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Impact on India’s Oil Supply, Strait of Hormuz, Crude Prices, Stock Market & Gold-Silver Rates

Impact on India's Oil Supply, Strait of Hormuz, Crude Prices, Stock Market & Gold-Silver Rates
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नई दिल्ली7 घंटे पहले

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इजराइल ने शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हमला किया।

ईरान और इजराइल के बीच शुरू हुई जंग का असर भारत के तेल, व्यापार, शेयर बाजार और सोना-चांदी की कीमतों पर दिख सकता है। अगर दोनों देशों के बीच युद्ध और बढ़ता है तो होर्मुज स्ट्रेट बंद हो सकता है। इससे भारत को हर महीने होने वाली तेल सप्लाई का आधा हिस्सा खतरे में पड़ जाएगा।

इसके अलावा भारत का नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट भी प्रभावित हो सकता है। इसका 10% से ज्यादा हिस्सा इस क्षेत्र से सप्लाई होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंग बढ़ने से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ती है और इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ेगा।

ऐसे हालात में बाजार में बड़ी बिकवाली और गिरावट देखने को मिल सकती है। दूसरी तरफ, जब दुनिया में तनाव बढ़ता है तो निवेशक सुरक्षित विकल्प की ओर जाते हैं। ऐसे समय में लोग सोना और चांदी खरीदना पसंद करते हैं। इसलिए इनकी कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।

होर्मुज स्ट्रेट से जब मालवाहक जहाज गुजरते हैं, तो ईरानी सेना निगरानी करती है।

होर्मुज स्ट्रेट से जब मालवाहक जहाज गुजरते हैं, तो ईरानी सेना निगरानी करती है।

भारत के लिए इतना अहम क्यों होर्मुज स्ट्रेट ?

ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे देशों से मंगवाता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है।

केपलर (Kpler) के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया के मुताबिक, अगर इजराइल ईरान के तेल ठिकानों पर हमला करता है या ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है, तो सप्लाई चेन पूरी तरह बंद हो जाएगी। इसका असर भारत के साथ-साथ ग्लोबल ऑयल मार्केट पर भी पड़ेगा।

भारत में रोजाना 26 लाख बैरल तेल होर्मुज रूट से आता है

ऐसा इसलिए क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 26 लाख बैरल कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) रोजाना इसी रास्ते से मंगवाता है। केपलर के डेटा के मुताबिक, जनवरी-फरवरी में भारत के कुल मंथली ऑयल इंपोर्ट का करीब 50% हिस्सा होर्मुज के रास्ते ही आया है। नवंबर-दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा 40% था, जो अब बढ़ गया है।

सूत्रों का कहना है कि अगर होर्मुज का रास्ता बंद होता है, तो भारत दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकता है। इसमें सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यूएई की अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन शामिल हैं। ये दोनों पाइपलाइन इसी मकसद से बनाई गई हैं ताकि होर्मुज के रास्ते का इस्तेमाल किए बिना तेल सप्लाई जारी रखी जा सके।

भारत के 10% नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट पर भी संकट

सिर्फ तेल ही नहीं, भारत का व्यापार भी ईरान और इजराइल के युद्ध से संकट में है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का 10% से ज्यादा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही जाता है। इसमें बासमती चावल, चाय, मसाले, ताजे फल, सब्जियां और इंजीनियरिंग सामान भी शामिल हैं। पश्चिम एशिया के देशों (GCC देशों) को होने वाला ज्यादातर एक्सपोर्ट इसी रूट से होता है। रूट बंद होने या माल ढुलाई महंगी होने से भारतीय एक्सपोर्टर्स की लागत बढ़ जाएगी और ग्लोबल मार्केट में भारतीय सामान महंगा हो जाएगा।

भारत ने हाल ही में उन खाड़ी देशों को करीब 47.6 बिलियन डॉलर का नॉन-ऑयल सामान एक्सपोर्ट किया है, जिनका व्यापार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े समुद्री रास्तों पर निर्भर है। यह भारत के टोटल 360.2 बिलियन डॉलर के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का करीब 13.2% हिस्सा है। ये आंकड़े बताते हैं कि अगर इन रास्तों से होने वाली सप्लाई में कोई रुकावट आती है, तो भारत के व्यापार पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है।

क्रूड की कीमतें बढ़ने से गिर सकता है भारतीय शेयर बाजार

भारतीय शेयर बाजार के लिए क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल हमेशा से एक सेंसिटिव फैक्टर रहा है। अगर ईरान-इजराइल तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80-85 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं, तो भारत के शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी जा सकती है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 2.87% बढ़कर 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं।

पेंट, टायर, एविएशन और लॉजिस्टिक जैसे सेक्टर, जो कच्चे तेल पर निर्भर हैं, उनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) पहले से ही भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, ऐसे में यह युद्ध जियो-पॉलिटिकल टेंशन को और तेज कर सकता है।

सोने-चांदी की कीमतों में भी उछाल आ सकता है

अनिश्चितता दौर में निवेशक इक्विटी मार्केट से पैसा निकालकर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान-इजरायल युद्ध के चलते सोने-चांदी की कीमतें नई ऊंचाई को छू सकती हैं।

अगर अमेरिका इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होता है, तो डॉलर के मुकाबले सोने की मांग और बढ़ेगी। चांदी की इंडस्ट्रियल और इन्वेस्टमेंट डिमांड दोनों में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे यह आने वाले समय में निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न का जरिया बन सकता है।

10 ग्राम सोना ₹1.59 लाख और चांदी ₹2.66 लाख/किलो बिक रही

एक दिन पहले शुक्रवार (27 फरवरी) को कारोबार के सोना-चांदी के दाम में तेजी रही थी। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,075 रुपए बढ़कर ₹1.59 लाख पहुंच गया।

इससे पहले गुरुवार को इसकी कीमत 1.58 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, एक किलो चांदी 6,033 रुपए बढ़कर ₹2.66 लाख पर पहुंच गई है। इससे पहले गुरुवार को इसकी कीमत 2.61 लाख रुपए प्रति किलो थी।

युद्ध से महंगाई बढ़ने का डर

अगर क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की संभावनाएं खत्म हो जाएंगी। फ्यूल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर फल, सब्जी और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर पड़ेगा। इससे रिटेल इन्फ्लेशन रेट यानी खुदरा महंगाई दर बढ़ सकती है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना- मौजूदा स्थिति वेट एंड वॉच वाली

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा स्थिति वेट एंड वॉच वाली है। इजराइल की अगली प्रतिक्रिया क्या होगी, इसी पर ग्लोबल मार्केट की दिशा निर्भर करेगी। यदि इजराइल सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाता है, तो बाजार जल्द रिकवर कर सकता है। वहीं अगर तेल रिफाइनरियों या हॉर्मुज रूट को निशाना बनाया गया, तो यह लंबे समय तक चलने वाली आर्थिक मंदी का संकेत हो सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट के बारे में जानिए..

होर्मुज स्ट्रेट क्या है?

होर्मुज स्ट्रेट एक संकरा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से और आगे अरब सागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान सटा है। दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE है। इसके आसपास सभी तेल उत्पादक देश हैं। इसलिए इस जलीय रास्ते से दुनियाभर में तेल की सप्लाई होती है।

होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा है। इसके दोनों मुहाने करीब 50 किमी चौड़े हैं, जबकि सबसे संकरा हिस्सा करीब 33 किमी चौड़ा है। इसमें आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक के लिए 3 किमी चौड़ी शिपिंग लेन तय है।

6 दिसंबर 1987 को जब सिंगापुर का नॉर्मन अटलांटिक शिप होर्मुज स्ट्रेट पहुंचा, तो ईरानी वॉरशिप ने हमला कर दिया। इसके बाद जहाज में आग लग गई थी।

6 दिसंबर 1987 को जब सिंगापुर का नॉर्मन अटलांटिक शिप होर्मुज स्ट्रेट पहुंचा, तो ईरानी वॉरशिप ने हमला कर दिया। इसके बाद जहाज में आग लग गई थी।

होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम क्यों है?

अमेरिका के एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी EIA के मुताबिक, दुनिया के कुल पेट्रोलियम में से करीब 20% होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। हर दिन लगभग 1.78 करोड़ बैरल से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इस रूट से जाता है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी IEA के मुताबिक, ईरान खुद रोजाना 17 लाख बैरेल पेट्रोलियम इस रूट से निर्यात करता है। इस रास्ते से गुजरने वाली कॉमर्शियल शिप की सुरक्षा अमेरिकी नेवी की एक टुकड़ी करती है।

ईरान के अलावा दूसरे गल्फ देश जैसे ईराक, कुवैत, सऊदी अरब और UAE भी इसे रास्ते से अपना ज्यादातर तेल निर्यात करते हैं। इसमें से ज्यादातर निर्यात एशियाई देशों को होता है। 2022 में होर्मुज से गुजरने वाले कुल तेल का 82% एशियाई देशों में गया था।

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ये खबर भी पढ़ें…

अमेरिका-इजराइल का ईरान पर हमला, 40 छात्राओं की मौत: ईरान ने भी इजराइल-दुबई पर मिसाइलें दागीं, कतर-UAE में अमेरिकी मिलिट्री बेस पर अटैक

इजराइल ने शनिवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हमला कर दिया। इरना न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इन हमलों में दक्षिणी ईरान में 40 छात्राओं की मौत हो गई। जबकि 45 घायल हैं।

इसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल पर जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने पलटवार करते हुए करीब 400 मिसाइलें दागीं हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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इजराइल ने शनिवार को ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हमला किया।

ईरान और इजराइल के बीच शुरू हुई जंग का असर भारत के तेल, व्यापार, शेयर बाजार और सोना-चांदी की कीमतों पर दिख सकता है। अगर दोनों देशों के बीच युद्ध और बढ़ता है तो होर्मुज स्ट्रेट बंद हो सकता है। इससे भारत को हर महीने होने वाली तेल सप्लाई का आधा हिस्सा खतरे में पड़ जाएगा।

इसके अलावा भारत का नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट भी प्रभावित हो सकता है। इसका 10% से ज्यादा हिस्सा इस क्षेत्र से सप्लाई होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंग बढ़ने से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ती है और इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ेगा।

ऐसे हालात में बाजार में बड़ी बिकवाली और गिरावट देखने को मिल सकती है। दूसरी तरफ, जब दुनिया में तनाव बढ़ता है तो निवेशक सुरक्षित विकल्प की ओर जाते हैं। ऐसे समय में लोग सोना और चांदी खरीदना पसंद करते हैं। इसलिए इनकी कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है।

होर्मुज स्ट्रेट से जब मालवाहक जहाज गुजरते हैं, तो ईरानी सेना निगरानी करती है।

होर्मुज स्ट्रेट से जब मालवाहक जहाज गुजरते हैं, तो ईरानी सेना निगरानी करती है।

भारत के लिए इतना अहम क्यों होर्मुज स्ट्रेट ?

ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल सऊदी अरब, इराक, कुवैत और यूएई जैसे देशों से मंगवाता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है।

केपलर (Kpler) के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया के मुताबिक, अगर इजराइल ईरान के तेल ठिकानों पर हमला करता है या ईरान इस रास्ते को ब्लॉक करता है, तो सप्लाई चेन पूरी तरह बंद हो जाएगी। इसका असर भारत के साथ-साथ ग्लोबल ऑयल मार्केट पर भी पड़ेगा।

भारत में रोजाना 26 लाख बैरल तेल होर्मुज रूट से आता है

ऐसा इसलिए क्योंकि भारत अपनी जरूरत का करीब 26 लाख बैरल कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) रोजाना इसी रास्ते से मंगवाता है। केपलर के डेटा के मुताबिक, जनवरी-फरवरी में भारत के कुल मंथली ऑयल इंपोर्ट का करीब 50% हिस्सा होर्मुज के रास्ते ही आया है। नवंबर-दिसंबर 2025 में यह आंकड़ा 40% था, जो अब बढ़ गया है।

सूत्रों का कहना है कि अगर होर्मुज का रास्ता बंद होता है, तो भारत दूसरे विकल्पों पर विचार कर सकता है। इसमें सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और यूएई की अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन शामिल हैं। ये दोनों पाइपलाइन इसी मकसद से बनाई गई हैं ताकि होर्मुज के रास्ते का इस्तेमाल किए बिना तेल सप्लाई जारी रखी जा सके।

भारत के 10% नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट पर भी संकट

सिर्फ तेल ही नहीं, भारत का व्यापार भी ईरान और इजराइल के युद्ध से संकट में है। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का 10% से ज्यादा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही जाता है। इसमें बासमती चावल, चाय, मसाले, ताजे फल, सब्जियां और इंजीनियरिंग सामान भी शामिल हैं। पश्चिम एशिया के देशों (GCC देशों) को होने वाला ज्यादातर एक्सपोर्ट इसी रूट से होता है। रूट बंद होने या माल ढुलाई महंगी होने से भारतीय एक्सपोर्टर्स की लागत बढ़ जाएगी और ग्लोबल मार्केट में भारतीय सामान महंगा हो जाएगा।

भारत ने हाल ही में उन खाड़ी देशों को करीब 47.6 बिलियन डॉलर का नॉन-ऑयल सामान एक्सपोर्ट किया है, जिनका व्यापार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े समुद्री रास्तों पर निर्भर है। यह भारत के टोटल 360.2 बिलियन डॉलर के नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का करीब 13.2% हिस्सा है। ये आंकड़े बताते हैं कि अगर इन रास्तों से होने वाली सप्लाई में कोई रुकावट आती है, तो भारत के व्यापार पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है।

क्रूड की कीमतें बढ़ने से गिर सकता है भारतीय शेयर बाजार

भारतीय शेयर बाजार के लिए क्रूड ऑयल यानी कच्चा तेल हमेशा से एक सेंसिटिव फैक्टर रहा है। अगर ईरान-इजराइल तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 80-85 डॉलर प्रति बैरल के पार जाती हैं, तो भारत के शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी जा सकती है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 2.87% बढ़कर 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थीं।

पेंट, टायर, एविएशन और लॉजिस्टिक जैसे सेक्टर, जो कच्चे तेल पर निर्भर हैं, उनके मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) पहले से ही भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, ऐसे में यह युद्ध जियो-पॉलिटिकल टेंशन को और तेज कर सकता है।

सोने-चांदी की कीमतों में भी उछाल आ सकता है

अनिश्चितता दौर में निवेशक इक्विटी मार्केट से पैसा निकालकर सोने और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान-इजरायल युद्ध के चलते सोने-चांदी की कीमतें नई ऊंचाई को छू सकती हैं।

अगर अमेरिका इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होता है, तो डॉलर के मुकाबले सोने की मांग और बढ़ेगी। चांदी की इंडस्ट्रियल और इन्वेस्टमेंट डिमांड दोनों में तेजी आने की उम्मीद है, जिससे यह आने वाले समय में निवेशकों के लिए बेहतर रिटर्न का जरिया बन सकता है।

10 ग्राम सोना ₹1.59 लाख और चांदी ₹2.66 लाख/किलो बिक रही

एक दिन पहले शुक्रवार (27 फरवरी) को कारोबार के सोना-चांदी के दाम में तेजी रही थी। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,075 रुपए बढ़कर ₹1.59 लाख पहुंच गया।

इससे पहले गुरुवार को इसकी कीमत 1.58 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, एक किलो चांदी 6,033 रुपए बढ़कर ₹2.66 लाख पर पहुंच गई है। इससे पहले गुरुवार को इसकी कीमत 2.61 लाख रुपए प्रति किलो थी।

युद्ध से महंगाई बढ़ने का डर

अगर क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती की संभावनाएं खत्म हो जाएंगी। फ्यूल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर फल, सब्जी और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर पड़ेगा। इससे रिटेल इन्फ्लेशन रेट यानी खुदरा महंगाई दर बढ़ सकती है।

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना- मौजूदा स्थिति वेट एंड वॉच वाली

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मौजूदा स्थिति वेट एंड वॉच वाली है। इजराइल की अगली प्रतिक्रिया क्या होगी, इसी पर ग्लोबल मार्केट की दिशा निर्भर करेगी। यदि इजराइल सिर्फ सैन्य ठिकानों को निशाना बनाता है, तो बाजार जल्द रिकवर कर सकता है। वहीं अगर तेल रिफाइनरियों या हॉर्मुज रूट को निशाना बनाया गया, तो यह लंबे समय तक चलने वाली आर्थिक मंदी का संकेत हो सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट के बारे में जानिए..

होर्मुज स्ट्रेट क्या है?

होर्मुज स्ट्रेट एक संकरा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से और आगे अरब सागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान सटा है। दक्षिण में ओमान और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE है। इसके आसपास सभी तेल उत्पादक देश हैं। इसलिए इस जलीय रास्ते से दुनियाभर में तेल की सप्लाई होती है।

होर्मुज स्ट्रेट करीब 167 किमी लंबा है। इसके दोनों मुहाने करीब 50 किमी चौड़े हैं, जबकि सबसे संकरा हिस्सा करीब 33 किमी चौड़ा है। इसमें आने-जाने वाले समुद्री ट्रैफिक के लिए 3 किमी चौड़ी शिपिंग लेन तय है।

6 दिसंबर 1987 को जब सिंगापुर का नॉर्मन अटलांटिक शिप होर्मुज स्ट्रेट पहुंचा, तो ईरानी वॉरशिप ने हमला कर दिया। इसके बाद जहाज में आग लग गई थी।

6 दिसंबर 1987 को जब सिंगापुर का नॉर्मन अटलांटिक शिप होर्मुज स्ट्रेट पहुंचा, तो ईरानी वॉरशिप ने हमला कर दिया। इसके बाद जहाज में आग लग गई थी।

होर्मुज स्ट्रेट इतना अहम क्यों है?

अमेरिका के एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन यानी EIA के मुताबिक, दुनिया के कुल पेट्रोलियम में से करीब 20% होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। हर दिन लगभग 1.78 करोड़ बैरल से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इस रूट से जाता है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी IEA के मुताबिक, ईरान खुद रोजाना 17 लाख बैरेल पेट्रोलियम इस रूट से निर्यात करता है। इस रास्ते से गुजरने वाली कॉमर्शियल शिप की सुरक्षा अमेरिकी नेवी की एक टुकड़ी करती है।

ईरान के अलावा दूसरे गल्फ देश जैसे ईराक, कुवैत, सऊदी अरब और UAE भी इसे रास्ते से अपना ज्यादातर तेल निर्यात करते हैं। इसमें से ज्यादातर निर्यात एशियाई देशों को होता है। 2022 में होर्मुज से गुजरने वाले कुल तेल का 82% एशियाई देशों में गया था।

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इजराइल ने शनिवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हमला कर दिया। इरना न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इन हमलों में दक्षिणी ईरान में 40 छात्राओं की मौत हो गई। जबकि 45 घायल हैं।

इसके जवाब में ईरान ने भी इजराइल पर जवाबी हमले शुरू कर दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने पलटवार करते हुए करीब 400 मिसाइलें दागीं हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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