Sunday, 08 Nov 2026 | 10:42 PM

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Indian Government Stand on Nikhil Gupta: nikhil gupta sikh separatist gurpatwant singh pannun murder plot case | us court order | what stand indian government | कौन हैं निखिल गुप्ता, जिनको अमेरिका में 40 साल तक की हो सकती सजा, भारत सरकार पहल करे तो क्या आ जाएंगे बाहर?

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Nikhil Gupta US Court Guilty Plea: क्या अमेरिका में खालिस्तानी समर्थक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश से जुड़े मामले में भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को राहत मिलेगी? क्या निखिल गुप्ता जेल से छूट जाएंगे? क्या निखिल गुप्ता के मामले पर भारत राजनयिक पहल की शुरुआत कर सकती है? अमेरिकी अदालत में मई महीने में निखिल गुप्ता को 24 साल से लेकर 40 साल तक सजा सुनाने जा रही है. 54 साल के भारतीय नागरिक निखिल उर्फ निक ने अमेरिकी अदालत में पन्नू की सुपारी देकर हत्या की कोशिश, हत्या की साजिश और मनी लांड्रिंग की साजिश जैसे तीन गंभीर आरोपों में दोषी होने की बात मानी. जून 2023 में चेक रिपब्लिक में निखिल को गिरफ्तार किया गया था और बाद में मुकदमा चलाने के लिए न्यूयॉर्क भेज दिया गया. ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत सरकार राजनयिक पहल के जरिए निखिल गुप्ता को माफी या सजा कम करवा सकती है?

पिछले दिनों खालिस्तानी अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की न्यूयॉर्क में हत्या की कथित साजिश के मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. निखिल गुप्ता ने 13 फरवरी 2026 को न्यूयॉर्क की एक फेडरल कोर्ट में अपना गुनाह कबूल कर लिया है. निखिल पर आरोप है कि उन्होंने भारत सरकार के एक पूर्व अधिकारी के निर्देश पर पन्नू की हत्या के लिए एक ‘हिटमैन’ यानी किराए का हत्यारा हायर करने की कोशिश की थी. अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, निखिल गुप्ता को इन आरोपों के तहत अधिकतम 24 से 40 साल तक की जेल हो सकती है. सजा का औपचारिक ऐलान 29 मई 2026 को होना तय हुआ है.

कौन हैं निखिल गुप्ता और क्या हैं उन पर आरोप?

निखिल गुप्ता भारत का नागरिक है और गिरफ्तारी से पहले यहीं रहता था. उसने खुद को नशीले पदार्थों और हथियारों का इंटरनेशनल डीलर बताया. उसका एक खास आदमी विकास यादव भी था. वह भी आरोपी है. यादव पर आरोप है कि वह भारत की विदेशी खुफिया सर्विस रिसर्च एंड एनालिसिस विंग में काम करता है. हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है. निखिल ने इसके लिए एक व्यक्ति से संपर्क किया, जो अनजाने में अमेरिकी एजेंसी ‘ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन’ (DEA) का एक गुप्त सूत्र निकला. निखिल ने $1,00,000 लगभग ₹83 लाख में पन्नू की हत्या का सौदा किया और $15,000 एडवांस भी दिए. जून 2023 में जब वे चेक रिपब्लिक की यात्रा पर थे, तब उन्हें स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और जून 2024 में अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया.

क्या भारत सरकार की पहल से वे बाहर आ सकते हैं?

निखिल गुप्ता के जेल से बाहर आने या भारत लौटने की संभावनाओं को लेकर कानूनी विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है. इसके कुछ मुख्य पहलू इस प्रकार हैं:

सरकार का आधिकारिक रुख: भारत सरकार ने शुरू से ही इस साजिश में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ कहा है कि पन्नू की हत्या की साजिश रचना सरकारी नीति के खिलाफ है. हालांकि, भारत ने इस मामले की जांच के लिए एक ‘हाई-लेवल इंक्वायरी कमेटी’ बनाई है.

दोष स्वीकार (Guilty Plea) का असर: निखिल द्वारा गुनाह कबूल करने के बाद अब केस ट्रायल पर नहीं जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि उन्होंने ‘स्वीकारोक्ति’ (Acceptance of Responsibility) के बदले सजा में कुछ रियायत पाने के लिए यह समझौता किया होगा.

राजनयिक हस्तक्षेप: भारत सरकार उन्हें ‘कॉन्सुलर एक्सेस’ (राजनयिक मदद) प्रदान कर रही है, लेकिन अमेरिकी कानून के तहत सजा पाने के बाद उन्हें सीधे रिहा करवाना लगभग असंभव है. केवल ‘प्रिजनर ट्रांसफर ट्रीटी’ (कैदियों के स्थानांतरण की संधि) के तहत ही यह संभव हो सकता है कि वे अपनी बाकी की सजा भारत की जेल में काटें, लेकिन इसके लिए अमेरिका की सहमति अनिवार्य है.

अदालत में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान निखिल गुप्ता ने स्वीकार किया कि उन्होंने पन्नू की हत्या के लिए साजिश रची थी. एफबीआई (FBI) ने इस मामले को ‘ट्रांसनेशनल रिप्रेशन’ यानी किसी देश द्वारा दूसरे देश की धरती पर अपने विरोधियों को दबाने की कोशिश बताया है. पन्नू, जो ‘सिख फॉर जस्टिस’ का नेता है और अमेरिका-कनाडा की दोहरी नागरिकता रखता है, भारत में एक घोषित आतंकवादी है. लेकिन अमेरिका ने इसे ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ पर हमला मानते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया है.

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पिछले दिनों खालिस्तानी अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की न्यूयॉर्क में हत्या की कथित साजिश के मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. निखिल गुप्ता ने 13 फरवरी 2026 को न्यूयॉर्क की एक फेडरल कोर्ट में अपना गुनाह कबूल कर लिया है. निखिल पर आरोप है कि उन्होंने भारत सरकार के एक पूर्व अधिकारी के निर्देश पर पन्नू की हत्या के लिए एक ‘हिटमैन’ यानी किराए का हत्यारा हायर करने की कोशिश की थी. अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, निखिल गुप्ता को इन आरोपों के तहत अधिकतम 24 से 40 साल तक की जेल हो सकती है. सजा का औपचारिक ऐलान 29 मई 2026 को होना तय हुआ है.

कौन हैं निखिल गुप्ता और क्या हैं उन पर आरोप?

निखिल गुप्ता भारत का नागरिक है और गिरफ्तारी से पहले यहीं रहता था. उसने खुद को नशीले पदार्थों और हथियारों का इंटरनेशनल डीलर बताया. उसका एक खास आदमी विकास यादव भी था. वह भी आरोपी है. यादव पर आरोप है कि वह भारत की विदेशी खुफिया सर्विस रिसर्च एंड एनालिसिस विंग में काम करता है. हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है. निखिल ने इसके लिए एक व्यक्ति से संपर्क किया, जो अनजाने में अमेरिकी एजेंसी ‘ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन’ (DEA) का एक गुप्त सूत्र निकला. निखिल ने $1,00,000 लगभग ₹83 लाख में पन्नू की हत्या का सौदा किया और $15,000 एडवांस भी दिए. जून 2023 में जब वे चेक रिपब्लिक की यात्रा पर थे, तब उन्हें स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और जून 2024 में अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया.

क्या भारत सरकार की पहल से वे बाहर आ सकते हैं?

निखिल गुप्ता के जेल से बाहर आने या भारत लौटने की संभावनाओं को लेकर कानूनी विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है. इसके कुछ मुख्य पहलू इस प्रकार हैं:

सरकार का आधिकारिक रुख: भारत सरकार ने शुरू से ही इस साजिश में किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने साफ कहा है कि पन्नू की हत्या की साजिश रचना सरकारी नीति के खिलाफ है. हालांकि, भारत ने इस मामले की जांच के लिए एक ‘हाई-लेवल इंक्वायरी कमेटी’ बनाई है.

दोष स्वीकार (Guilty Plea) का असर: निखिल द्वारा गुनाह कबूल करने के बाद अब केस ट्रायल पर नहीं जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि उन्होंने ‘स्वीकारोक्ति’ (Acceptance of Responsibility) के बदले सजा में कुछ रियायत पाने के लिए यह समझौता किया होगा.

राजनयिक हस्तक्षेप: भारत सरकार उन्हें ‘कॉन्सुलर एक्सेस’ (राजनयिक मदद) प्रदान कर रही है, लेकिन अमेरिकी कानून के तहत सजा पाने के बाद उन्हें सीधे रिहा करवाना लगभग असंभव है. केवल ‘प्रिजनर ट्रांसफर ट्रीटी’ (कैदियों के स्थानांतरण की संधि) के तहत ही यह संभव हो सकता है कि वे अपनी बाकी की सजा भारत की जेल में काटें, लेकिन इसके लिए अमेरिका की सहमति अनिवार्य है.

अदालत में क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान निखिल गुप्ता ने स्वीकार किया कि उन्होंने पन्नू की हत्या के लिए साजिश रची थी. एफबीआई (FBI) ने इस मामले को ‘ट्रांसनेशनल रिप्रेशन’ यानी किसी देश द्वारा दूसरे देश की धरती पर अपने विरोधियों को दबाने की कोशिश बताया है. पन्नू, जो ‘सिख फॉर जस्टिस’ का नेता है और अमेरिका-कनाडा की दोहरी नागरिकता रखता है, भारत में एक घोषित आतंकवादी है. लेकिन अमेरिका ने इसे ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ पर हमला मानते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया है.

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