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Delhi High Court Stays FSSAI Ban on Dabur Pure Natural Products

Delhi High Court Stays FSSAI Ban on Dabur Pure Natural Products

नई दिल्ली8 मिनट पहले

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दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें ‘100% प्योर’, ‘100% नेचुरल’ और ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावों वाले उत्पादों की बिक्री तुरंत रोकने को कहा था।

जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जब तक मामले में अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक FSSAI का बैन ऑर्डर सस्पेंड रहेगा।

इस पूरे मामले, कोर्ट के फैसले, डाबर की दलीलों और FSSAI की कार्रवाई पर सवाल-जवाब…

सवाल 1. FSSAI ने डाबर के किन-किन प्रोडक्ट्स और दावों पर रोक लगाई थी?

जवाब: FSSAI ने डाबर के उन प्रोडक्ट्स पर कार्रवाई की थी जिनके लेबल पर “100% प्योर”, “100% नेचुरल” और “100% ऑर्गेनिक” लिखा होता है। इनमें प्रमुख रूप से डाबर हनी , डाबर हनी स्क्वीजी, डाबर सुंदरबंस हनी, डाबर हिमालयन एपल साइडर विनेगर, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल, डाबर काउ घी, रियल एक्टिव 100% टेंडर कोकोनट वॉटर, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क और डाबर ऑर्गेनिक हनी शामिल हैं।

सवाल 2. FSSAI का डाबर के इन दावों पर क्या एतराज था?

जवाब: FSSAI का कहना था कि लेबल पर “100%” जैसे दावों का इस्तेमाल अस्पष्ट और भ्रमित करने वाला है। नियामक का तर्क था कि इन दावों की कोई वेरिफिकेशन नहीं की जा सकती। इससे ग्राहकों को गलत जानकारी मिलने की संभावना बनी रहती है।

सवाल 3. डाबर ने FSSAI के इस आदेश को कोर्ट में चुनौती क्यों दी?

जवाब: डाबर का मुख्य तर्क यह था कि FSSAI ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशंस, 2018 के तहत तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया। डाबर के अनुसार, कार्रवाई करने से पहले कंपनी को न तो कोई कारण बताओ नोटिस दिया गया और ना ही कोई सुधार नोटिस। कंपनी को अपना पक्ष रखने या स्पष्टीकरण देने का मौका दिए बिना ही अचानक बिक्री रोकने का आदेश जारी कर दिया गया।

सवाल 4. डाबर ने कानूनी और तकनीकी आधार पर FSSAI के आदेश में क्या कमियां बताईं?

जवाब: डाबर ने तर्क दिया कि FSSAI एक्ट, 2006 की धारा 18 केवल मार्गदर्शक सिद्धांत तय करती है, यह किसी अधिकारी को सीधे बिक्री रोकने का अधिकार नहीं देती। इसके अलावा, आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि “100% प्योर” या “100% नेचुरल” जैसे शब्द नियमों का उल्लंघन कैसे करते हैं। कंपनी ने कहा कि सिंगल-इन्ग्रीडिएंट या पूरी तरह प्राकृतिक उत्पादों के लिए “100% प्योर” कहना अपने आप में भ्रामक नहीं माना जा सकता।

सवाल 5. क्या डाबर के इन उत्पादों की क्वालिटी या सेफ्टी में कोई खराबी पाई गई है?

जवाब: नहीं, यह मामला उत्पाद की गुणवत्ता या सुरक्षा से जुड़ा नहीं है। डाबर ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि FSSAI ने अपने आदेश में यह कहीं नहीं कहा है कि ये उत्पाद मिलावटी, असुरक्षित, नकली या घटिया हैं। यह विवाद केवल पैकेट के लेबल और विज्ञापनों पर लिखे शब्दों तक सीमित है।

सवाल 6. FSSAI के इस अचानक लगे बैन से डाबर के बिजनेस पर क्या असर पड़ रहा था?

जवाब: डाबर ने कोर्ट को बताया कि इस आदेश से कंपनी को भारी व्यावसायिक नुकसान हो रहा था। बाजार में पहले से मौजूद स्टॉक को वापस मंगाने या उनकी रिपैकेजिंग करने की नौबत आ गई थी। साथ ही FSSAI द्वारा सोशल मीडिया पर इस आदेश को सार्वजनिक करने और ऑनलाइन रिटेलर्स/चैनल पार्टनर्स को बिक्री रोकने की सलाह देने से कंपनी के व्यापार और साख पर तुरंत बुरा असर पड़ा।

सवाल 7. हाईकोर्ट के इस स्टे ऑर्डर के बाद अब मार्केट में क्या स्थिति रहेगी?

जवाब: इस अंतरिम आदेश के बाद अब डाबर अपने सभी प्रभावित प्रोडक्ट्स की बिक्री पहले की तरह जारी रख सकेगी। ऑनलाइन और ऑफलाइन रिटेलर्स इन प्रोडक्ट्स को बेचने से नहीं रोकेंगे। कंपनी को फिलहाल रिपैकेजिंग या बाजार से पुराना स्टॉक वापस मंगाने की जरूरत नहीं होगी।

सवाल 8. आगे क्या होगा? FSSAI और डाबर के बीच कानूनी प्रक्रिया का अगला कदम क्या है?

जवाब: दिल्ली हाईकोर्ट के नोटिस के बाद अब FSSAI और केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद कोर्ट डाबर याचिका पर अगली सुनवाई करेगी और यह तय करेगी कि FSSAI का 3 अगस्त का आदेश कानूनन सही था या उसे पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए।

सवाल 9. FMCG सेक्टर और कंज्यूमर्स के लिए इस मामले का क्या महत्व है?

जवाब: यह मामला FMCG कंपनियों के लिए रेगुलेटरी कंप्लायंस और ब्रांडिंग के लिहाज से काफी अहम है। FSSAI पिछले कुछ समय से ‘100%’ और ‘नेचुरल’ जैसे दावों पर सख्त रुख अपना रहा है। हालांकि, हाईकोर्ट के इस कदम से कंपनियों को प्रक्रियात्मक न्याय और अपना पक्ष रखने का अधिकार मिला है। ग्राहकों के लिए भी यह समझना महत्वपूर्ण है कि विवाद उत्पाद की सुरक्षा का नहीं बल्कि लेबलिंग की तकनीकी भाषा का है।

नॉलेज पार्ट: जानें क्या कहता है FSSAI का ‘क्लेम्स रेगुलेशन’?

  • शो-कॉज नोटिस अनिवार्य: खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, अगर FSSAI को किसी प्रोडक्ट के विज्ञापन या क्लेम पर आपत्ति होती है, तो पहले फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) को स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस देना होता है।
  • सिंगल बनाम मल्टी-इन्ग्रीडिएंट: FSSAI का मानना है कि प्रोसेस्ड या मल्टी-इन्ग्रीडिएंट फूड में ‘100% Pure’ लिखना गलत है, जबकि कंपनियां तर्क देती हैं कि शहद या शुद्ध नारियल पानी जैसे प्राकृतिक प्रोडक्ट्स में यह दावा जायज है।

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जस्टिस अमित महाजन की बेंच ने केंद्र और FSSAI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। जब तक मामले में अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक FSSAI का बैन ऑर्डर सस्पेंड रहेगा।

इस पूरे मामले, कोर्ट के फैसले, डाबर की दलीलों और FSSAI की कार्रवाई पर सवाल-जवाब…

सवाल 1. FSSAI ने डाबर के किन-किन प्रोडक्ट्स और दावों पर रोक लगाई थी?

जवाब: FSSAI ने डाबर के उन प्रोडक्ट्स पर कार्रवाई की थी जिनके लेबल पर “100% प्योर”, “100% नेचुरल” और “100% ऑर्गेनिक” लिखा होता है। इनमें प्रमुख रूप से डाबर हनी , डाबर हनी स्क्वीजी, डाबर सुंदरबंस हनी, डाबर हिमालयन एपल साइडर विनेगर, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल, डाबर काउ घी, रियल एक्टिव 100% टेंडर कोकोनट वॉटर, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क और डाबर ऑर्गेनिक हनी शामिल हैं।

सवाल 2. FSSAI का डाबर के इन दावों पर क्या एतराज था?

जवाब: FSSAI का कहना था कि लेबल पर “100%” जैसे दावों का इस्तेमाल अस्पष्ट और भ्रमित करने वाला है। नियामक का तर्क था कि इन दावों की कोई वेरिफिकेशन नहीं की जा सकती। इससे ग्राहकों को गलत जानकारी मिलने की संभावना बनी रहती है।

सवाल 3. डाबर ने FSSAI के इस आदेश को कोर्ट में चुनौती क्यों दी?

जवाब: डाबर का मुख्य तर्क यह था कि FSSAI ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशंस, 2018 के तहत तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया। डाबर के अनुसार, कार्रवाई करने से पहले कंपनी को न तो कोई कारण बताओ नोटिस दिया गया और ना ही कोई सुधार नोटिस। कंपनी को अपना पक्ष रखने या स्पष्टीकरण देने का मौका दिए बिना ही अचानक बिक्री रोकने का आदेश जारी कर दिया गया।

सवाल 4. डाबर ने कानूनी और तकनीकी आधार पर FSSAI के आदेश में क्या कमियां बताईं?

जवाब: डाबर ने तर्क दिया कि FSSAI एक्ट, 2006 की धारा 18 केवल मार्गदर्शक सिद्धांत तय करती है, यह किसी अधिकारी को सीधे बिक्री रोकने का अधिकार नहीं देती। इसके अलावा, आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि “100% प्योर” या “100% नेचुरल” जैसे शब्द नियमों का उल्लंघन कैसे करते हैं। कंपनी ने कहा कि सिंगल-इन्ग्रीडिएंट या पूरी तरह प्राकृतिक उत्पादों के लिए “100% प्योर” कहना अपने आप में भ्रामक नहीं माना जा सकता।

सवाल 5. क्या डाबर के इन उत्पादों की क्वालिटी या सेफ्टी में कोई खराबी पाई गई है?

जवाब: नहीं, यह मामला उत्पाद की गुणवत्ता या सुरक्षा से जुड़ा नहीं है। डाबर ने कोर्ट में स्पष्ट किया कि FSSAI ने अपने आदेश में यह कहीं नहीं कहा है कि ये उत्पाद मिलावटी, असुरक्षित, नकली या घटिया हैं। यह विवाद केवल पैकेट के लेबल और विज्ञापनों पर लिखे शब्दों तक सीमित है।

सवाल 6. FSSAI के इस अचानक लगे बैन से डाबर के बिजनेस पर क्या असर पड़ रहा था?

जवाब: डाबर ने कोर्ट को बताया कि इस आदेश से कंपनी को भारी व्यावसायिक नुकसान हो रहा था। बाजार में पहले से मौजूद स्टॉक को वापस मंगाने या उनकी रिपैकेजिंग करने की नौबत आ गई थी। साथ ही FSSAI द्वारा सोशल मीडिया पर इस आदेश को सार्वजनिक करने और ऑनलाइन रिटेलर्स/चैनल पार्टनर्स को बिक्री रोकने की सलाह देने से कंपनी के व्यापार और साख पर तुरंत बुरा असर पड़ा।

सवाल 7. हाईकोर्ट के इस स्टे ऑर्डर के बाद अब मार्केट में क्या स्थिति रहेगी?

जवाब: इस अंतरिम आदेश के बाद अब डाबर अपने सभी प्रभावित प्रोडक्ट्स की बिक्री पहले की तरह जारी रख सकेगी। ऑनलाइन और ऑफलाइन रिटेलर्स इन प्रोडक्ट्स को बेचने से नहीं रोकेंगे। कंपनी को फिलहाल रिपैकेजिंग या बाजार से पुराना स्टॉक वापस मंगाने की जरूरत नहीं होगी।

सवाल 8. आगे क्या होगा? FSSAI और डाबर के बीच कानूनी प्रक्रिया का अगला कदम क्या है?

जवाब: दिल्ली हाईकोर्ट के नोटिस के बाद अब FSSAI और केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद कोर्ट डाबर याचिका पर अगली सुनवाई करेगी और यह तय करेगी कि FSSAI का 3 अगस्त का आदेश कानूनन सही था या उसे पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए।

सवाल 9. FMCG सेक्टर और कंज्यूमर्स के लिए इस मामले का क्या महत्व है?

जवाब: यह मामला FMCG कंपनियों के लिए रेगुलेटरी कंप्लायंस और ब्रांडिंग के लिहाज से काफी अहम है। FSSAI पिछले कुछ समय से ‘100%’ और ‘नेचुरल’ जैसे दावों पर सख्त रुख अपना रहा है। हालांकि, हाईकोर्ट के इस कदम से कंपनियों को प्रक्रियात्मक न्याय और अपना पक्ष रखने का अधिकार मिला है। ग्राहकों के लिए भी यह समझना महत्वपूर्ण है कि विवाद उत्पाद की सुरक्षा का नहीं बल्कि लेबलिंग की तकनीकी भाषा का है।

नॉलेज पार्ट: जानें क्या कहता है FSSAI का ‘क्लेम्स रेगुलेशन’?

  • शो-कॉज नोटिस अनिवार्य: खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार, अगर FSSAI को किसी प्रोडक्ट के विज्ञापन या क्लेम पर आपत्ति होती है, तो पहले फूड बिजनेस ऑपरेटर (FBO) को स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस देना होता है।
  • सिंगल बनाम मल्टी-इन्ग्रीडिएंट: FSSAI का मानना है कि प्रोसेस्ड या मल्टी-इन्ग्रीडिएंट फूड में ‘100% Pure’ लिखना गलत है, जबकि कंपनियां तर्क देती हैं कि शहद या शुद्ध नारियल पानी जैसे प्राकृतिक प्रोडक्ट्स में यह दावा जायज है।

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