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India-Japan Bullet Train Delay | Former Minister Hideki Makihara Statement

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टोक्यो13 मिनट पहले

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भारत-जापान के बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट को लेकर जापान के पूर्व न्याय मंत्री हिदेकी माकिहारा ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर लिखा कि प्रोजेक्ट के लेट होने की सबसे बड़ी वजह भारतीय मंत्री का रवैया रहा।

माकिहारा ने कहा कि वे खुद इस प्रोजेक्ट से जुड़े रहे हैं और जापानी टीम ने पूरी मेहनत से काम किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले।

उनके मुताबिक, भारतीय पक्ष ने कई बार किए वादे पूरे नहीं किए। समझौते किए, फिर उनसे पीछे हट गए। आखिरी समय तक अपने हिसाब से शर्तें बदलते रहे। इसी वजह से बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया।

‘प्रधानमंत्री के दौरे से भी कोई नतीजा नहीं निकला’

माकिहारा के मुताबिक, प्रधानमंत्री के दौरे से भी कोई नतीजा नहीं निकला। दरअसल, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1-3 जुलाई 2026 में भारत दौरे पर आई थी।

इस दौरान दोनों देशों ने 129 समझौतों का ऐलान किया था। इन समझौतों का मकसद निवेश, उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, कौशल विकास और सप्लाई चेन सहयोग को मजबूत करना है।

भारत-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची

भारत-जापान जॉइंट इकोनॉमिक फोरम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची

माकिहारा ने अपनी पोस्ट में टॉयो केइजाई ऑनलाइन की एक रिपोर्ट भी शेयर की। इसमें दावा किया गया है कि बुलेट ट्रेन के सबसे अहम सेफ्टी सिस्टम (सिग्नलिंग सिस्टम) में जापान को शामिल नहीं किया गया।

उन्होंने दावा किया कि उन्हें 100% यकीन है कि इस प्रोजेक्ट के आगे न बढ़ पाने की पूरी जिम्मेदारी भारतीय पक्ष की है।

हालांकि, भारत सरकार या मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

2017 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट

देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी के पूर्व PM शिंजो आबे ने 14 सितंबर 2017 को अहमदाबाद में इस प्रोजेक्ट का इनॉगरेशन किया था। दोनों शहरों के बीच 508 किमी का सफर बुलेट ट्रेन तीन घंटे में तय करेगी।

अभी नॉर्मल ट्रेन से यह सफर तय करने में सात-आठ घंटे लगते हैं। रूट पर 12 स्टेशन मुंबई, ठाणे, विरार, भोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वड़ोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती हो सकते हैं। इनमें मुंबई स्टेशन अंडरग्राउंड होगा।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन में ₹88 हजार करोड़ जापानी निवेश

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की पहले अनुमानित लागत करीब ₹2 लाख करोड़ है। इसमें से लगभग ₹88 हजार करोड़ जापान दे रहा है। यह पैसा जापान की सरकारी एजेंसी JICA बेहद सस्ती शर्तों पर दे रही है।

इस कर्ज पर सिर्फ 0.1% सालाना ब्याज लगेगा, इसे चुकाने के लिए 50 साल मिलेंगे और पहले 15 साल तक किस्त नहीं देनी होगी। जापान अब तक इस परियोजना के लिए 1,150 अरब येन (करीब ₹55 हजार करोड़) मंजूर कर चुका है। इसके अलावा वह बुलेट ट्रेन की शिंकानसेन तकनीक, ट्रेनिंग और तकनीकी विशेषज्ञता भी भारत को उपलब्ध करा रहा है।

रूट का 7 किमी हिस्सा समुद्र के अंदर होगा

508 किमी के रूट में से 351 किमी हिस्सा गुजरात और 157 किमी हिस्सा महाराष्ट्र से गुजरेगा। कुल 92% यानी 468 किमी लंबा ट्रैक एलिवेटेड रहेगा।

मुंबई में 7 किमी का हिस्सा समुद्र के अंदर होगा। 25 किमी का रूट सुरंग से गुजरेगा। 13 किमी हिस्सा जमीन पर होगा। बुलेट ट्रेन 70 हाईवे, 21 नदियां पार करेगी। 173 बड़े और 201 छोटे ब्रिज बनेंगे।

शुरुआत 10 कोच वाली 35 बुलेट ट्रेनों से होगी। ये ट्रेनें रोजाना 70 फेरे लगाएंगी। एक बुलेट ट्रेन में 750 लोग बैठ सकेंगे। बाद में 1200 लोगों के लिए 16 कोच हो जाएंगे। 2050 तक इन ट्रेनों की संख्या बढ़ाकर 105 करने का प्लान है।

———————

ये खबर भी पढ़ें…

मोदी बोले- सुजुकी दो-तिहाई कारें भारत में बना रही:जापान की मदद से देश में खाद के 1000 कारखाने लगेंगे; PM ताकाइची को बहन कहा

भारत और जापान ने आर्थिक साझेदारी को नई रफ्तार देने का फैसला किया है। भारत-जापान जॉइंट इकोनोमिक फोरम में प्रधानमंत्री मोदी ने जापानी कंपनियों की दिक्कतें दूर करने के लिए ‘जापान बिजनेस वीक’ शुरू करने का ऐलान किया। इसके तहत PMO के सीनियर अधिकारी सीधे जापानी निवेशकों से बातचीत करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

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माकिहारा ने कहा कि वे खुद इस प्रोजेक्ट से जुड़े रहे हैं और जापानी टीम ने पूरी मेहनत से काम किया, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिले।

उनके मुताबिक, भारतीय पक्ष ने कई बार किए वादे पूरे नहीं किए। समझौते किए, फिर उनसे पीछे हट गए। आखिरी समय तक अपने हिसाब से शर्तें बदलते रहे। इसी वजह से बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया।

‘प्रधानमंत्री के दौरे से भी कोई नतीजा नहीं निकला’

माकिहारा के मुताबिक, प्रधानमंत्री के दौरे से भी कोई नतीजा नहीं निकला। दरअसल, जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची 1-3 जुलाई 2026 में भारत दौरे पर आई थी।

इस दौरान दोनों देशों ने 129 समझौतों का ऐलान किया था। इन समझौतों का मकसद निवेश, उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, कौशल विकास और सप्लाई चेन सहयोग को मजबूत करना है।

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माकिहारा ने अपनी पोस्ट में टॉयो केइजाई ऑनलाइन की एक रिपोर्ट भी शेयर की। इसमें दावा किया गया है कि बुलेट ट्रेन के सबसे अहम सेफ्टी सिस्टम (सिग्नलिंग सिस्टम) में जापान को शामिल नहीं किया गया।

उन्होंने दावा किया कि उन्हें 100% यकीन है कि इस प्रोजेक्ट के आगे न बढ़ पाने की पूरी जिम्मेदारी भारतीय पक्ष की है।

हालांकि, भारत सरकार या मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों की ओर से फिलहाल इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

2017 में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट

देश की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी के पूर्व PM शिंजो आबे ने 14 सितंबर 2017 को अहमदाबाद में इस प्रोजेक्ट का इनॉगरेशन किया था। दोनों शहरों के बीच 508 किमी का सफर बुलेट ट्रेन तीन घंटे में तय करेगी।

अभी नॉर्मल ट्रेन से यह सफर तय करने में सात-आठ घंटे लगते हैं। रूट पर 12 स्टेशन मुंबई, ठाणे, विरार, भोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वड़ोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती हो सकते हैं। इनमें मुंबई स्टेशन अंडरग्राउंड होगा।

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन में ₹88 हजार करोड़ जापानी निवेश

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की पहले अनुमानित लागत करीब ₹2 लाख करोड़ है। इसमें से लगभग ₹88 हजार करोड़ जापान दे रहा है। यह पैसा जापान की सरकारी एजेंसी JICA बेहद सस्ती शर्तों पर दे रही है।

इस कर्ज पर सिर्फ 0.1% सालाना ब्याज लगेगा, इसे चुकाने के लिए 50 साल मिलेंगे और पहले 15 साल तक किस्त नहीं देनी होगी। जापान अब तक इस परियोजना के लिए 1,150 अरब येन (करीब ₹55 हजार करोड़) मंजूर कर चुका है। इसके अलावा वह बुलेट ट्रेन की शिंकानसेन तकनीक, ट्रेनिंग और तकनीकी विशेषज्ञता भी भारत को उपलब्ध करा रहा है।

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शुरुआत 10 कोच वाली 35 बुलेट ट्रेनों से होगी। ये ट्रेनें रोजाना 70 फेरे लगाएंगी। एक बुलेट ट्रेन में 750 लोग बैठ सकेंगे। बाद में 1200 लोगों के लिए 16 कोच हो जाएंगे। 2050 तक इन ट्रेनों की संख्या बढ़ाकर 105 करने का प्लान है।

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