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Germany, Spain, Italy Hit Hard; France records around 1,000 additional deaths

Germany, Spain, Italy Hit Hard; France records around 1,000 additional deaths
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पेरिस, लंदन, मैड्रिड15 मिनट पहले

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यूरोप इन दिनों रिकॉर्डतोड़ हीटवेव की चपेट में है। फ्रांस में भीषण गर्मी से करीब 1,000 अतिरिक्त लोगों की मौत हुई है। हेल्थ एजेंसी ने रविवार को बताया कि ये मौतें 24 जून से 27 जून के बीच हुईं। अतिरिक्त मौतों का मतलब है कि पिछले कुछ साल में हुई औसत मौतों की तुलना में इस बार करीब 1000 लोग ज्यादा मरे हैं। हालांकि सरकार ने न ही पिछली बार और न ही इस बार का कोई सटीक आंकड़ा दिया है।

अधिकारियों के मुताबिक मरने वालों में 85% बुजुर्ग हैं। सबसे अधिक मौतें घरों में हुईं। खासकर राजधानी पेरिस और उसके आसपास के इलाकों वाले इलाके में ऐसे मामले ज्यादा सामने आए। वहीं, जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन, डेनमार्क, इटली और स्विट्जरलैंड समेत 16 देशों में तापमान ने दशकों पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

न्यूज एजेंसी AFP के अनुमान के मुताबिक, रविवार को यूरोप के करीब 19.1 करोड़ लोगों को 35 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान का सामना करना पड़ा। कहीं सड़कें पिघल रही हैं, कहीं स्कूल बंद करने पड़े हैं, तो कहीं जंगलों में भीषण आग भड़क उठी है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोप का तापमान दुनिया के औसत तापमान की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। भविष्य में ऐसी गर्मी की लहरें और अधिक बार आएंगी, ज्यादा समय तक रहेंगी।

फ्रांस के शैम्बैरी शहर के एक बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर में सुबह दुकान खुलते ही एयर कंडीशनर और पंखे खरीदने के लिए ग्राहकों में भगदड़ और धक्का-मुक्की देखने को मिली।

फ्रांस के शैम्बैरी शहर के एक बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर में सुबह दुकान खुलते ही एयर कंडीशनर और पंखे खरीदने के लिए ग्राहकों में भगदड़ और धक्का-मुक्की देखने को मिली।

पेरिस के एक सुपरमार्केट में इतनी ज्यादा में खरीदार पहुंचे कि पंखे, कूलर का स्टोर कुछ ही घंटे में खाली हो गया।

पेरिस के एक सुपरमार्केट में इतनी ज्यादा में खरीदार पहुंचे कि पंखे, कूलर का स्टोर कुछ ही घंटे में खाली हो गया।

यूरोपीय देशों में गर्मी की हालत

ब्रिटेन: जून में गर्मी का 50 साल पुराना रिकॉर्ड 3 बार टूटा

ब्रिटेन के इतिहास में पहली बार लगातार तीन दिनों तक ‘रेड वार्निंग’ जारी करनी पड़ी है। ब्रिटेन में जून के महीने का 50 साल पुराना पिछला रिकॉर्ड (35.6°C) इस हफ्ते लगातार तीन दिन टूटा है।

दक्षिणी इंग्लैंड में तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो इस जून का नया रिकॉर्ड है। ब्रिटेन के इतिहास का सबसे अधिक तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस है, जो जुलाई 2022 में दर्ज किया गया था। माना जा रहा है कि यह इस साल टूट सकता है।

गर्मी के कारण बिजली की मांग 45 साल में सबसे ज्यादा हो गई है। हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस की तकलीफ के मरीजों की संख्या अचानक बहुत बढ़ गई है। इसके कारण कई बड़े अस्पतालों को इमरजेंसी घोषित करना पड़ा है।

पूरे ब्रिटेन में 1,000 से अधिक स्कूलों को बंद करना पड़ा है। कंक्रीट और पुरानी तकनीक से बनी क्लासरूम की इमारतें इतनी गर्म हो गई हैं कि बच्चों और शिक्षकों का वहां बैठना असंभव हो गया है।

अत्यधिक तापमान के कारण लोहे की रेलवे पटरियां फैल रही हैं और उनके मुड़ने का खतरा बढ़ गया है। इसके कारण ट्रेनों की रफ्तार पर सख्त स्पीड लिमिट (60 मील प्रति घंटा) लगा दी गई है।

ब्रिटेन के कई इलाके में पाइप के जरिए बगीचों और कारों पर पानी डालने (होजपाइप) पर रोक लगा दी गई है।

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में एक महिला गर्मी से राहत पाने के लिए इलेक्ट्रिक पंखे का इस्तेमाल करती हुई।

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में एक महिला गर्मी से राहत पाने के लिए इलेक्ट्रिक पंखे का इस्तेमाल करती हुई।

स्पेन: यूरोप में सबसे ज्यादा गर्मी, 45 डिग्री के पार पहुंचा पारा

स्पेन इस समय पूरे यूरोप में सबसे ज्यादा तप रहा है। स्पेन के एंडुजार में तापमान 45.1 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है। वहीं उत्तरी शहर बिलबाओ में जून का सर्वकालिक रिकॉर्ड टूटते हुए पारा 42.7°C दर्ज किया गया। पिछले 4 दिनों में गर्मी के कारण देश में 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

अत्यधिक सूखे और भीषण गर्मी के कारण स्पेन के जंगलों में भयंकर आग भड़क उठी है। दमकल विभाग चौबीसों घंटे आग बुझाने में जुटा है, और कई कस्बों को खाली कराना पड़ा है।

जर्मनी: 41.5 डिग्री तापमान- इतिहास में सबसे ज्यादा गर्मी

पूर्वी जर्मनी के ड्रैविट्ज में शनिवार को तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह जर्मनी के इतिहास का अब तक का सबसे अधिक तापमान है। वहीं, कुबशुट्स शहर में रात का तापमान 29.4 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गया। करीब 150 साल पहले रिकॉर्ड शुरू होने के बाद यह देश की सबसे गर्म रात रही।

गर्मी इतनी भीषण है कि जर्मनी में कई हाइवे की सड़कें पिघलने और टूटने लगी हैं, जिससे उन्हें बंद करना पड़ा है। जर्मनी में कई स्पोर्ट्स इवेंट्स, म्यूजिक फेस्टिवल्स और कॉन्सर्ट्स को सुरक्षा के लिहाज से रद्द या स्थगित करना पड़ा है।

रिकॉर्ड गर्मी के बीच जर्मनी के टिम्मेनडॉर्फर स्ट्रैंड बीच पर उमड़ी लोगों की भीड़।

रिकॉर्ड गर्मी के बीच जर्मनी के टिम्मेनडॉर्फर स्ट्रैंड बीच पर उमड़ी लोगों की भीड़।

डेनमार्क: ठंडे देश में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस पहुंचा

जर्मनी का पड़ोसी डेनमार्क ठंडे देश के रूप में जाना जाता है। वहां भी इस बार ऐसी गर्मी पड़ी है जो इतिहास में कभी नहीं देखी गई। शनिवार को तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। डेनमार्क में 1874 से रिकॉर्ड रखना शुरू हुआ था। इसके बाद से यह सबसे अधिकतम तापमान है। इससे पहले अगस्त 1975 में सबसे ज्यादा 36.4°C गर्मी पड़ी थी।

डेनमार्क की सड़कें पिघलने लगी हैं। इस वजह से वहां भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है ताकि सड़कों को उखड़ने से बचाया जा सके।

गर्मी से बचने के लिए कोपेनहेगन के मशहूर अमागर बीच और देश के दूसरे तटीय इलाकों में लाखों की संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक उमड़ पड़े। लेकिन स्थिति यह थी कि ठंडे पानी में नहाने और गर्मी से बचने के लिए बीच पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी।

फ्रांस: इतिहास का सबसे गर्म दिन, तापमान 44.3 डिग्री पहुंचा

फ्रांस के पिसोस शहर में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर औसत तापमान 30°C को पार कर गया, जो रिकॉर्ड में फ्रांस का सबसे गर्म दिन रहा। यहां रात का तापमान भी औसतन 22°C से नीचे नहीं गया। गर्मी से पटरियों के फैलने के कारण ट्रेनें रोकनी पड़ी हैं और बिजली ग्रिड ठप होने से 50,000 घर बिना बिजली के रह रहे हैं।

फ्रांस में सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर पाबंदी लगा दी है। भीषण गर्मी के कारण 1,350 से ज्यादा स्कूल बंद कर दिए गए हैं। गर्मी के कारण सरकार ने ‘फेत द ला म्यूजिक’ नामक वार्षिक म्यूजिक फैसटीवल के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर प्रतिबंध लगा दिया।

पेरिस में हीटवेव (लू) के दौरान एफिल टॉवर के पास ट्रोकाडेरो स्क्वायर पर एक महिला धूप से बचने की कोशिश करती हुई।

पेरिस में हीटवेव (लू) के दौरान एफिल टॉवर के पास ट्रोकाडेरो स्क्वायर पर एक महिला धूप से बचने की कोशिश करती हुई।

पेरिस के प्लेस डु ट्रोकाडेरो चौक पर भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए फुहार वाले फाउंटेन के नीचे खड़े लोग।

पेरिस के प्लेस डु ट्रोकाडेरो चौक पर भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए फुहार वाले फाउंटेन के नीचे खड़े लोग।

इटली: 18 शहरों में रेड अलर्ट, पो नदी में सूखे का खतरा

इटली में गर्मी लगातार बढ़ रही है। सरकार ने रोम, मिलान, वेनिस, फ्लोरेंस और ट्यूरिन समेत 18 शहरों में सबसे ऊंचा रेड हीट अलर्ट जारी किया है।

भीषण गर्मी के कारण देश की सबसे लंबी पो नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। इस वजह से समुद्र का खारा पानी नदी में घुसने लगा है, जिससे खेती और पेयजल पर खतरा बढ़ गया है।

सरकार ने कई इलाकों में लोगों को दोपहर के समय बाहर न निकलने की सलाह दी गई है और कामकाज के समय में भी बदलाव किए गए हैं।

हीटवेव के बीच रोम में कोलोसियम के पास पानी की फुहार के नीचे लोग गर्मी से बचने की कोशिश करते हुए।

हीटवेव के बीच रोम में कोलोसियम के पास पानी की फुहार के नीचे लोग गर्मी से बचने की कोशिश करते हुए।

चेक रिपब्लिक: 40 डिग्री का ऐतिहासिक आंकड़ा पार

हीटवेव ने चेक रिपब्लिक को भी नहीं बख्शा है। शनिवार को देश के डोक्सानी शहर में तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले देश का राष्ट्रीय ऑल-टाइम रिकॉर्ड 40.4°C था, जो लगभग 14 साल पहले 20 अगस्त 2012 को डोब्रिचोवाइस शहर में दर्ज किया गया था।

मौसम विभाग ने पूरे देश के लिए उच्चतम स्तर का रेड अलर्ट जारी कर रखा है और लोगों को दोपहर में घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। स्विट्जरलैंड: जून का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड

स्विट्जरलैंड के बासेल शहर में तापमान 38.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह देश के इतिहास में जून महीने का सबसे अधिक तापमान है। भीषण गर्मी की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस साल ग्लेशियरों का बर्फ नुकसान रिकॉर्ड समय से पहले शुरू हो गया है।

यूरोप की भीषण गर्मी से स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।

यूरोप की भीषण गर्मी से स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।

पोलैंड: 100 साल पुराना तापमान रिकॉर्ड टूटने की आशंका

पोलैंड में भी रिकॉर्डतोड़ गर्मी पड़ रही है। मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने का अनुमान जताया है। अगर ऐसा हुआ तो 1921 में बना 40.2°C का राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूट जाएगा। सरकार ने स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है और लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। कई शहरों में कूलिंग सेंटर खोले गए हैं।

पुर्तगाल: 40 डिग्री के पार तापमान, जंगलों में आग का खतरा

पुर्तगाल में भी तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है। देश के कई इलाकों में रेड अलर्ट जारी है। भीषण गर्मी और सूखे के कारण जंगलों में आग का खतरा काफी बढ़ गया है। दमकल विभाग को हाई अलर्ट पर रखा गया है और लोगों से जंगलों में आग जलाने या बारबेक्यू करने से बचने को कहा गया है।

40°C भारत में सामान्य क्यों है? यूरोप में आपदा कैसे बन जाता है?

जब भारत में तापमान 43°C पहुंचता है, तो लोग इसे मई-जून की आम गर्मी मानकर सिर पर गमछा ओढ़ते हैं और आम पना पीते हुए काम पर निकल जाते हैं। लेकिन जब यही तापमान यूरोप में 40°C पार करता है, तो वहां रेड अलर्ट जारी हो जाता है, ट्रेनें रुक जाती हैं और इसे एक ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित कर दिया जाता है।

इसके पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि ज्योग्राफी, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंसानी शरीर की आदत का एक पूरा विज्ञान है।

i. इन्फ्रास्ट्रक्चर का फर्क

यूरोप: घर और इमारतें गर्मी को अंदर रोकने के लिए बनाए जाते हैं, ताकि सर्दियों में कम हीटिंग की जरूरत पड़े। जब वहां गर्मी पड़ती है, तो ये घर ‘ओवन’ (तंदूर) की तरह काम करने लगते हैं। गर्मी अंदर तो आ जाती है, पर बाहर नहीं निकल पाती।

भारत: घर इस तरह बनाए जाते हैं कि हवा का क्रॉस-वेंटिलेशन हो सके। ऊंची छतें, संगमरमर या टाइल्स के फर्श और खुली खिड़कियां गर्मी को रोकने के बजाय उसे बाहर निकालने में मदद करती हैं।

ii. इंसानी शरीर की आदत

भारत: हमारे शरीर को बचपन से ही हाई टेम्परेचर झेलने की आदत होती है। भारत के लोगों का ‘थर्मोरेगुलेशन सिस्टम’ (शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता) अच्छा है। भारत के लोगों का शरीर ज्यादा गर्मी में पसीना बहाने लगता है जिससे शरीर को तुरंत ठंडा हो जाता है।

यूरोप: यूरोप के लोगों का शरीर कम तापमान का आदी होता है। जब अचानक तापमान 40°C पहुंचता है, तो उनका शरीर इस झटके को बर्दाश्त नहीं कर पाता। इससे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और ऑर्गन फेलियर का खतरा बहुत तेजी से बढ़ता है।

iii. ह्यूमिडिटी का फर्क

गर्मी सिर्फ तापमान से नहीं, बल्कि हवा में मौजूद नमी से तय होती है। भारत में मई और जून की सूखी गर्मी में पसीना जल्दी सूख जाता है, जिससे शरीर का तापमान कम होने में मदद मिलती है।

यूरोप में जब गर्मी पड़ती है, तो हवा में नमी बहुत ज्यादा होती है। उमस के कारण शरीर का पसीना सूख नहीं पाता, जिससे शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। 40°C तापमान वहां महसूस 45°C या उससे ज्यादा जैसा होता है।

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फ्रांस में गर्मी से 58 लोगों की मौत:न्यूक्लियर पावर प्लांट बंद करना पड़ा; हीटवेव की चपेट में 26 यूरोपीय देश, इटली-ब्रिटेन में रेड अलर्ट

फ्रांस में गर्मी के कारण 58 लोगों की मौत हो गई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक लोग गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों, झीलों और नहरों में नहाने जा रहे हैं। इसके चलते पिछले कुछ दिनों में 40 लोगों की डूबकर मौत हो गई है। इनमें ज्यादातर युवा शामिल हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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पेरिस, लंदन, मैड्रिड15 मिनट पहले

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यूरोप इन दिनों रिकॉर्डतोड़ हीटवेव की चपेट में है। फ्रांस में भीषण गर्मी से करीब 1,000 अतिरिक्त लोगों की मौत हुई है। हेल्थ एजेंसी ने रविवार को बताया कि ये मौतें 24 जून से 27 जून के बीच हुईं। अतिरिक्त मौतों का मतलब है कि पिछले कुछ साल में हुई औसत मौतों की तुलना में इस बार करीब 1000 लोग ज्यादा मरे हैं। हालांकि सरकार ने न ही पिछली बार और न ही इस बार का कोई सटीक आंकड़ा दिया है।

अधिकारियों के मुताबिक मरने वालों में 85% बुजुर्ग हैं। सबसे अधिक मौतें घरों में हुईं। खासकर राजधानी पेरिस और उसके आसपास के इलाकों वाले इलाके में ऐसे मामले ज्यादा सामने आए। वहीं, जर्मनी, स्पेन, ब्रिटेन, डेनमार्क, इटली और स्विट्जरलैंड समेत 16 देशों में तापमान ने दशकों पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

न्यूज एजेंसी AFP के अनुमान के मुताबिक, रविवार को यूरोप के करीब 19.1 करोड़ लोगों को 35 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान का सामना करना पड़ा। कहीं सड़कें पिघल रही हैं, कहीं स्कूल बंद करने पड़े हैं, तो कहीं जंगलों में भीषण आग भड़क उठी है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोप का तापमान दुनिया के औसत तापमान की तुलना में ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। भविष्य में ऐसी गर्मी की लहरें और अधिक बार आएंगी, ज्यादा समय तक रहेंगी।

फ्रांस के शैम्बैरी शहर के एक बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर में सुबह दुकान खुलते ही एयर कंडीशनर और पंखे खरीदने के लिए ग्राहकों में भगदड़ और धक्का-मुक्की देखने को मिली।

फ्रांस के शैम्बैरी शहर के एक बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर में सुबह दुकान खुलते ही एयर कंडीशनर और पंखे खरीदने के लिए ग्राहकों में भगदड़ और धक्का-मुक्की देखने को मिली।

पेरिस के एक सुपरमार्केट में इतनी ज्यादा में खरीदार पहुंचे कि पंखे, कूलर का स्टोर कुछ ही घंटे में खाली हो गया।

पेरिस के एक सुपरमार्केट में इतनी ज्यादा में खरीदार पहुंचे कि पंखे, कूलर का स्टोर कुछ ही घंटे में खाली हो गया।

यूरोपीय देशों में गर्मी की हालत

ब्रिटेन: जून में गर्मी का 50 साल पुराना रिकॉर्ड 3 बार टूटा

ब्रिटेन के इतिहास में पहली बार लगातार तीन दिनों तक ‘रेड वार्निंग’ जारी करनी पड़ी है। ब्रिटेन में जून के महीने का 50 साल पुराना पिछला रिकॉर्ड (35.6°C) इस हफ्ते लगातार तीन दिन टूटा है।

दक्षिणी इंग्लैंड में तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो इस जून का नया रिकॉर्ड है। ब्रिटेन के इतिहास का सबसे अधिक तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस है, जो जुलाई 2022 में दर्ज किया गया था। माना जा रहा है कि यह इस साल टूट सकता है।

गर्मी के कारण बिजली की मांग 45 साल में सबसे ज्यादा हो गई है। हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस की तकलीफ के मरीजों की संख्या अचानक बहुत बढ़ गई है। इसके कारण कई बड़े अस्पतालों को इमरजेंसी घोषित करना पड़ा है।

पूरे ब्रिटेन में 1,000 से अधिक स्कूलों को बंद करना पड़ा है। कंक्रीट और पुरानी तकनीक से बनी क्लासरूम की इमारतें इतनी गर्म हो गई हैं कि बच्चों और शिक्षकों का वहां बैठना असंभव हो गया है।

अत्यधिक तापमान के कारण लोहे की रेलवे पटरियां फैल रही हैं और उनके मुड़ने का खतरा बढ़ गया है। इसके कारण ट्रेनों की रफ्तार पर सख्त स्पीड लिमिट (60 मील प्रति घंटा) लगा दी गई है।

ब्रिटेन के कई इलाके में पाइप के जरिए बगीचों और कारों पर पानी डालने (होजपाइप) पर रोक लगा दी गई है।

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में एक महिला गर्मी से राहत पाने के लिए इलेक्ट्रिक पंखे का इस्तेमाल करती हुई।

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में एक महिला गर्मी से राहत पाने के लिए इलेक्ट्रिक पंखे का इस्तेमाल करती हुई।

स्पेन: यूरोप में सबसे ज्यादा गर्मी, 45 डिग्री के पार पहुंचा पारा

स्पेन इस समय पूरे यूरोप में सबसे ज्यादा तप रहा है। स्पेन के एंडुजार में तापमान 45.1 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है। वहीं उत्तरी शहर बिलबाओ में जून का सर्वकालिक रिकॉर्ड टूटते हुए पारा 42.7°C दर्ज किया गया। पिछले 4 दिनों में गर्मी के कारण देश में 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।

अत्यधिक सूखे और भीषण गर्मी के कारण स्पेन के जंगलों में भयंकर आग भड़क उठी है। दमकल विभाग चौबीसों घंटे आग बुझाने में जुटा है, और कई कस्बों को खाली कराना पड़ा है।

जर्मनी: 41.5 डिग्री तापमान- इतिहास में सबसे ज्यादा गर्मी

पूर्वी जर्मनी के ड्रैविट्ज में शनिवार को तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह जर्मनी के इतिहास का अब तक का सबसे अधिक तापमान है। वहीं, कुबशुट्स शहर में रात का तापमान 29.4 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गया। करीब 150 साल पहले रिकॉर्ड शुरू होने के बाद यह देश की सबसे गर्म रात रही।

गर्मी इतनी भीषण है कि जर्मनी में कई हाइवे की सड़कें पिघलने और टूटने लगी हैं, जिससे उन्हें बंद करना पड़ा है। जर्मनी में कई स्पोर्ट्स इवेंट्स, म्यूजिक फेस्टिवल्स और कॉन्सर्ट्स को सुरक्षा के लिहाज से रद्द या स्थगित करना पड़ा है।

रिकॉर्ड गर्मी के बीच जर्मनी के टिम्मेनडॉर्फर स्ट्रैंड बीच पर उमड़ी लोगों की भीड़।

रिकॉर्ड गर्मी के बीच जर्मनी के टिम्मेनडॉर्फर स्ट्रैंड बीच पर उमड़ी लोगों की भीड़।

डेनमार्क: ठंडे देश में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस पहुंचा

जर्मनी का पड़ोसी डेनमार्क ठंडे देश के रूप में जाना जाता है। वहां भी इस बार ऐसी गर्मी पड़ी है जो इतिहास में कभी नहीं देखी गई। शनिवार को तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। डेनमार्क में 1874 से रिकॉर्ड रखना शुरू हुआ था। इसके बाद से यह सबसे अधिकतम तापमान है। इससे पहले अगस्त 1975 में सबसे ज्यादा 36.4°C गर्मी पड़ी थी।

डेनमार्क की सड़कें पिघलने लगी हैं। इस वजह से वहां भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया है ताकि सड़कों को उखड़ने से बचाया जा सके।

गर्मी से बचने के लिए कोपेनहेगन के मशहूर अमागर बीच और देश के दूसरे तटीय इलाकों में लाखों की संख्या में स्थानीय लोग और पर्यटक उमड़ पड़े। लेकिन स्थिति यह थी कि ठंडे पानी में नहाने और गर्मी से बचने के लिए बीच पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी।

फ्रांस: इतिहास का सबसे गर्म दिन, तापमान 44.3 डिग्री पहुंचा

फ्रांस के पिसोस शहर में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर औसत तापमान 30°C को पार कर गया, जो रिकॉर्ड में फ्रांस का सबसे गर्म दिन रहा। यहां रात का तापमान भी औसतन 22°C से नीचे नहीं गया। गर्मी से पटरियों के फैलने के कारण ट्रेनें रोकनी पड़ी हैं और बिजली ग्रिड ठप होने से 50,000 घर बिना बिजली के रह रहे हैं।

फ्रांस में सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर पाबंदी लगा दी है। भीषण गर्मी के कारण 1,350 से ज्यादा स्कूल बंद कर दिए गए हैं। गर्मी के कारण सरकार ने ‘फेत द ला म्यूजिक’ नामक वार्षिक म्यूजिक फैसटीवल के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर प्रतिबंध लगा दिया।

पेरिस में हीटवेव (लू) के दौरान एफिल टॉवर के पास ट्रोकाडेरो स्क्वायर पर एक महिला धूप से बचने की कोशिश करती हुई।

पेरिस में हीटवेव (लू) के दौरान एफिल टॉवर के पास ट्रोकाडेरो स्क्वायर पर एक महिला धूप से बचने की कोशिश करती हुई।

पेरिस के प्लेस डु ट्रोकाडेरो चौक पर भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए फुहार वाले फाउंटेन के नीचे खड़े लोग।

पेरिस के प्लेस डु ट्रोकाडेरो चौक पर भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए फुहार वाले फाउंटेन के नीचे खड़े लोग।

इटली: 18 शहरों में रेड अलर्ट, पो नदी में सूखे का खतरा

इटली में गर्मी लगातार बढ़ रही है। सरकार ने रोम, मिलान, वेनिस, फ्लोरेंस और ट्यूरिन समेत 18 शहरों में सबसे ऊंचा रेड हीट अलर्ट जारी किया है।

भीषण गर्मी के कारण देश की सबसे लंबी पो नदी का जलस्तर तेजी से घट रहा है। इस वजह से समुद्र का खारा पानी नदी में घुसने लगा है, जिससे खेती और पेयजल पर खतरा बढ़ गया है।

सरकार ने कई इलाकों में लोगों को दोपहर के समय बाहर न निकलने की सलाह दी गई है और कामकाज के समय में भी बदलाव किए गए हैं।

हीटवेव के बीच रोम में कोलोसियम के पास पानी की फुहार के नीचे लोग गर्मी से बचने की कोशिश करते हुए।

हीटवेव के बीच रोम में कोलोसियम के पास पानी की फुहार के नीचे लोग गर्मी से बचने की कोशिश करते हुए।

चेक रिपब्लिक: 40 डिग्री का ऐतिहासिक आंकड़ा पार

हीटवेव ने चेक रिपब्लिक को भी नहीं बख्शा है। शनिवार को देश के डोक्सानी शहर में तापमान 40.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले देश का राष्ट्रीय ऑल-टाइम रिकॉर्ड 40.4°C था, जो लगभग 14 साल पहले 20 अगस्त 2012 को डोब्रिचोवाइस शहर में दर्ज किया गया था।

मौसम विभाग ने पूरे देश के लिए उच्चतम स्तर का रेड अलर्ट जारी कर रखा है और लोगों को दोपहर में घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। स्विट्जरलैंड: जून का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड

स्विट्जरलैंड के बासेल शहर में तापमान 38.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह देश के इतिहास में जून महीने का सबसे अधिक तापमान है। भीषण गर्मी की वजह से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस साल ग्लेशियरों का बर्फ नुकसान रिकॉर्ड समय से पहले शुरू हो गया है।

यूरोप की भीषण गर्मी से स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।

यूरोप की भीषण गर्मी से स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।

पोलैंड: 100 साल पुराना तापमान रिकॉर्ड टूटने की आशंका

पोलैंड में भी रिकॉर्डतोड़ गर्मी पड़ रही है। मौसम विभाग ने देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने का अनुमान जताया है। अगर ऐसा हुआ तो 1921 में बना 40.2°C का राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूट जाएगा। सरकार ने स्वास्थ्य चेतावनी जारी की है और लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। कई शहरों में कूलिंग सेंटर खोले गए हैं।

पुर्तगाल: 40 डिग्री के पार तापमान, जंगलों में आग का खतरा

पुर्तगाल में भी तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के पार बना हुआ है। देश के कई इलाकों में रेड अलर्ट जारी है। भीषण गर्मी और सूखे के कारण जंगलों में आग का खतरा काफी बढ़ गया है। दमकल विभाग को हाई अलर्ट पर रखा गया है और लोगों से जंगलों में आग जलाने या बारबेक्यू करने से बचने को कहा गया है।

40°C भारत में सामान्य क्यों है? यूरोप में आपदा कैसे बन जाता है?

जब भारत में तापमान 43°C पहुंचता है, तो लोग इसे मई-जून की आम गर्मी मानकर सिर पर गमछा ओढ़ते हैं और आम पना पीते हुए काम पर निकल जाते हैं। लेकिन जब यही तापमान यूरोप में 40°C पार करता है, तो वहां रेड अलर्ट जारी हो जाता है, ट्रेनें रुक जाती हैं और इसे एक ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित कर दिया जाता है।

इसके पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि ज्योग्राफी, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंसानी शरीर की आदत का एक पूरा विज्ञान है।

i. इन्फ्रास्ट्रक्चर का फर्क

यूरोप: घर और इमारतें गर्मी को अंदर रोकने के लिए बनाए जाते हैं, ताकि सर्दियों में कम हीटिंग की जरूरत पड़े। जब वहां गर्मी पड़ती है, तो ये घर ‘ओवन’ (तंदूर) की तरह काम करने लगते हैं। गर्मी अंदर तो आ जाती है, पर बाहर नहीं निकल पाती।

भारत: घर इस तरह बनाए जाते हैं कि हवा का क्रॉस-वेंटिलेशन हो सके। ऊंची छतें, संगमरमर या टाइल्स के फर्श और खुली खिड़कियां गर्मी को रोकने के बजाय उसे बाहर निकालने में मदद करती हैं।

ii. इंसानी शरीर की आदत

भारत: हमारे शरीर को बचपन से ही हाई टेम्परेचर झेलने की आदत होती है। भारत के लोगों का ‘थर्मोरेगुलेशन सिस्टम’ (शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता) अच्छा है। भारत के लोगों का शरीर ज्यादा गर्मी में पसीना बहाने लगता है जिससे शरीर को तुरंत ठंडा हो जाता है।

यूरोप: यूरोप के लोगों का शरीर कम तापमान का आदी होता है। जब अचानक तापमान 40°C पहुंचता है, तो उनका शरीर इस झटके को बर्दाश्त नहीं कर पाता। इससे हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और ऑर्गन फेलियर का खतरा बहुत तेजी से बढ़ता है।

iii. ह्यूमिडिटी का फर्क

गर्मी सिर्फ तापमान से नहीं, बल्कि हवा में मौजूद नमी से तय होती है। भारत में मई और जून की सूखी गर्मी में पसीना जल्दी सूख जाता है, जिससे शरीर का तापमान कम होने में मदद मिलती है।

यूरोप में जब गर्मी पड़ती है, तो हवा में नमी बहुत ज्यादा होती है। उमस के कारण शरीर का पसीना सूख नहीं पाता, जिससे शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता। 40°C तापमान वहां महसूस 45°C या उससे ज्यादा जैसा होता है।

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