ने कहा- खजाने पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा; 5 राज्यों की OPS फंड वापसी की मांग खारिज

ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को बहाल करने को लेकर सरकार का रुख पूरी तरह साफ हो गया है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि OPS को वापस लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार ने इसके पीछे सरकारी खजाने पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ को मुख्य वजह बताया है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में बताया कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारों ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) से पुरानी पेंशन योजना में वापस जाने के बारे में केंद्र सरकार और पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण को सूचित किया था।

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एथेनॉल में गन्ने के इस्तेमाल को रोक सकती है सरकार:चीनी की कीमतें काबू करने की तैयारी; अभी 10% महंगी मिल रही

एथेनॉल में गन्ने के इस्तेमाल को रोक सकती है सरकार:चीनी की कीमतें काबू करने की तैयारी; अभी 10% महंगी मिल रही

देश में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। इसको कंट्रोल करने और घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार अक्टूबर सीजन से एथेनॉल प्रोडक्शन में गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने पर विचार कर रही है। इस कदम से देश में चीनी का प्रोडक्शन बढ़ेगा, जिससे भारत को चीनी आयात करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस मामले पर अंतिम फैसला अगले महीने के आखिरी तक लिया जा सकता है। महाराष्ट्र-कर्नाटक में कम बारिश से चिंता बढ़ी मामले से जुड़े दो सरकारी और दो उद्योग सूत्रों के अनुसार, देश के सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश हुई है। इस वजह से अगले साल चीनी उत्पादन में गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है। उत्पादन घटने की स्थिति में एथेनॉल के बजाय चीनी सप्लाई को प्राथमिकता देने से घरेलू बाजार को राहत मिलेगी। इस संबंध में सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। 30 लाख मीट्रिक टन चीनी की सप्लाई बढ़ेगी इस साल चीनी मिलों ने कुल उत्पादन का लगभग 10% यानी करीब 30 लाख मीट्रिक टन चीनी एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की थी। यदि अगले सीजन में गन्ने के इस डायवर्जन पर रोक लगाई जाती है, तो घरेलू बाजार में उतनी ही मात्रा में अतिरिक्त चीनी उपलब्ध हो सकेगी। इससे कम बारिश के कारण उत्पादन में होने वाले संभावित घाटे की भरपाई हो जाएगी। मांग बढ़ने से 10% बढ़े चीनी के दाम गन्ने की जगह मक्का और चावल से एथेनॉल बनेगा सरकार 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग के अपने लक्ष्य को जारी रखना चाहती है। गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की मात्रा में कटौती की भरपाई करने के लिए सरकार एथेनॉल उत्पादन में मक्का और चावल के उपयोग को बढ़ावा देगी। देश में फिलहाल मक्का-चावल का पर्याप्त स्टॉक है। सी-हेवी मोलासेस के इस्तेमाल की ही मिलेगी इजाजत मामले की सीधी जानकारी रखने वाले सूत्रों ने बताया कि चीनी मिलों को गन्ने के जूस और बी-हेवी मोलासेस (ज्यादा चीनी वाला बाय-प्रोडक्ट) से एथेनॉल बनाने से मना किया जाएगा। मिलों को मुख्य रूप से सी-हेवी मोलासेस से ही एथेनॉल बनाने की अनुमति दी जाएगी। यह ऐसा बाय-प्रोडक्ट होता है जिसमें से अधिकांश चीनी पहले ही निकाली जा चुकी होती है। अगले सीजन की शुरुआत से पहले तय होगा एलोकेशन नवंबर से शुरू होने वाले मार्केटिंग वर्ष के लिए चीनी उद्योग के लिए एथेनॉल के एलोकेशन को नया सीजन शुरू होने से पहले अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद सरकारी तेल कंपनियां एथेनॉल खरीद के लिए टेंडर जारी करेंगी। केंद्र सरकार ने पहले ही चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है और पिछले महीने व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा भी लागू कर दी थी। चीनी मिलों की कमाई पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर उद्योग अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित नए प्रतिबंधों से चीनी उद्योग को कोई बड़ा आर्थिक नुकसान होने की संभावना नहीं है। एथेनॉल बनाने की तुलना में गन्ने से चीनी बनाकर बेचने पर मिलों को ज्यादा कमाई होने की उम्मीद है। क्या होता है बी-हेवी और सी-हेवी मोलासेस? ये खबर भी पढ़ें… डाबर ने FSSAI पर भेदभाव का आरोप लगाया: कहा- कॉम्पिटिटर्स को फायदा पहुंचा रही; बैन से ₹150 करोड़ के माल पर संकट था एफएमसीजी कंपनी डाबर ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने FSSAI पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा कंपनी ने FSSAI पर कॉम्पिटिटर्स में शामिल अन्य मैन्युफैक्चरर्स के कॉमर्शियल हितों को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। पूरी खबर पढ़ें…

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6 TTK Prestige Innovative Products for 2026

6 TTK Prestige Innovative Products for 2026

1 मिनट पहले कॉपी लिंक मॉडर्न किचन की नई पहचान-किचनवेयर और अप्लायंसेज जो कुकिंग को बनाते हैं ज्यादा इनोवेटिव और हर तरह की कुकिंग के लिए हैं बेहतरीन अच्छा खाना पकाने की आर्ट सिर्फ टेस्ट तक लिमिटेड नहीं होती, बल्कि यह उन टूल्स और बर्तनों पर भी डिपेंड करती है, जो हम किचन में यूज करते हैं। पिछले कुछ सालों में इंडियन किचन में बड़ा बदलाव आया है। लोग अब ऐसे किचन सॉल्यूशंस ढूंढ रहे हैं, जो टाइम बचाएं, कम मेहनत में बेटर रिजल्ट्स दें और हेल्दी कुकिंग में हेल्प करें। इसी वजह से कुकवेयर और किचन अप्लायंसेज के डिजाइन और टेक्नोलॉजी में भी काफी इवोल्यूशन देखा गया है। हर कुक का कुकिंग स्टाइल भी अलग होता है। कोई जल्दी और कन्वीनियंस को प्राथमिकता देता है, कोई हेल्दी कुकिंग पसंद करता है, कोई ट्रेडिशनल फ्लेवर्स को बरकरार रखना चाहता है, तो कोई नई रेसिपीज के साथ एक्सपेरिमेंट करना पसंद करता है। ऐसे में हर तरह के कुक को ऐसे प्रोडक्ट्स की जरूरत होती है, जो उनकी अलग-अलग जरूरतों और कुकिंग पर्सनैलिटी के मुताबिक उनका साथ दें। आज की फास्ट-पेस्ड लाइफ में लोग ऐसे अप्लायंसेज और कुकवेयर चाहते हैं, जो टाइम बचाने के साथ बेटर परफॉर्मेंस भी दें। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए TTK Prestige ने कई मॉडर्न प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं, जो कन्वीनियंस, ड्यूरेबिलिटी और हेल्दी कुकिंग का परफेक्ट कॉम्बो हैं। ये सिर्फ किचन टूल्स नहीं हैं, बल्कि हर तरह के कुक के लिए क्यूरेट किए गए ऐसे भरोसेमंद सपोर्ट सिस्टम हैं, जो उनकी कुकिंग स्टाइल के मुताबिक काम करते हुए कुकिंग को कम झंझट वाला, ज़्यादा आसान और आनंददायक अनुभव बनाते हैं। तो आइए जानते हैं इन 6 खास प्रोडक्ट्स के बारे में, जो आपके किचन को और स्मार्ट बना सकते हैं। 1. जब इक्वली पकाना हो खाना: ट्राई-प्लाई कुकवेयर किसी भी एक्सपीरियंस्ड शेफ से पूछो, वह आपको बताएगा कि खाना पकाने में ईवन हीट डिस्ट्रीब्यूशन कितना इंपॉर्टेंट होता है। ट्राई-प्लाई टेक्नोलॉजी वाले कुकवेयर बिल्कुल इसी जरूरत को फुलफिल करते हैं। इनमें स्टेनलेस स्टील लेयर्स के बीच एक एल्यूमिनियम कोर होता है, जिससे हीट पूरे बर्तन में ईवनली डिस्ट्रीब्यूट होती है। हैमरड फिनिश वाले मॉडर्न ट्राई-प्लाई कुकवेयर न सिर्फ देखने में अट्रैक्टिव होते हैं, बल्कि स्ट्रक्चरली भी ज़्यादा स्ट्रॉन्ग होते हैं। कम तेल में कुकिंग और इंडक्शन व गैस दोनों पर यूज़ की फ्लेक्सिबिलिटी इन्हें मॉडर्न किचन के लिए परफेक्ट बनाती है। Prestige Tri-Ply Hammered Cookware: एलिगेंट डिजाइन और रिफाइन्ड लुक्स के साथ तेज कुकिंग के लिए बेहतरीन विकल्प। प्रमुख फीचर्स: ट्राई-प्लाई बॉडी कंस्ट्रक्शन — एल्यूमिनियम कोर के दोनों तरफ हाई-क्वालिटी स्टेनलेस स्टील लेयर्स। फास्टर कुकिंग के लिए ईवन हीट डिस्ट्रीब्यूशन। रिफाइंड लुक्स के लिए एलिगेंट स्टेनलेस स्टील हैंडल्स। कम तेल में हेल्दी कुकिंग। बेटर हीट रिटेंशन से खाना ज़्यादा इफेक्टिवली पकता है। अट्रैक्टिव हैमरड फिनिश — ड्यूरेबिलिटी और प्रीमियम लुक दोनों। गैस और इंडक्शन दोनों के साथ कम्पैटिबल। 10 साल की वारंटी। 2. इंडियन किचन की रियल जरूरत, एक पावरफुल मिक्सर ग्राइंडर इंडियन खाने में मसाले, चटनियां, बैटर और पेस्ट का बहुत बड़ा रोल होता है। ऐसे में मिक्सर ग्राइंडर सिर्फ एक अप्लायंस नहीं, बल्कि किचन का सेंट्रल पीस बन जाता है। 1000 वॉट की हाई-पावर मोटर और अलग-अलग साइज के जार्स आज की जरूरत हैं। ड्राई मसालों की फाइन ग्राइंडिंग के लिए यूनिक कोर्स ग्राइंडिंग मोड इसे खास बनाता है। 4-स्पीड एक्सेलरेशन कंट्रोल टेक्नोलॉजी की मदद से अलग-अलग तरह की ग्राइंडिंग और ब्लेंडिंग की जरूरत के अनुसार स्पीड को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। डोसा बैटर और स्मूदीज से लेकर रोजमर्रा की ग्राइंडिंग तक—यह मिक्सर हर काम को आसानी से संभाल लेता है। स्टर्डी स्टेनलेस स्टील जार्स लॉन्ग-लास्टिंग और रिलायबल परफॉर्मेंस सुनिश्चित करते हैं। Prestige Prism Plus Mixer Grinder: रोजाना की ग्राइंडिंग और ब्लेंडिंग नीड्स के साथ पारंपरिक स्वाद और खुशबू को बनाए रखने के लिए यह मिक्सर ग्राइंडर देता है धमाकेदार परफॉर्मेंस। प्रमुख फीचर्स: यूनिक कोर्स ग्राइंडिंग मोड। 1000W पावरफुल कॉपर मोटर। 4-स्पीड कंट्रोल सिस्टम। 3 स्टेनलेस स्टील जार्स — 1.5L वेट जार, 1L ड्राई जार और 450ml चटनी जार। मसाले, बैटर, चटनी और स्मूदीज़ के लिए सूटेबल। ड्यूरेबल और हाइजीनिक स्टेनलेस स्टील जार्स। स्टाइलिश डिज़ाइन, जो मॉडर्न किचन में फिट हो। 3. छोटी जगह के लिए बड़ा सॉल्यूशन: Prestige OmniPot अर्बन लाइफ में स्मॉल अपार्टमेंट्स, हॉस्टल्स और फ्रीक्वेंटली ट्रैवलिंग प्रोफेशनल्स की गिनती बढ़ रही है। ऐसे में ऐसे अप्लायंसेज़ की डिमांड बढ़ी है, जो एक ही यूनिट में मल्टिपल काम कर सकें। मल्टी-पर्पज इलेक्ट्रिक पॉट बॉयलिंग, स्टीमिंग, लाइट फ्राइंग और वन-पॉट मील्स-सब हैंडल कर सकता है। कॉम्पैक्ट साइज और पोर्टेबिलिटी इसे उन लोगों के लिए आइडियल बनाती है, जो लिमिटेड स्पेस में भी फुल किचन जैसी कन्वीनियंस चाहते हैं। Prestige OmniPot: एक मल्टी-पर्पज़ इलेक्ट्रिक कुकिंग सॉल्यूशन, जो छोटे घर और ट्रैवल के लिए एक्सट्रीमली यूजफुल है। प्रमुख फीचर्स: ट्रैवल के लिए कॉम्पैक्ट डिजाइन। एफिशिएंट और कन्वीनियंट कुकिंग के लिए 1000W डिटैचेबल पावर बेस। बॉयलिंग, स्टीमिंग, सॉतेइंग और वन-पॉट कुकिंग-सब पॉसिबल। कुकिंग पॉट और फ्राइ पैन शामिल-वर्सेटिलिटी के लिए डिजाइन किए गए। मल्टिपल टेम्परेचर सेटिंग्स। स्टीम वेंट वाला लिड। लाइटवेट, कॉम्पैक्ट और ट्रैवल-फ्रेंडली डिज़ाइन। कूल-टच फोल्डेबल हैंडल्स। हॉस्टल, स्टूडियो अपार्टमेंट, हॉलीडेज़ और छोटे घर के लिए आइडियल। 4. कास्ट आयरन के फायदे, बिना ज्यादा झंझट के कास्ट आयरन को हमेशा से बेस्ट कुकवेयर माना जाता रहा है क्योंकि यह हीट को लंबे समय तक रिटेन करता है। लेकिन ट्रेडिशनल कास्ट आयरन का वजन और मेंटेनेंस कई लोगों के लिए चैलेंजिंग होता है। नई जेनरेशन के लाइटवेट कास्ट आयरन कुकवेयर इस प्रॉब्लम का सॉल्यूशन दे रहे हैं। बेटर हीट रिटेंशन के साथ रिलेटिवली ईज़ी हैंडलिंग, रस्ट-रेजिस्टेंट सरफेस और डिफरेंट कुकटॉप्स के साथ कम्पैटिबिलिटी-यह सब एक पैकेज में मिलता है। ट्रेडिशनल कुकिंग के लिए तैयार किया गया यह कुकवेयर ईवन हीट डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित करता है, जिससे धीमी आंच पर स्वाद से भरपूर व्यंजन आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। Prestige Castline Cookware: कास्ट आयरन के बेनिफिट्स और मॉडर्न कन्वीनियंस का परफेक्ट कॉम्बिनेशन। प्रमुख फीचर्स: लाइटवेट कास्ट आयरन कंस्ट्रक्शन। लॉन्ग-लास्टिंग हीट रिटेंशन। कम तेल में कुकिंग में हेल्पफुल। रस्ट-प्रूफ डिजाइन। ईजी-टू-क्लीन सरफेस। स्टे-कूल हैंडल्स। गैस, इंडक्शन, रेडिएंट रिंग, सॉलिड प्लेट और सिरेमिक कुकटॉप्स के साथ कम्पैटिबल। पैटर्न्ड इनैमल कोटेड, इनैमल कोटेड और नाइट्राइड फिनिश ऑप्शंस में उपलब्ध। 15 साल की वारंटी। 5. एयर

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6 TTK Prestige Innovative Products for 2026

6 TTK Prestige Innovative Products for 2026

20 मिनट पहले कॉपी लिंक मॉडर्न किचन की नई पहचान-किचनवेयर और अप्लायंसेज जो कुकिंग को बनाते हैं ज्यादा इनोवेटिव और हर तरह की कुकिंग के लिए हैं बेहतरीन अच्छा खाना पकाने की आर्ट सिर्फ टेस्ट तक लिमिटेड नहीं होती, बल्कि यह उन टूल्स और बर्तनों पर भी डिपेंड करती है, जो हम किचन में यूज करते हैं। पिछले कुछ सालों में इंडियन किचन में बड़ा बदलाव आया है। लोग अब ऐसे किचन सॉल्यूशंस ढूंढ रहे हैं, जो टाइम बचाएं, कम मेहनत में बेटर रिजल्ट्स दें और हेल्दी कुकिंग में हेल्प करें। इसी वजह से कुकवेयर और किचन अप्लायंसेज के डिजाइन और टेक्नोलॉजी में भी काफी इवोल्यूशन देखा गया है। हर कुक का कुकिंग स्टाइल भी अलग होता है। कोई जल्दी और कन्वीनियंस को प्राथमिकता देता है, कोई हेल्दी कुकिंग पसंद करता है, कोई ट्रेडिशनल फ्लेवर्स को बरकरार रखना चाहता है, तो कोई नई रेसिपीज के साथ एक्सपेरिमेंट करना पसंद करता है। ऐसे में हर तरह के कुक को ऐसे प्रोडक्ट्स की जरूरत होती है, जो उनकी अलग-अलग जरूरतों और कुकिंग पर्सनैलिटी के मुताबिक उनका साथ दें। आज की फास्ट-पेस्ड लाइफ में लोग ऐसे अप्लायंसेज और कुकवेयर चाहते हैं, जो टाइम बचाने के साथ बेटर परफॉर्मेंस भी दें। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए TTK Prestige ने कई मॉडर्न प्रोडक्ट्स लॉन्च किए हैं, जो कन्वीनियंस, ड्यूरेबिलिटी और हेल्दी कुकिंग का परफेक्ट कॉम्बो हैं। ये सिर्फ किचन टूल्स नहीं हैं, बल्कि हर तरह के कुक के लिए क्यूरेट किए गए ऐसे भरोसेमंद सपोर्ट सिस्टम हैं, जो उनकी कुकिंग स्टाइल के मुताबिक काम करते हुए कुकिंग को कम झंझट वाला, ज़्यादा आसान और आनंददायक अनुभव बनाते हैं। तो आइए जानते हैं इन 6 खास प्रोडक्ट्स के बारे में, जो आपके किचन को और स्मार्ट बना सकते हैं। 1. जब इक्वली पकाना हो खाना: ट्राई-प्लाई कुकवेयर किसी भी एक्सपीरियंस्ड शेफ से पूछो, वह आपको बताएगा कि खाना पकाने में ईवन हीट डिस्ट्रीब्यूशन कितना इंपॉर्टेंट होता है। ट्राई-प्लाई टेक्नोलॉजी वाले कुकवेयर बिल्कुल इसी जरूरत को फुलफिल करते हैं। इनमें स्टेनलेस स्टील लेयर्स के बीच एक एल्यूमिनियम कोर होता है, जिससे हीट पूरे बर्तन में ईवनली डिस्ट्रीब्यूट होती है। हैमरड फिनिश वाले मॉडर्न ट्राई-प्लाई कुकवेयर न सिर्फ देखने में अट्रैक्टिव होते हैं, बल्कि स्ट्रक्चरली भी ज़्यादा स्ट्रॉन्ग होते हैं। कम तेल में कुकिंग और इंडक्शन व गैस दोनों पर यूज़ की फ्लेक्सिबिलिटी इन्हें मॉडर्न किचन के लिए परफेक्ट बनाती है। Prestige Tri-Ply Hammered Cookware: एलिगेंट डिजाइन और रिफाइन्ड लुक्स के साथ तेज कुकिंग के लिए बेहतरीन विकल्प। प्रमुख फीचर्स: ट्राई-प्लाई बॉडी कंस्ट्रक्शन — एल्यूमिनियम कोर के दोनों तरफ हाई-क्वालिटी स्टेनलेस स्टील लेयर्स। फास्टर कुकिंग के लिए ईवन हीट डिस्ट्रीब्यूशन। रिफाइंड लुक्स के लिए एलिगेंट स्टेनलेस स्टील हैंडल्स। कम तेल में हेल्दी कुकिंग। बेटर हीट रिटेंशन से खाना ज़्यादा इफेक्टिवली पकता है। अट्रैक्टिव हैमरड फिनिश — ड्यूरेबिलिटी और प्रीमियम लुक दोनों। गैस और इंडक्शन दोनों के साथ कम्पैटिबल। 10 साल की वारंटी। 2. इंडियन किचन की रियल जरूरत, एक पावरफुल मिक्सर ग्राइंडर इंडियन खाने में मसाले, चटनियां, बैटर और पेस्ट का बहुत बड़ा रोल होता है। ऐसे में मिक्सर ग्राइंडर सिर्फ एक अप्लायंस नहीं, बल्कि किचन का सेंट्रल पीस बन जाता है। 1000 वॉट की हाई-पावर मोटर और अलग-अलग साइज के जार्स आज की जरूरत हैं। ड्राई मसालों की फाइन ग्राइंडिंग के लिए यूनिक कोर्स ग्राइंडिंग मोड इसे खास बनाता है। 4-स्पीड एक्सेलरेशन कंट्रोल टेक्नोलॉजी की मदद से अलग-अलग तरह की ग्राइंडिंग और ब्लेंडिंग की जरूरत के अनुसार स्पीड को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। डोसा बैटर और स्मूदीज से लेकर रोजमर्रा की ग्राइंडिंग तक—यह मिक्सर हर काम को आसानी से संभाल लेता है। स्टर्डी स्टेनलेस स्टील जार्स लॉन्ग-लास्टिंग और रिलायबल परफॉर्मेंस सुनिश्चित करते हैं। Prestige Prism Plus Mixer Grinder: रोजाना की ग्राइंडिंग और ब्लेंडिंग नीड्स के साथ पारंपरिक स्वाद और खुशबू को बनाए रखने के लिए यह मिक्सर ग्राइंडर देता है धमाकेदार परफॉर्मेंस। प्रमुख फीचर्स: यूनिक कोर्स ग्राइंडिंग मोड। 1000W पावरफुल कॉपर मोटर। 4-स्पीड कंट्रोल सिस्टम। 3 स्टेनलेस स्टील जार्स — 1.5L वेट जार, 1L ड्राई जार और 450ml चटनी जार। मसाले, बैटर, चटनी और स्मूदीज़ के लिए सूटेबल। ड्यूरेबल और हाइजीनिक स्टेनलेस स्टील जार्स। स्टाइलिश डिज़ाइन, जो मॉडर्न किचन में फिट हो। 3. छोटी जगह के लिए बड़ा सॉल्यूशन: Prestige OmniPot अर्बन लाइफ में स्मॉल अपार्टमेंट्स, हॉस्टल्स और फ्रीक्वेंटली ट्रैवलिंग प्रोफेशनल्स की गिनती बढ़ रही है। ऐसे में ऐसे अप्लायंसेज़ की डिमांड बढ़ी है, जो एक ही यूनिट में मल्टिपल काम कर सकें। मल्टी-पर्पज इलेक्ट्रिक पॉट बॉयलिंग, स्टीमिंग, लाइट फ्राइंग और वन-पॉट मील्स-सब हैंडल कर सकता है। कॉम्पैक्ट साइज और पोर्टेबिलिटी इसे उन लोगों के लिए आइडियल बनाती है, जो लिमिटेड स्पेस में भी फुल किचन जैसी कन्वीनियंस चाहते हैं। Prestige OmniPot: एक मल्टी-पर्पज़ इलेक्ट्रिक कुकिंग सॉल्यूशन, जो छोटे घर और ट्रैवल के लिए एक्सट्रीमली यूजफुल है। प्रमुख फीचर्स: ट्रैवल के लिए कॉम्पैक्ट डिजाइन। एफिशिएंट और कन्वीनियंट कुकिंग के लिए 1000W डिटैचेबल पावर बेस। बॉयलिंग, स्टीमिंग, सॉतेइंग और वन-पॉट कुकिंग-सब पॉसिबल। कुकिंग पॉट और फ्राइ पैन शामिल-वर्सेटिलिटी के लिए डिजाइन किए गए। मल्टिपल टेम्परेचर सेटिंग्स। स्टीम वेंट वाला लिड। लाइटवेट, कॉम्पैक्ट और ट्रैवल-फ्रेंडली डिज़ाइन। कूल-टच फोल्डेबल हैंडल्स। हॉस्टल, स्टूडियो अपार्टमेंट, हॉलीडेज़ और छोटे घर के लिए आइडियल। 4. कास्ट आयरन के फायदे, बिना ज्यादा झंझट के कास्ट आयरन को हमेशा से बेस्ट कुकवेयर माना जाता रहा है क्योंकि यह हीट को लंबे समय तक रिटेन करता है। लेकिन ट्रेडिशनल कास्ट आयरन का वजन और मेंटेनेंस कई लोगों के लिए चैलेंजिंग होता है। नई जेनरेशन के लाइटवेट कास्ट आयरन कुकवेयर इस प्रॉब्लम का सॉल्यूशन दे रहे हैं। बेटर हीट रिटेंशन के साथ रिलेटिवली ईज़ी हैंडलिंग, रस्ट-रेजिस्टेंट सरफेस और डिफरेंट कुकटॉप्स के साथ कम्पैटिबिलिटी-यह सब एक पैकेज में मिलता है। ट्रेडिशनल कुकिंग के लिए तैयार किया गया यह कुकवेयर ईवन हीट डिस्ट्रीब्यूशन सुनिश्चित करता है, जिससे धीमी आंच पर स्वाद से भरपूर व्यंजन आसानी से तैयार किए जा सकते हैं। Prestige Castline Cookware: कास्ट आयरन के बेनिफिट्स और मॉडर्न कन्वीनियंस का परफेक्ट कॉम्बिनेशन। प्रमुख फीचर्स: लाइटवेट कास्ट आयरन कंस्ट्रक्शन। लॉन्ग-लास्टिंग हीट रिटेंशन। कम तेल में कुकिंग में हेल्पफुल। रस्ट-प्रूफ डिजाइन। ईजी-टू-क्लीन सरफेस। स्टे-कूल हैंडल्स। गैस, इंडक्शन, रेडिएंट रिंग, सॉलिड प्लेट और सिरेमिक कुकटॉप्स के साथ कम्पैटिबल। पैटर्न्ड इनैमल कोटेड, इनैमल कोटेड और नाइट्राइड फिनिश ऑप्शंस में उपलब्ध। 15 साल की वारंटी। 5. एयर

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Dabur Moves Delhi High Court Against FSSAI Over 100% Claim Ban Controversy

Dabur Moves Delhi High Court Against FSSAI Over 100% Claim Ban Controversy

Hindi News Business Dabur Moves Delhi High Court Against FSSAI Over 100% Claim Ban Controversy नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक एफएमसीजी कंपनी डाबर ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने FSSAI पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा कंपनी ने FSSAI पर कॉम्पिटिटर्स में शामिल अन्य मैन्युफैक्चरर्स के कॉमर्शियल हितों को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। डाबर का दावा है कि प्रॉडक्ट्स पर 100% दावे के इस्तेमाल को तुरंत बैन करने के आदेश से उसकी 150 करोड़ रुपए की वैल्यू की इन्वेंट्री यानी माल नष्ट होने के जोखिम में आ गया था। 6 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में डाबर ने FSSAI के इस आदेश को बिना सोच-समझकर जारी किया गया और एकतरफा बताया है। याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कंपनी को राहत देते हुए FSSAI के आदेश पर 24 अगस्त तक स्टे लगा दिया। कोर्ट ने माना कि ऐसा कोई भी निर्देश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए था। क्या है पूरा विवाद: 100% क्लेम पर बैन और FSSAI की कार्रवाई फूड रेगुलेटर FSSAI ने प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स के विज्ञापनों और लेबल्स पर 100% प्योर, 100% नेचुरल या 100% ऑर्गेनिक जैसे दावों को भ्रामक माना है। FSSAI के अनुसार, इस तरह के दावे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवर्टाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशन, 2018 का उल्लंघन करते हैं। FSSAI ने तुरंत प्रभाव से 100% क्लेम वाले प्रॉडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगा दी थी और डाबर से 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी थी। FSSAI का तर्क है कि ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से अन्य कंपनियों के प्रोडक्ट्स की छवि प्रभावित होती है। डाबर का तर्क: अन्य मैन्युफैक्चरर्स के बिजनेस इंटरेस्ट को बढ़ावा दे रहा FSSAI डाबर ने अपनी रिट याचिका में FSSAI के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि 100% क्लेम बिना किसी दूसरे मैन्युफैक्चरर का रेफरेंस दिए स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यह पूरी इंडस्ट्री में सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाला शब्द है। कंपनी के अनुसार, यह स्पष्ट है कि यह बैन जनहित में जारी नहीं किया गया है, बल्कि अन्य मैन्युफैक्चरर के कॉमर्शियल हितों को साधने के लिए जारी किया गया। डाबर ने दावा किया कि FSSAI ने बिना किसी कारण बताओ नोटिस या सुधार का अवसर दिए ही सीधे बैन लगा दिया। ₹150 करोड़ का स्टॉक दांव पर, 11 फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स प्रभावित FSSAI की इस कार्रवाई से डाबर के 11 प्रमुख फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें डाबर हनी, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल और रियल एक्टिव कोकोनट वॉटर जैसे बड़े ब्रांड्स शामिल हैं। डाबर का आरोप है कि FSSAI ने लेबल्स की जांच किए बिना आदेश जारी किया है। कंपनी के अनुसार, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क और डाबर कोल्ड प्रेस्ड सेसम ऑयल के लेबल पर कभी 100% का दावा लिखा ही नहीं गया था, फिर भी उन्हें बैन की लिस्ट में शामिल किया। इससे कंपनी की ₹150 करोड़ की इन्वेंट्री बर्बाद होने की कगार पर है। क्विक-कॉमर्स और होटलों से सप्लाई चेन पर असर FSSAI के इस आदेश को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए जाने के बाद डाबर की रिटेल सप्लाई चेन अचानक प्रभावित हो गई। कई रिटेल और ऑनलाइन चैनल्स को कंपनी के 100% क्लेम वाले प्रॉडक्ट्स न बेचने की सलाह दी गई। 4 अगस्त को जोमैटो के क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट ने डाबर को अल्टीमेटम जारी करते हुए उसके प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग को तुरंत डिसेबल कर दिया। ब्लिंकिट ने ईमेल में स्पष्ट किया कि इस मामले से पैदा होने वाली किसी भी कानूनी या वित्तीय देनदारी के लिए वह जिम्मेदार नहीं होगा। वहीं हॉस्पिटैलिटी ब्रांड हिल्टन होटल्स ने भी विवाद सुलझने तक प्रभावित प्रोडक्ट्स को अपनी सप्लाई से बाहर करने का प्रस्ताव रखा। कंपनी पहले ही कर रही थी लेबल्स में बदलाव डाबर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह FSSAI के लेटर में बताए गए प्रोडक्ट्स के लेबल्स से 100% क्लेम हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी थी। कंपनी के पिछले हफ्ते जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आदेश में मेंशन ज्यादातर प्रोडक्ट्स के लेबल्स, विज्ञापनों और वेबसाइट रेफरेंस को बिना 100% क्लेम वाले नए लेबल्स में बदल दिया गया है या बदलने की फाइनल प्रोसेस में हैं। FSSAI का बड़ा क्रैकडाउन और आगे का रास्ता FSSAI हाल के दिनों में एफएमसीजी कंपनियों के भ्रामक विज्ञापनों, आर्टिफिशियल इंग्रीडिएंट्स के इस्तेमाल और हाइजीन से जुड़े मामलों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है। रेगुलेटर ने प्रोसेस्ड फूड्स पर बिना किसी सॉलिड वेरिफिकेशन के इस्तेमाल किए जाने वाले मार्केटिंग शब्दों पर रोक लगाई है। फिलहाल FSSAI ने इस कानूनी मामले और डाबर के आरोपों पर तुरंत कोई आधिकारिक जवाब या प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। दिल्ली हाईकोर्ट की दी गई 24 अगस्त तक की राहत के बाद अब सभी की निगाहें अगली अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। नॉलेज पार्ट: जानें क्या कहता है FSSAI का ‘क्लेम्स रेगुलेशन’? शो-कॉज नोटिस अनिवार्य: खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, अगर FSSAI को किसी प्रोडक्ट के विज्ञापन या क्लेम पर आपत्ति होती है, तो पहले फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) को स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस देना होता है। सिंगल बनाम मल्टी-इन्ग्रीडिएंट: FSSAI का मानना है कि प्रोसेस्ड या मल्टी-इन्ग्रीडिएंट फूड में ‘100% Pure’ लिखना गलत है, जबकि कंपनियां तर्क देती हैं कि शहद या शुद्ध नारियल पानी जैसे प्राकृतिक प्रोडक्ट्स में यह दावा जायज है। ये खबर भी पढ़ें… डाबर के ‘100% प्योर’ दावे वाले प्रोडक्ट्स पर बैन टला: FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश पर हाईकोर्ट का स्टे; डाबर हनी-घी बिकते रहेंगे दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने को कहा था। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जब तक मामले में अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक FSSAI का बैन ऑर्डर सस्पेंड रहेगा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Hindi News Business Dabur Moves Delhi High Court Against FSSAI Over 100% Claim Ban Controversy नई दिल्ली50 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को राहत देते हुए FSSAI के बैन के आदेश पर 24 अगस्त तक स्टे लगा दिया। एफएमसीजी कंपनी डाबर ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कंपनी ने FSSAI पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। इसके अलावा कंपनी ने FSSAI पर कॉम्पिटिटर्स में शामिल अन्य मैन्युफैक्चरर्स के कॉमर्शियल हितों को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया। डाबर का दावा है कि प्रोडक्ट्स पर 100% दावे के इस्तेमाल को तुरंत बैन करने के आदेश से उसकी 150 करोड़ रुपए की वैल्यू की इन्वेंट्री यानी माल नष्ट होने के जोखिम में आ गया था। 6 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में डाबर ने FSSAI के इस आदेश को बिना सोच-समझकर जारी किया गया और एकतरफा बताया है। हाईकोर्ट ने FSSAI के आदेश पर 24 अगस्त तक स्टे लगाया याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कंपनी को राहत देते हुए FSSAI के आदेश पर 24 अगस्त तक स्टे लगा दिया। कोर्ट ने माना कि ऐसा कोई भी निर्देश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए था। क्या है पूरा विवाद: 100% क्लेम पर बैन और FSSAI की कार्रवाई फूड रेगुलेटर FSSAI ने प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स के विज्ञापनों और लेबल्स पर 100% प्योर, 100% नेचुरल या 100% ऑर्गेनिक जैसे दावों को भ्रामक माना है। FSSAI के अनुसार, इस तरह के दावे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवर्टाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशन, 2018 का उल्लंघन करते हैं। FSSAI ने तुरंत प्रभाव से 100% क्लेम वाले प्रॉडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगा दी थी और डाबर से 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी थी। FSSAI का तर्क है कि ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से अन्य कंपनियों के प्रोडक्ट्स की छवि प्रभावित होती है। डाबर का तर्क: अन्य मैन्युफैक्चरर्स के बिजनेस इंटरेस्ट को बढ़ावा दे रहा FSSAI डाबर ने अपनी रिट याचिका में FSSAI के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि 100% क्लेम बिना किसी दूसरे मैन्युफैक्चरर का रेफरेंस दिए स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यह पूरी इंडस्ट्री में सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाला शब्द है। कंपनी के अनुसार, यह स्पष्ट है कि यह बैन जनहित में जारी नहीं किया गया है, बल्कि अन्य मैन्युफैक्चरर के कॉमर्शियल हितों को साधने के लिए जारी किया गया। डाबर ने दावा किया कि FSSAI ने बिना किसी कारण बताओ नोटिस या सुधार का अवसर दिए ही सीधे बैन लगा दिया। ₹150 करोड़ का स्टॉक दांव पर, 11 फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स प्रभावित FSSAI की इस कार्रवाई से डाबर के 11 प्रमुख फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें डाबर हनी, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल और रियल एक्टिव कोकोनट वॉटर जैसे बड़े ब्रांड्स शामिल हैं। डाबर का आरोप है कि FSSAI ने लेबल्स की जांच किए बिना आदेश जारी किया है। कंपनी के अनुसार, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क और डाबर कोल्ड प्रेस्ड सेसम ऑयल के लेबल पर कभी 100% का दावा लिखा ही नहीं गया था, फिर भी उन्हें बैन की लिस्ट में शामिल किया। इससे कंपनी की ₹150 करोड़ की इन्वेंट्री बर्बाद होने की कगार पर है। क्विक-कॉमर्स और होटलों से सप्लाई चेन पर असर FSSAI के इस आदेश को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक किए जाने के बाद डाबर की रिटेल सप्लाई चेन अचानक प्रभावित हो गई। कई रिटेल और ऑनलाइन चैनल्स को कंपनी के 100% क्लेम वाले प्रॉडक्ट्स न बेचने की सलाह दी गई। 4 अगस्त को जोमैटो के क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकिट ने डाबर को अल्टीमेटम जारी करते हुए उसके प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग को तुरंत डिसेबल कर दिया। ब्लिंकिट ने ईमेल में स्पष्ट किया कि इस मामले से पैदा होने वाली किसी भी कानूनी या वित्तीय देनदारी के लिए वह जिम्मेदार नहीं होगा। वहीं हॉस्पिटैलिटी ब्रांड हिल्टन होटल्स ने भी विवाद सुलझने तक प्रभावित प्रोडक्ट्स को अपनी सप्लाई से बाहर करने का प्रस्ताव रखा। कंपनी पहले ही कर रही थी लेबल्स में बदलाव डाबर ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह FSSAI के लेटर में बताए गए प्रोडक्ट्स के लेबल्स से 100% क्लेम हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी थी। कंपनी के पिछले हफ्ते जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, आदेश में मेंशन ज्यादातर प्रोडक्ट्स के लेबल्स, विज्ञापनों और वेबसाइट रेफरेंस को बिना 100% क्लेम वाले नए लेबल्स में बदल दिया गया है या बदलने की फाइनल प्रोसेस में हैं। FSSAI का बड़ा क्रैकडाउन और आगे का रास्ता FSSAI कुछ दिनों से एफएमसीजी कंपनियों के भ्रामक विज्ञापनों, आर्टिफिशियल इंग्रीडिएंट्स के इस्तेमाल और हाइजीन से जुड़े मामलों पर सख्त कार्रवाई कर रहा है। रेगुलेटर ने प्रोसेस्ड फूड्स पर बिना किसी सॉलिड वेरिफिकेशन के इस्तेमाल किए जाने वाले मार्केटिंग शब्दों पर रोक लगाई है। फिलहाल FSSAI ने इस कानूनी मामले और डाबर के आरोपों पर तुरंत कोई आधिकारिक जवाब या प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। दिल्ली हाईकोर्ट की दी गई 24 अगस्त तक की राहत के बाद अब सभी की निगाहें अगली अदालती सुनवाई पर टिकी हैं। नॉलेज पार्ट: जानें क्या कहता है FSSAI का ‘क्लेम्स रेगुलेशन’? शो-कॉज नोटिस अनिवार्य: खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, अगर FSSAI को किसी प्रोडक्ट के विज्ञापन या क्लेम पर आपत्ति होती है, तो पहले फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) को स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस देना होता है। सिंगल बनाम मल्टी-इन्ग्रीडिएंट: FSSAI का मानना है कि प्रोसेस्ड या मल्टी-इन्ग्रीडिएंट फूड में ‘100% Pure’ लिखना गलत है, जबकि कंपनियां तर्क देती हैं कि शहद या शुद्ध नारियल पानी जैसे प्राकृतिक प्रोडक्ट्स में यह दावा जायज है। ये खबर भी पढ़ें… डाबर के ‘100% प्योर’ दावे वाले प्रोडक्ट्स पर बैन टला: FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश पर हाईकोर्ट का स्टे; डाबर हनी-घी बिकते रहेंगे दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने को कहा था। जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जब तक मामले में अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक FSSAI

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ब्रांड्स का नया ट्रेंड; नस्ली न्याय से बढ़ी सेल्स:जेन जी को टारगेट करने वाले ब्रांड्स को करना पड़ रहा उनके मुद्दों को सपोर्ट

ब्रांड्स का नया ट्रेंड; नस्ली न्याय से बढ़ी सेल्स:जेन जी को टारगेट करने वाले ब्रांड्स को करना पड़ रहा उनके मुद्दों को सपोर्ट

भारतीय ब्रांड्स ने जेन जी यानी 14 से 29 साल तक की युवा पीढ़ी की भाषा और सौंदर्यबोध अपनाने में महारत हासिल कर ली है। नायका और स्विगी इंस्टामार्ट ने हाल ही में ‘गंजी चुड़ैल’ जैसे ट्रेंड भुनाए, टिंडर ने ‘सिचुएशनशिप’ और ‘मेन-कैरेक्टर एनर्जी’ जैसे शब्द अपनाए, तो फास्ट्रैक ने ‘यू डू यू’ कैंपेन के जरिए फ्लुइड पहचान का जश्न मनाया। लेकिन जब परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) आंदोलन के तहत जेन जी सड़कों पर उतरी तो ब्रांड्स की जुड़ाव वाली यह छवि गायब हो गई। दरअसल, आज ब्रांड्स सिर्फ युवा संस्कृति के सौंदर्यबोध को उधार लेकर उनकी वास्तविक चिंताओं से दूर नहीं रह सकते, जैसा कि पेप्सी ने 1960 के दशक में ‘पेप्सी जनरेशन’ कैंपेन के जरिए किया था। इसके उलट, नाइकी ने ‘कॉलिन कैपरनिक’ कैंपेन के जरिए नस्ली न्याय के मुद्दे पर लगातार फोकस करके करीब 1,550 करोड़ रुपए की मीडिया वैल्यू और बिक्री में तगड़ी बढ़त हासिल की। लेकिन बात और काम के बीच तालमेल न हो तो नुकसान भी होता है। कोविड के दौर में मैकडॉनल्ड्स के बयान और कंपनी के भीतर अश्वेत कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े आरोपों के बीच अंतर इसकी मिसाल है। बहरहाल, सीजेपी आंदोलन ने दिखाया कि भारतीय जेन जी 37.7 करोड़ की आबादी और करीब 81 लाख करोड़ रुपए खर्च करने क्षमता के साथ अपनी आर्थिक ताकत अच्छी तरह पहचानती है। प्रदर्शनकारियों ने हास्य, ‘गेट रेडी विद मी’ वीडियो और पुलिस हिंसा के फुटेज को गेमिंग इमेजरी के साथ जोड़कर पूरी स्क्रिप्ट खुद लिखी। इस ब्रीच कई मौकों पर युवाओं को जोड़ने के ब्रांड्स के दांव सही नहीं बैठे। जुलाई में वाडीलाल का ‘वर्ल्ड आइसक्रीम डे’ कैंपेन जिसमें नीट टॉपर्स की तस्वीरों में डिजिटल मुस्कान जोड़ी गई। सीजेपी आंदोलन के बीच आने पर यह आलोचनाओं में घिर गया। इसके उलट स्टेफ्री ने प्रदर्शनकारियों द्वारा गढ़े गए नारे ‘एट लीस्ट द पैड्स डोंट लीक’ को अपने चैनल पर बढ़ावा देने का मौका गंवा दिया। करवी और फॉस्टो जैसे ब्रांड्स ने प्रचार गतिविधियां रोककर सांकेतिक एकजुटता दिखाई। ब्लू टोकाई के जनपथ आउटलेट ने पुलिस हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों को शरण दी, जबकि ट्रैक ने कर्मचारियों को प्रदर्शनों में हिस्सा लेने से न रोकने की बात कही। ब्रांड्स एक्सपर्ट स्वाति शर्मा का कहना है कि बाजार का गणित अब यह नहीं रह गया कि आलोचना होगी या नहीं, बल्कि यह है कि ब्रांड लंबी अवधि की विश्वसनीयता के लिए फौरी विवाद झेलने के लिए तैयार है या नहीं। स्ट्रीटवियर ब्रांड मैनलिक के संस्थापक प्रीतम कुदेव ने कहा, ‘यदि युवा अपने बुनियादी अधिकारों के लिए सड़कों पर हैं, तो हम कम से कम उनके साथ खड़ा तो हो सकते थे।’ भारतीय कंपनियों के सामने पश्चिमी ब्रांड्स से अलग चुनौती, पक्षपाती दिखने का खतरा शर्मा का कहना है कि ब्रांड्स के सामने राजनीतिक रूप से पक्षपाती दिखने का खतरा मंडराता रहता है। 2020 में आए तनिष्क के विज्ञापन को ही ले लीजिए। उसमें एक विशेष धर्म को मानने वाली सास अन्य धर्म की बहू की गोदभराई कराती दिखी थी। ‘बायकॉट तनिष्क’ ट्रेंड के बाद उसे वापस लेना पड़ा। हालांकि सर्फ एक्सेल ने इसी तरह के बहिष्कार के बावजूद विज्ञापन नहीं हटाया, जिसे एक करोड़ से ज्यादा बार देखा गया।

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ब्रांड्स का नया ट्रेंड; नस्ली न्याय से बढ़ी सेल्स:जेन जी को टारगेट करने वाले ब्रांड्स को करना पड़ रहा उनके मुद्दों को सपोर्ट

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भारतीय ब्रांड्स ने जेन जी यानी 14 से 29 साल तक की युवा पीढ़ी की भाषा और सौंदर्यबोध अपनाने में महारत हासिल कर ली है। नायका और स्विगी इंस्टामार्ट ने हाल ही में ‘गंजी चुड़ैल’ जैसे ट्रेंड भुनाए, टिंडर ने ‘सिचुएशनशिप’ और ‘मेन-कैरेक्टर एनर्जी’ जैसे शब्द अपनाए, तो फास्ट्रैक ने ‘यू डू यू’ कैंपेन के जरिए फ्लुइड पहचान का जश्न मनाया। लेकिन जब परीक्षा पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) आंदोलन के तहत जेन जी सड़कों पर उतरी तो ब्रांड्स की जुड़ाव वाली यह छवि गायब हो गई। दरअसल, आज ब्रांड्स सिर्फ युवा संस्कृति के सौंदर्यबोध को उधार लेकर उनकी वास्तविक चिंताओं से दूर नहीं रह सकते, जैसा कि पेप्सी ने 1960 के दशक में ‘पेप्सी जनरेशन’ कैंपेन के जरिए किया था। इसके उलट, नाइकी ने ‘कॉलिन कैपरनिक’ कैंपेन के जरिए नस्ली न्याय के मुद्दे पर लगातार फोकस करके करीब 1,550 करोड़ रुपए की मीडिया वैल्यू और बिक्री में तगड़ी बढ़त हासिल की। लेकिन बात और काम के बीच तालमेल न हो तो नुकसान भी होता है। कोविड के दौर में मैकडॉनल्ड्स के बयान और कंपनी के भीतर अश्वेत कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े आरोपों के बीच अंतर इसकी मिसाल है। बहरहाल, सीजेपी आंदोलन ने दिखाया कि भारतीय जेन जी 37.7 करोड़ की आबादी और करीब 81 लाख करोड़ रुपए खर्च करने क्षमता के साथ अपनी आर्थिक ताकत अच्छी तरह पहचानती है। प्रदर्शनकारियों ने हास्य, ‘गेट रेडी विद मी’ वीडियो और पुलिस हिंसा के फुटेज को गेमिंग इमेजरी के साथ जोड़कर पूरी स्क्रिप्ट खुद लिखी। इस ब्रीच कई मौकों पर युवाओं को जोड़ने के ब्रांड्स के दांव सही नहीं बैठे। जुलाई में वाडीलाल का ‘वर्ल्ड आइसक्रीम डे’ कैंपेन जिसमें नीट टॉपर्स की तस्वीरों में डिजिटल मुस्कान जोड़ी गई। सीजेपी आंदोलन के बीच आने पर यह आलोचनाओं में घिर गया। इसके उलट स्टेफ्री ने प्रदर्शनकारियों द्वारा गढ़े गए नारे ‘एट लीस्ट द पैड्स डोंट लीक’ को अपने चैनल पर बढ़ावा देने का मौका गंवा दिया। करवी और फॉस्टो जैसे ब्रांड्स ने प्रचार गतिविधियां रोककर सांकेतिक एकजुटता दिखाई। ब्लू टोकाई के जनपथ आउटलेट ने पुलिस हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों को शरण दी, जबकि ट्रैक ने कर्मचारियों को प्रदर्शनों में हिस्सा लेने से न रोकने की बात कही। ब्रांड्स एक्सपर्ट स्वाति शर्मा का कहना है कि बाजार का गणित अब यह नहीं रह गया कि आलोचना होगी या नहीं, बल्कि यह है कि ब्रांड लंबी अवधि की विश्वसनीयता के लिए फौरी विवाद झेलने के लिए तैयार है या नहीं। स्ट्रीटवियर ब्रांड मैनलिक के संस्थापक प्रीतम कुदेव ने कहा, ‘यदि युवा अपने बुनियादी अधिकारों के लिए सड़कों पर हैं, तो हम कम से कम उनके साथ खड़ा तो हो सकते थे।’ भारतीय कंपनियों के सामने पश्चिमी ब्रांड्स से अलग चुनौती, पक्षपाती दिखने का खतरा शर्मा का कहना है कि ब्रांड्स के सामने राजनीतिक रूप से पक्षपाती दिखने का खतरा मंडराता रहता है। 2020 में आए तनिष्क के विज्ञापन को ही ले लीजिए। उसमें एक विशेष धर्म को मानने वाली सास अन्य धर्म की बहू की गोदभराई कराती दिखी थी। ‘बायकॉट तनिष्क’ ट्रेंड के बाद उसे वापस लेना पड़ा। हालांकि सर्फ एक्सेल ने इसी तरह के बहिष्कार के बावजूद विज्ञापन नहीं हटाया, जिसे एक करोड़ से ज्यादा बार देखा गया।

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Gold Silver Price Hike | India Bullion Market Rate Update 2026

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12 मिनट पहले कॉपी लिंक सोने-चांदी की कीमत में आज यानी 10 अगस्त को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 1,440 रुपए बढ़कर 1.51 लाख रुपए पर पहुंच गया है। एक किलो चांदी की कीमत 1,909 रुपए बढ़कर 2.33 लाख रुपए पर पहुंच गई है। इस महीने यानी अगस्त में सिर्फ 6 दिन में ही सोना 8,201 और चांदी 14,995 रुपए महंगी हो चुकी है। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत कैरेट भाव (रुपए/10 ग्राम) 24 ₹1,51,061 22 ₹1,38,372 18 ₹1,13,296 14 ₹88,371 देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत शहर 10 ग्राम 24 कैरेट दिल्ली ₹1,52,120 मुंबई ₹1,51,970 कोलकाता ₹1,51,970 जयपुर ₹1,52,120 भोपाल ₹1,52,020 पटना ₹1,52,020 लखनऊ ₹1,52,120 रायपुर ₹1,51,970 अहमदाबाद ₹1,52,020 सोर्स: goodreturns 10 अगस्त 2026 इस साल सोने-चांदी में अब तक तेजी रही इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 18 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.51 लाख रुपए पर पहुंच गया है। चांदी की कीमत में 3 हजार रुपए की बढ़त है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.33 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। इस साल अब तक सोने-चांदी की चाल तारीख सोना चांदी 31 दिसंबर 2025 ₹1,33,195 ₹2,30,420 31 जनवरी 2026 ₹1,65,795 ₹3,39,350 28 फरवरी 2026 ₹1,50,997 ₹2,66,700 31 मार्च 2026 ₹1,46,733 ₹2,30,135 30 अप्रैल 2026 ₹1,50,263 ₹2,40,331 31 मई 2026 ₹1,56,463 ₹2,63,350 30 जून 2026 ₹1,41,286 ₹2,25,425 31 जुलाई 2026 ₹1,42,860 ₹2,18,295 10 अगस्त 2026 ₹1,51,061 ₹2,33,290 नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर रहे हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है। सोने-चांदी में ETF के जरिए कर सकते हैं निवेश एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सोने और चांदी के गिरते-चढ़ते भावों पर बेस्ड होते हैं। गोल्ड ETF या सिल्वर ETF की खरीद-बिक्री शेयर की ही तरह BSE और NSE पर की जा सकती है। हालांकि, इसमें आपको सोना या चांदी नहीं मिलता। आप जब इससे निकलना चाहें तब आपको उस समय के सोने-चांदी के भाव के बराबर पैसा मिल जाएगा। इसमें 500 रुपए से भी कम में निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। इसमें कैसे कर सकते हैं निवेश? ETF खरीदने के लिए आपको अपने ब्रोकर के माध्यम से डीमैट अकाउंट खोलना होता है। इसमें NSE पर उपलब्ध ETF के यूनिट आप खरीद सकते हैं और उसके बराबर की राशि आपके डीमैट अकाउंट से जुड़े बैंक अकाउंट से कट जाएगी। आपके डीमैट अकाउंट में ऑर्डर लगाने के दो दिन बाद ETF आपके अकाउंट में डिपॉजिट हो जाते हैं। ट्रेडिंग खाते के जरिए ही ETF को बेचा जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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'अखिलेश मुसलमान और राहुल हिन्दुओं को ईसाई बनाना चाह रहे':प्रमोद कृष्णम बोले- पहले पार्टी के लिए थे समस्या, अब राष्ट्र की समस्या हैं नेता प्रतिपक्ष

February 27, 2026/
5:18 pm

ऊधम सिंह नगर में कांग्रेस से निकाले गए कल्कि धाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव...

पीएम एक्सीलेंस कॉलेज में बस शुल्क को लेकर विवाद:जबरन वसूली के विरोध में एनएसयूआई ने खोला मोर्चा, कहा-10 दिन में समाधान करें

April 27, 2026/
6:47 pm

रीवा में पीएम एक्सीलेंस (मॉडल साइंस कॉलेज) में छात्रों से जबरन बस शुल्क वसूली के विरोध में एनएसयूआई ने मोर्चा...

SRH Praful Hinge IPL 2026 Strategy; Sunrisers Hyderabad

April 24, 2026/
4:39 pm

स्पोर्ट्स डेस्क17 मिनट पहले कॉपी लिंक सनराइजर्स हैदराबाद के तेज गेंदबाज प्रफुल्ल हिंगे ने आने वाले मैचों के लिए अपनी...

Former Pakistan Army Chief Qamar Bajwa Passes Away

March 28, 2026/
10:51 pm

इस्लामाबाद2 घंटे पहले कॉपी लिंक पाकिस्तान के पूर्व सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा का 65 साल की उम्र में...

NEET PG 2026 Exam Update

August 3, 2026/
7:48 am

नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने NEET PG 2026 परीक्षा के लिए कई बड़े सुधारों की...

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