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GDP, Rupee & Oil Prices Impact

GDP, Rupee & Oil Prices Impact

नई दिल्ली13 मिनट पहले

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फरवरी में भारत की रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंच गई थी।

पश्चिम एशिया में तनाव से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत में रिटेल महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स (0.60%) तक बढ़ सकती है।

इस बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जा करना है। उनके इस बयान के बाद ब्रेंट क्रूड आज 116 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंच गया। केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है।

भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है, ऐसे में वहां के हालात बिगड़ने से भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट, GDP ग्रोथ और रुपए की वैल्यू पर भी दबाव बढ़ेगा।

फरवरी में भारत की रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंच गई थी।

फरवरी में भारत की रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंच गई थी।

तेल कंपनियों पर बोझ बढ़ा, कीमतें जल्द बढ़ सकती हैं

केयरएज ग्लोबल की CEO रेवती कस्तुरे ने कहा कि FY2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमतों में हर 10 डॉलर बढ़ोतरी से महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ सकती है। इसकी मुख्य वजह कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) बास्केट में फ्यूल का वेटेज ज्यादा होना है।

शुरुआत में तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) इस बोझ को खुद झेल सकती हैं, लेकिन अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डालना मजबूरी हो जाएगा।

ट्रम्प ने कहा- ईरान का तेल छीनना मेरी पसंदीदा चीज

ट्रम्प ने कहा कि ईरान का तेल छीनना उनकी पसंदीदा चीज है। उन्होंने कहा कि उनके पास कई विकल्प हैं और वे खार्ग आइलैंड को आसानी से अपने कंट्रोल में ले सकते हैं। यह ईरान का प्रमुख तेल एक्सपोर्ट हब है, जहां से देश का करीब 90% तेल निर्यात होता है।

रुपए और करंट अकाउंट डेफिसिट पर भी असर

  • केयरएज की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़त से भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट भी 0.3% से 0.4% तक बढ़ सकता है।
  • चुनौतियों के बावजूद FY2026-27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.5%-6.8% रहने का अनुमान है। मजबूत घरेलू मांग से इकोनॉमी को सहारा मिल रहा है।
  • वैश्विक अनिश्चितता में निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में अमेरिकी डॉलर की ओर बढ़ रहे हैं। इससे डॉलर मजबूत और रुपए पर दबाव बढ़ रहा है।
  • अगर भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट और बढ़ता है, तो रुपए की वैल्यू में और गिरावट आ सकती है। डॉलर के मुकाबले रुपया 95.58 के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा।
  • भारत को मिलने वाले कुल रेमिटेंस (विदेशों से घर भेजा जाने वाला पैसा) का एक-तिहाई हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। अगर युद्ध लंबा चला तो लेबर मार्केट प्रभावित होगा।
  • जिससे रेमिटेंस कम हो सकता है। FY2024-25 में इस सेक्टर से 64 बिलियन डॉलर का निर्यात हुआ, जो शिपिंग देरी और तनाव से प्रभावित हो सकता है।
  • महंगे कच्चे तेल का असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। एलएनजी (LNG) की कीमतें बढ़ने से फर्टिलाइजर (खाद) बनाने की लागत भी बढ़ेगी।
  • भारत अपनी खाद जरूरतों का 25% पश्चिम एशिया से आयात करता है, इसलिए सरकार को इसे सस्ता रखने के लिए फर्टिलाइजर सब्सिडी का बजट बढ़ाना पड़ सकता है।

तेल 120 डॉलर के पार गया तो वैश्विक मंदी आएगी

मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर तेल की कीमतें 120 डॉलर के ऊपर जाती हैं, तो दुनिया भर में मंदी आने का खतरा बढ़ जाएगा। ऊंची कीमतों की वजह से डिमांड कम होगी और महंगाई बेकाबू हो जाएगी।

भारत के कुल तेल आयात का 51% खाड़ी देशों से आता है

भारत कच्चे तेल की जरूरतों के लिए सबसे ज्यादा पश्चिम एशिया पर निर्भर है। FY2025-26 के पहले 10 महीनों में भारत के कुल कच्चे तेल और पेट्रोलियम आयात में 51% हिस्सा इसी क्षेत्र का था। कच्चे तेल का भाव बढ़ने से भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है।

होर्मुज रूट प्रभावित होने से तेल की कीमतों में आई तेजी

ईरान ने होर्मुज रूट को लगभग बंद कर दिया है। दुनिया का करीब 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से न केवल तेल, बल्कि एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक की कीमतों में भी भारी तेजी आने लगी है।

ब्रिटेन और यूरोप में भी दवाओं और जरूरी चीजों की कमी होने का खतरा है, क्योंकि शिपिंग का खर्च कई गुना बढ़ गया है।

मार्च में 60% महंगा हुआ क्रूड, 36 साल का रिकॉर्ड टूटा

मार्च में कच्चे तेल की कीमतों में अब तक करीब 60% का उछाल आया है, जो 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद एक महीने में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। फरवरी के आखिरी में ब्रेंट क्रूड 72.48 डॉलर पर बंद हुआ था, जो अब 116 डॉलर के पार पहुंच गया है।

इससे पहले सितंबर 1990 में सद्दाम हुसैन के कुवैत पर हमले के समय तेल की कीमतें एक महीने में 46% बढ़ी थीं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर युद्ध जल्द खत्म नहीं हुआ, तो कीमतें 150 से 200 डॉलर तक भी जा सकती हैं।

ये खबर भी पढ़ें…

रुपया डॉलर के मुकाबले सबसे कमजोर: पहली बार 1 डॉलर ₹95.22 का हुआ; मोबाइल, सोना, तेल, विदेशी सामान खरीदना महंगा

ईरान जंग की वजह से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज यानी 30 मार्च को पहली बार 95 के पार पहुंच गया। कारोबार के दौरान ये 95.22 के सबसे निचले स्तर पर गिर गया।

हालांकि बाद में ये थोड़ा संभला और कारोबार खत्म होने पर 94.78 पर बंद हुआ। यह पिछले बंद भाव 94.85 के मुकाबले डॉलर के सामने 7 पैसे की मामूली मजबूती है। पूरी खबर पढ़ें…

वित्त मंत्रालय ने माना इकोनॉमी की रफ्तार धीमी: महंगे तेल-लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन बिगड़ने का असर; महंगाई बढ़ने के संकेत

वित्त मंत्रालय ने मार्च 2026 की अपनी मंथली इकोनॉमिक रिव्यू रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार अब धीमी पड़ गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में चल रहा तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं।

मंत्रालय ने माना है कि इन बाहरी झटकों की वजह से देश के अंदर इनपुट कॉस्ट यानी प्रोडक्शन की लागत बढ़ गई है, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर दबाव दिख रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

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फरवरी में भारत की रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंच गई थी।

पश्चिम एशिया में तनाव से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। रेटिंग एजेंसी केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल बढ़ोतरी से भारत में रिटेल महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स (0.60%) तक बढ़ सकती है।

इस बीच डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ईरान के तेल संसाधनों पर कब्जा करना है। उनके इस बयान के बाद ब्रेंट क्रूड आज 116 डॉलर प्रति बैरल पार पहुंच गया। केयरएज ग्लोबल के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने का असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है।

भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है, ऐसे में वहां के हालात बिगड़ने से भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट, GDP ग्रोथ और रुपए की वैल्यू पर भी दबाव बढ़ेगा।

फरवरी में भारत की रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंच गई थी।

फरवरी में भारत की रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंच गई थी।

तेल कंपनियों पर बोझ बढ़ा, कीमतें जल्द बढ़ सकती हैं

केयरएज ग्लोबल की CEO रेवती कस्तुरे ने कहा कि FY2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमतों में हर 10 डॉलर बढ़ोतरी से महंगाई 60 बेसिस पॉइंट्स तक बढ़ सकती है। इसकी मुख्य वजह कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) बास्केट में फ्यूल का वेटेज ज्यादा होना है।

शुरुआत में तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) इस बोझ को खुद झेल सकती हैं, लेकिन अगर कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहीं, तो इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डालना मजबूरी हो जाएगा।

ट्रम्प ने कहा- ईरान का तेल छीनना मेरी पसंदीदा चीज

ट्रम्प ने कहा कि ईरान का तेल छीनना उनकी पसंदीदा चीज है। उन्होंने कहा कि उनके पास कई विकल्प हैं और वे खार्ग आइलैंड को आसानी से अपने कंट्रोल में ले सकते हैं। यह ईरान का प्रमुख तेल एक्सपोर्ट हब है, जहां से देश का करीब 90% तेल निर्यात होता है।

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  • केयरएज की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर की बढ़त से भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट भी 0.3% से 0.4% तक बढ़ सकता है।
  • चुनौतियों के बावजूद FY2026-27 में भारत की GDP ग्रोथ 6.5%-6.8% रहने का अनुमान है। मजबूत घरेलू मांग से इकोनॉमी को सहारा मिल रहा है।
  • वैश्विक अनिश्चितता में निवेशक सुरक्षित विकल्प के रूप में अमेरिकी डॉलर की ओर बढ़ रहे हैं। इससे डॉलर मजबूत और रुपए पर दबाव बढ़ रहा है।
  • अगर भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट और बढ़ता है, तो रुपए की वैल्यू में और गिरावट आ सकती है। डॉलर के मुकाबले रुपया 95.58 के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा।
  • भारत को मिलने वाले कुल रेमिटेंस (विदेशों से घर भेजा जाने वाला पैसा) का एक-तिहाई हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। अगर युद्ध लंबा चला तो लेबर मार्केट प्रभावित होगा।
  • जिससे रेमिटेंस कम हो सकता है। FY2024-25 में इस सेक्टर से 64 बिलियन डॉलर का निर्यात हुआ, जो शिपिंग देरी और तनाव से प्रभावित हो सकता है।
  • महंगे कच्चे तेल का असर केवल पेट्रोल-डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। एलएनजी (LNG) की कीमतें बढ़ने से फर्टिलाइजर (खाद) बनाने की लागत भी बढ़ेगी।
  • भारत अपनी खाद जरूरतों का 25% पश्चिम एशिया से आयात करता है, इसलिए सरकार को इसे सस्ता रखने के लिए फर्टिलाइजर सब्सिडी का बजट बढ़ाना पड़ सकता है।

तेल 120 डॉलर के पार गया तो वैश्विक मंदी आएगी

मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर तेल की कीमतें 120 डॉलर के ऊपर जाती हैं, तो दुनिया भर में मंदी आने का खतरा बढ़ जाएगा। ऊंची कीमतों की वजह से डिमांड कम होगी और महंगाई बेकाबू हो जाएगी।

भारत के कुल तेल आयात का 51% खाड़ी देशों से आता है

भारत कच्चे तेल की जरूरतों के लिए सबसे ज्यादा पश्चिम एशिया पर निर्भर है। FY2025-26 के पहले 10 महीनों में भारत के कुल कच्चे तेल और पेट्रोलियम आयात में 51% हिस्सा इसी क्षेत्र का था। कच्चे तेल का भाव बढ़ने से भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है।

होर्मुज रूट प्रभावित होने से तेल की कीमतों में आई तेजी

ईरान ने होर्मुज रूट को लगभग बंद कर दिया है। दुनिया का करीब 20% तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता है। इसके बंद होने से न केवल तेल, बल्कि एल्युमीनियम, फर्टिलाइजर और प्लास्टिक की कीमतों में भी भारी तेजी आने लगी है।

ब्रिटेन और यूरोप में भी दवाओं और जरूरी चीजों की कमी होने का खतरा है, क्योंकि शिपिंग का खर्च कई गुना बढ़ गया है।

मार्च में 60% महंगा हुआ क्रूड, 36 साल का रिकॉर्ड टूटा

मार्च में कच्चे तेल की कीमतों में अब तक करीब 60% का उछाल आया है, जो 1990 के खाड़ी युद्ध के बाद एक महीने में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। फरवरी के आखिरी में ब्रेंट क्रूड 72.48 डॉलर पर बंद हुआ था, जो अब 116 डॉलर के पार पहुंच गया है।

इससे पहले सितंबर 1990 में सद्दाम हुसैन के कुवैत पर हमले के समय तेल की कीमतें एक महीने में 46% बढ़ी थीं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर युद्ध जल्द खत्म नहीं हुआ, तो कीमतें 150 से 200 डॉलर तक भी जा सकती हैं।

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रुपया डॉलर के मुकाबले सबसे कमजोर: पहली बार 1 डॉलर ₹95.22 का हुआ; मोबाइल, सोना, तेल, विदेशी सामान खरीदना महंगा

ईरान जंग की वजह से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज यानी 30 मार्च को पहली बार 95 के पार पहुंच गया। कारोबार के दौरान ये 95.22 के सबसे निचले स्तर पर गिर गया।

हालांकि बाद में ये थोड़ा संभला और कारोबार खत्म होने पर 94.78 पर बंद हुआ। यह पिछले बंद भाव 94.85 के मुकाबले डॉलर के सामने 7 पैसे की मामूली मजबूती है। पूरी खबर पढ़ें…

वित्त मंत्रालय ने माना इकोनॉमी की रफ्तार धीमी: महंगे तेल-लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन बिगड़ने का असर; महंगाई बढ़ने के संकेत

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मंत्रालय ने माना है कि इन बाहरी झटकों की वजह से देश के अंदर इनपुट कॉस्ट यानी प्रोडक्शन की लागत बढ़ गई है, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर दबाव दिख रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

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