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CJI Surya Kant Judge Scolding Incident; Judicial Officer Aspirant

CJI Surya Kant Judge Scolding Incident; Judicial Officer Aspirant
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नई दिल्ली33 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने शुक्रवार को अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा सुनाया। केस की सुनवाई के दौरान CJI ने बताया कैसे एक जज ने उन्हें डांट लगाते हुए चैंबर से बाहर निकल जाने को कहा था। ये किस्सा जस्टिस सूर्यकांत ने ज्यूडिशियल सर्विस की एप्लीकेंट की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया।

मजिस्ट्रेट परीक्षा की कॉपी दोबारा जांच कराने की मांग लेकर प्रेरणा गुप्ता अपनी बात रख रही थीं, तभी CJI ने बीच में कहा, “मैं आपको अपनी निजी कहानी सुनाता हूं। उम्मीद है कि इसके बाद आप खुशी-खुशी जाएंगी, क्योंकि हम आपकी याचिका मंजूर नहीं कर सकते।”

उन्होंने समझाया कि जज बनने के दो रास्ते होते हैं। पहला, न्यायिक सेवा में मजिस्ट्रेट के रूप में शामिल होकर धीरे-धीरे प्रमोशन पाना और फिर हाई कोर्ट व संभव हो तो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचना। दूसरा, वकालत करना, बार में अपनी पहचान बनाना और बाद में सीधे उच्च स्तर पर जज नियुक्त होना।

जज ने कहा था मेरे चैंबर से बाहर निकल जाओ

जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि 1984 में जब वह लॉ के अंतिम वर्ष के छात्र थे, तब उनका सपना भी ज्यूडिशियल ऑफिसर बनने का था। उन्होंने लिखित परीक्षा पास कर ली थी और इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था।

CJI ने बताया कि परीक्षा का रिजल्ट आने तक उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में वकालत शुरू कर दी थी। इंटरव्यू पैनल में वही वरिष्ठ जज थे, जिनकी अदालत में वह हाल ही में दो महत्वपूर्ण मामलों में बहस कर चुके थे।

उन्होंने बताया कि उन मामलों में से एक ‘सुनीता रानी बनाम बलदेव राज’ था, जिसमें उन्होंने वैवाहिक विवाद के मामले में अपील की थी और जिला जज ने सिजोफ्रेनिया (एक मानसिक बीमारी) के आधार पर दिए गए तलाक के फैसले को सीनियर जज ने रद्द कर दिया था।

इंटरव्यू शुरू होने से पहले उस जज ने मुझे अपने चैंबर में बुलाया और पूछा, “क्या तुम न्यायिक अधिकारी बनना चाहते हो?”

मैने जवाब दिया, “हां।”

इस पर जज ने तुरंत कहा, “मेरे चैंबर से बाहर निकल जाओ।”

CJI ने बताया कि उस समय उन्हें लगा कि उनका सपना टूट गया है और करियर खत्म हो गया है। वह कांपते हुए चैंबर से बाहर निकले।

लेकिन अगले दिन उन्हीं जज ने उन्हें दोबारा बुलाया और कहा, “अगर तुम जज बनना चाहते हो तो बन सकते हो, लेकिन मेरी सलाह है कि न्यायिक अधिकारी मत बनो। बार तुम्हारा इंतजार कर रहा है।”

जज की सलाह पर छोड़ा न्यायिक सेवा का इंटरव्यू

जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कि इसके बाद उन्होंने इंटरव्यू ही नहीं दिया। शुरुआत में उन्होंने अपने माता-पिता को भी यह बात नहीं बताई, क्योंकि उन्हें डर था कि वे निराश होंगे। फिर उन्होंने पूरी तरह वकालत पर ध्यान देने का फैसला किया।

CJI ने मुस्कुराते हुए याचिकाकर्ता से पूछा, “अब बताइए, मैंने सही फैसला लिया या गलत?”

अंत में जस्टिस सूर्यकांत ने प्रेरणा गुप्ता को भविष्य की ओर देखने की सलाह देते हुए कहा, “बार में बहुत संभावनाएं हैं।”

देश के 53वें CJI हैं जस्टिस सूर्यकांत

———————————————

सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला-हर धार्मिक प्रथा को चुनौती गलत:इससे धर्म और समाज दोनों टूट जाएंगे, अदालतों में सैकड़ों केस आएंगे

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि अगर लोग धार्मिक प्रथाओं और धर्म के मामलों को अदालत में चुनौती देने लगेंगे, तो इससे धर्म और समाज पर असर पड़ सकता है। कोर्ट ने कहा कि इससे सैकड़ों याचिकाएं आएंगी और हर रिवाज पर सवाल उठने लगेंगे। हैं। पढ़ें पूरी खबर…

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CJI ने बताया कि परीक्षा का रिजल्ट आने तक उन्होंने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में वकालत शुरू कर दी थी। इंटरव्यू पैनल में वही वरिष्ठ जज थे, जिनकी अदालत में वह हाल ही में दो महत्वपूर्ण मामलों में बहस कर चुके थे।

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जज की सलाह पर छोड़ा न्यायिक सेवा का इंटरव्यू

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