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Gwalior Court Orders Judge Probe for Construction Violation

Gwalior Court Orders Judge Probe for Construction Violation

ग्वालियर10 मिनट पहले

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ग्वालियर हाई कोर्ट का फाइल फोटो

ग्वालियर हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने आदेश की अवहेलना और लापरवाही बरतने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने एक सिविल जज के आचरण की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह मामला किसी अन्य सिविल जज को सौंपने के आदेश दिए गए हैं, जिसे चार माह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।

मामला अशोक कुमार व अन्य बनाम मीरा देवी से जुड़ा है। वर्ष 2013 में विवादित संपत्ति के संबंध में अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश जारी किया था। इसके बावजूद प्रतिवादी पक्ष द्वारा कथित रूप से विवादित भूमि पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता अशोक कुमार ने अवमानना याचिका दायर की।

ट्रायल कोर्ट से चार माह में मांगी थी जांच रिपोर्ट

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 4 अप्रैल 2024 को ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह जांच कर यह स्पष्ट करे कि क्या अंतरिम आदेश का उल्लंघन कर निर्माण किया गया है। ट्रायल कोर्ट को चार माह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था। साथ ही पक्षकारों को 24 अप्रैल 2024 को ट्रायल कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश भी दिया गया था।

हालांकि लंबे समय तक जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत नहीं की गई। इस पर 8 अक्टूबर 2024 को कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को तुरंत रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। इसके बाद 12 नवंबर 2024 को भी हाईकोर्ट ने असंतोष व्यक्त करते हुए दो माह का अतिरिक्त समय दिया और प्रिंसिपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश भिंड को निर्देशित किया कि वे ट्रायल कोर्ट को अदालत के आदेशों के प्रति लापरवाही न बरतने के निर्देश दें।

ईई लोनिवि से निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कर सौंप दी

इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने विधिवत जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं की। गवाहों के बयान दर्ज करने और पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के बजाय केवल लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यपालन यंत्री से स्थल निरीक्षण रिपोर्ट मंगाकर सीधे हाईकोर्ट को भेज दी। इतना ही नहीं, रिपोर्ट को प्रिंसिपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश के माध्यम से भेजने की निर्धारित प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया।

20 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पीडब्ल्यूडी की यह स्थल निरीक्षण रिपोर्ट पक्षकारों की अनुपस्थिति में तैयार की गई प्रतीत होती है, इसलिए इस पर निर्भर नहीं किया जा सकता। अदालत ने मामले की विधिवत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। याचिका की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित की गई है।

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मामला अशोक कुमार व अन्य बनाम मीरा देवी से जुड़ा है। वर्ष 2013 में विवादित संपत्ति के संबंध में अदालत ने यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश जारी किया था। इसके बावजूद प्रतिवादी पक्ष द्वारा कथित रूप से विवादित भूमि पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता अशोक कुमार ने अवमानना याचिका दायर की।

ट्रायल कोर्ट से चार माह में मांगी थी जांच रिपोर्ट

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने 4 अप्रैल 2024 को ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था कि वह जांच कर यह स्पष्ट करे कि क्या अंतरिम आदेश का उल्लंघन कर निर्माण किया गया है। ट्रायल कोर्ट को चार माह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया था। साथ ही पक्षकारों को 24 अप्रैल 2024 को ट्रायल कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश भी दिया गया था।

हालांकि लंबे समय तक जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत नहीं की गई। इस पर 8 अक्टूबर 2024 को कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को तुरंत रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए। इसके बाद 12 नवंबर 2024 को भी हाईकोर्ट ने असंतोष व्यक्त करते हुए दो माह का अतिरिक्त समय दिया और प्रिंसिपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश भिंड को निर्देशित किया कि वे ट्रायल कोर्ट को अदालत के आदेशों के प्रति लापरवाही न बरतने के निर्देश दें।

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इसके बावजूद ट्रायल कोर्ट ने विधिवत जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं की। गवाहों के बयान दर्ज करने और पक्षकारों को सुनवाई का अवसर देने के बजाय केवल लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कार्यपालन यंत्री से स्थल निरीक्षण रिपोर्ट मंगाकर सीधे हाईकोर्ट को भेज दी। इतना ही नहीं, रिपोर्ट को प्रिंसिपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश के माध्यम से भेजने की निर्धारित प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया।

20 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पीडब्ल्यूडी की यह स्थल निरीक्षण रिपोर्ट पक्षकारों की अनुपस्थिति में तैयार की गई प्रतीत होती है, इसलिए इस पर निर्भर नहीं किया जा सकता। अदालत ने मामले की विधिवत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। याचिका की अगली सुनवाई 20 अगस्त को निर्धारित की गई है।

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