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Farrhana Bhatt Struggle Success Story; Bigg Boss 19 | Mumbai Casting Couch

Farrhana Bhatt Struggle Success Story; Bigg Boss 19 | Mumbai Casting Couch

2 मिनट पहले

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फरहाना भट्ट पीस एक्टिविस्ट भी हैं और अक्सर सामाजिक समस्याओं को उजागर करती हैं।

बचपन में रिश्तेदार ताने देते थे कि यह परिवार की इज्जत खराब कर देगी। पिकनिक पर ले जाने से पहले सिर पर दुपट्टा रखने की शर्त रखी जाती थी और उन्हें तिरस्कार झेलना पड़ता था। लेकिन फरहाना भट्ट ने हार मानने के बजाय खुद को साबित किया। आठवीं कक्षा से उन्होंने अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाना शुरू कर दिया।

मॉडलिंग की, पत्रकारिता में हाथ आजमाया और फिर एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा। करियर की शुरुआत में मुंबई में एक कथित कास्टिंग स्कैम का सामना किया, जहां कॉन्ट्रैक्ट में कलाकारों को डायरेक्टर के फार्महाउस पर रहने जैसी संदिग्ध शर्तें थीं। बिग बॉस में जाने से पहले जिन डिजाइनरों ने कपड़े देने से इनकार किया था, शो के बाद वही लोग लाखों रुपए के ऑफर लेकर पहुंचे।

आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं फरहाना भट्ट के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें।

फरहाना की परवरिश मां और नाना ने की है।

फरहाना की परवरिश मां और नाना ने की है।

चार महीने की थीं, तभी पिता छोड़कर चले गए

फरहाना भट्ट का जन्म 15 मार्च 1997 को कश्मीर में हुआ था। जब वह महज चार महीने की थीं, तभी उनके पिता उन्हें और उनकी मां को छोड़कर चले गए। इसके बाद उनकी परवरिश मां और नाना ने की। टेलीइंडिया से बातचीत में फरहाना ने बताया कि बचपन से ही उन्होंने संघर्ष देखा।

आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बीच उनकी मां ने अकेले उन्हें बड़ा किया। इसी वजह से कम उम्र में उन्होंने जिम्मेदारियां समझीं और आगे चलकर अपनी पढ़ाई व जरूरतों का खर्च खुद उठाने लगीं।

आठवीं क्लास से खुद उठा रही थीं पढ़ाई का खर्च

एक्ट्रेस फरहाना भट्ट ने बताया कि उन्होंने आठवीं कक्षा से अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाना शुरू कर दिया था। इसी वजह से उन्होंने कश्मीर की पहली ई-कॉमर्स कंपनी के लिए मॉडलिंग शुरू की।

उस समय उन्हें करीब 1500 रुपए प्रतिदिन मिलते थे। उनकी मां को इसकी जानकारी थी, लेकिन परिवार के बाकी लोगों को नहीं। फरहाना का कहना है कि जिम्मेदारियां संभालने के बाद उन्होंने कभी किसी से पैसे नहीं मांगे।

टीवी पर विज्ञापन आते ही घर में मच गया बवाल

फरहाना ने बताया कि शुरुआत में वह चोरी-छिपे मॉडलिंग और विज्ञापनों में काम करती थीं। परिवार को इसकी जानकारी तब हुई जब उनका एक विज्ञापन टीवी पर प्रसारित हुआ। इसके बाद घर में हंगामा मच गया।

रिश्तेदारों ने सवाल उठाया कि घर की लड़की टीवी पर कैसे दिखाई दे सकती है। कुछ लोगों का कहना था कि इससे परिवार की बदनामी होगी और दूसरी लड़कियों की शादी पर असर पड़ेगा। हालांकि फरहाना अपने फैसले पर अड़ी रहीं।

फरहाना भट्ट ताइक्वांडो में महारत हासिल कर चुकी हैं और पांच बार नेशनल चैंपियन रह चुकी हैं।

फरहाना भट्ट ताइक्वांडो में महारत हासिल कर चुकी हैं और पांच बार नेशनल चैंपियन रह चुकी हैं।

पिकनिक पर ले जाने से पहले सिर ढंकने की शर्त रखते थे

फरहाना ने बताया कि बचपन में उन्हें परिवार के कई कार्यक्रमों और पिकनिक में शामिल नहीं किया जाता था। अगर ले जाया जाता था तो उनकी मां से कहा जाता था कि फरहाना सिर पर दुपट्टा रखें, तभी उन्हें साथ ले जाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कई बार उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जाता था जैसा किसी सौतेले बच्चे के साथ भी नहीं किया जाता। रिश्तेदार चाहते थे कि वह हर बात मानने वाली लड़की बनें, लेकिन उनका स्वभाव अलग था।

रिश्तेदार कहते थे- इसे इसके पिता के पास छोड़ दो

फरहाना ने बताया कि कुछ रिश्तेदार उनकी मां से कहते थे, “इसे इसके पिता के पास छोड़ दो, यह हमारी इज्जत खराब कर देगी।”

उन्होंने बताया कि लोग उनके वीडियो बनाने और मॉडलिंग करने पर ताने मारते थे। कुछ लोगों ने धमकी भरे लहजे में कहा था कि “किसी दिन इसे गाड़ी के नीचे कर देंगे।” फरहाना कहती हैं कि ऐसी बातें उन्हें तोड़ती थीं, लेकिन बाद में यही उनकी ताकत बन गईं।

‘मैं उनकी आंखों का कांटा थी, कठपुतली नहीं’

फरहाना ने कहा कि बचपन से वह सवाल पूछने वाली और अपने फैसले खुद लेने वाली लड़की थीं। यही वजह थी कि परिवार के कुछ लोगों को वह पसंद नहीं थीं।

उन्होंने कहा, “मैं हमेशा उनकी आंखों का कांटा थी। लेकिन मुझे खुशी है कि मैं किसी की कठपुतली नहीं बनी।”

फरहाना का मानना है कि अगर उन्हें बचपन में इतना विरोध और तिरस्कार नहीं मिला होता, तो शायद उनके अंदर खुद को साबित करने की इतनी आग नहीं होती।

फरहाना ने इम्तियाज अली की फिल्म ‘लैला मजनू’ में जसमीत का किरदार निभाया था।

फरहाना ने इम्तियाज अली की फिल्म ‘लैला मजनू’ में जसमीत का किरदार निभाया था।

इम्तियाज अली की फिल्म मिली, लेकिन पैसे के लिए की थी

फरहाना ने बताया कि जब उन्हें ‘लैला मजनू’ में काम करने का मौका मिला तो वह स्टार बनने के बारे में नहीं सोच रही थीं। उन्होंने फिल्म इसलिए की क्योंकि इसके लिए उन्हें अच्छी रकम मिल रही थी।

उन्हें लगा था कि फिल्म ज्यादा नहीं चलेगी, लेकिन कश्मीर में वह काफी लोकप्रिय हो गई। इसके बाद रिश्तेदार और पड़ोसी उनकी मां को बधाई देने घर आने लगे। लोगों को गर्व होने लगा कि उन्होंने इम्तियाज अली और साजिद अली जैसे निर्देशकों के साथ काम किया है।

फरहाना ने मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। उन्होंने अनुपम खेर की अकादमी से एक्टिंग सीखी।

फरहाना ने मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। उन्होंने अनुपम खेर की अकादमी से एक्टिंग सीखी।

पत्रकारिता छोड़ एक्टिंग को चुना

फरहाना बचपन से पत्रकार बनना चाहती थीं। उन्होंने कश्मीर के कई बड़े न्यूज चैनलों और अखबारों में इंटर्नशिप की।

लेकिन कुछ समय बाद उन्हें महसूस हुआ कि वह 9 से 5 की नौकरी नहीं कर सकतीं। उन्हें लगा कि अभिनय ही ऐसा काम है जिसे वह पूरी जिंदगी कर सकती हैं। इसके बाद उन्होंने एक्टिंग को ही करियर बनाने का फैसला किया।

फरहाना ने 2016 में सनी कौशल के साथ फिल्म 'सनशाइन म्यूजिक टूर्स एंड ट्रेवल्स' से बॉलीवुड में कदम रखा था।

फरहाना ने 2016 में सनी कौशल के साथ फिल्म ‘सनशाइन म्यूजिक टूर्स एंड ट्रेवल्स’ से बॉलीवुड में कदम रखा था।

सिविल सर्विस छोड़ने का मन बनाया, ज्योतिषी ने बदल दी सोच

एक समय फरहाना ने एक्टिंग छोड़कर सिविल सर्विसेज की तैयारी करने का फैसला कर लिया था। इसी दौरान दिल्ली में उनकी मुलाकात एक ज्योतिषी से हुई।

फरहाना के मुताबिक, ज्योतिषी ने उनकी जन्मतिथि देखकर कहा, “तुम्हारा नाम सिविल सर्विस में नहीं लिखा है। तुम्हें शोबिज में ही सफलता मिलेगी।”

उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 में एक अन्य ज्योतिषी ने भी उनसे कहा था कि यह साल उनकी जिंदगी बदल देगा और उन्हें बड़ी पहचान मिलेगी।

कश्मीर की लड़कियों के लिए नहीं छोड़ी इंडस्ट्री

फरहाना ने बताया कि संघर्ष के दौरान कई बार उनके मन में एक्टिंग छोड़ने का ख्याल आया। लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकीं, क्योंकि कश्मीर की कई लड़कियां उन्हें प्रेरणा मानती थीं।

उन्हें अक्सर मैसेज मिलते थे कि अगर फरहाना समाज और परिवार की बंदिशों को तोड़कर आगे बढ़ सकती हैं, तो वे भी अपने सपने पूरे कर सकती हैं। फरहाना कहती हैं कि अगर वह हार मान लेतीं तो उन लड़कियों का भरोसा टूट जाता।

मुंबई में कास्टिंग स्कैम का शिकार होते-होते बचीं

करियर के शुरुआती दिनों में फरहाना को एक महिला ने बॉलीवुड फिल्म का झांसा देकर मुंबई बुलाया। उन्हें बताया गया कि फिल्म की शूटिंग शुरू होने वाली है और रहने का इंतजाम होटल में किया गया है।

लेकिन मुंबई पहुंचने पर उन्हें होटल की जगह एक कथित डायरेक्टर के घर ले जाया गया। देर रात तक उन्हें वहीं बैठाए रखा गया। धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि कुछ गड़बड़ है।

कॉन्ट्रैक्ट में लिखी थीं संदिग्ध शर्तें

फरहाना ने बताया कि रात में उन्हें एक कॉन्ट्रैक्ट पढ़ने के लिए दिया गया। उसमें ऐसी शर्तें थीं कि कलाकारों को एक-दो हफ्ते तक डायरेक्टर के फार्महाउस पर रहना होगा। कॉन्ट्रैक्ट पढ़ते ही उन्हें समझ आ गया कि मामला संदिग्ध है। उन्होंने तुरंत उस महिला को फोन किया, जिसने उन्हें मुंबई बुलाया था और साफ कहा कि वह तुरंत वहां पहुंचे।

डर के बीच हाथ में फूलदान लेकर बैठी थीं

फरहाना ने बताया कि जिस वक्त उन्हें डायरेक्टर के कमरे में बुलाया गया, वह बेहद डर गई थीं। उन्होंने सुरक्षा के लिए पास रखा फूलदान हाथ में पकड़ लिया था।

उन्होंने अपनी दोस्त से कहा था कि अगर वह आदमी कोई गलत हरकत करेगा तो वह उसी फूलदान से उस पर हमला कर देंगी। बाद में उन्होंने दबाव बनाकर अपने और अपनी दोस्त के लिए वापसी की टिकट का इंतजाम कराया। दोनों सुरक्षित श्रीनगर लौट गईं।

बाद में पता चला कि वह डायरेक्टर फ्रॉड था

फरहाना ने बताया कि कुछ समय बाद उन्हें जानकारी मिली कि वह कथित डायरेक्टर कई लोगों के साथ धोखाधड़ी कर चुका था। वह प्रोड्यूसर्स से पैसे लेकर भी गायब हो गया था। फरहाना मानती हैं कि अगर उस समय उन्होंने समझदारी नहीं दिखाई होती, तो स्थिति और खतरनाक हो सकती थी।

नाना के निधन ने पूरी जिंदगी बदल दी

फरहाना के मुताबिक, उनके नाना उनके सबसे बड़े सहारे थे। उनके निधन के बाद उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि अब उन्हें अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि उस दौर में उन्हें लगा जैसे किसी बड़े मैदान में उन्हें अकेले खड़ा कर दिया गया हो। यही उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

फरहाना बिग बॉस 19 में रनर-अप रहीं, जबकि गौरव खन्ना विनर रहे थे।

फरहाना बिग बॉस 19 में रनर-अप रहीं, जबकि गौरव खन्ना विनर रहे थे।

बिग बॉस से पहले किसी ने कपड़े तक नहीं दिए

फरहाना ने बताया कि बिग बॉस में जाने से पहले उनके पास ज्यादा सोशल मीडिया फॉलोअर्स नहीं थे। इसी वजह से कई डिजाइनर और ब्रांड्स उनके साथ जुड़ना नहीं चाहते थे। कुछ लोगों ने कहा कि पहले एक-दो हफ्ते शो में टिक जाएं, उसके बाद कपड़े देंगे।

शो के बाद वही लोग लाखों रुपए ऑफर करने लगे

फरहाना ने बताया कि बिग बॉस से बाहर आने के बाद वही डिजाइनर और ब्रांड्स उनके साथ काम करने के लिए उत्सुक हो गए। कुछ ब्रांड्स तीन आउटफिट्स के बदले दो लाख रुपए तक देने को तैयार थे। हालांकि उन्होंने अपनी टीम से साफ कह दिया कि जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में साथ नहीं दिया, उनके साथ अब काम करने की जरूरत नहीं है।

ऑडिशन दो और फिर भूल जाओ

फरहाना का कहना है कि उन्होंने आज तक किसी कास्टिंग डायरेक्टर को फोन कर यह नहीं पूछा कि उनका चयन हुआ या नहीं। उनका मानना है कि ऑडिशन देने के बाद उसे भूल जाना चाहिए। अगर वह काम आपकी किस्मत में होगा, तो खुद आपके पास आ जाएगा।

सिंघम अगेन में फरहाना ने कश्मीरी पत्रकार का किरदार निभाया था।

सिंघम अगेन में फरहाना ने कश्मीरी पत्रकार का किरदार निभाया था।

सिंगम अगेन का ऑडिशन देकर भूल गई थीं

फरहाना ने बताया कि सिंगम अगेन के लिए उन्होंने चार महीने पहले ऑडिशन दिया था और फिर भूल गई थीं कि उन्होंने इसके लिए टेस्ट दिया है। बाद में उन्हें फिल्म मिल गई। वह कहती हैं कि जरूरत से ज्यादा उम्मीदें रखने के बजाय इंसान को मन संतुलित रखना चाहिए।

सबसे बड़ा सपना- मां को वह जिंदगी देना जिसकी वह हकदार हैं

फरहाना कहती हैं कि उनका सपना सिर्फ पैसा कमाना या स्टार बनना नहीं है। वह अपनी मां को वह जिंदगी देना चाहती हैं जिसकी वह हकदार हैं। उनका कहना है कि बचपन में उनकी मां ने बहुत संघर्ष किया और कई खुशियां खो दीं। अब वह चाहती हैं कि उनकी मां दुनिया की हर वह खुशी हासिल करें, जिसका उन्होंने सपना देखा था।

फरहाना का मानना है कि जब आप परिवार और समाज की पुरानी सोच को तोड़कर नया रास्ता चुनते हैं, तो सबसे पहले अपने ही लोग सवाल उठाते हैं। लेकिन अगर इरादा साफ हो, तो खुद पर भरोसा बनाए रखना चाहिए, क्योंकि आखिरकार वही भरोसा मंजिल तक पहुंचाता है।

‘खतरों के खिलाड़ी 15′ में आएंगी नजर

फरहाना कहती हैं- इस शो को लेकर एक्साइटमेंट भी है और डर भी। यह लाइफटाइम एक्सपीरियंस है, क्योंकि असल जिंदगी में ऐसे स्टंट नहीं कर सकते। रोहित शेट्टी जैसे लीजेंड के साथ और पूरी सेफ्टी के बीच यह सब करना बहुत बड़ी बात है। मैं इस शो के जरिए अपनी पर्सनैलिटी का नया हिस्सा एक्सप्लोर करना चाहती हूं। इसमें असली मुकाबला दूसरे कंटेस्टेंट्स से नहीं, बल्कि अपने डर से होता है।

मैं आज भी बहुत सारी चीजों से डरती हूं। फर्क सिर्फ इतना है कि अब शायद मुझे उन डरों को करीब से देखने का मौका मिलेगा। जिंदगी इतनी तेज भागती है कि इंसान अपने डर के सामने रुककर खड़ा नहीं हो पाता, लेकिन अब शायद मौका मिलेगा कि डर को इतना करीब से देखूं कि वह खत्म हो जाए।

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फरहाना भट्ट पीस एक्टिविस्ट भी हैं और अक्सर सामाजिक समस्याओं को उजागर करती हैं।

बचपन में रिश्तेदार ताने देते थे कि यह परिवार की इज्जत खराब कर देगी। पिकनिक पर ले जाने से पहले सिर पर दुपट्टा रखने की शर्त रखी जाती थी और उन्हें तिरस्कार झेलना पड़ता था। लेकिन फरहाना भट्ट ने हार मानने के बजाय खुद को साबित किया। आठवीं कक्षा से उन्होंने अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाना शुरू कर दिया।

मॉडलिंग की, पत्रकारिता में हाथ आजमाया और फिर एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा। करियर की शुरुआत में मुंबई में एक कथित कास्टिंग स्कैम का सामना किया, जहां कॉन्ट्रैक्ट में कलाकारों को डायरेक्टर के फार्महाउस पर रहने जैसी संदिग्ध शर्तें थीं। बिग बॉस में जाने से पहले जिन डिजाइनरों ने कपड़े देने से इनकार किया था, शो के बाद वही लोग लाखों रुपए के ऑफर लेकर पहुंचे।

आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं फरहाना भट्ट के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें।

फरहाना की परवरिश मां और नाना ने की है।

फरहाना की परवरिश मां और नाना ने की है।

चार महीने की थीं, तभी पिता छोड़कर चले गए

फरहाना भट्ट का जन्म 15 मार्च 1997 को कश्मीर में हुआ था। जब वह महज चार महीने की थीं, तभी उनके पिता उन्हें और उनकी मां को छोड़कर चले गए। इसके बाद उनकी परवरिश मां और नाना ने की। टेलीइंडिया से बातचीत में फरहाना ने बताया कि बचपन से ही उन्होंने संघर्ष देखा।

आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों के बीच उनकी मां ने अकेले उन्हें बड़ा किया। इसी वजह से कम उम्र में उन्होंने जिम्मेदारियां समझीं और आगे चलकर अपनी पढ़ाई व जरूरतों का खर्च खुद उठाने लगीं।

आठवीं क्लास से खुद उठा रही थीं पढ़ाई का खर्च

एक्ट्रेस फरहाना भट्ट ने बताया कि उन्होंने आठवीं कक्षा से अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाना शुरू कर दिया था। इसी वजह से उन्होंने कश्मीर की पहली ई-कॉमर्स कंपनी के लिए मॉडलिंग शुरू की।

उस समय उन्हें करीब 1500 रुपए प्रतिदिन मिलते थे। उनकी मां को इसकी जानकारी थी, लेकिन परिवार के बाकी लोगों को नहीं। फरहाना का कहना है कि जिम्मेदारियां संभालने के बाद उन्होंने कभी किसी से पैसे नहीं मांगे।

टीवी पर विज्ञापन आते ही घर में मच गया बवाल

फरहाना ने बताया कि शुरुआत में वह चोरी-छिपे मॉडलिंग और विज्ञापनों में काम करती थीं। परिवार को इसकी जानकारी तब हुई जब उनका एक विज्ञापन टीवी पर प्रसारित हुआ। इसके बाद घर में हंगामा मच गया।

रिश्तेदारों ने सवाल उठाया कि घर की लड़की टीवी पर कैसे दिखाई दे सकती है। कुछ लोगों का कहना था कि इससे परिवार की बदनामी होगी और दूसरी लड़कियों की शादी पर असर पड़ेगा। हालांकि फरहाना अपने फैसले पर अड़ी रहीं।

फरहाना भट्ट ताइक्वांडो में महारत हासिल कर चुकी हैं और पांच बार नेशनल चैंपियन रह चुकी हैं।

फरहाना भट्ट ताइक्वांडो में महारत हासिल कर चुकी हैं और पांच बार नेशनल चैंपियन रह चुकी हैं।

पिकनिक पर ले जाने से पहले सिर ढंकने की शर्त रखते थे

फरहाना ने बताया कि बचपन में उन्हें परिवार के कई कार्यक्रमों और पिकनिक में शामिल नहीं किया जाता था। अगर ले जाया जाता था तो उनकी मां से कहा जाता था कि फरहाना सिर पर दुपट्टा रखें, तभी उन्हें साथ ले जाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि कई बार उनके साथ ऐसा व्यवहार किया जाता था जैसा किसी सौतेले बच्चे के साथ भी नहीं किया जाता। रिश्तेदार चाहते थे कि वह हर बात मानने वाली लड़की बनें, लेकिन उनका स्वभाव अलग था।

रिश्तेदार कहते थे- इसे इसके पिता के पास छोड़ दो

फरहाना ने बताया कि कुछ रिश्तेदार उनकी मां से कहते थे, “इसे इसके पिता के पास छोड़ दो, यह हमारी इज्जत खराब कर देगी।”

उन्होंने बताया कि लोग उनके वीडियो बनाने और मॉडलिंग करने पर ताने मारते थे। कुछ लोगों ने धमकी भरे लहजे में कहा था कि “किसी दिन इसे गाड़ी के नीचे कर देंगे।” फरहाना कहती हैं कि ऐसी बातें उन्हें तोड़ती थीं, लेकिन बाद में यही उनकी ताकत बन गईं।

‘मैं उनकी आंखों का कांटा थी, कठपुतली नहीं’

फरहाना ने कहा कि बचपन से वह सवाल पूछने वाली और अपने फैसले खुद लेने वाली लड़की थीं। यही वजह थी कि परिवार के कुछ लोगों को वह पसंद नहीं थीं।

उन्होंने कहा, “मैं हमेशा उनकी आंखों का कांटा थी। लेकिन मुझे खुशी है कि मैं किसी की कठपुतली नहीं बनी।”

फरहाना का मानना है कि अगर उन्हें बचपन में इतना विरोध और तिरस्कार नहीं मिला होता, तो शायद उनके अंदर खुद को साबित करने की इतनी आग नहीं होती।

फरहाना ने इम्तियाज अली की फिल्म ‘लैला मजनू’ में जसमीत का किरदार निभाया था।

फरहाना ने इम्तियाज अली की फिल्म ‘लैला मजनू’ में जसमीत का किरदार निभाया था।

इम्तियाज अली की फिल्म मिली, लेकिन पैसे के लिए की थी

फरहाना ने बताया कि जब उन्हें ‘लैला मजनू’ में काम करने का मौका मिला तो वह स्टार बनने के बारे में नहीं सोच रही थीं। उन्होंने फिल्म इसलिए की क्योंकि इसके लिए उन्हें अच्छी रकम मिल रही थी।

उन्हें लगा था कि फिल्म ज्यादा नहीं चलेगी, लेकिन कश्मीर में वह काफी लोकप्रिय हो गई। इसके बाद रिश्तेदार और पड़ोसी उनकी मां को बधाई देने घर आने लगे। लोगों को गर्व होने लगा कि उन्होंने इम्तियाज अली और साजिद अली जैसे निर्देशकों के साथ काम किया है।

फरहाना ने मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। उन्होंने अनुपम खेर की अकादमी से एक्टिंग सीखी।

फरहाना ने मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की है। उन्होंने अनुपम खेर की अकादमी से एक्टिंग सीखी।

पत्रकारिता छोड़ एक्टिंग को चुना

फरहाना बचपन से पत्रकार बनना चाहती थीं। उन्होंने कश्मीर के कई बड़े न्यूज चैनलों और अखबारों में इंटर्नशिप की।

लेकिन कुछ समय बाद उन्हें महसूस हुआ कि वह 9 से 5 की नौकरी नहीं कर सकतीं। उन्हें लगा कि अभिनय ही ऐसा काम है जिसे वह पूरी जिंदगी कर सकती हैं। इसके बाद उन्होंने एक्टिंग को ही करियर बनाने का फैसला किया।

फरहाना ने 2016 में सनी कौशल के साथ फिल्म 'सनशाइन म्यूजिक टूर्स एंड ट्रेवल्स' से बॉलीवुड में कदम रखा था।

फरहाना ने 2016 में सनी कौशल के साथ फिल्म ‘सनशाइन म्यूजिक टूर्स एंड ट्रेवल्स’ से बॉलीवुड में कदम रखा था।

सिविल सर्विस छोड़ने का मन बनाया, ज्योतिषी ने बदल दी सोच

एक समय फरहाना ने एक्टिंग छोड़कर सिविल सर्विसेज की तैयारी करने का फैसला कर लिया था। इसी दौरान दिल्ली में उनकी मुलाकात एक ज्योतिषी से हुई।

फरहाना के मुताबिक, ज्योतिषी ने उनकी जन्मतिथि देखकर कहा, “तुम्हारा नाम सिविल सर्विस में नहीं लिखा है। तुम्हें शोबिज में ही सफलता मिलेगी।”

उन्होंने बताया कि जनवरी 2025 में एक अन्य ज्योतिषी ने भी उनसे कहा था कि यह साल उनकी जिंदगी बदल देगा और उन्हें बड़ी पहचान मिलेगी।

कश्मीर की लड़कियों के लिए नहीं छोड़ी इंडस्ट्री

फरहाना ने बताया कि संघर्ष के दौरान कई बार उनके मन में एक्टिंग छोड़ने का ख्याल आया। लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकीं, क्योंकि कश्मीर की कई लड़कियां उन्हें प्रेरणा मानती थीं।

उन्हें अक्सर मैसेज मिलते थे कि अगर फरहाना समाज और परिवार की बंदिशों को तोड़कर आगे बढ़ सकती हैं, तो वे भी अपने सपने पूरे कर सकती हैं। फरहाना कहती हैं कि अगर वह हार मान लेतीं तो उन लड़कियों का भरोसा टूट जाता।

मुंबई में कास्टिंग स्कैम का शिकार होते-होते बचीं

करियर के शुरुआती दिनों में फरहाना को एक महिला ने बॉलीवुड फिल्म का झांसा देकर मुंबई बुलाया। उन्हें बताया गया कि फिल्म की शूटिंग शुरू होने वाली है और रहने का इंतजाम होटल में किया गया है।

लेकिन मुंबई पहुंचने पर उन्हें होटल की जगह एक कथित डायरेक्टर के घर ले जाया गया। देर रात तक उन्हें वहीं बैठाए रखा गया। धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि कुछ गड़बड़ है।

कॉन्ट्रैक्ट में लिखी थीं संदिग्ध शर्तें

फरहाना ने बताया कि रात में उन्हें एक कॉन्ट्रैक्ट पढ़ने के लिए दिया गया। उसमें ऐसी शर्तें थीं कि कलाकारों को एक-दो हफ्ते तक डायरेक्टर के फार्महाउस पर रहना होगा। कॉन्ट्रैक्ट पढ़ते ही उन्हें समझ आ गया कि मामला संदिग्ध है। उन्होंने तुरंत उस महिला को फोन किया, जिसने उन्हें मुंबई बुलाया था और साफ कहा कि वह तुरंत वहां पहुंचे।

डर के बीच हाथ में फूलदान लेकर बैठी थीं

फरहाना ने बताया कि जिस वक्त उन्हें डायरेक्टर के कमरे में बुलाया गया, वह बेहद डर गई थीं। उन्होंने सुरक्षा के लिए पास रखा फूलदान हाथ में पकड़ लिया था।

उन्होंने अपनी दोस्त से कहा था कि अगर वह आदमी कोई गलत हरकत करेगा तो वह उसी फूलदान से उस पर हमला कर देंगी। बाद में उन्होंने दबाव बनाकर अपने और अपनी दोस्त के लिए वापसी की टिकट का इंतजाम कराया। दोनों सुरक्षित श्रीनगर लौट गईं।

बाद में पता चला कि वह डायरेक्टर फ्रॉड था

फरहाना ने बताया कि कुछ समय बाद उन्हें जानकारी मिली कि वह कथित डायरेक्टर कई लोगों के साथ धोखाधड़ी कर चुका था। वह प्रोड्यूसर्स से पैसे लेकर भी गायब हो गया था। फरहाना मानती हैं कि अगर उस समय उन्होंने समझदारी नहीं दिखाई होती, तो स्थिति और खतरनाक हो सकती थी।

नाना के निधन ने पूरी जिंदगी बदल दी

फरहाना के मुताबिक, उनके नाना उनके सबसे बड़े सहारे थे। उनके निधन के बाद उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि अब उन्हें अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। उन्होंने कहा कि उस दौर में उन्हें लगा जैसे किसी बड़े मैदान में उन्हें अकेले खड़ा कर दिया गया हो। यही उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

फरहाना बिग बॉस 19 में रनर-अप रहीं, जबकि गौरव खन्ना विनर रहे थे।

फरहाना बिग बॉस 19 में रनर-अप रहीं, जबकि गौरव खन्ना विनर रहे थे।

बिग बॉस से पहले किसी ने कपड़े तक नहीं दिए

फरहाना ने बताया कि बिग बॉस में जाने से पहले उनके पास ज्यादा सोशल मीडिया फॉलोअर्स नहीं थे। इसी वजह से कई डिजाइनर और ब्रांड्स उनके साथ जुड़ना नहीं चाहते थे। कुछ लोगों ने कहा कि पहले एक-दो हफ्ते शो में टिक जाएं, उसके बाद कपड़े देंगे।

शो के बाद वही लोग लाखों रुपए ऑफर करने लगे

फरहाना ने बताया कि बिग बॉस से बाहर आने के बाद वही डिजाइनर और ब्रांड्स उनके साथ काम करने के लिए उत्सुक हो गए। कुछ ब्रांड्स तीन आउटफिट्स के बदले दो लाख रुपए तक देने को तैयार थे। हालांकि उन्होंने अपनी टीम से साफ कह दिया कि जिन लोगों ने मुश्किल वक्त में साथ नहीं दिया, उनके साथ अब काम करने की जरूरत नहीं है।

ऑडिशन दो और फिर भूल जाओ

फरहाना का कहना है कि उन्होंने आज तक किसी कास्टिंग डायरेक्टर को फोन कर यह नहीं पूछा कि उनका चयन हुआ या नहीं। उनका मानना है कि ऑडिशन देने के बाद उसे भूल जाना चाहिए। अगर वह काम आपकी किस्मत में होगा, तो खुद आपके पास आ जाएगा।

सिंघम अगेन में फरहाना ने कश्मीरी पत्रकार का किरदार निभाया था।

सिंघम अगेन में फरहाना ने कश्मीरी पत्रकार का किरदार निभाया था।

सिंगम अगेन का ऑडिशन देकर भूल गई थीं

फरहाना ने बताया कि सिंगम अगेन के लिए उन्होंने चार महीने पहले ऑडिशन दिया था और फिर भूल गई थीं कि उन्होंने इसके लिए टेस्ट दिया है। बाद में उन्हें फिल्म मिल गई। वह कहती हैं कि जरूरत से ज्यादा उम्मीदें रखने के बजाय इंसान को मन संतुलित रखना चाहिए।

सबसे बड़ा सपना- मां को वह जिंदगी देना जिसकी वह हकदार हैं

फरहाना कहती हैं कि उनका सपना सिर्फ पैसा कमाना या स्टार बनना नहीं है। वह अपनी मां को वह जिंदगी देना चाहती हैं जिसकी वह हकदार हैं। उनका कहना है कि बचपन में उनकी मां ने बहुत संघर्ष किया और कई खुशियां खो दीं। अब वह चाहती हैं कि उनकी मां दुनिया की हर वह खुशी हासिल करें, जिसका उन्होंने सपना देखा था।

फरहाना का मानना है कि जब आप परिवार और समाज की पुरानी सोच को तोड़कर नया रास्ता चुनते हैं, तो सबसे पहले अपने ही लोग सवाल उठाते हैं। लेकिन अगर इरादा साफ हो, तो खुद पर भरोसा बनाए रखना चाहिए, क्योंकि आखिरकार वही भरोसा मंजिल तक पहुंचाता है।

‘खतरों के खिलाड़ी 15′ में आएंगी नजर

फरहाना कहती हैं- इस शो को लेकर एक्साइटमेंट भी है और डर भी। यह लाइफटाइम एक्सपीरियंस है, क्योंकि असल जिंदगी में ऐसे स्टंट नहीं कर सकते। रोहित शेट्टी जैसे लीजेंड के साथ और पूरी सेफ्टी के बीच यह सब करना बहुत बड़ी बात है। मैं इस शो के जरिए अपनी पर्सनैलिटी का नया हिस्सा एक्सप्लोर करना चाहती हूं। इसमें असली मुकाबला दूसरे कंटेस्टेंट्स से नहीं, बल्कि अपने डर से होता है।

मैं आज भी बहुत सारी चीजों से डरती हूं। फर्क सिर्फ इतना है कि अब शायद मुझे उन डरों को करीब से देखने का मौका मिलेगा। जिंदगी इतनी तेज भागती है कि इंसान अपने डर के सामने रुककर खड़ा नहीं हो पाता, लेकिन अब शायद मौका मिलेगा कि डर को इतना करीब से देखूं कि वह खत्म हो जाए।

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पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए…

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मुंबई की चमक-दमक के पीछे ठगी, ताने और संघर्ष की लंबी कहानी भी छुपी है। नोरा फतेही की जिंदगी भी ऐसी ही रही, जहां काम दिलाने का वादा कर 20 लाख रुपए ठग लिए गए और कई बार उन्हें बिना फीस के गाने करने पड़े। “मेरा मजाक उड़ाया गया, दिलबर जैसे कई गाने फ्री में करने पड़े”- यह दौर उनकी पहचान बनने से पहले के संघर्ष को दिखाता है।पूरी खबर पढ़ें..

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