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From hardship to captaincy; once had no money to buy a bat, today he is leading the team

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नई दिल्ली19 मिनट पहले

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तिलक वर्मा, भारतीय क्रिकेटर।- फाइल फोटो

बाएं हाथ के विस्फोटक बल्लेबाज तिलक वर्मा आज भले ही प्रशंसकों के दिल में जगह बना चुके हों, लेकिन उनका करिअर गंभीर चुनौतियों से भरा रहा है। फिलहाल वे त्रिकोणीय सीरीज के लिए भारत-ए टीम के कप्तान बनाए गए हैं। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी.

हैदराबाद में 8 नवंबर 2002 को जन्मे तिलक वर्मा का बचपन गहरी आर्थिक तंगी में बीता। उनके पिता नंबूरी नागराजू तब एक मामूली इलेक्ट्रिशियन थे, जो छोटे-मोटे रिपेयरिंग वर्क करके परिवार का पेट पालते थे।

माता-पिता के साथ तिलक और उनके बड़े भाई तरुण एक छोटे-से किराए के मकान में रहते थे। पिता की इच्छा थी कि तिलक बड़े होकर डॉक्टर बनें, लेकिन बचपन से ही तिलक का मन क्रिकेट में रम गया।

संघर्ष – बैट खरीदने के पैसे नहीं थे, रोजाना 40 किमी का सफर कर जाते थे एकेडमी

एक वक्त ऐसा था जब तिलक के पास बैट और अन्य गियर खरीदने के पैसे भी नहीं थे। तिलक की बैटिंग स्टाइल से प्रभावित होकर स्थानीय कोच सलाम बायश ने उन्हें कोचिंग का सुझाव दिया, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते परिवार ने मना कर दिया। बायश ने उन्हें न सिर्फ मुफ्त कोचिंग दी, बल्कि उनके किट और अन्य उपकरणों का खर्च भी उठाया। तिलक को रोजाना 40 किमी का सफर कर एकेडमी जाना पड़ता था। एक साक्षात्कार में तिलक ने बताया कि 2022 में उन्हें रैबडोमायोलिसिस नामक दुर्लभ बीमारी हो गई थी, जिसमें अत्यधिक दबाव के कारण मांसपेशियां टूटने लगती हैं। मुम्बई इंडियन के मैनेजमेंट ने उनका इलाज कराया। फिर 2026 में ही विजय हजारे ट्रॉफी खेलते हुए उन्हें टेस्टिकल टॉर्शन की समस्या हो गई, जिसकी बाद में सर्जरी करानी पड़ी।

शुरुआत- पहले जूनियर टीम में रिजेक्ट हुए, फिर विश्वकप टीम में बनाई अपनी जगह

महज 12 साल की उम्र में तिलक ने हैदराबाद की अंडर-14 टीम से क्रिकेट कॅरिअर की शुरुआत की। हालांकि इसके चयन में भी उन्हें शुरुआती रिजेक्शन झेलने पड़े थे। 2018 में उन्होंने हैदराबाद के लिए रणजी ट्राफी डेब्यू किया। फिर 2020 में उन्हें साउथ अफ्रीका में हुए अंडर-19 विश्व कप की भारतीय टीम में चुना गया। हालांकि वे 3 पारियों में 86 रन ही बना पाए

सफलता – एमआई ने 1.70 करोड़ में खरीदा, पाकिस्तान के खिलाफ पारी से चमके

2022 तिलक का टर्निंग पॉइंट था, जब मुम्बई इंडियन ने उन्हें 1.70 करोड़ रुपए में खरीदा। 2023 में वे सीनियर भारतीय टीम में चुने गए और इसी साल उन्होंने टी20 और वनडे फॉर्मेट में डेब्यू किया। 2025 के एशिया कप फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 69 रनों की मैच विनिंग पारी ने उन्हें क्रिकेट जगत में प्रसिद्ध कर दिया। अब तिलक अपनी पुरानी एकेडमी में गरीब बच्चों की आर्थिक मदद भी करते हैं।

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नई दिल्ली19 मिनट पहले

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तिलक वर्मा, भारतीय क्रिकेटर।- फाइल फोटो

बाएं हाथ के विस्फोटक बल्लेबाज तिलक वर्मा आज भले ही प्रशंसकों के दिल में जगह बना चुके हों, लेकिन उनका करिअर गंभीर चुनौतियों से भरा रहा है। फिलहाल वे त्रिकोणीय सीरीज के लिए भारत-ए टीम के कप्तान बनाए गए हैं। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी.

हैदराबाद में 8 नवंबर 2002 को जन्मे तिलक वर्मा का बचपन गहरी आर्थिक तंगी में बीता। उनके पिता नंबूरी नागराजू तब एक मामूली इलेक्ट्रिशियन थे, जो छोटे-मोटे रिपेयरिंग वर्क करके परिवार का पेट पालते थे।

माता-पिता के साथ तिलक और उनके बड़े भाई तरुण एक छोटे-से किराए के मकान में रहते थे। पिता की इच्छा थी कि तिलक बड़े होकर डॉक्टर बनें, लेकिन बचपन से ही तिलक का मन क्रिकेट में रम गया।

संघर्ष – बैट खरीदने के पैसे नहीं थे, रोजाना 40 किमी का सफर कर जाते थे एकेडमी

एक वक्त ऐसा था जब तिलक के पास बैट और अन्य गियर खरीदने के पैसे भी नहीं थे। तिलक की बैटिंग स्टाइल से प्रभावित होकर स्थानीय कोच सलाम बायश ने उन्हें कोचिंग का सुझाव दिया, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते परिवार ने मना कर दिया। बायश ने उन्हें न सिर्फ मुफ्त कोचिंग दी, बल्कि उनके किट और अन्य उपकरणों का खर्च भी उठाया। तिलक को रोजाना 40 किमी का सफर कर एकेडमी जाना पड़ता था। एक साक्षात्कार में तिलक ने बताया कि 2022 में उन्हें रैबडोमायोलिसिस नामक दुर्लभ बीमारी हो गई थी, जिसमें अत्यधिक दबाव के कारण मांसपेशियां टूटने लगती हैं। मुम्बई इंडियन के मैनेजमेंट ने उनका इलाज कराया। फिर 2026 में ही विजय हजारे ट्रॉफी खेलते हुए उन्हें टेस्टिकल टॉर्शन की समस्या हो गई, जिसकी बाद में सर्जरी करानी पड़ी।

शुरुआत- पहले जूनियर टीम में रिजेक्ट हुए, फिर विश्वकप टीम में बनाई अपनी जगह

महज 12 साल की उम्र में तिलक ने हैदराबाद की अंडर-14 टीम से क्रिकेट कॅरिअर की शुरुआत की। हालांकि इसके चयन में भी उन्हें शुरुआती रिजेक्शन झेलने पड़े थे। 2018 में उन्होंने हैदराबाद के लिए रणजी ट्राफी डेब्यू किया। फिर 2020 में उन्हें साउथ अफ्रीका में हुए अंडर-19 विश्व कप की भारतीय टीम में चुना गया। हालांकि वे 3 पारियों में 86 रन ही बना पाए

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