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Holiday homes are no longer just a hobby, but also a source of income.

Holiday homes are no longer just a hobby, but also a source of income.

नई दिल्ली21 मिनट पहले

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रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सेकंड होम और रिटायरमेंट होम मार्केट सालाना 23.63 फीसदी की दर से बढ़ रहा है।

गोवा, अलीबाग, कसौली और कुमाऊं की पहाड़ियों जैसे पर्यटन स्थलों पर अब लोग सिर्फ छुट्टियां बिताने के लिए घर नहीं खरीद रहे हैं। एक नया ट्रेंड उभरा है। यह है ‘रेंटल इनकम’ का। यानी जो कभी लाइफस्टाइल के लिए लिया गया फैसला था, वह अब एक निवेश रणनीति बन चुका है। हिल स्टेशनों और तटीय इलाकों में घरों को किराये पर देना नया नहीं है, लेकिन अब इसका पैमाना, ढांचा और इरादा पूरी तरह बदल गया है।

होमलैंड ग्रुप के एमडी अभय जिंदल के अनुसार, लाइफस्टाइल और निवेश के बीच का अंतर खत्म हो रहा है। जिंदल कहते हैं, ‘खरीदार अब लाइफस्टाइल और निवेश में से किसी एक को नहीं चुनते, उन्हें दोनों चाहिए। वे ऐसा घर चाहते हैं जिसका वीकेंड पर मजा ले सकें और बाकी दिन उससे कमाई हो।’

प्रॉपर्टी से मिलने वाली नियमित आय इसे केवल लग्जरी खरीद के बजाय एक सोची-समझी वित्तीय योजना बना देती है। यह बदलाव आंकड़ों में भी दिखता है। 2021 तक भारत में हॉलिडे होम मार्केट 1.394 अरब डॉलर (12,976 करोड़ रुपए) था। 2019 के प्री-कोविड दौर के मुकाबले 88.63 फीसदी की उछाल आई। 360 रियल्टर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सेकंड होम और रिटायरमेंट होम मार्केट सालाना 23.63 फीसदी की दर से बढ़ रहा है और 2026 तक यह 4 अरब डॉलर (37,236 करोड़ रुपए) तक पहुंचने का अनुमान है।

स्टेमास्टर के आंकड़े बताते हैं कि उनके पोर्टफोलियो में शामिल विला साल के 365 दिनों में से करीब 270 दिन बुक रहते हैं। यानी घर खाली कम, कमाई ज्यादा। इससे 10 से 12% ग्रॉस रेंटल यील्ड हो रही है। हॉलिडे होम की कमाई सिर्फ लोकेशन पर निर्भर करती है। गोवा में है तो चलेगा, कसौली में है तो किराया मिलेगा। लेकिन अब यह सोच पुरानी पड़ चुकी है।

स्टेमास्टर के को-फाउंडर ऋषि मोदी बताते हैं कि युवा ट्रैवलर अब प्राइवेट पूल, बड़े कॉमन स्पेस और फंक्शनल किचन को एड-ऑन नहीं, बल्कि बुनियादी उम्मीद मानते हैं। जिस घर में ये सुविधाएं हों, उसकी बुकिंग ज्यादा होती है। प्राइवेट शेफ और हाउसकीपिंग जैसी सेवाएं रेवेन्यू में 15 से 20% की बढ़ोतरी कर सकती हैं। द ब्लू काइट’ की सीईओ कैरोलिन मुलिज का मानना है कि रेंटल परफॉर्मेंस के लिए प्रोफेशनल मैनेजमेंट जरूरी है। हाउसकीपिंग, सुरक्षा और रखरखाव में सालाना रेंटल इनकम का 25-30% खर्च हो सकता है।

अकेले नहीं होती कमाई, एक पूरी टीम चाहिए

द काइट ब्लू की सीईओ कैरोलीन मुलीज कहती हैं कि डायनेमिक प्राइसिंग, मार्केटिंग, गेस्ट सर्विसिंग और कम्प्लायंस- यह सब हर घर का मालिक अकेले नहीं कर सकता। समय और स्थितियों के हिसाब से किराया तय करना पड़ता है। मेहमान की शिकायत रात को आए तो तुरंत जवाब देना है। यह सब एक सिस्टम मांगता है, एक इंसान नहीं। इसीलिए द काइट ब्लू और स्टेमास्टर जैसे प्लेटफॉर्म सामने आए हैं जो बुकिंग से लेकर मेहमान के चेकआउट तक सब संभालते हैं। घर मालिक को बस एक काम करना है, जब मन करे, खुद जाकर रह आएं।

सैफ्रन-स्टेज जैसे प्लेटफॉर्म बुकिंग से लेकर चेकआउट संभाल रहे

एयरबीएनबी जैसे प्लेटफॉर्म्स ने बाजार को पारदर्शी बना दिया है, जिससे डिमांड को ट्रैक करना आसान हो गया है। प्राइवेसी, शानदार व्यू और कम मेंटेनेंस वाले लेआउट अब अनिवार्य हो गए हैं। ‘सैफ्रन-स्टेज’ के देवेन्द्र पारुलेकर का कहना है कि लग्जरी विला में रिटर्न ज्यादा मिलता है क्योंकि वहां प्राइवेसी और ग्रुप स्टे की डिमांड अधिक रहती है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सेकंड होम और रिटायरमेंट होम मार्केट सालाना 23.63 फीसदी की दर से बढ़ रहा है।

गोवा, अलीबाग, कसौली और कुमाऊं की पहाड़ियों जैसे पर्यटन स्थलों पर अब लोग सिर्फ छुट्टियां बिताने के लिए घर नहीं खरीद रहे हैं। एक नया ट्रेंड उभरा है। यह है ‘रेंटल इनकम’ का। यानी जो कभी लाइफस्टाइल के लिए लिया गया फैसला था, वह अब एक निवेश रणनीति बन चुका है। हिल स्टेशनों और तटीय इलाकों में घरों को किराये पर देना नया नहीं है, लेकिन अब इसका पैमाना, ढांचा और इरादा पूरी तरह बदल गया है।

होमलैंड ग्रुप के एमडी अभय जिंदल के अनुसार, लाइफस्टाइल और निवेश के बीच का अंतर खत्म हो रहा है। जिंदल कहते हैं, ‘खरीदार अब लाइफस्टाइल और निवेश में से किसी एक को नहीं चुनते, उन्हें दोनों चाहिए। वे ऐसा घर चाहते हैं जिसका वीकेंड पर मजा ले सकें और बाकी दिन उससे कमाई हो।’

प्रॉपर्टी से मिलने वाली नियमित आय इसे केवल लग्जरी खरीद के बजाय एक सोची-समझी वित्तीय योजना बना देती है। यह बदलाव आंकड़ों में भी दिखता है। 2021 तक भारत में हॉलिडे होम मार्केट 1.394 अरब डॉलर (12,976 करोड़ रुपए) था। 2019 के प्री-कोविड दौर के मुकाबले 88.63 फीसदी की उछाल आई। 360 रियल्टर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सेकंड होम और रिटायरमेंट होम मार्केट सालाना 23.63 फीसदी की दर से बढ़ रहा है और 2026 तक यह 4 अरब डॉलर (37,236 करोड़ रुपए) तक पहुंचने का अनुमान है।

स्टेमास्टर के आंकड़े बताते हैं कि उनके पोर्टफोलियो में शामिल विला साल के 365 दिनों में से करीब 270 दिन बुक रहते हैं। यानी घर खाली कम, कमाई ज्यादा। इससे 10 से 12% ग्रॉस रेंटल यील्ड हो रही है। हॉलिडे होम की कमाई सिर्फ लोकेशन पर निर्भर करती है। गोवा में है तो चलेगा, कसौली में है तो किराया मिलेगा। लेकिन अब यह सोच पुरानी पड़ चुकी है।

स्टेमास्टर के को-फाउंडर ऋषि मोदी बताते हैं कि युवा ट्रैवलर अब प्राइवेट पूल, बड़े कॉमन स्पेस और फंक्शनल किचन को एड-ऑन नहीं, बल्कि बुनियादी उम्मीद मानते हैं। जिस घर में ये सुविधाएं हों, उसकी बुकिंग ज्यादा होती है। प्राइवेट शेफ और हाउसकीपिंग जैसी सेवाएं रेवेन्यू में 15 से 20% की बढ़ोतरी कर सकती हैं। द ब्लू काइट’ की सीईओ कैरोलिन मुलिज का मानना है कि रेंटल परफॉर्मेंस के लिए प्रोफेशनल मैनेजमेंट जरूरी है। हाउसकीपिंग, सुरक्षा और रखरखाव में सालाना रेंटल इनकम का 25-30% खर्च हो सकता है।

अकेले नहीं होती कमाई, एक पूरी टीम चाहिए

द काइट ब्लू की सीईओ कैरोलीन मुलीज कहती हैं कि डायनेमिक प्राइसिंग, मार्केटिंग, गेस्ट सर्विसिंग और कम्प्लायंस- यह सब हर घर का मालिक अकेले नहीं कर सकता। समय और स्थितियों के हिसाब से किराया तय करना पड़ता है। मेहमान की शिकायत रात को आए तो तुरंत जवाब देना है। यह सब एक सिस्टम मांगता है, एक इंसान नहीं। इसीलिए द काइट ब्लू और स्टेमास्टर जैसे प्लेटफॉर्म सामने आए हैं जो बुकिंग से लेकर मेहमान के चेकआउट तक सब संभालते हैं। घर मालिक को बस एक काम करना है, जब मन करे, खुद जाकर रह आएं।

सैफ्रन-स्टेज जैसे प्लेटफॉर्म बुकिंग से लेकर चेकआउट संभाल रहे

एयरबीएनबी जैसे प्लेटफॉर्म्स ने बाजार को पारदर्शी बना दिया है, जिससे डिमांड को ट्रैक करना आसान हो गया है। प्राइवेसी, शानदार व्यू और कम मेंटेनेंस वाले लेआउट अब अनिवार्य हो गए हैं। ‘सैफ्रन-स्टेज’ के देवेन्द्र पारुलेकर का कहना है कि लग्जरी विला में रिटर्न ज्यादा मिलता है क्योंकि वहां प्राइवेसी और ग्रुप स्टे की डिमांड अधिक रहती है।

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