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NIT Kurukshetra Student Suicides | Academic & Financial Pressure

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10 मिनट पहले

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NIT कुरुक्षेत्र में 2 महीने में 4 कॉलेज स्टूडेंट्स की सुसाइड से मौत हो गई। ये नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NIT कुरुक्षेत्र में 16 फरवरी से 16 अप्रैल तक में हुई मौतों का आंकड़ा है। इन 4 स्टूडेंट्स ने या तो एकेडमिक या फिर फाइनेंशियल प्रेशर की वजह से अपनी जान दी।

2 महीने में 5 मौतें हुईं

16 अप्रैल को कॉलेज के हॉस्टल में एक स्टूडेंट दीक्षा दुबे ने सुसाइड किया। दीक्षा AI एंड डेटा साइंस की फर्स्ट सेमेस्टर की स्टूडेंट थी। वो बिहार के बक्सर की रहने वाली थी।

कॉलेज में इससे पहले भी 3 मौतें हुईं। कॉलेज में 16 फरवरी को 19 साल के कंप्यूटर इंजीनियरिंग के एक छात्र अंगोड़ शिवा ने अपनी जान दी थी। शिवा तेलंगाना से NIT कुरुक्षेत्र पढ़ने आए था।

31 मार्च को 22 साल का इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र पवन कुमार ने सुसाइड किया। पवन हरियाणा के नूंह जिले का रहने वाला था।

8 अप्रैल को NIT से सिविल इंजीनियरिंग कर रहे थर्ड ईयर के एक छात्र प्रियांशु वर्मा ने सुसाइड किया। सुसाइट नोट मिला पर उससे सुसाइड की वजह साफ नहीं है। प्रियांशु हरियाणा के सिरसा जिले का रहने वाला था।

दो और स्टूडेंट ने जान देने की कोशिश की

इसके अलावा इस बीच और दो स्टूडेंट ने भी जान देने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें बचा लिया गया।

एकेडमिक और फाइनेंशियल प्रेशर झेल रहे हैं स्टूडेंट्स

कॉलेज स्टूडेंट काउंसिल के मेंबर ने नाम न छापने की शर्त पर हमसे बात की। बताया कि कुछ स्टूडेंट्स ने कॉलेज में री-एग्जाम सिस्टम के प्रेशर में आकर सुसाइड किया है। कुछ ने क्रेडिट कार्ड और ऑनलाइन बेटिंग की वजह से फाइनेंशियल ट्रैप में फंसकर अपनी जान दी।

इन मौतों का सीधा कारण भले एकेडमिक और फाइनेंशियल प्रेशर हो, पर इसका दूसरा पहलू कॉलेज में मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम की कमी भी बताता है।

सुसाइड मामलों की जांच को लेकर प्रोटेस्ट

कैंपस में हालिया मौतों और उसके प्रति कॉलेज प्रशासन के रवैये के खिलाफ कॉलेज के स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट कर रहे हैं।

इस प्रोटेस्ट में कैंपस में हुए सुसाइड समेत कई मुद्दों को उठाया, जिसमें इन मौतों की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई।

इसके अलावा एकेडमिक प्रेशर बढ़ाने वाले रि-एग्जाम सिस्टम को बदलने और कैंपस में मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम बहाल और दुरुस्त करने की मांग की।

NIT कुरुक्षेत्र में सुसाइड से हुई मौतें के बाद कॉलेज के छात्रों ने 16 अप्रैल को प्रोटेस्ट किया।

NIT कुरुक्षेत्र में सुसाइड से हुई मौतें के बाद कॉलेज के छात्रों ने 16 अप्रैल को प्रोटेस्ट किया।

स्टूडेंट्स का कहना है कि कॉलेज में अब तक कोई खास मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम नहीं है। एक स्टूडेंट ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘एक काउंसलर हैं, पर वो भी कॉलेज में बहुत कम दिखती हैं।’

कॉलेज प्रशासन ने कैंपस खाली कराया

कॉलेज प्रशासन ने सेमेस्टर ब्रेक से पहले ही कॉलेज बंद कर दिया और स्टूडेंट्स को घर लौट जाने की हिदायत दी। इसके साथ ही नोटिस जारी कर स्टूडेंट्स को अगस्त में सीधे परीक्षा में शामिल होने का आदेश जारी किया है।

स्टूडेंट्स को मंहगी दरों पर क्रेडिट कार्ड दे रहे थे

स्टूडेंट प्रोटेस्ट की खबर के बाद हरियाणा राज्य महिला आयोग (HSCW) की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने 28 अप्रैल को कैंपस विजिट कर स्टूडेंट्स से बात की। उनकी जांच में महंगी किश्तों पर क्रेडिट कार्ड लेने और ऑनलाइन बेटिंग-गैंब्लिंग की बात भी सामने आई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्राइवेट बैंक स्टूडेंट्स को सिर्फ आईडी कार्ड पर 36% इंट्रस्ट रेट पर क्रेडिट कार्ड दे रहे थे। इससे छात्र ऑनलाइन बेटिंग एप्स पर पैसा लगा रहे थे और हार के बाद कर्ज में डूबने पर प्राइवेट मनी लेंडर्स से पैसे लेकर उन्हें पैसे चुका रहे थे। एक तरह के लूप में फंसने के बाद उन्होंने अपनी जान दे दी।

स्टूडेंट बोले- ‘काउंसलर थे, लेकिन जरूरत में उन तक पहुंच नहीं’

कॉलेज के PRO और हाल में डीन ऑफ एकेडमिक्स चुने गए जीयान भूषण का कहना है कि जांच में सबके सुसाइड के अलग-अलग कारण मिले हैं।

रेनू भाटिया ने एक रिपोर्ट में कहा कि सुसाइड करने वाले दो लड़कों के मामले में ये बात सामने आई है कि वे जुए में लिप्त थे और कर्ज में डूब गए थे। उनके सुसाइड नोट में फाइनेंशियल प्रेशर का जिक्र है।

कॉलेज स्टूडेंट्स की मौत का कारण भले एक न हो, लेकिन सभी में सुसाइड की वजह कॉमन थी और वो है मेंटल स्ट्रेस। लेकिन कॉलेज में समय रहते काउंसलर तक उनकी पहुंच नहीं थी।

इस बारे में पूछने पर कॉलेज के वर्तमान PRO जीयान भूषण ने बताया कि पिछले तीन साल से कॉलेज में काउंसलर की व्यवस्था है। 2025 में काउंसलर और साइकोलॉजिस्ट अंजलि तनेजा को अपॉइंट किया गया था।

ऐसे में स्टूडेंट्स का कहना है कि ये सब कागजी है लेकिन एक प्रॉपर सिस्टम नहीं है, जो वाकई में बच्चों की मदद कर सके। स्टूडेंट्स ने बताया कि पहले भी कॉलेज में साइकोलॉजिस्ट थे। जब हम खुद अप्रोच करते थे तब बात हो पाती थी, लेकिन उन तक हमारी पहुंच इतनी भी आसान नहीं थी। वे सिर्फ गिने-चुने दिनों में कुछ घंटों के लिए अवेलेबल होते थे।

प्रोफेसर कहते हैं- कैंपस से बाहर जाकर सुसाइड करो

कॉलेज ने प्रोटेस्ट के बाद सुसाइड मामला हाइलाइट होते ही कॉलेज बंद किया। इस पर स्टूडेंट्स का कहना है कि कॉलेज ब्रॉडर सिस्टेमेटिक प्रॉब्लम को एड्रेस करने और इसकी जिम्मेदारी लेने की बजाय इससे भाग रहा है। किसी प्रोफेसर ने बच्चों से ये तक कहा कि अगर सुसाइड करना है तो कैंपस के बाहर करो।

प्रोटेस्ट में स्टूडेंट्स ने कहा- दीक्षा को बिना चेक किए, खिड़की से देखकर ही मृत घोषित कर दिया।

प्रोटेस्ट में स्टूडेंट्स ने कहा- दीक्षा को बिना चेक किए, खिड़की से देखकर ही मृत घोषित कर दिया।

कॉलेज ने मामले की जांच के लिए इंटरनल पैनल बनाया। हालांकि, स्टूडेंट्स का कहना है कि जांच में क्या सामने आया इस तरह की कोई जानकारी या रिपोर्ट पब्लिक नहीं की गई है। कॉलेज का कहना है कि रिपोर्ट सम्बंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है।

प्रोफेसर जीयान ने बताया कि कैंपस में क्रेडिट कार्ड सिस्टम बंद कर दिया गया है। NIT के ऑफिशिएटिंग डायरेक्टर के मुताबिक, स्टूडेंट्स के मेंटल हेल्थ हेल्थ सपोर्ट के लिए तीन कमिटी बनाई गई है, जिनमें से एक स्टूडेंट से वन ऑन वन रेगुलर इंटेरैक्शन के लिए होगी दूसरी वॉर्डनंस और तीसरी फैकल्टी मेंबर्स की कमिटी बनाई गई है। लेकिन स्टूडेंट्स का सवाल है कि जब बात मेंटल हेल्थ की है तो क्या सिर्फ मेंटर्स असाइन करने से प्रोब्लम सॉल्व हो जाएगी?

पिछले दस सालों में 65% तक स्टूडेंट सुसाइड के मामले बढ़े

16 अप्रैल को जब आखिरी मौत हुई, तब 3 घंटे तक लाश लटकी रही। स्टूडेंट्स का आरोप है कि लाश को किसी ने हाथ तक नहीं लगाया। प्रशासन का ये असंवेदनशील रवैया स्टूडेंट्स को बहुत खला।

स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बाद कॉलेज ने हॉस्टल खाली करने को कहा था।

स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बाद कॉलेज ने हॉस्टल खाली करने को कहा था।

NIT कुरुक्षेत्र में इन मौतों के अलावा, पिछले 15 महीनों में BITS पिलानी गोवा कैंपस में भी कम से कम 5 स्टूडेंट्स के सुसाइड के मामले सामने आए हैं।

पूरे देश की तस्वीर अगर देखें, तो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो यानी NCRB की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में देश में स्टूडेंट सुसाइड का आंकड़ा 13,892 तक पहुंच गया। ये पिछले दस सालों में करीब 65% तक बढ़ा है। वहीं NCRB 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में ये आंकड़ा में 13,044 रहा था।

लेकिन ये आंकड़े भी समस्या की गंभीरता नहीं बता सकते, क्योंकि कई मामलों की रिपोर्टिंग ही नहीं होती या फिर उन्हें ‘दूसरी वजहों से मौत’ कहकर दर्ज कर दिया जाता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (NIEPA) की अगुवाई में हुई एक स्टडी बताती है कि कॉलेजों में छात्रों के लिए बने सपोर्ट सिस्टम ज्यादातर बेअसर और ठीक से काम नहीं कर रहे।

औपचारिकता के लिए मेंटल हेल्थ सिस्टम, लेकिन उस तक पहुंच और क्वॉलिटी नहीं

रिपोर्ट्स की मानें तो इंडियन कैंपसेज में मेंटल हेल्थ सिस्टम के फेलियर की कई वजहें हैं। इसमें कई बड़ी खामियां है जैसे कि-

  • कई कॉलेजों में भरोसेमंद काउंसलिंग सिस्टम ही मौजूद नहीं है।
  • अगर है तो हेल्पलाइन और कमेटियों के बीच तालमेल बेहद कमजोर है।
  • फैकल्टी पर काम का बोझ पहले से ज्यादा है और उन्हें प्रॉपर ट्रेनिंग भी नहीं मिलती है।

इस पर हुई कई स्टडीज के मुताबिक, ट्रेंड मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स की भारी कमी है, बजट भी सीमित है और इससे भी जरूरी, ‘काउंसलर’ की भूमिका को लेकर क्लैरिटी ही नहीं है। इसके अलावा मेंटल हेल्थ से जुड़े स्टिग्मा और गोपनीयता की चिंता की वजह से बहुत से स्टूडेंट ही मदद लेने से बचते हैं।

इससे साफ है कि भले ही औपचारिकता पूरी करने के लिए कैंपस में मेंटल हेल्थ सिस्टम जरूर बन रहे हैं, लेकिन उसकी पहुंच और क्वॉलिटी अभी भी हर इंस्टीट्यूशन में लगभग एक जैसी नहीं है। हर कॉलेज में 24×7 हेल्पलाइन और सपोर्ट सिस्टम होना जरूरी

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी UGC ने 2025 सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस (HEIs) में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने और सुसाइड को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

UGC के ड्राफ्ट के मुताबिक, एक आइडियल कैंपस ऐसा होना चाहिए, जहां मेंटल हेल्थ को लेकर पूरा एक सिस्टम हो,

  • एक डेडिकेटेड मेंटल हेल्थ एंड वेल-बीइंग सेंटर होना जरूरी है,
  • निगरानी के लिए मॉनिटरिंग कमेटी,
  • ट्रेंड मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स,
  • फैकल्टी मेंटर्स और पीयर सपोर्ट सिस्टम और
  • 24×7 चलने वाली हेल्पलाइन भी होनी जरूरी है।

इसके साथ ही रेगुलर अवेयरनेस प्रोग्राम्स और वर्कशॉप्स जरूरी है। ताकि स्टूडेंट लाइफ स्किल्स, स्ट्रेस मैनेजमेंट और कोपिंग स्किल्स सीख सकें। इसमें टीचर्स को भी मेंटल हेल्थ ट्रेनिंग जरूरी है ताकि वो गेटकीपर की भूमिका अदा कर सकें।

इसके अलावा, UGC ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि मेंटल हेल्थ क्राइसिस के वक्त तुरंत रिस्पॉन्स सिस्टम हो, क्राइसिस के बाद में फॉलो-अप किया जाए,पूरी प्रक्रिया की डिजिटल रिपोर्टिंग हो और संस्थानों की सपोर्ट सिस्टम और हेल्पलाइन को Tele-MANAS जैसे नेशनल प्लेटफॉर्म और जिला स्तर की सेवाएं जैसे डिस्ट्रिक्ट मेंटल हेल्थ प्रोग्राम से जोड़ना होगा।

स्टूडेंट्स के लिए अलग से पीयर सपोर्ट सिस्टम विकसित करना भी जरूरी है। 100 या उससे ज्यादा स्टूडेंट्स वाले इंस्टीट्यूट में कम से कम 1 क्वालिफाइड मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल होना चाहिए और लगभग हर 500 स्टूडेंट पर 1 एक्सपर्ट रखने पर विचार किया जाना चाहिए।

IITs ने वेलनेस सेशन, तो केरल ने ‘जीवनी’ मेंटल हेल्थ प्रोजेक्ट शुरू किया

कुछ टॉप इंस्टीट्यूशंस ने सुधार की दिशा में जरूरी कोशिशें की हैं। जैसे कि IITs ने वेलनेस सेशन, अवेयरनेस कैंपेन, और एक्सटर्नल ई-काउंसलिंग सर्विसेज के साथ टाईअप्स किए हैं।

इसके अलावा, केरल सरकार ने ‘जीवनी’ नाम से एक कॉलेज मेंटल हेल्थ प्रोजेक्ट शुरू किया है, जो सभी गवर्नमेंट आर्ट एंड साइंस कॉलेजों में मेंटल हेल्थ सर्विसेज देता है।

स्टोरी- सोनाली राय

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NIT कुरुक्षेत्र में 2 महीने में 4 कॉलेज स्टूडेंट्स की सुसाइड से मौत हो गई। ये नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NIT कुरुक्षेत्र में 16 फरवरी से 16 अप्रैल तक में हुई मौतों का आंकड़ा है। इन 4 स्टूडेंट्स ने या तो एकेडमिक या फिर फाइनेंशियल प्रेशर की वजह से अपनी जान दी।

2 महीने में 5 मौतें हुईं

16 अप्रैल को कॉलेज के हॉस्टल में एक स्टूडेंट दीक्षा दुबे ने सुसाइड किया। दीक्षा AI एंड डेटा साइंस की फर्स्ट सेमेस्टर की स्टूडेंट थी। वो बिहार के बक्सर की रहने वाली थी।

कॉलेज में इससे पहले भी 3 मौतें हुईं। कॉलेज में 16 फरवरी को 19 साल के कंप्यूटर इंजीनियरिंग के एक छात्र अंगोड़ शिवा ने अपनी जान दी थी। शिवा तेलंगाना से NIT कुरुक्षेत्र पढ़ने आए था।

31 मार्च को 22 साल का इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छात्र पवन कुमार ने सुसाइड किया। पवन हरियाणा के नूंह जिले का रहने वाला था।

8 अप्रैल को NIT से सिविल इंजीनियरिंग कर रहे थर्ड ईयर के एक छात्र प्रियांशु वर्मा ने सुसाइड किया। सुसाइट नोट मिला पर उससे सुसाइड की वजह साफ नहीं है। प्रियांशु हरियाणा के सिरसा जिले का रहने वाला था।

दो और स्टूडेंट ने जान देने की कोशिश की

इसके अलावा इस बीच और दो स्टूडेंट ने भी जान देने की कोशिश की थी, लेकिन उन्हें बचा लिया गया।

एकेडमिक और फाइनेंशियल प्रेशर झेल रहे हैं स्टूडेंट्स

कॉलेज स्टूडेंट काउंसिल के मेंबर ने नाम न छापने की शर्त पर हमसे बात की। बताया कि कुछ स्टूडेंट्स ने कॉलेज में री-एग्जाम सिस्टम के प्रेशर में आकर सुसाइड किया है। कुछ ने क्रेडिट कार्ड और ऑनलाइन बेटिंग की वजह से फाइनेंशियल ट्रैप में फंसकर अपनी जान दी।

इन मौतों का सीधा कारण भले एकेडमिक और फाइनेंशियल प्रेशर हो, पर इसका दूसरा पहलू कॉलेज में मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम की कमी भी बताता है।

सुसाइड मामलों की जांच को लेकर प्रोटेस्ट

कैंपस में हालिया मौतों और उसके प्रति कॉलेज प्रशासन के रवैये के खिलाफ कॉलेज के स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट कर रहे हैं।

इस प्रोटेस्ट में कैंपस में हुए सुसाइड समेत कई मुद्दों को उठाया, जिसमें इन मौतों की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई।

इसके अलावा एकेडमिक प्रेशर बढ़ाने वाले रि-एग्जाम सिस्टम को बदलने और कैंपस में मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम बहाल और दुरुस्त करने की मांग की।

NIT कुरुक्षेत्र में सुसाइड से हुई मौतें के बाद कॉलेज के छात्रों ने 16 अप्रैल को प्रोटेस्ट किया।

NIT कुरुक्षेत्र में सुसाइड से हुई मौतें के बाद कॉलेज के छात्रों ने 16 अप्रैल को प्रोटेस्ट किया।

स्टूडेंट्स का कहना है कि कॉलेज में अब तक कोई खास मेंटल हेल्थ सपोर्ट सिस्टम नहीं है। एक स्टूडेंट ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘एक काउंसलर हैं, पर वो भी कॉलेज में बहुत कम दिखती हैं।’

कॉलेज प्रशासन ने कैंपस खाली कराया

कॉलेज प्रशासन ने सेमेस्टर ब्रेक से पहले ही कॉलेज बंद कर दिया और स्टूडेंट्स को घर लौट जाने की हिदायत दी। इसके साथ ही नोटिस जारी कर स्टूडेंट्स को अगस्त में सीधे परीक्षा में शामिल होने का आदेश जारी किया है।

स्टूडेंट्स को मंहगी दरों पर क्रेडिट कार्ड दे रहे थे

स्टूडेंट प्रोटेस्ट की खबर के बाद हरियाणा राज्य महिला आयोग (HSCW) की चेयरपर्सन रेनू भाटिया ने 28 अप्रैल को कैंपस विजिट कर स्टूडेंट्स से बात की। उनकी जांच में महंगी किश्तों पर क्रेडिट कार्ड लेने और ऑनलाइन बेटिंग-गैंब्लिंग की बात भी सामने आई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्राइवेट बैंक स्टूडेंट्स को सिर्फ आईडी कार्ड पर 36% इंट्रस्ट रेट पर क्रेडिट कार्ड दे रहे थे। इससे छात्र ऑनलाइन बेटिंग एप्स पर पैसा लगा रहे थे और हार के बाद कर्ज में डूबने पर प्राइवेट मनी लेंडर्स से पैसे लेकर उन्हें पैसे चुका रहे थे। एक तरह के लूप में फंसने के बाद उन्होंने अपनी जान दे दी।

स्टूडेंट बोले- ‘काउंसलर थे, लेकिन जरूरत में उन तक पहुंच नहीं’

कॉलेज के PRO और हाल में डीन ऑफ एकेडमिक्स चुने गए जीयान भूषण का कहना है कि जांच में सबके सुसाइड के अलग-अलग कारण मिले हैं।

रेनू भाटिया ने एक रिपोर्ट में कहा कि सुसाइड करने वाले दो लड़कों के मामले में ये बात सामने आई है कि वे जुए में लिप्त थे और कर्ज में डूब गए थे। उनके सुसाइड नोट में फाइनेंशियल प्रेशर का जिक्र है।

कॉलेज स्टूडेंट्स की मौत का कारण भले एक न हो, लेकिन सभी में सुसाइड की वजह कॉमन थी और वो है मेंटल स्ट्रेस। लेकिन कॉलेज में समय रहते काउंसलर तक उनकी पहुंच नहीं थी।

इस बारे में पूछने पर कॉलेज के वर्तमान PRO जीयान भूषण ने बताया कि पिछले तीन साल से कॉलेज में काउंसलर की व्यवस्था है। 2025 में काउंसलर और साइकोलॉजिस्ट अंजलि तनेजा को अपॉइंट किया गया था।

ऐसे में स्टूडेंट्स का कहना है कि ये सब कागजी है लेकिन एक प्रॉपर सिस्टम नहीं है, जो वाकई में बच्चों की मदद कर सके। स्टूडेंट्स ने बताया कि पहले भी कॉलेज में साइकोलॉजिस्ट थे। जब हम खुद अप्रोच करते थे तब बात हो पाती थी, लेकिन उन तक हमारी पहुंच इतनी भी आसान नहीं थी। वे सिर्फ गिने-चुने दिनों में कुछ घंटों के लिए अवेलेबल होते थे।

प्रोफेसर कहते हैं- कैंपस से बाहर जाकर सुसाइड करो

कॉलेज ने प्रोटेस्ट के बाद सुसाइड मामला हाइलाइट होते ही कॉलेज बंद किया। इस पर स्टूडेंट्स का कहना है कि कॉलेज ब्रॉडर सिस्टेमेटिक प्रॉब्लम को एड्रेस करने और इसकी जिम्मेदारी लेने की बजाय इससे भाग रहा है। किसी प्रोफेसर ने बच्चों से ये तक कहा कि अगर सुसाइड करना है तो कैंपस के बाहर करो।

प्रोटेस्ट में स्टूडेंट्स ने कहा- दीक्षा को बिना चेक किए, खिड़की से देखकर ही मृत घोषित कर दिया।

प्रोटेस्ट में स्टूडेंट्स ने कहा- दीक्षा को बिना चेक किए, खिड़की से देखकर ही मृत घोषित कर दिया।

कॉलेज ने मामले की जांच के लिए इंटरनल पैनल बनाया। हालांकि, स्टूडेंट्स का कहना है कि जांच में क्या सामने आया इस तरह की कोई जानकारी या रिपोर्ट पब्लिक नहीं की गई है। कॉलेज का कहना है कि रिपोर्ट सम्बंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है।

प्रोफेसर जीयान ने बताया कि कैंपस में क्रेडिट कार्ड सिस्टम बंद कर दिया गया है। NIT के ऑफिशिएटिंग डायरेक्टर के मुताबिक, स्टूडेंट्स के मेंटल हेल्थ हेल्थ सपोर्ट के लिए तीन कमिटी बनाई गई है, जिनमें से एक स्टूडेंट से वन ऑन वन रेगुलर इंटेरैक्शन के लिए होगी दूसरी वॉर्डनंस और तीसरी फैकल्टी मेंबर्स की कमिटी बनाई गई है। लेकिन स्टूडेंट्स का सवाल है कि जब बात मेंटल हेल्थ की है तो क्या सिर्फ मेंटर्स असाइन करने से प्रोब्लम सॉल्व हो जाएगी?

पिछले दस सालों में 65% तक स्टूडेंट सुसाइड के मामले बढ़े

16 अप्रैल को जब आखिरी मौत हुई, तब 3 घंटे तक लाश लटकी रही। स्टूडेंट्स का आरोप है कि लाश को किसी ने हाथ तक नहीं लगाया। प्रशासन का ये असंवेदनशील रवैया स्टूडेंट्स को बहुत खला।

स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बाद कॉलेज ने हॉस्टल खाली करने को कहा था।

स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बाद कॉलेज ने हॉस्टल खाली करने को कहा था।

NIT कुरुक्षेत्र में इन मौतों के अलावा, पिछले 15 महीनों में BITS पिलानी गोवा कैंपस में भी कम से कम 5 स्टूडेंट्स के सुसाइड के मामले सामने आए हैं।

पूरे देश की तस्वीर अगर देखें, तो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो यानी NCRB की 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2023 में देश में स्टूडेंट सुसाइड का आंकड़ा 13,892 तक पहुंच गया। ये पिछले दस सालों में करीब 65% तक बढ़ा है। वहीं NCRB 2022 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में ये आंकड़ा में 13,044 रहा था।

लेकिन ये आंकड़े भी समस्या की गंभीरता नहीं बता सकते, क्योंकि कई मामलों की रिपोर्टिंग ही नहीं होती या फिर उन्हें ‘दूसरी वजहों से मौत’ कहकर दर्ज कर दिया जाता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (NIEPA) की अगुवाई में हुई एक स्टडी बताती है कि कॉलेजों में छात्रों के लिए बने सपोर्ट सिस्टम ज्यादातर बेअसर और ठीक से काम नहीं कर रहे।

औपचारिकता के लिए मेंटल हेल्थ सिस्टम, लेकिन उस तक पहुंच और क्वॉलिटी नहीं

रिपोर्ट्स की मानें तो इंडियन कैंपसेज में मेंटल हेल्थ सिस्टम के फेलियर की कई वजहें हैं। इसमें कई बड़ी खामियां है जैसे कि-

  • कई कॉलेजों में भरोसेमंद काउंसलिंग सिस्टम ही मौजूद नहीं है।
  • अगर है तो हेल्पलाइन और कमेटियों के बीच तालमेल बेहद कमजोर है।
  • फैकल्टी पर काम का बोझ पहले से ज्यादा है और उन्हें प्रॉपर ट्रेनिंग भी नहीं मिलती है।

इस पर हुई कई स्टडीज के मुताबिक, ट्रेंड मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स की भारी कमी है, बजट भी सीमित है और इससे भी जरूरी, ‘काउंसलर’ की भूमिका को लेकर क्लैरिटी ही नहीं है। इसके अलावा मेंटल हेल्थ से जुड़े स्टिग्मा और गोपनीयता की चिंता की वजह से बहुत से स्टूडेंट ही मदद लेने से बचते हैं।

इससे साफ है कि भले ही औपचारिकता पूरी करने के लिए कैंपस में मेंटल हेल्थ सिस्टम जरूर बन रहे हैं, लेकिन उसकी पहुंच और क्वॉलिटी अभी भी हर इंस्टीट्यूशन में लगभग एक जैसी नहीं है। हर कॉलेज में 24×7 हेल्पलाइन और सपोर्ट सिस्टम होना जरूरी

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन यानी UGC ने 2025 सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस (HEIs) में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने और सुसाइड को रोकने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

UGC के ड्राफ्ट के मुताबिक, एक आइडियल कैंपस ऐसा होना चाहिए, जहां मेंटल हेल्थ को लेकर पूरा एक सिस्टम हो,

  • एक डेडिकेटेड मेंटल हेल्थ एंड वेल-बीइंग सेंटर होना जरूरी है,
  • निगरानी के लिए मॉनिटरिंग कमेटी,
  • ट्रेंड मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल्स,
  • फैकल्टी मेंटर्स और पीयर सपोर्ट सिस्टम और
  • 24×7 चलने वाली हेल्पलाइन भी होनी जरूरी है।

इसके साथ ही रेगुलर अवेयरनेस प्रोग्राम्स और वर्कशॉप्स जरूरी है। ताकि स्टूडेंट लाइफ स्किल्स, स्ट्रेस मैनेजमेंट और कोपिंग स्किल्स सीख सकें। इसमें टीचर्स को भी मेंटल हेल्थ ट्रेनिंग जरूरी है ताकि वो गेटकीपर की भूमिका अदा कर सकें।

इसके अलावा, UGC ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि मेंटल हेल्थ क्राइसिस के वक्त तुरंत रिस्पॉन्स सिस्टम हो, क्राइसिस के बाद में फॉलो-अप किया जाए,पूरी प्रक्रिया की डिजिटल रिपोर्टिंग हो और संस्थानों की सपोर्ट सिस्टम और हेल्पलाइन को Tele-MANAS जैसे नेशनल प्लेटफॉर्म और जिला स्तर की सेवाएं जैसे डिस्ट्रिक्ट मेंटल हेल्थ प्रोग्राम से जोड़ना होगा।

स्टूडेंट्स के लिए अलग से पीयर सपोर्ट सिस्टम विकसित करना भी जरूरी है। 100 या उससे ज्यादा स्टूडेंट्स वाले इंस्टीट्यूट में कम से कम 1 क्वालिफाइड मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल होना चाहिए और लगभग हर 500 स्टूडेंट पर 1 एक्सपर्ट रखने पर विचार किया जाना चाहिए।

IITs ने वेलनेस सेशन, तो केरल ने ‘जीवनी’ मेंटल हेल्थ प्रोजेक्ट शुरू किया

कुछ टॉप इंस्टीट्यूशंस ने सुधार की दिशा में जरूरी कोशिशें की हैं। जैसे कि IITs ने वेलनेस सेशन, अवेयरनेस कैंपेन, और एक्सटर्नल ई-काउंसलिंग सर्विसेज के साथ टाईअप्स किए हैं।

इसके अलावा, केरल सरकार ने ‘जीवनी’ नाम से एक कॉलेज मेंटल हेल्थ प्रोजेक्ट शुरू किया है, जो सभी गवर्नमेंट आर्ट एंड साइंस कॉलेजों में मेंटल हेल्थ सर्विसेज देता है।

स्टोरी- सोनाली राय

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