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Indias New Military Structure: Joint Theatre Command by 2026

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नई दिल्ली28 मिनट पहलेलेखक: मुकेश कौशिक

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तस्वीर में बाएं से नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी, CDS अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह- फाइल फोटो।

देश के सैन्य ढांचे में अब तक के सबसे बड़े बदलाव का खाका तैयार हो चुका है। थलसेना, वायुसेना और नौसेना अब संयुक्त थिएटर कमान के तहत काम करेंगी। संयुक्त थिएटर कमान पर 5 साल से मंथन जारी था। नया ढांचा 3 महीने में औपचारिक रूप से सामने आ जाएगा।

इससे भारत के पास किसी भी सैन्य संघर्ष से निपटने के लिए इंटीग्रेटेड, फास्ट और जॉइंट कमांड इन्फ्रास्ट्रक्चर रहेगा। निर्णय लेने में 60-70% तक तेजी आएगी। वहीं, 15-20% तक संसाधनों की भी बचत होगी। पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों पर तैयारी और बेहतर होगी।

गौरतलब है कि ‎अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और‎ ब्रिटेन सहित दुनिया के कई देशों में‎ सैन्य तंत्र संयुक्त थिएटर कमान के‎ तहत ही ऑपरेट करता है। चीन में 5 ‎जबकि अमेरिका में 11 कमान हैं।‎

10 साल में 5 बार चीन-पाकिस्तान से टकराव के बाद तैयार हुआ ढांचा

सैन्य सूत्रों के अनुसार, एक दशक में पाकिस्तान और चीन के साथ हुए 5 टकरावों से मिले कौशल, चुनौतियों और खामियों को फिल्टर कर नया ढांचा तैयार किया है। इनमें, पाकिस्तान के खिलाफ 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक और 2025 में 88 घंटे चला ऑपरेशन सिंदूर शामिल है। वहीं, चीन के खिलाफ 2017 के डोकलाम और 2020 के गलवान संघर्ष के सबक शामिल हैं।

इस प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के अनुसार अलग-अलग सेवाओं की स्वतंत्र कार्रवाई में कम्युनिकेशन गैप और रिसोर्स ओवरलैप जैसी समस्याएं सामने आईं।

ऑपरेशन सिंदूर में पहली बार 88 ‎घंटे के भीतर तीनों सेनाओं का कम्पलीट इंटीग्रेशन देखा गया। मिसाइल‎ स्ट्राइक्स, ड्रोन स्वार्म, इलेक्ट्रॉनिक‎ वारफेयर और ग्राउंड फोर्स का ‎तालमेल भरपूर रहा।

आजादी के बाद सबसे बड़ा सैन्य सुधार

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एसएल नरसिम्हन के मुताबिक- यह 1947 के बाद सबसे बड़ा सैन्य‎ ओवरहॉल है। मई 2026 में पहली ‎थिएटर कमान सक्रिय होने पर हमारी ‎सेनाएं न सिर्फ जॉइंट होंगी, बल्कि ‎थिएटर-रेडी भी होंगी। ठीक ऑपरेशन‎ सिंदूर के 88 घंटों की तरह। हर ‎थिएटर में साइबर, स्पेस और स्पेशल‎ ऑपरेशंस सब-कमांड होंगी। तीनों‎ सेनाओं का कॉमन सप्लाई चेन और ‎मेंटेनेंस होगा। इंटेलिजेंस फ्यूजन‎ सेंटर्स होंगे। दो मोर्चों पर युद्ध के ‎प्रोटोकोल होंगे। संसाधन साझा करने ‎की ऑटोमैटिक व्यवस्था होगी। हर ‎थिएटर में साल में कम से कम दो ‎फुल-स्केल जॉइंट एक्सरसाइज होंगी।‎

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तस्वीर में बाएं से नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी, CDS अनिल चौहान, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह- फाइल फोटो।

देश के सैन्य ढांचे में अब तक के सबसे बड़े बदलाव का खाका तैयार हो चुका है। थलसेना, वायुसेना और नौसेना अब संयुक्त थिएटर कमान के तहत काम करेंगी। संयुक्त थिएटर कमान पर 5 साल से मंथन जारी था। नया ढांचा 3 महीने में औपचारिक रूप से सामने आ जाएगा।

इससे भारत के पास किसी भी सैन्य संघर्ष से निपटने के लिए इंटीग्रेटेड, फास्ट और जॉइंट कमांड इन्फ्रास्ट्रक्चर रहेगा। निर्णय लेने में 60-70% तक तेजी आएगी। वहीं, 15-20% तक संसाधनों की भी बचत होगी। पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों पर तैयारी और बेहतर होगी।

गौरतलब है कि ‎अमेरिका, चीन, रूस, फ्रांस और‎ ब्रिटेन सहित दुनिया के कई देशों में‎ सैन्य तंत्र संयुक्त थिएटर कमान के‎ तहत ही ऑपरेट करता है। चीन में 5 ‎जबकि अमेरिका में 11 कमान हैं।‎

10 साल में 5 बार चीन-पाकिस्तान से टकराव के बाद तैयार हुआ ढांचा

सैन्य सूत्रों के अनुसार, एक दशक में पाकिस्तान और चीन के साथ हुए 5 टकरावों से मिले कौशल, चुनौतियों और खामियों को फिल्टर कर नया ढांचा तैयार किया है। इनमें, पाकिस्तान के खिलाफ 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक और 2025 में 88 घंटे चला ऑपरेशन सिंदूर शामिल है। वहीं, चीन के खिलाफ 2017 के डोकलाम और 2020 के गलवान संघर्ष के सबक शामिल हैं।

इस प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के अनुसार अलग-अलग सेवाओं की स्वतंत्र कार्रवाई में कम्युनिकेशन गैप और रिसोर्स ओवरलैप जैसी समस्याएं सामने आईं।

ऑपरेशन सिंदूर में पहली बार 88 ‎घंटे के भीतर तीनों सेनाओं का कम्पलीट इंटीग्रेशन देखा गया। मिसाइल‎ स्ट्राइक्स, ड्रोन स्वार्म, इलेक्ट्रॉनिक‎ वारफेयर और ग्राउंड फोर्स का ‎तालमेल भरपूर रहा।

आजादी के बाद सबसे बड़ा सैन्य सुधार

रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एसएल नरसिम्हन के मुताबिक- यह 1947 के बाद सबसे बड़ा सैन्य‎ ओवरहॉल है। मई 2026 में पहली ‎थिएटर कमान सक्रिय होने पर हमारी ‎सेनाएं न सिर्फ जॉइंट होंगी, बल्कि ‎थिएटर-रेडी भी होंगी। ठीक ऑपरेशन‎ सिंदूर के 88 घंटों की तरह। हर ‎थिएटर में साइबर, स्पेस और स्पेशल‎ ऑपरेशंस सब-कमांड होंगी। तीनों‎ सेनाओं का कॉमन सप्लाई चेन और ‎मेंटेनेंस होगा। इंटेलिजेंस फ्यूजन‎ सेंटर्स होंगे। दो मोर्चों पर युद्ध के ‎प्रोटोकोल होंगे। संसाधन साझा करने ‎की ऑटोमैटिक व्यवस्था होगी। हर ‎थिएटर में साल में कम से कम दो ‎फुल-स्केल जॉइंट एक्सरसाइज होंगी।‎

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