Wednesday, 10 Jun 2026 | 01:35 PM

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Gold & Silver Prices Drop; LPG Subsidy Changes

Gold & Silver Prices Drop; LPG Subsidy Changes

नई दिल्ली14 मिनट पहले कॉपी लिंक कल की बड़ी खबर LPG सिलेंडर से जुड़ी रही। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर अब साल में 9 की बजाय सिर्फ पहले 4 सिलेंडर पर ही 300 रुपए की एक्स्ट्रा छूट मिलेगी। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में क्रेडिट की जाती है। वहीं, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से 8 जून को सोने-चांदी के दाम में गिरावट रही। 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 2,749 रुपए गिरकर 1.51 लाख रुपए हो गया, जबकि 1 किलो चांदी की कीमत 12,608 रुपए कम होकर 2.44 लाख रुपए पर आ गई। कल की बड़ी खबर से पहले आज की ये सुर्खियां… शेयर बाजार में आज गिरावट देखने को मिल सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमत में आज कोई बदलाव नहीं हुआ। अब कल की बड़ी खबरें पढ़ें… 1. उज्ज्वला योजना में सिर्फ 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलेंगे: अब तक 9 सिलेंडर दिए जाते थे, इंटरनेशनल मार्केट में LPG के दाम 46% तक बढ़ने का असर उज्ज्वला योजना (PMUY) में अब साल के सिर्फ पहले 4 गैस सिलेंडरों पर ही ₹300 की अतिरिक्त छूट मिलेगी, पहले यह 9 सिलेंडरों पर मिलती थी। सब्सिडी की यह रकम सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते (डीबीटी) में भेजी जाती है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी प्रवीण खनूजा ने सोमवार को बताया कि, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर LPG की कीमतें 46% तक बढ़ने से यह फैसला लिया गया है। 14.2 किलो वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत रविवार (7 जून) को 29 रुपए बढ़ने के बाद दिल्ली में 942 रुपए है। ऐसे में उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सिलेंडर 642 रुपए में मिल रहा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 2. चांदी ₹12,608 गिरकर ₹2.41 लाख किलो पर आई: 8 दिन में ₹22 हजार की गिरावट; सोना आज ₹2749 टूटा, 10 ग्राम की कीमत ₹1.51 लाख मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से 8 जून को सोने-चांदी के दाम में गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 2,749 रुपए गिरकर 1.51 लाख रुपए हो गया है। वहीं, 1 किलो चांदी की कीमत 12,608 रुपए कम होकर 2.44 लाख रुपए पर आ गई है। 31 मई को चांदी की कीमत 2,63,350 रुपए थी। एक्सपर्ट्स के अनुसार जियो पॉलिटिकल टेंशन के चलते लोग मार्केट से पैसा निकालकर अपने पास कैश रख रहे हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 3. एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत: सरकार का वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज वसूलने का फैसला रद्द; बैंक गारंटी भी वापस होगी बॉम्बे हाई कोर्ट ने भारती एयरटेल लिमिटेड और वोडाफोन आइडिया लिमिटेड पर केंद्र सरकार के लगाए गए वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज (OTSC) को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकार के पास टेलीकॉम लाइसेंस दिए जाने के सालों बाद वित्तीय शर्तों को पिछली तारीख (रेट्रोस्पेक्टिव) से बदलने का कोई अधिकार नहीं है। जस्टिस मनीष पितले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की डिवीजन बेंच ने सरकार के 2012 के इस फैसले को खारिज करते हुए कंपनियों की बैंक गारंटी भी लौटाने का निर्देश दिया है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 4. भारत-यूएस ट्रेड डील फाइनल होने के करीब: जुलाई के बाद नए टैरिफ रेट पर कंफर्मेशन मिलते ही फैसला होगा; ब्रिटेन के साथ भी बातचीत बढ़ी भारत और अमेरिका के बीच बाइलेटरल ट्रेड डील की पहली किस्त जल्द ही फाइनल हो सकती है। दोनों देशों के बीच यह डील जुलाई के बाद भारतीय एक्सपोर्ट पर लागू होने वाली टैरिफ दरों पर कंफर्मेशन आने के बाद फाइनल लेगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, अमेरिका की धारा 301 की प्रोसेस के तहत जो टैरिफ रेट तय किया जाएगा, वही रेट इस ट्रेड डील में भारत के लिए भी लागू होने की संभावना है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… 5. इंडिगो का FY-30 तक सालाना 20 करोड़ पैसेंजर्स का टारगेट: 550 से ज्यादा एयरक्राफ्ट का प्लान, इंटरनेशनल कैपेसिटी 40% करने का लक्ष्य भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने वित्त वर्ष 2029-30 (FY30) के लिए अपना मेगा प्लान पेश किया है। कंपनी का लक्ष्य सालाना करीब 200 मिलियन (20 करोड़) यात्रियों को सफर कराना और भारत को एक बड़ा ग्लोबल एविएशन ट्रांजिट हब बनाना है। यह ब्लूप्रिंट 8 जून को एयरलाइन के ‘एनालिस्ट डे’ पर पेश किया गया। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें… दुनिया के टॉप-10 सबसे अमीर कौन रहे यह भी देख लीजिए… सोमवार के शेयर बाजार और सोना-चांदी का हाल जान लीजिए… पेट्रोल-डीजल और घरेलू गैस सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत जान लीजिए… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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एपल WWDC 2026, एप बदले बिना ईमेल-मैसेज लिखेगी सिरी AI:बच्चों के लिए 'आस्क टू ब्राउज' डिफॉल्ट मिलेगा, iOS27 में 11 बड़े फीचर्स

एपल WWDC 2026, एप बदले बिना ईमेल-मैसेज लिखेगी सिरी AI:बच्चों के लिए 'आस्क टू ब्राउज' डिफॉल्ट मिलेगा, iOS27 में 11 बड़े फीचर्स

एपल का एनुअल इवेंट वर्ल्डवाइड डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस 2026 एपल पार्क में शुरू हो गया है। इस बार इवेंट में सिरी, iOS 27 और एपल इंटेलिजेंस को लेकर कई बड़े ऐलान किए गए हैं। सबसे खास सिरी को नए अवतार में ‘सिरी AI’ नाम से पेश किया गया, जो पहले से कहीं ज्यादा बातचीत करने में सक्षम और कॉन्टेक्स्ट-अवेयर (यानी संदर्भ को समझने वाला) है। सिरी AI बिना एप बदले ईमेल और मैसेज लिख सकेगी और फोटो देखकर बताएगी खाने की न्यूट्रिशन वैल्यू भी बताएगी। साल 2011 में आईफोन पर डेब्यू के बाद से यह सिरी का अब तक का सबसे बड़ा अपग्रेड है, जिसके जरिए कंपनी चैटजीपीटी, जेमिनी और क्लाउड जैसे प्रतिस्पर्धियों को टक्कर देने की तैयारी कर रही है। आगे जानिए एपल ने WWDC 2026 में iOS 27 में क्या नए अपडेट्स किए हैं। 1. सिरी में बड़ा बदलाव: गूगल जेमिनी के साथ अब नए स्टैंडअलोन एप में मिलेगी एपल ने अपनी पुरानी सिरी असिस्टेंट को AI के इस दौर में ज्यादा एडवांस बना दिया है। नए अपडेट के बाद सिरी अब गूगल जेमिनी मॉडल की मदद से काम करेगी। कंपनी का दावा है कि नई सिरी पहले से ज्यादा बातचीत करने लायक, विजुअल इंटेलिजेंस को समझने वाली और ज्यादा क्षमतावान होगी। अब सिरी को मौजूदा एप्स के साथ-साथ एक अलग स्टैंडअलोन एप के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। 2. AI प्राइवेसी पर फोकस: डेटा सिर्फ रिक्वेस्ट पूरी करने के लिए होगा AI फीचर्स को रोलआउट करने से पहले एपल ने प्राइवेसी को लेकर अपना स्टैंड साफ किया है। एपल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट क्रेग फेडरिघी ने कहा, “हम मानते हैं कि एआई में प्राइवेसी के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।” उन्होंने भरोसा दिया कि यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल केवल उनकी रिक्वेस्ट को पूरा करने के लिए किया जाएगा और बाहरी एक्सपर्ट्स कभी भी इस वादे की जांच कर सकते हैं। 3. एपल इंटेलिजेंस: कॉलिंग के दौरान मेल और मैसेज का संदर्भ समझेगा फोन कंपनी ने अपने एप्स में कई नए एपल इंटेलिजेंस अपडेट शामिल किए हैं। सफारी ब्राउजर के लिए अब टैब मैनेजमेंट और वन-टैप पासवर्ड अपडेट की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, एप्स के बीच क्रॉस-एप कॉन्टेक्स्ट अवेयरनेस (एक एप की बात दूसरे में समझना) फीचर दिया गया है। मैसेज एप में अब AI-पावर्ड रिप्लाई सजेशन मिलेंगे, जबकि फोन एप अब कॉल के दौरान ही मेल और मैसेज जैसे अन्य एप्स से संदर्भ (कॉन्टेक्स्ट) निकाल सकेगा। एपल ने बताया कि इन फीचर्स के लिए उन्होंने गूगल के जेमिनी मॉडल्स की मदद से एपल फाउंडेशन मॉडल्स तैयार किए हैं। 4. iOS 27: आईफोन 11 और उसके बाद के सभी मॉडल्स को मिलेगा सपोर्ट एपल ने दावा किया है कि यह उनका अब तक का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर अपडेट होगा जो सबसे ज्यादा डिवाइसेज को सपोर्ट करेगा। कंपनी ने ऐलान किया कि आईफोन 11 और उसके बाद के सभी आईफोन मॉडल्स को iOS 27 का अपडेट मिलेगा। इस नए अपडेट से परफॉर्मेंस काफी बेहतर हो जाएगी। एपल के मुताबिक, नए फोटो अब 70% ज्यादा तेजी से दिखाई देंगे, एयरड्रॉप ट्रांसफर की स्पीड 80% बढ़ जाएगी और मल्टीटास्किंग को बेहतर करने के लिए सीपीयू शेड्यूलर्स में सुधार किया गया है। 5. पेरेंटल कंट्रोल्स: 13 साल से छोटे बच्चों के लिए ‘आस्क टू ब्राउज’ डिफॉल्ट रहेगा बच्चों के स्क्रीन टाइम और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एपल ने माता-पिता के लिए नए टूल्स पेश किए हैं। अब पेरेंट्स यह तय कर सकेंगे कि उनका बच्चा किसे कॉल कर सकता है और किन एप्स या वेबसाइट्स को एक्सेस कर सकता है। 13 साल से कम उम्र के बच्चों की डिवाइसेज में ‘आस्क टू ब्राउज’ (वेबसाइट एक्सेस लिमिट) और एप स्टोर या इन-एप परचेज के लिए ‘आस्क टू बाय’ फीचर बाय-डिफॉल्ट एक्टिव रहेगा। 6. फोटो एप में AI एडिटिंग: रीफ्रेम और एक्सटेंड टूल्स से बदल जाएगा तस्वीर का लुक फोटो एडिटिंग एप्स को टक्कर देने के लिए एपल फोटो एप में नए एआई टूल्स लाया है। नया स्पेशल ‘रीफ्रेम’ फीचर एआई की मदद से फोटो के पर्सपेक्टिव (एंगल) को ऐसे बदल देगा जैसे तस्वीर लेते वक्त कैमरा किसी दूसरी जगह रखा हो। वहीं ‘एक्सटेंड’ टूल इमेज के आस्पेक्ट रेशियो को बढ़ा देगा जिससे सीन में और ज्यादा चीजें जोड़ी जा सकेंगी। इसके अलावा ‘क्लीनअप’ टूल को भी अपग्रेड किया गया है, जो जेनरेटिव एआई की मदद से फोटो के बैकग्राउंड से अनचाही चीजों को ज्यादा रियलिस्टिक तरीके से हटा देगा। 7. लिक्विड ग्लास डिजाइन और इमेज प्लेग्राउंड में बदलाव पिछले साल के लिक्विड ग्लास डिजाइन को पसंद न करने वाले यूजर्स के लिए एपल ने इसमें कुछ बदलाव करने (ऑप्ट-इन रोलबैक) का विकल्प दिया है। अब यूजर्स इसके एलिमेंट्स को कम या ज्यादा हाइलाइट कर सकते हैं। इसके साथ ही एप्स के अंदर लिक्विड ग्लास का एक नया लेयर्ड अप्रोच दिखाया गया है। वहीं, इमेज जनरेशन एप ‘इमेज प्लेग्राउंड’ को परफॉर्मेंस अपडेट के साथ दोबारा पेश किया गया है। इसमें सुरक्षा रखी गई है कि इस एप से बनी तस्वीरों का इस्तेमाल एआई की ट्रेनिंग के लिए नहीं किया जाएगा। 8. नए फीचर्स: कीबोर्ड में इन-बिल्ट एआई डिक्टेशन और शॉर्टकट्स में नेचुरल लैंग्वेज 9. टिम कुक: ‘मुझे भरोसा है कि एपल का सबसे बेहतरीन समय अभी आना बाकी है’ कीनोट के आखिर में CEO टिम कुक ने कंपनी को अलविदा कहते हुए अपना आखिरी मैसेज दिया। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ सालों में आपने लोगों को असाधारण तरीकों से जुड़ने, सीखने और अनुभव करने में मदद की है। आज जिन शानदार क्षमताओं को हमने पेश किया है और जो आगे आने वाली हैं, उन्हें देखकर मुझे पूरा विश्वास है कि एपल का सबसे बेहतरीन समय अभी आना बाकी है। लोगों के जीवन को बेहतर बनाने वाले दुनिया के सबसे बेहतरीन प्रोडक्ट्स बनाना हमेशा हमारा ध्रुवतारा रहा है। ऐसी क्रिएटिव और केयरिंग टीम के साथ इस मिशन को आगे बढ़ाना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है।”

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एपल WWDC 2026, एप बदले बिना ईमेल-मैसेज लिखेगी सिरी AI:बच्चों के लिए 'आस्क टू ब्राउज' डिफॉल्ट मिलेगा, iOS27 में 11 बड़े फीचर्स

एपल WWDC 2026, एप बदले बिना ईमेल-मैसेज लिखेगी सिरी AI:बच्चों के लिए 'आस्क टू ब्राउज' डिफॉल्ट मिलेगा, iOS27 में 11 बड़े फीचर्स

एपल का एनुअल इवेंट वर्ल्डवाइड डेवलपर्स कॉन्फ्रेंस 2026 एपल पार्क में शुरू हो गया है। इस बार इवेंट में सिरी, iOS 27 और एपल इंटेलिजेंस को लेकर कई बड़े ऐलान किए गए हैं। सबसे खास सिरी को नए अवतार में ‘सिरी AI’ नाम से पेश किया गया, जो पहले से कहीं ज्यादा बातचीत करने में सक्षम और कॉन्टेक्स्ट-अवेयर (यानी संदर्भ को समझने वाला) है। सिरी AI बिना एप बदले ईमेल और मैसेज लिख सकेगी और फोटो देखकर बताएगी खाने की न्यूट्रिशन वैल्यू भी बताएगी। साल 2011 में आईफोन पर डेब्यू के बाद से यह सिरी का अब तक का सबसे बड़ा अपग्रेड है, जिसके जरिए कंपनी चैटजीपीटी, जेमिनी और क्लाउड जैसे प्रतिस्पर्धियों को टक्कर देने की तैयारी कर रही है। आगे जानिए एपल ने WWDC 2026 में iOS 27 में क्या नए अपडेट्स किए हैं। 1. सिरी में बड़ा बदलाव: गूगल जेमिनी के साथ अब नए स्टैंडअलोन एप में मिलेगी एपल ने अपनी पुरानी सिरी असिस्टेंट को AI के इस दौर में ज्यादा एडवांस बना दिया है। नए अपडेट के बाद सिरी अब गूगल जेमिनी मॉडल की मदद से काम करेगी। कंपनी का दावा है कि नई सिरी पहले से ज्यादा बातचीत करने लायक, विजुअल इंटेलिजेंस को समझने वाली और ज्यादा क्षमतावान होगी। अब सिरी को मौजूदा एप्स के साथ-साथ एक अलग स्टैंडअलोन एप के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। 2. AI प्राइवेसी पर फोकस: डेटा सिर्फ रिक्वेस्ट पूरी करने के लिए होगा AI फीचर्स को रोलआउट करने से पहले एपल ने प्राइवेसी को लेकर अपना स्टैंड साफ किया है। एपल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट क्रेग फेडरिघी ने कहा, “हम मानते हैं कि एआई में प्राइवेसी के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।” उन्होंने भरोसा दिया कि यूजर्स के डेटा का इस्तेमाल केवल उनकी रिक्वेस्ट को पूरा करने के लिए किया जाएगा और बाहरी एक्सपर्ट्स कभी भी इस वादे की जांच कर सकते हैं। 3. एपल इंटेलिजेंस: कॉलिंग के दौरान मेल और मैसेज का संदर्भ समझेगा फोन कंपनी ने अपने एप्स में कई नए एपल इंटेलिजेंस अपडेट शामिल किए हैं। सफारी ब्राउजर के लिए अब टैब मैनेजमेंट और वन-टैप पासवर्ड अपडेट की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा, एप्स के बीच क्रॉस-एप कॉन्टेक्स्ट अवेयरनेस (एक एप की बात दूसरे में समझना) फीचर दिया गया है। मैसेज एप में अब AI-पावर्ड रिप्लाई सजेशन मिलेंगे, जबकि फोन एप अब कॉल के दौरान ही मेल और मैसेज जैसे अन्य एप्स से संदर्भ (कॉन्टेक्स्ट) निकाल सकेगा। एपल ने बताया कि इन फीचर्स के लिए उन्होंने गूगल के जेमिनी मॉडल्स की मदद से एपल फाउंडेशन मॉडल्स तैयार किए हैं। 4. iOS 27: आईफोन 11 और उसके बाद के सभी मॉडल्स को मिलेगा सपोर्ट एपल ने दावा किया है कि यह उनका अब तक का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर अपडेट होगा जो सबसे ज्यादा डिवाइसेज को सपोर्ट करेगा। कंपनी ने ऐलान किया कि आईफोन 11 और उसके बाद के सभी आईफोन मॉडल्स को iOS 27 का अपडेट मिलेगा। इस नए अपडेट से परफॉर्मेंस काफी बेहतर हो जाएगी। एपल के मुताबिक, नए फोटो अब 70% ज्यादा तेजी से दिखाई देंगे, एयरड्रॉप ट्रांसफर की स्पीड 80% बढ़ जाएगी और मल्टीटास्किंग को बेहतर करने के लिए सीपीयू शेड्यूलर्स में सुधार किया गया है। 5. पेरेंटल कंट्रोल्स: 13 साल से छोटे बच्चों के लिए ‘आस्क टू ब्राउज’ डिफॉल्ट रहेगा बच्चों के स्क्रीन टाइम और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एपल ने माता-पिता के लिए नए टूल्स पेश किए हैं। अब पेरेंट्स यह तय कर सकेंगे कि उनका बच्चा किसे कॉल कर सकता है और किन एप्स या वेबसाइट्स को एक्सेस कर सकता है। 13 साल से कम उम्र के बच्चों की डिवाइसेज में ‘आस्क टू ब्राउज’ (वेबसाइट एक्सेस लिमिट) और एप स्टोर या इन-एप परचेज के लिए ‘आस्क टू बाय’ फीचर बाय-डिफॉल्ट एक्टिव रहेगा। 6. फोटो एप में AI एडिटिंग: रीफ्रेम और एक्सटेंड टूल्स से बदल जाएगा तस्वीर का लुक फोटो एडिटिंग एप्स को टक्कर देने के लिए एपल फोटो एप में नए एआई टूल्स लाया है। नया स्पेशल ‘रीफ्रेम’ फीचर एआई की मदद से फोटो के पर्सपेक्टिव (एंगल) को ऐसे बदल देगा जैसे तस्वीर लेते वक्त कैमरा किसी दूसरी जगह रखा हो। वहीं ‘एक्सटेंड’ टूल इमेज के आस्पेक्ट रेशियो को बढ़ा देगा जिससे सीन में और ज्यादा चीजें जोड़ी जा सकेंगी। इसके अलावा ‘क्लीनअप’ टूल को भी अपग्रेड किया गया है, जो जेनरेटिव एआई की मदद से फोटो के बैकग्राउंड से अनचाही चीजों को ज्यादा रियलिस्टिक तरीके से हटा देगा। 7. लिक्विड ग्लास डिजाइन और इमेज प्लेग्राउंड में बदलाव पिछले साल के लिक्विड ग्लास डिजाइन को पसंद न करने वाले यूजर्स के लिए एपल ने इसमें कुछ बदलाव करने (ऑप्ट-इन रोलबैक) का विकल्प दिया है। अब यूजर्स इसके एलिमेंट्स को कम या ज्यादा हाइलाइट कर सकते हैं। इसके साथ ही एप्स के अंदर लिक्विड ग्लास का एक नया लेयर्ड अप्रोच दिखाया गया है। वहीं, इमेज जनरेशन एप ‘इमेज प्लेग्राउंड’ को परफॉर्मेंस अपडेट के साथ दोबारा पेश किया गया है। इसमें सुरक्षा रखी गई है कि इस एप से बनी तस्वीरों का इस्तेमाल एआई की ट्रेनिंग के लिए नहीं किया जाएगा। 8. नए फीचर्स: कीबोर्ड में इन-बिल्ट एआई डिक्टेशन और शॉर्टकट्स में नेचुरल लैंग्वेज 9. टिम कुक: ‘मुझे भरोसा है कि एपल का सबसे बेहतरीन समय अभी आना बाकी है’ कीनोट के आखिर में CEO टिम कुक ने कंपनी को अलविदा कहते हुए अपना आखिरी मैसेज दिया। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ सालों में आपने लोगों को असाधारण तरीकों से जुड़ने, सीखने और अनुभव करने में मदद की है। आज जिन शानदार क्षमताओं को हमने पेश किया है और जो आगे आने वाली हैं, उन्हें देखकर मुझे पूरा विश्वास है कि एपल का सबसे बेहतरीन समय अभी आना बाकी है। लोगों के जीवन को बेहतर बनाने वाले दुनिया के सबसे बेहतरीन प्रोडक्ट्स बनाना हमेशा हमारा ध्रुवतारा रहा है। ऐसी क्रिएटिव और केयरिंग टीम के साथ इस मिशन को आगे बढ़ाना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है।”

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Fuel Reserve for 1 Month If Supply Stops; Boost Oil Research Investment

Fuel Reserve for 1 Month If Supply Stops; Boost Oil Research Investment

Hindi News Business Petroleum Minister: Fuel Reserve For 1 Month If Supply Stops; Boost Oil Research Investment नई दिल्ली10 मिनट पहले कॉपी लिंक पेट्रोल-डीजल पर सोमवार (8 जून) को पेट्रोलियम मंत्रालय और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की और से दो अलग-अलग बयान आए, जिससे पता चलता है कि देश में फ्यूल का स्टॉक तो है, लेकिन कीमतें बढ़ सकती हैं। एक ओर केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि भारत के पास वर्तमान में अपनी रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व, रिफाइनरी स्टॉक और कमर्शियल स्टॉक को मिलाकर 76 से 80 दिन की खपत के बराबर फ्यूल रिजर्व मौजूद है। उन्होंने बताया कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद देश की तेल सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें बहुत लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर नहीं रहेंगी। वहीं, दूसरी ओर पेट्रोलियम मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी प्रवीण खनूजा ने एक प्रेस ब्रीफिंग में यह भी बताया कि LPG के अलावा तेल कंपनियां वर्तमान में डीजल पर 30 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल पर 6 रुपए प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी (नुकसान) झेल रही हैं। इस कारण कंपनियों को हर दिन करीब 600 से 700 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। लंबी अवधि के युद्ध से बदल सकती हैं चुनौतियां हरदीप सिंह पुरी ने यह भी स्वीकार किया कि यदि मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष उम्मीद से कहीं ज्यादा लंबा खींचता है, तो चुनौतियां बदल सकती हैं। शॉर्ट-टर्म की रुकावटों को देश अपने स्टॉक और वैकल्पिक रास्तों से संभाल लेगा, लेकिन बहुत लंबे समय तक चलने वाला संकट वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक असर डाल सकता है। हालांकि, सरकारी तेल कंपनियां लॉन्ग-टर्म सुरक्षा के लिए घरेलू स्तर पर ड्रिलिंग एक्टिविटीज को काफी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही हैं ताकि बाहरी झटकों के प्रति निर्भरता कम हो सके। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने पर भी 30 दिन का संकट झेलने में सक्षम वैश्विक तेल सप्लाई के सबसे महत्वपूर्ण रूट ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बंद होने की आशंकाओं पर पेट्रोलियम मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि भारत के पास मौजूद स्टॉक और वैकल्पिक सोर्सिंग (आपूर्ति) की व्यवस्थाओं के कारण देश किसी भी अस्थायी रुकावट से निपटने में सक्षम है। अगर यह समुद्री रास्ता करीब 30 दिनों के लिए बंद भी हो जाता है, तो भारत इस स्थिति को बेहद आसानी से संभाल सकता है। क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस और LPG का 60 दिनों का मजबूत कवर मौजूद हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि उनकी प्राथमिकता देश में क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस और एलपीजी (LPG) तीनों का कम से कम 60-60 दिनों का स्टॉक कवर बनाए रखने की है। भारत वर्तमान में इस तय सीमा (थ्रेशोल्ड) को पूरा कर रहा है और एक बेहद आरामदायक स्थिति में है। सरकार ने पहले से ही अपनी आपूर्ति व्यवस्था में विविधता (डाइवर्सिफिकेशन) लाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। मोजाम्बिक और यूएई जैसे देशों से मिलेगी अतिरिक्त मदद पेट्रोलियम मंत्री के मुताबिक, खाड़ी देशों (गल्फ रीजन) से बाहर के उत्पादक देश वैश्विक स्तर पर तेल की कमी को पूरा करेंगे। उन्होंने बताया कि मोजाम्बिक से आने वाली अतिरिक्त गैस सप्लाई भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करेगी। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त एलपीजी कार्गो सुरक्षित करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों के साथ बातचीत की गई है, जिससे भारत को संकट के समय जरूरी मदद मिल सके। 24 रिफाइनरियों की क्षमता भारत की सबसे बड़ी ताकत मंत्री ने कहा कि भारत का एनर्जी सिक्योरिटी फ्रेमवर्क सिर्फ स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रिफाइनर्स और फ्यूल रिटेलर्स के पास मौजूद इन्वेंट्री भी शामिल है। देश में वर्तमान में 24 रिफाइनरियां काम कर रही हैं और सरकार लगातार अपनी रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ा रही है। वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान यह रिफाइनिंग क्षमता भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है। देश की ऊर्जा कंपनियां भी मानती हैं कि शॉर्ट-टर्म के किसी भी संकट को आसानी से मैनेज किया जा सकता है। कम कीमत पर रिजर्व न भरने के आरोपों को खारिज किया महामारी (पैंडेमिक) के बाद जब कच्चे तेल की कीमतें बेहद कम थीं, तब भारत द्वारा अपने रिजर्व को पर्याप्त रूप से न भरने की आलोचनाओं को मंत्री ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि फ्यूल स्टॉक का मैनेजमेंट एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें लगातार स्टॉक को रिप्लेनिश (दोबारा भरना) और उसका कमर्शियल इस्तेमाल करना शामिल होता है। क्रूड ऑयल को अनिश्चितकाल के लिए सिर्फ स्टोर करके नहीं रखा जा सकता; इन्वेंट्री को बाजार की स्थितियों और खपत की जरूरतों के आधार पर एक्टिव तरीके से मैनेज किया जाता है। एलपीजी कनेक्शंस 14 करोड़ से बढ़कर 33 करोड़ के पार पहुंचे देश के बुनियादी ऊर्जा ढांचे (ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करने के लिए एलपीजी स्टोरेज क्षमता और घरेलू तेल खोज (एक्सप्लोरेशन) पर खर्च को काफी बढ़ाया गया है। साल 2014 में देश में करीब 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे, जो अब बढ़कर 33 करोड़ से ज्यादा हो चुके हैं। इसके अलावा अंडमान बेसिन सहित विभिन्न घरेलू एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट्स में निवेश को तेज किया गया है। —————- ये खबर भी पढ़ें… उज्ज्वला योजना में सिर्फ 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलेंगे: अब तक 9 सिलेंडर दिए जाते थे, इंटरनेशनल मार्केट में LPG के दाम 46% तक बढ़ने का असर उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर अब साल में 9 की बजाय सिर्फ पहले 4 सिलेंडर पर ही 300 रुपए की एक्स्ट्रा छूट मिलेगी। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में क्रेडिट की जाती है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी प्रवीण खनूजा ने सोमवार को बताया कि, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर LPG की कीमतें 46% तक बढ़ने से यह फैसला लिया गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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Fuel Reserve for 1 Month If Supply Stops; Boost Oil Research Investment

Fuel Reserve for 1 Month If Supply Stops; Boost Oil Research Investment

Hindi News Business Petroleum Minister: Fuel Reserve For 1 Month If Supply Stops; Boost Oil Research Investment नई दिल्ली41 मिनट पहले कॉपी लिंक पेट्रोल-डीजल पर सोमवार (8 जून) को पेट्रोलियम मंत्रालय और केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की और से दो अलग-अलग बयान आए, जिससे पता चलता है कि देश में फ्यूल का स्टॉक तो है, लेकिन कीमतें बढ़ सकती हैं। एक ओर केंद्रीय मंत्री पुरी ने कहा कि भारत के पास वर्तमान में अपनी रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व, रिफाइनरी स्टॉक और कमर्शियल स्टॉक को मिलाकर 76 से 80 दिन की खपत के बराबर फ्यूल रिजर्व मौजूद है। उन्होंने बताया कि मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद देश की तेल सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है और ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें बहुत लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर नहीं रहेंगी। वहीं, दूसरी ओर पेट्रोलियम मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी प्रवीण खनूजा ने एक प्रेस ब्रीफिंग में यह भी बताया कि LPG के अलावा तेल कंपनियां वर्तमान में डीजल पर 30 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल पर 6 रुपए प्रति लीटर की अंडर-रिकवरी (नुकसान) झेल रही हैं। इस कारण कंपनियों को हर दिन करीब 600 से 700 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। लंबी अवधि के युद्ध से बदल सकती हैं चुनौतियां हरदीप सिंह पुरी ने यह भी स्वीकार किया कि यदि मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष उम्मीद से कहीं ज्यादा लंबा खींचता है, तो चुनौतियां बदल सकती हैं। शॉर्ट-टर्म की रुकावटों को देश अपने स्टॉक और वैकल्पिक रास्तों से संभाल लेगा, लेकिन बहुत लंबे समय तक चलने वाला संकट वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक असर डाल सकता है। हालांकि, सरकारी तेल कंपनियां लॉन्ग-टर्म सुरक्षा के लिए घरेलू स्तर पर ड्रिलिंग एक्टिविटीज को काफी बढ़ाने की योजना पर काम कर रही हैं ताकि बाहरी झटकों के प्रति निर्भरता कम हो सके। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने पर भी 30 दिन का संकट झेलने में सक्षम वैश्विक तेल सप्लाई के सबसे महत्वपूर्ण रूट ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के बंद होने की आशंकाओं पर पेट्रोलियम मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि भारत के पास मौजूद स्टॉक और वैकल्पिक सोर्सिंग (आपूर्ति) की व्यवस्थाओं के कारण देश किसी भी अस्थायी रुकावट से निपटने में सक्षम है। अगर यह समुद्री रास्ता करीब 30 दिनों के लिए बंद भी हो जाता है, तो भारत इस स्थिति को बेहद आसानी से संभाल सकता है। क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस और LPG का 60 दिनों का मजबूत कवर मौजूद हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि उनकी प्राथमिकता देश में क्रूड ऑयल, नेचुरल गैस और एलपीजी (LPG) तीनों का कम से कम 60-60 दिनों का स्टॉक कवर बनाए रखने की है। भारत वर्तमान में इस तय सीमा (थ्रेशोल्ड) को पूरा कर रहा है और एक बेहद आरामदायक स्थिति में है। सरकार ने पहले से ही अपनी आपूर्ति व्यवस्था में विविधता (डाइवर्सिफिकेशन) लाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। मोजाम्बिक और यूएई जैसे देशों से मिलेगी अतिरिक्त मदद पेट्रोलियम मंत्री के मुताबिक, खाड़ी देशों (गल्फ रीजन) से बाहर के उत्पादक देश वैश्विक स्तर पर तेल की कमी को पूरा करेंगे। उन्होंने बताया कि मोजाम्बिक से आने वाली अतिरिक्त गैस सप्लाई भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करेगी। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त एलपीजी कार्गो सुरक्षित करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अधिकारियों के साथ बातचीत की गई है, जिससे भारत को संकट के समय जरूरी मदद मिल सके। 24 रिफाइनरियों की क्षमता भारत की सबसे बड़ी ताकत मंत्री ने कहा कि भारत का एनर्जी सिक्योरिटी फ्रेमवर्क सिर्फ स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रिफाइनर्स और फ्यूल रिटेलर्स के पास मौजूद इन्वेंट्री भी शामिल है। देश में वर्तमान में 24 रिफाइनरियां काम कर रही हैं और सरकार लगातार अपनी रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ा रही है। वैश्विक बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान यह रिफाइनिंग क्षमता भारत की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरती है। देश की ऊर्जा कंपनियां भी मानती हैं कि शॉर्ट-टर्म के किसी भी संकट को आसानी से मैनेज किया जा सकता है। कम कीमत पर रिजर्व न भरने के आरोपों को खारिज किया महामारी (पैंडेमिक) के बाद जब कच्चे तेल की कीमतें बेहद कम थीं, तब भारत द्वारा अपने रिजर्व को पर्याप्त रूप से न भरने की आलोचनाओं को मंत्री ने सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि फ्यूल स्टॉक का मैनेजमेंट एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें लगातार स्टॉक को रिप्लेनिश (दोबारा भरना) और उसका कमर्शियल इस्तेमाल करना शामिल होता है। क्रूड ऑयल को अनिश्चितकाल के लिए सिर्फ स्टोर करके नहीं रखा जा सकता; इन्वेंट्री को बाजार की स्थितियों और खपत की जरूरतों के आधार पर एक्टिव तरीके से मैनेज किया जाता है। एलपीजी कनेक्शंस 14 करोड़ से बढ़कर 33 करोड़ के पार पहुंचे देश के बुनियादी ऊर्जा ढांचे (ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करने के लिए एलपीजी स्टोरेज क्षमता और घरेलू तेल खोज (एक्सप्लोरेशन) पर खर्च को काफी बढ़ाया गया है। साल 2014 में देश में करीब 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे, जो अब बढ़कर 33 करोड़ से ज्यादा हो चुके हैं। इसके अलावा अंडमान बेसिन सहित विभिन्न घरेलू एक्सप्लोरेशन प्रोजेक्ट्स में निवेश को तेज किया गया है। —————- ये खबर भी पढ़ें… उज्ज्वला योजना में सिर्फ 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलेंगे: अब तक 9 सिलेंडर दिए जाते थे, इंटरनेशनल मार्केट में LPG के दाम 46% तक बढ़ने का असर उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर अब साल में 9 की बजाय सिर्फ पहले 4 सिलेंडर पर ही 300 रुपए की एक्स्ट्रा छूट मिलेगी। यह राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में क्रेडिट की जाती है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी प्रवीण खनूजा ने सोमवार को बताया कि, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर LPG की कीमतें 46% तक बढ़ने से यह फैसला लिया गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत:सरकार का वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज वसूलने का फैसला रद्द; बैंक गारंटी भी वापस होगी

एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत:सरकार का वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज वसूलने का फैसला रद्द; बैंक गारंटी भी वापस होगी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने भारती एयरटेल लिमिटेड और वोडाफोन आइडिया लिमिटेड पर केंद्र सरकार के लगाए गए वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज (OTSC) को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकार के पास टेलीकॉम लाइसेंस दिए जाने के सालों बाद वित्तीय शर्तों को पिछली तारीख (रेट्रोस्पेक्टिव) से बदलने का कोई अधिकार नहीं है। जस्टिस मनीष पितले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की डिवीजन बेंच ने सरकार के 2012 के इस फैसले को खारिज करते हुए कंपनियों की बैंक गारंटी भी लौटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार के 14 साल पुराने फैसले को पलटा जस्टिस मनीष पितले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की बेंच ने केंद्र सरकार के 8 नवंबर और 28 दिसंबर 2012 के उन फैसलों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनके तहत टेलीकॉम कंपनियों पर जुर्माना लगाया गया था। सरकार ने इन फैसलों के जरिए जुलाई 2008 से 6.2 मेगाहर्ट्ज (MHz) से अधिक के स्पेक्ट्रम होल्डिंग पर वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज लगाया था। कोर्ट ने न केवल सरकार के डिमांड नोटिस को रद्द किया, बल्कि टेलीकॉम ऑपरेटर्स द्वारा जमा की गई बैंक गारंटी को भी वापस करने का आदेश दिया है। एयरटेल ने कहा- टेलीकॉम सेक्टर के लिए बड़ा फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले का टेलीकॉम इंडस्ट्री ने स्वागत किया है। एयरटेल के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि हम वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज (OTSC) की मांग को रद्द करने वाले बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। यह फैसला कानूनी और वित्तीय अनिश्चितता को खत्म करके भारत के टेलीकॉम सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन साबित होगा। इससे भविष्य के निवेश के लिए एक बेहतर माहौल तैयार होगा। क्या था पूरा विवाद और सरकार का तर्क? यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट के 2G स्पेक्ट्रम फैसले के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद केंद्र सरकार ने तय सीमा से अधिक स्पेक्ट्रम रखने वाले पुराने ऑपरेटर्स पर वन-टाइम चार्ज लगाने का फैसला किया। टेलीकॉम विभाग (DoT) ने जुलाई 2008 से 6.2 मेगाहर्ट्ज से ज्यादा के स्पेक्ट्रम होल्डिंग्स पर यह चार्ज वसूलने की मांग की थी। सरकार का तर्क था कि ऑपरेटर्स को स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज के अलावा, स्पेक्ट्रम एलोकेशन के लिए अलग से भुगतान करना जरूरी था। कंपनियों ने दी थी कानूनी चुनौती भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने इस लेवी (टैक्स) को कोर्ट में चुनौती दी थी। कंपनियों का तर्क था कि न तो इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885 और न ही उनके लाइसेंस एग्रीमेंट में इस तरह के बैक-डेटेड (पिछली तारीख से) चार्ज लगाने का कोई प्रावधान है। उन्होंने दलील दी कि वे नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी (NTP) 1999 के तहत रेवेन्यू-शेयरिंग फ्रेमवर्क और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम मिलने पर बढ़ी हुई रेवेन्यू-शेयरिंग देनदारियों के जरिए पहले ही भुगतान कर चुके हैं। कॉन्ट्रैक्ट के बीच नियम बदलने की इजाजत नहीं हाई कोर्ट ने कंपनियों की दलीलों को सही माना। कोर्ट ने कहा कि टेलीग्राफ एक्ट की धारा 4 के तहत दिए गए टेलीकॉम लाइसेंस पूरी तरह से कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) के दायरे में आते हैं और सरकार इसकी शर्तों से बंधी हुई है। बेंच ने कहा कि सरकार को कॉन्ट्रैक्ट के बीच में गोल पोस्ट (नियम) बदलने की इजाजत नहीं दी जा सकती। दोनों पक्षों के सहमत होने और कॉन्ट्रैक्ट पर काम शुरू होने के बाद सरकार लाइसेंस की वित्तीय शर्तों को अकेले नहीं बदल सकती। रेवेन्यू बढ़ाना ही हमेशा पब्लिक इंटरेस्ट नहीं होता केंद्र सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया था कि यह चार्ज सार्वजनिक हित में लगाया गया है। कोर्ट ने सरकार के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि केवल सरकारी राजस्व (रेवेन्यू) को अधिकतम करना ही स्वचालित रूप से सार्वजनिक हित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने याद दिलाया कि NTP-1999 का मुख्य उद्देश्य किफायती टेलीकॉम सेवाएं देना, ग्रामीण कनेक्टिविटी बढ़ाना और स्पेक्ट्रम का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना था, न कि सरकार की कमाई बढ़ाना। ट्राई की सिफारिशों का भी हवाला दिया अदालत ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) और समय-समय पर बनी सरकारी कमेटियों की सिफारिशों का भी अध्ययन किया। कोर्ट ने पाया कि पुरानी सिफारिशों में केवल 10 मेगाहर्ट्ज से अधिक के स्पेक्ट्रम एलोकेशन पर ही वन-टाइम चार्ज लगाने की बात कही गई थी। 10 मेगाहर्ट्ज तक के स्पेक्ट्रम होल्डिंग पर ऐसे किसी चार्ज का समर्थन नहीं किया गया था। इस मामले में ऑपरेटर्स के पास तय सीमा से ज्यादा स्पेक्ट्रम नहीं था और वे पहले से ही बढ़ा हुआ रेवेन्यू-शेयर चुका रहे थे। मद्रास हाई कोर्ट के पुराने फैसले से अलग रुख बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला एक पुराने मामले में आए फैसले से अलग है। इससे पहले 2016 में मद्रास हाई कोर्ट ने एयरसेल वाले मामले में सरकार के इसी तरह के चार्ज लगाने के फैसले को सही ठहराया था। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट की बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले से असहमति जताई। बेंच ने कहा कि वे इस बात को स्वीकार नहीं कर सकते कि अतिरिक्त राजस्व जुटाने वाला हर कदम सार्वजनिक हित में ही हो। सरकार ने लाइसेंस की शर्तों में सुधार किए बिना ही यह चार्ज थोप दिया था। क्या होता है वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज (OTSC)? जब टेलीकॉम कंपनियों को शुरुआत में लाइसेंस दिए गए थे, तब उन्हें एक निश्चित सीमा (जैसे 4.4 MHz या 6.2 MHz) तक स्पेक्ट्रम बिना किसी अलग शुल्क के आवंटित किया गया था, जिसके लिए वे रेवेन्यू शेयर करती थीं। बाद में सरकार ने तय सीमा से अधिक स्पेक्ट्रम रखने वाली कंपनियों पर पिछली तारीख से एकमुश्त शुल्क लगाने का फैसला किया, जिसे वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज कहा जाता है। कंपनियों ने इसी बैक-डेटेड शुल्क का विरोध किया था। ये खबर भी पढ़ें… उज्ज्वला योजना में सिर्फ 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलेंगे: अब तक 9 सिलेंडर दिए जाते थे, इंटरनेशनल मार्केट में LPG के दाम 46% तक बढ़ने का असर उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर अब साल में 9 की बजाय सिर्फ 4 ही मिलेंगे। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर LPG की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। युद्ध की वजह से LPG 46% तक महंगी हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…

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एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत:सरकार का वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज वसूलने का फैसला रद्द; बैंक गारंटी भी वापस होगी

एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को बॉम्बे हाई कोर्ट से राहत:सरकार का वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज वसूलने का फैसला रद्द; बैंक गारंटी भी वापस होगी

बॉम्बे हाई कोर्ट ने भारती एयरटेल लिमिटेड और वोडाफोन आइडिया लिमिटेड पर केंद्र सरकार के लगाए गए वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज (OTSC) को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि सरकार के पास टेलीकॉम लाइसेंस दिए जाने के सालों बाद वित्तीय शर्तों को पिछली तारीख (रेट्रोस्पेक्टिव) से बदलने का कोई अधिकार नहीं है। जस्टिस मनीष पितले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की डिवीजन बेंच ने सरकार के 2012 के इस फैसले को खारिज करते हुए कंपनियों की बैंक गारंटी भी लौटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार के 14 साल पुराने फैसले को पलटा जस्टिस मनीष पितले और जस्टिस श्रीराम वी. शिरसाट की बेंच ने केंद्र सरकार के 8 नवंबर और 28 दिसंबर 2012 के उन फैसलों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनके तहत टेलीकॉम कंपनियों पर जुर्माना लगाया गया था। सरकार ने इन फैसलों के जरिए जुलाई 2008 से 6.2 मेगाहर्ट्ज (MHz) से अधिक के स्पेक्ट्रम होल्डिंग पर वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज लगाया था। कोर्ट ने न केवल सरकार के डिमांड नोटिस को रद्द किया, बल्कि टेलीकॉम ऑपरेटर्स द्वारा जमा की गई बैंक गारंटी को भी वापस करने का आदेश दिया है। एयरटेल ने कहा- टेलीकॉम सेक्टर के लिए बड़ा फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट के इस फैसले का टेलीकॉम इंडस्ट्री ने स्वागत किया है। एयरटेल के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि हम वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज (OTSC) की मांग को रद्द करने वाले बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं। यह फैसला कानूनी और वित्तीय अनिश्चितता को खत्म करके भारत के टेलीकॉम सेक्टर के लिए एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन साबित होगा। इससे भविष्य के निवेश के लिए एक बेहतर माहौल तैयार होगा। क्या था पूरा विवाद और सरकार का तर्क? यह पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट के 2G स्पेक्ट्रम फैसले के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद केंद्र सरकार ने तय सीमा से अधिक स्पेक्ट्रम रखने वाले पुराने ऑपरेटर्स पर वन-टाइम चार्ज लगाने का फैसला किया। टेलीकॉम विभाग (DoT) ने जुलाई 2008 से 6.2 मेगाहर्ट्ज से ज्यादा के स्पेक्ट्रम होल्डिंग्स पर यह चार्ज वसूलने की मांग की थी। सरकार का तर्क था कि ऑपरेटर्स को स्पेक्ट्रम यूसेज चार्ज के अलावा, स्पेक्ट्रम एलोकेशन के लिए अलग से भुगतान करना जरूरी था। कंपनियों ने दी थी कानूनी चुनौती भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया ने इस लेवी (टैक्स) को कोर्ट में चुनौती दी थी। कंपनियों का तर्क था कि न तो इंडियन टेलीग्राफ एक्ट, 1885 और न ही उनके लाइसेंस एग्रीमेंट में इस तरह के बैक-डेटेड (पिछली तारीख से) चार्ज लगाने का कोई प्रावधान है। उन्होंने दलील दी कि वे नेशनल टेलीकॉम पॉलिसी (NTP) 1999 के तहत रेवेन्यू-शेयरिंग फ्रेमवर्क और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम मिलने पर बढ़ी हुई रेवेन्यू-शेयरिंग देनदारियों के जरिए पहले ही भुगतान कर चुके हैं। कॉन्ट्रैक्ट के बीच नियम बदलने की इजाजत नहीं हाई कोर्ट ने कंपनियों की दलीलों को सही माना। कोर्ट ने कहा कि टेलीग्राफ एक्ट की धारा 4 के तहत दिए गए टेलीकॉम लाइसेंस पूरी तरह से कॉन्ट्रैक्ट (अनुबंध) के दायरे में आते हैं और सरकार इसकी शर्तों से बंधी हुई है। बेंच ने कहा कि सरकार को कॉन्ट्रैक्ट के बीच में गोल पोस्ट (नियम) बदलने की इजाजत नहीं दी जा सकती। दोनों पक्षों के सहमत होने और कॉन्ट्रैक्ट पर काम शुरू होने के बाद सरकार लाइसेंस की वित्तीय शर्तों को अकेले नहीं बदल सकती। रेवेन्यू बढ़ाना ही हमेशा पब्लिक इंटरेस्ट नहीं होता केंद्र सरकार ने कोर्ट में तर्क दिया था कि यह चार्ज सार्वजनिक हित में लगाया गया है। कोर्ट ने सरकार के इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि केवल सरकारी राजस्व (रेवेन्यू) को अधिकतम करना ही स्वचालित रूप से सार्वजनिक हित नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने याद दिलाया कि NTP-1999 का मुख्य उद्देश्य किफायती टेलीकॉम सेवाएं देना, ग्रामीण कनेक्टिविटी बढ़ाना और स्पेक्ट्रम का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना था, न कि सरकार की कमाई बढ़ाना। ट्राई की सिफारिशों का भी हवाला दिया अदालत ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) और समय-समय पर बनी सरकारी कमेटियों की सिफारिशों का भी अध्ययन किया। कोर्ट ने पाया कि पुरानी सिफारिशों में केवल 10 मेगाहर्ट्ज से अधिक के स्पेक्ट्रम एलोकेशन पर ही वन-टाइम चार्ज लगाने की बात कही गई थी। 10 मेगाहर्ट्ज तक के स्पेक्ट्रम होल्डिंग पर ऐसे किसी चार्ज का समर्थन नहीं किया गया था। इस मामले में ऑपरेटर्स के पास तय सीमा से ज्यादा स्पेक्ट्रम नहीं था और वे पहले से ही बढ़ा हुआ रेवेन्यू-शेयर चुका रहे थे। मद्रास हाई कोर्ट के पुराने फैसले से अलग रुख बॉम्बे हाई कोर्ट का यह फैसला एक पुराने मामले में आए फैसले से अलग है। इससे पहले 2016 में मद्रास हाई कोर्ट ने एयरसेल वाले मामले में सरकार के इसी तरह के चार्ज लगाने के फैसले को सही ठहराया था। हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट की बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले से असहमति जताई। बेंच ने कहा कि वे इस बात को स्वीकार नहीं कर सकते कि अतिरिक्त राजस्व जुटाने वाला हर कदम सार्वजनिक हित में ही हो। सरकार ने लाइसेंस की शर्तों में सुधार किए बिना ही यह चार्ज थोप दिया था। क्या होता है वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज (OTSC)? जब टेलीकॉम कंपनियों को शुरुआत में लाइसेंस दिए गए थे, तब उन्हें एक निश्चित सीमा (जैसे 4.4 MHz या 6.2 MHz) तक स्पेक्ट्रम बिना किसी अलग शुल्क के आवंटित किया गया था, जिसके लिए वे रेवेन्यू शेयर करती थीं। बाद में सरकार ने तय सीमा से अधिक स्पेक्ट्रम रखने वाली कंपनियों पर पिछली तारीख से एकमुश्त शुल्क लगाने का फैसला किया, जिसे वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज कहा जाता है। कंपनियों ने इसी बैक-डेटेड शुल्क का विरोध किया था। ये खबर भी पढ़ें… उज्ज्वला योजना में सिर्फ 4 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलेंगे: अब तक 9 सिलेंडर दिए जाते थे, इंटरनेशनल मार्केट में LPG के दाम 46% तक बढ़ने का असर उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर अब साल में 9 की बजाय सिर्फ 4 ही मिलेंगे। पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर LPG की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। युद्ध की वजह से LPG 46% तक महंगी हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…

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LPG Cylinder Subsidy Cut | 4 Cylinders Now, PMUY Price Hike News

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नई दिल्ली11 मिनट पहले कॉपी लिंक सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों के लिए सालाना सब्सिडी वाले LPG सिलेंडर की रिफिल की संख्या 9 से घटाकर 4 कर दी है। यानी उज्ज्वला योजना के तहत ₹642 में अब सिर्फ 4 सिलेंडर ही मिलेंगे। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर LPG की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। युद्ध की वजह से LPG 46% तक महंगी हो चुकी है। दुनिया में सबसे सस्ती कुकिंग गैस भारत में मिल रही इस बीच सरकार का कहना है कि दुनिया भर में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय परिवारों को सबसे सस्ती कुकिंग गैस मिल रही है। भारत में घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमत पड़ोसी देशों और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसी एडवांस इकोनॉमी के मुकाबले काफी कम है। वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती लागत का बोझ सरकार खुद उठा रही है और इसे आम उपभोक्ताओं पर पास-ऑन नहीं होने दिया गया है। उज्ज्वला लाभार्थियों को 642 रुपए में मिल रहा सिलेंडर भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी हुई हैं। इसके बावजूद सरकार घरेलू एलपीजी की कीमतों को नियंत्रित रखती है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को हर साल रिफिलिंग पर प्रति सिलेंडर 300 रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी सीधे बैंक खाते में मिलती है। यह छूट साल के पहले 4 सिलेंडरों पर लागू होती है, जिससे उन्हें एक सिलेंडर प्रभावी रूप से 642 रुपए का पड़ता है। भारत में 10.58 करोड़ से ज्यादा उज्ज्वला कनेक्शन हैं। जानिए किस देश में कितने का मिलता है सिलेंडर देश कीमत (रुपए में) उज्ज्वला कीमत (₹642) से कितना महंगा भारत (उज्ज्वला कनेक्शन) ₹642 — पाकिस्तान ₹1,046 लगभग 39% महंगा नेपाल ₹1,207 लगभग 47% महंगा बांग्लादेश लगभग ₹1,225 लगभग 48% महंगा श्रीलंका ₹1,241 लगभग 48% महंगा यूनाइटेड स्टेट्स (USA) लगभग ₹1,755 लगभग 63% महंगा ऑस्ट्रेलिया लगभग ₹1,765 लगभग 64% महंगा कनाडा लगभग ₹2,411 लगभग 73% महंगा नोट: 14.2 किलोग्राम के आधार पर तुलना की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में भारत का उज्ज्वला सिलेंडर करीब 60% डिस्काउंट और सामान्य घरेलू सिलेंडर लगभग 45% डिस्काउंट पर मिलता है। लागत ₹1600 पार, सरकार उठा रही प्रति सिलेंडर ₹700 का बोझ अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद भारत में एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई लागत (कॉस्ट टू सप्लाई) 1,600 रुपए से ऊपर पहुंच गई है। इसका मतलब है कि सरकारी तेल कंपनियों को हर घरेलू सिलेंडर पर करीब 700 रुपए की अंडर-रिकवरी (नुकसान) हो रही है। इस अंडर-रिकवरी के अंतर को पब्लिक सेक्टर की ऑयल मार्केटिंग कंपनियां झेल रही हैं, जिसकी आंशिक भरपाई सरकार द्वारा की जाती है। पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर 60,000 करोड़ रुपए पहुंच गई, जो इससे पिछले साल 41,338 करोड़ रुपए थी। केंद्रीय कैबिनेट ने इसके लिए कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपए के मुआवजे को मंजूरी दी है। होटल-रेस्टोरेंट के लिए कॉमर्शियल सिलेंडर ₹3,113.50 का हुआ होटल और बिजनेस में इस्तेमाल होने वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतें हर महीने अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क के आधार पर खुद-ब-खुद बदलती हैं। पश्चिम एशिया संकट के दौरान 5 बार दाम बढ़ने के बाद दिल्ली में 19 किलोग्राम का कॉमर्शियल सिलेंडर 3,113.50 रुपए (करीब 164 रुपए प्रति किलोग्राम) पर बिक रहा है। इसकी तुलना में घरेलू उपभोक्ता केवल 66 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से भुगतान कर रहे हैं। पश्चिम एशिया तनाव से सऊदी एलपीजी बेंचमार्क 46% महंगा हुआ भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का 60% हिस्सा आयात करता है। इसकी लैंडेड कॉस्ट सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (CP) से तय होती है, जिसे सऊदी अरामको हर महीने की शुरुआत में फिक्स करती है। पश्चिम एशिया में आए व्यवधान और फरवरी के अंत में होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। फरवरी में जो सऊदी सीपी बेंचमार्क 542.50 डॉलर प्रति टन पर था, वह अप्रैल में बढ़कर 775 डॉलर और जून 2026 में 790 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गया है। इस तरह फरवरी के मुकाबले जून तक एलपीजी बेंचमार्क में करीब 46% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसमें प्रोपेन 39% और ब्यूटेन 52% महंगा हुआ है। होर्मुज रूट बंद होने के बाद भी भारत ने जारी रखी सप्लाई दुनिया के करीब एक-तिहाई तेल और भारत की 54% एलपीजी का आयात होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही होता है। इस मार्ग पर संघर्ष के कारण जहां अधिकांश कॉमर्शियल ट्रैफिक रुक गया, वहीं भारत ने बेहतर तालमेल के जरिए अपने जहाजों की आवाजाही जारी रखी। भारतीय झंडे वाले टैंकर लगातार इस रास्ते से कच्चे तेल और एलपीजी की खेप लेकर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचे, जिससे देश में किसी भी पेट्रोलियम प्रोडक्ट की किल्लत नहीं हुई। घरेलू प्रोडक्शन 60% बढ़ाया, अमेरिका-कनाडा से शुरू की खरीद सप्लाई को सुरक्षित रखने के लिए भारत ने घरेलू एलपीजी उत्पादन को 60% से अधिक बढ़ाते हुए करीब 32 टीएमटी (TMT) से 52 टीएमटी तक पहुंचा दिया। इसके साथ ही होर्मुज रूट के बाहर के देशों जैसे अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया से भी गैस की खरीद शुरू की गई। उपलब्ध गैस की सप्लाई में घरों के साथ अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे प्रायोरिटी यूजर्स को प्राथमिकता दी गई। दूसरी तरफ मांग के दबाव को कम करने के लिए ग्राहकों को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया गया। घरेलू गैस की कॉमर्शियल मार्केट में चोरी रोकने के लिए ओटीपी (OTP) आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन को बढ़ाकर 90% तक कर दिया गया है। LPG से पहले पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम भी बढ़े पिछले कुछ हफ्तों में पेट्रोल, डीजल और CNG के दाम भी बढ़े हैं। मई में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कुल मिलाकर ₹7.50 प्रति लीटर बढ़ चुकी हैं, जबकि CNG करीब ₹6 प्रति किलो महंगी हुई है। कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹11 प्रति लीटर और डीजल पर ₹33.6 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद कंपनियों का दावा है कि पेट्रोल-डीजल अभी भी लागत से कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि वैश्विक कीमतों में हुई पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है। कच्चे तेल के

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July Tariff Rates, UK Talks Boost 2026

July Tariff Rates, UK Talks Boost 2026

नई दिल्ली28 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत और अमेरिका के बीच बाइलेटरल ट्रेड डील की पहली किस्त जल्द ही फाइनल हो सकती है। दोनों देशों के बीच यह डील जुलाई के बाद भारतीय एक्सपोर्ट पर लागू होने वाली टैरिफ दरों पर कंफर्मेशन आने के बाद फाइनल लेगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, अमेरिका की धारा 301 की प्रोसेस के तहत जो टैरिफ रेट तय किया जाएगा, वही रेट इस ट्रेड डील में भारत के लिए भी लागू होने की संभावना है। जुलाई में खत्म हो रहा है मौजूदा 10% टैरिफ बातचीत से जुड़े एक सरकारी सूत्र ने बताया कि भारत के एक्सपोर्ट पर लगने वाला मौजूदा 10% का टैरिफ इसी साल जुलाई में समाप्त हो रहा है। इसके बाद जब तक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) धारा 301 के तहत नए टैरिफ तय नहीं करता, तब तक केवल एमएफएन (MFN) टैरिफ ही लागू हो सकते हैं। भारत चाहता है कि जो भी नई दर तय हो, वह बाजार में हमारे डायरेक्ट कॉम्पिटिटर्स देशों के मुकाबले कम होना चाहिए। नई दिल्ली में 2 से 4 जून तक चली बैठक भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर 2 से 4 जून तक नई दिल्ली में मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में दोनों देशों के अधिकारियों ने मुख्य रूप से मार्केट एक्सेस, टैरिफ से जुड़े मुद्दे, गैर-टैरिफ बाधाएं, सीमा शुल्क सुविधा और प्रस्तावित बाइलेटरल ट्रेड डील के फ्रेमवर्क पर विस्तार से चर्चा की है। धारा 301 के तहत 12.5% अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के कार्यालय ने अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत एक नया कदम उठाया है। उड्डयन और व्यापार नियमों से जुड़े इस कानून के तहत, USTR ने 2 जून को भारत और 53 अन्य अर्थव्यवस्थाओं से होने वाले आयात पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव दिया है। अमेरिका का आरोप है कि इन देशों में जबरन श्रम से बनने वाले सामानों पर प्रतिबंधों का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर अभी विचार-विमर्श चल रहा है और जुलाई में पब्लिक कमेंट (जनता की राय) की प्रोसेस के बाद इसे फाइनल किया जाएगा। भारत ने मांगी दोबारा जांच न होने की गारंटी धारा 301 वास्तव में अमेरिकी व्यापार अधिनियम (US ट्रेड एक्ट) का वह नियम है जो वॉशिंगटन को अपने व्यापारिक साझेदारों की उन नीतियों की जांच करने और उन पर टैरिफ लगाने की अनुमति देता है, जिन्हें वह अनुचित व्यापार व्यवहार यानी अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस मानता है। भारत ने अमेरिका से यह आश्वासन मांगा है कि एक बार यह व्यापार समझौता फाइनल और लागू हो जाने के बाद, भविष्य में भारत को निशाना बनाकर ऐसी कोई भी धारा 301 की जांच नहीं की जाएगी। UK के साथ भी डील पर प्रोग्रेस, एक विवाद सुलझा अमेरिका के साथ-साथ भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच भी व्यापार समझौते को लागू करने की दिशा में अच्छी प्रोग्रेस हुई है। हाल ही में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और यूके के बिजनेस एंड ट्रेड सेक्रेटरी पीटर काइल के बीच एक अहम मीटिंग हुई थी। इस बातचीत में दोनों देशों के बीच अटके तीन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें से एक बड़े मुद्दे को सफलतापूर्वक सुलझा लिया गया है। सूत्र के मुताबिक, ब्रिटिश अधिकारी चाहते हैं कि इस समझौते के लागू होने की आधिकारिक घोषणा लंदन में की जाए। स्टील और कार्बन टैक्स पर बातचीत जारी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत पूरी होने और हस्ताक्षर होने के बाद भी कुछ व्यापारिक अड़चनें सामने आई थीं, जिन्हें दूर करने का प्रयास नई दिल्ली कर रहा है। भारतीय पक्ष का मुख्य ध्यान यूके द्वारा हाल ही में बढ़ाए गए स्टील सेफगार्ड मेजर्स और उसके प्रस्तावित कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) पर केंद्रित है। भारत को आशंका है कि यूके के इन कदमों से इस समझौते के तहत भारतीय कंपनियों को मिलने वाली बाजार पहुंच पर बुरा असर पड़ सकता है। क्या है धारा 301? यह अमेरिकी व्यापार अधिनियम का एक विशेष प्रावधान है जो अमेरिकी सरकार को किसी भी ऐसे विदेशी देश के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई (जैसे अतिरिक्त टैरिफ लगाना) करने का अधिकार देता है, जिसका व्यापार व्यवहार अमेरिका के हितों के खिलाफ या अनुचित होता है। क्या होता है MFN (मोस्ट फेवर्ड नेशन) टैरिफ? वैश्विक व्यापार नियमों के तहत डब्ल्यूटीओ (WTO) के सदस्य देशों द्वारा एक-दूसरे को दिया जाने वाला सामान्य और गैर-भेदभावपूर्ण टैरिफ रेट, जो किसी विशेष व्यापार समझौते के न होने पर डिफॉल्ट रूप से लागू होता है। ये खबर भी पढ़ें… चांदी ₹12,608 गिरकर ₹2.41 लाख किलो पर आई: 8 दिन में ₹22 हजार की गिरावट; सोना आज ₹2749 टूटा, 10 ग्राम की कीमत ₹1.51 लाख मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से आज यानी 8 जून को सोने-चांदी के दाम में गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 2,749 रुपए गिरकर 1.51 लाख रुपए हो गया है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

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इंडिगो का FY-30 तक सालाना 20 करोड़ पैसेंजर्स का टारगेट:550 से ज्यादा एयरक्राफ्ट का प्लान, इंटरनेशनल कैपेसिटी 40% करने का लक्ष्य

इंडिगो का FY-30 तक सालाना 20 करोड़ पैसेंजर्स का टारगेट:550 से ज्यादा एयरक्राफ्ट का प्लान, इंटरनेशनल कैपेसिटी 40% करने का लक्ष्य

भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने वित्त वर्ष 2029-30 (FY30) के लिए अपना मेगा प्लान पेश किया है। कंपनी का लक्ष्य सालाना करीब 200 मिलियन (20 करोड़) यात्रियों को सफर कराना और भारत को एक बड़ा ग्लोबल एविएशन ट्रांजिट हब बनाना है। यह ब्लूप्रिंट 8 जून को एयरलाइन के ‘एनालिस्ट डे’ पर पेश किया गया। 5 फैक्टर्स: इंडिगो के लॉन्ग-टर्म प्लान की मुख्य बातें इंटरनेशनल मार्केट पर फोकस इंडिगो की नई रणनीति का सबसे बड़ा हिस्सा विदेशी बाजार हैं। कंपनी इंटरनेशनल कैपेसिटी शेयर को मौजूदा 30% से बढ़ाकर 40% करने जा रही है। इसके लिए एयरबस A321XLR और एयरबस A350 वाइडबॉडी विमानों को बेड़े में शामिल किया जा रहा है। चालू वित्त वर्ष में बेड़े में 9 नए A321XLR विमान शामिल होंगे। इससे एयरलाइन को लंबी दूरी के नए रूट्स जैसे एथेंस, इस्तांबुल, बाली और सियोल के लिए उड़ानें शुरू करने में मदद मिलेगी। भारत बनेगा ग्लोबल ट्रांजिट हब इंडिगो भारत को एक ऐसे ग्लोबल ट्रांजिट हब के रूप में देख रही है, जो यूरोप, साउथ-ईस्ट एशिया, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका को आपस में जोड़ेगा। कंपनी का मानना है कि भारत की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर उन पैसेंजर्स को आकर्षित किया जा सकता है, जो अभी खाड़ी देशों और साउथ-ईस्ट एशिया के हब से होकर गुजरते हैं। प्रीमियम पैसेंजर्स के लिए ‘स्ट्रेच बिजनेस-क्लास’ कंपनी अपनी ‘प्रीमियम रणनीति’ पर भी तेजी से काम कर रही है। नए एयरबस A321XLR विमानों के बेड़े में स्पेशल बिजनेस-क्लास केबिन तैयार किए जाएंगे। इसमें यात्रियों को कंप्लीमेंट्री मील और बेहतर ऑनबोर्ड सर्विसेज दी जाएंगी। इसके साथ ही फ्यूल एफिशिएंसी बढ़ाने और ऑपरेटिंग खर्च को कम करने के लिए पुराने एयरबस A320 CEOs, A321 NEOs, बोइंग 737 और बोइंग 787 जैसे डैम्प-लीज्ड (दूरी पर लिए गए) विमानों को धीरे-धीरे बाहर किया जाएगा। मांग सुस्त होने से कैपेसिटी में कम बढ़ोतरी करेंगे लॉन्ग-टर्म के मजबूत लक्ष्यों के बावजूद, इंडिगो शॉर्ट-टर्म में सावधानी बरत रही है। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) संकट के कारण हवाई यात्रा की मांग थोड़ी सुस्त पड़ी है। इसे देखते हुए कंपनी चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में अपनी कैपेसिटी में केवल 3-4% की ही बढ़ोतरी करेगी। बाजार में अनिश्चितता को देखते हुए मैनेजमेंट ने मापा-तौला रुख अपनाने की बात कही है। 2,536.9 करोड़ रुपए का शुद्ध घाटा जियोपॉलिटिकल तनाव (भू-राजनीतिक संकट) के कारण इंडिगो को मिडिल ईस्ट और यूरोप की करीब 160 डेली फ्लाइट्स को री-रूट करके डोमेस्टिक ऑपरेशंस में लगाना पड़ा था। हालांकि, कंपनी ने दो-तिहाई कैपेसिटी बहाल कर ली है और जून के अंत तक यह पूरी तरह ठीक हो जाएगी। इस तिमाही में विमानन क्षेत्र की चुनौतियां साफ दिखीं। रुपए में तेज गिरावट के कारण कंपनी को 4,823 करोड़ रुपए का फॉरेन एक्सचेंज लॉस हुआ, जिससे Q4FY26 में 2,536.9 करोड़ रुपए का नेट लॉस (शुद्ध घाटा) दर्ज किया गया। एटीएफ (हवाई ईंधन) की ऊंची कीमतों और उड़ानों में रुकावट का असर भी कमाई पर पड़ा। फॉरेक्स हेजिंग प्रोग्राम को $3 बिलियन किया करेंसी की अस्थिरता (रुपए के उतार-चढ़ाव) के जोखिम को कम करने के लिए इंडिगो ने अपने फॉरेन एक्सचेंज हेजिंग प्रोग्राम को 1 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 3 बिलियन डॉलर कर दिया है। हालांकि, शॉर्ट-टर्म की दिक्कतों के बावजूद कंपनी ने नए विमानों की डिलीवरी को टालने से साफ इनकार किया है। कंपनी अब धीरे-धीरे विमानों को खुद खरीदने और फाइनेंस लीजिंग मॉडल पर शिफ्ट हो रही है। क्या होती है फॉरेक्स हेजिंग और लीजिंग? फॉरेक्स हेजिंग: यह कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा में होने वाले नुकसान से बचने का एक बीमा जैसा है। डॉलर के मुकाबले रुपया गिरने पर जो नुकसान होता है, उसे कम करने के लिए पहले से ही एक फिक्स रेट पर एग्रीमेंट किया जाता है। डैम्प-लीज: जब कोई एयरलाइन किसी दूसरी कंपनी से हवाई जहाज किराए पर लेती है, जिसमें विमान के साथ क्रू (चालक दल) या मेंटेनेंस में से कुछ चीजें ही शामिल होती हैं और बाकी खर्च खुद उठाना पड़ता है। अवेलेबल सीट किलोमीटर (ASK): यह एयरलाइन की पैसेंजर ले जाने की क्षमता को नापने का पैमाना है। जितनी सीटें उपलब्ध हैं, उन्हें कुल तय की गई दूरी (किलोमीटर) से गुणा करके इसकी गणना होती है। ये खबर भी पढ़ें… सेंसेक्स 719 अंक गिरकर 73,524 पर बंद: निफ्टी भी 244 अंक फिसलकर 23,123 पर आया, मेटल और रियल्टी शेयरों में बिकवाली मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से आज यानी सोमवार, 8 जून को सेंसेक्स 719 अंक (0.97%) की गिरावट के साथ 73,524 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 244 अंकों (1.04%) की गिरावट रही, ये 23,123 पर बंद हुआ। आज के कारोबार में आईटी, मेटल और रियल्टी शेयरों में ज्यादा बिकवाली रही। पूरी खबर पढ़ें…

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