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Human Eye Evolution: How a One-Eyed Creature Became Our Ancestor? | इंसानी आंखों का रहस्य: 600 मिलियन साल पहले एक आंख वाले जीव से हुआ हमारा विकास

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नई दिल्ली: इंसानी शरीर कुदरत का सबसे जटिल और अनोखा करिश्मा है. सालों से वैज्ञानिक इस बात की खोज में जुटे थे कि हमारी आंखों की बनावट अन्य जीवों से इतनी अलग क्यों है. हाल ही में लुंड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स के रिसर्चर्स ने इस राज से पर्दा उठाया है. रिसर्च के मुताबिक, हम सभी कशेरुकी (Vertebrates) जीवों के पूर्वज करोड़ों साल पहले एक आंख वाले जीव हुआ करते थे. यह स्टडी हमारी आंखों के इतिहास के साथ-साथ दिमाग के विकास पर भी नई रोशनी डालती है. लूंड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एमेरिटस डैन-ई निल्सन कहते हैं, ‘ये नतीजे बेहद हैरान करने वाले हैं. इन्होंने आंखों और दिमाग के विकास को लेकर हमारी पूरी समझ को उलट दिया है.’

600 मिलियन साल पहले कैसा था हमारा वो पूर्वज?

  1. आज से करीब 600 मिलियन (60 करोड़) साल पहले हमारा यह पूर्वज एक छोटे कीड़े जैसा जीव था. यह समुद्र की गहराइयों में रहता था और पानी से प्लवक (Plankton) छानकर अपना पेट भरता था.
  2. हैरानी की बात यह है कि इस जीव की जीवनशैली बहुत ही शांत थी. वह एक जगह टिककर रहने वाला जीव था. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस दौर से पहले इस जीव के पास शायद दो आंखें थीं.
  3. लेकिन जैसे-जैसे उसकी लाइफस्टाइल सुस्त हुई, उसे शिकार करने या बचने के लिए दो आंखों की जरूरत महसूस नहीं हुई. नतीजा यह हुआ कि विकास की प्रक्रिया (Evolution) के दौरान उसने अपनी दोनों आंखें खो दीं.

कैसे बनी सिर के बीचों-बीच वो इकलौती आंख?

जब इस जीव ने अपनी जोड़ीदार आंखें खो दीं, तब उसके सिर के बिल्कुल बीच में प्रकाश के प्रति संवेदनशील कोशिकाओं (Light-sensitive cells) का एक ग्रुप बच गया. इसी ग्रुप ने एक आदिम ‘मिडियन आई’ यानी सिर के बीच वाली एक आंख का रूप ले लिया.

इस छिपकली के सिर के बीच में हल्का धब्बा बीच की आंख बनाता है. जानवर की रेगुलर आंखें दिखाई नहीं दे रही हैं क्योंकि तस्वीर पीछे से ली गई है. (Image Credit: Bruno Frías Morales/iNaturalist/Creative Commons)

यह आंख आज के दौर की आंखों की तरह साफ तस्वीरें तो नहीं देख सकती थी, लेकिन यह दिन और रात के फर्क को बखूबी समझती थी.

इस इकलौती आंख की मदद से वह जीव यह जान पाता था कि ऊपर क्या है और नीचे क्या. यह एक तरह का कुदरती सेंसर था जो उसे समुद्र के अंधेरे में सर्वाइव करने में मदद करता था.

इंसानी आंखों का सफर दोबारा कैसे शुरू हुआ?

  • लाखों साल बीतने के बाद हमारे पूर्वजों ने दोबारा एक एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाई. उन्होंने समुद्र में तैरना और शिकार करना शुरू किया. अब उन्हें ऐसी आंखों की जरूरत थी जो साफ देख सकें और दूरी का अंदाजा लगा सकें.
  • रिसर्च बताती है कि इसी मिडियन आई के हिस्सों से दोबारा दो नई आंखों का विकास हुआ. यही वजह है कि इंसानी आंखें कीड़ों या स्क्विड (Squid) की आंखों से पूरी तरह अलग हैं.
  • प्रोफेसर निल्सन बताते हैं कि हमारी आंखों की रेटिना दिमाग के हिस्से से विकसित हुई है. वहीं दूसरी तरफ कीड़ों की आंखें उनके सिर के किनारों की स्किन से बनी होती हैं.
बार-बार लाइफस्टाइल में बदलाव की वजह से रीढ़ वाले जानवरों की आंखों का अनोखा विकास हुआ. (Graphic Credit: Current Biology (2026). DOI: 10.1016/j.cub.2025.12.028)

दिमाग की पीनियल ग्लैंड और ‘तीसरी आंख’ का क्या कनेक्शन है?

सबसे रोमांचक बात यह है कि हमारे उस एक आंख वाले पूर्वज की वो आंख आज भी हमारे शरीर में मौजूद है. विकास के क्रम में वह आंख चेहरे से हटकर दिमाग के अंदर चली गई और ‘पीनियल ग्लैंड’ (Pineal Gland) बन गई. आज यह ग्रंथि हमारे शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन बनाती है.

यह वही हार्मोन है जो हमारी नींद और जागने के चक्र (Circadian Rhythm) को कंट्रोल करता है. यह सोचना भी दिमाग चकरा देने वाला है कि आपकी आज की नींद का कनेक्शन 600 मिलियन साल पहले वाले उस एक आंख वाले जीव से जुड़ा हुआ है.

इस स्टडी ने पहली बार उन न्यूरल सर्किट्स के ओरिजिन को समझाया है, जो हमारी रेटिना में इमेज का एनालिसिस करते हैं.

वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के तमाम जीव जंतुओं की लाइट-सेंसिटिव सेल्स का एनालिसिस किया और उनकी पोजीशन की जांच की. इससे यह साबित हो गया कि हमारी आंखों का रास्ता एक खास ‘डिटूर’ यानी घुमावदार मोड़ से होकर गुजरा है.

अगर हमारा वो पूर्वज एक आंख वाला न बना होता, तो शायद आज हमारी आंखों की बनावट और देखने का तरीका कुछ और ही होता.

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नई दिल्ली: इंसानी शरीर कुदरत का सबसे जटिल और अनोखा करिश्मा है. सालों से वैज्ञानिक इस बात की खोज में जुटे थे कि हमारी आंखों की बनावट अन्य जीवों से इतनी अलग क्यों है. हाल ही में लुंड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ ससेक्स के रिसर्चर्स ने इस राज से पर्दा उठाया है. रिसर्च के मुताबिक, हम सभी कशेरुकी (Vertebrates) जीवों के पूर्वज करोड़ों साल पहले एक आंख वाले जीव हुआ करते थे. यह स्टडी हमारी आंखों के इतिहास के साथ-साथ दिमाग के विकास पर भी नई रोशनी डालती है. लूंड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एमेरिटस डैन-ई निल्सन कहते हैं, ‘ये नतीजे बेहद हैरान करने वाले हैं. इन्होंने आंखों और दिमाग के विकास को लेकर हमारी पूरी समझ को उलट दिया है.’

600 मिलियन साल पहले कैसा था हमारा वो पूर्वज?

  1. आज से करीब 600 मिलियन (60 करोड़) साल पहले हमारा यह पूर्वज एक छोटे कीड़े जैसा जीव था. यह समुद्र की गहराइयों में रहता था और पानी से प्लवक (Plankton) छानकर अपना पेट भरता था.
  2. हैरानी की बात यह है कि इस जीव की जीवनशैली बहुत ही शांत थी. वह एक जगह टिककर रहने वाला जीव था. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस दौर से पहले इस जीव के पास शायद दो आंखें थीं.
  3. लेकिन जैसे-जैसे उसकी लाइफस्टाइल सुस्त हुई, उसे शिकार करने या बचने के लिए दो आंखों की जरूरत महसूस नहीं हुई. नतीजा यह हुआ कि विकास की प्रक्रिया (Evolution) के दौरान उसने अपनी दोनों आंखें खो दीं.

कैसे बनी सिर के बीचों-बीच वो इकलौती आंख?

जब इस जीव ने अपनी जोड़ीदार आंखें खो दीं, तब उसके सिर के बिल्कुल बीच में प्रकाश के प्रति संवेदनशील कोशिकाओं (Light-sensitive cells) का एक ग्रुप बच गया. इसी ग्रुप ने एक आदिम ‘मिडियन आई’ यानी सिर के बीच वाली एक आंख का रूप ले लिया.

इस छिपकली के सिर के बीच में हल्का धब्बा बीच की आंख बनाता है. जानवर की रेगुलर आंखें दिखाई नहीं दे रही हैं क्योंकि तस्वीर पीछे से ली गई है. (Image Credit: Bruno Frías Morales/iNaturalist/Creative Commons)

यह आंख आज के दौर की आंखों की तरह साफ तस्वीरें तो नहीं देख सकती थी, लेकिन यह दिन और रात के फर्क को बखूबी समझती थी.

इस इकलौती आंख की मदद से वह जीव यह जान पाता था कि ऊपर क्या है और नीचे क्या. यह एक तरह का कुदरती सेंसर था जो उसे समुद्र के अंधेरे में सर्वाइव करने में मदद करता था.

इंसानी आंखों का सफर दोबारा कैसे शुरू हुआ?

  • लाखों साल बीतने के बाद हमारे पूर्वजों ने दोबारा एक एक्टिव लाइफस्टाइल अपनाई. उन्होंने समुद्र में तैरना और शिकार करना शुरू किया. अब उन्हें ऐसी आंखों की जरूरत थी जो साफ देख सकें और दूरी का अंदाजा लगा सकें.
  • रिसर्च बताती है कि इसी मिडियन आई के हिस्सों से दोबारा दो नई आंखों का विकास हुआ. यही वजह है कि इंसानी आंखें कीड़ों या स्क्विड (Squid) की आंखों से पूरी तरह अलग हैं.
  • प्रोफेसर निल्सन बताते हैं कि हमारी आंखों की रेटिना दिमाग के हिस्से से विकसित हुई है. वहीं दूसरी तरफ कीड़ों की आंखें उनके सिर के किनारों की स्किन से बनी होती हैं.
बार-बार लाइफस्टाइल में बदलाव की वजह से रीढ़ वाले जानवरों की आंखों का अनोखा विकास हुआ. (Graphic Credit: Current Biology (2026). DOI: 10.1016/j.cub.2025.12.028)

दिमाग की पीनियल ग्लैंड और ‘तीसरी आंख’ का क्या कनेक्शन है?

सबसे रोमांचक बात यह है कि हमारे उस एक आंख वाले पूर्वज की वो आंख आज भी हमारे शरीर में मौजूद है. विकास के क्रम में वह आंख चेहरे से हटकर दिमाग के अंदर चली गई और ‘पीनियल ग्लैंड’ (Pineal Gland) बन गई. आज यह ग्रंथि हमारे शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन बनाती है.

यह वही हार्मोन है जो हमारी नींद और जागने के चक्र (Circadian Rhythm) को कंट्रोल करता है. यह सोचना भी दिमाग चकरा देने वाला है कि आपकी आज की नींद का कनेक्शन 600 मिलियन साल पहले वाले उस एक आंख वाले जीव से जुड़ा हुआ है.

इस स्टडी ने पहली बार उन न्यूरल सर्किट्स के ओरिजिन को समझाया है, जो हमारी रेटिना में इमेज का एनालिसिस करते हैं.

वैज्ञानिकों ने दुनिया भर के तमाम जीव जंतुओं की लाइट-सेंसिटिव सेल्स का एनालिसिस किया और उनकी पोजीशन की जांच की. इससे यह साबित हो गया कि हमारी आंखों का रास्ता एक खास ‘डिटूर’ यानी घुमावदार मोड़ से होकर गुजरा है.

अगर हमारा वो पूर्वज एक आंख वाला न बना होता, तो शायद आज हमारी आंखों की बनावट और देखने का तरीका कुछ और ही होता.

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