Wednesday, 07 Oct 2026 | 06:34 PM

Trending :

EXCLUSIVE

Naomi was criticized for withdrawing from the French Open, Naomi Osaka

Naomi was criticized for withdrawing from the French Open, Naomi Osaka
  • Hindi News
  • Sports
  • Naomi Was Criticized For Withdrawing From The French Open, Naomi Osaka

न्यूयॉर्क13 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

मशहूर टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका।- फाइल फोटो

दुनिया अक्सर कामयाबी को सिर्फ उपलब्धियों में मापती है। कितने मैच जीते, कितने रिकॉर्ड बनाए, कितनी बार लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरे। लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि किसी इंसान की असली ताकत सिर्फ उसके किए हुए कामों में नहीं, बल्कि उन चीजों में भी छिपी होती है जिन्हें करने से उसने इनकार किया। दुनिया की मशहूर टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने सिर्फ जीतना नहीं सीखा, बल्कि सही समय पर ‘ना’ कहना भी सीखा और शायद यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।

जापान की ओसाका जैसे-जैसे सफल होती गईं, वैसे-वैसे उनके आसपास उम्मीदों का दायरा भी बढ़ता गया जैसे कि शानदार प्रदर्शन, मुस्कुराहट, इंटरव्यू, हर मंच पर मौजूदगी। ओसाका भी लंबे समय तक हर किसी को खुश रखने की कोशिश करती रहीं। वे बताती हैं, ‘मुझे हमेशा लगता था कि अगर मैंने किसी चीज के लिए मना किया तो लोग निराश हो जाएंगे।’ लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बोझ बनने लगी। लगातार काम, मानसिक दबाव, खुद को हर समय साबित करने की कोशिश ने उन्हें थका दिया। बाहर से वे सफल खिलाड़ी दिखती थीं, लेकिन अंदर एक संघर्ष चल रहा था।

फिर उन्होंने साल 2021 के फ्रेंच ओपन से हटने का फैसला कर लिया। यह फैसला खेल जगत के लिए चौंकाने वाला था। आलोचना भी हुई, सवाल भी उठे। लेकिन ओसाका के लिए यह सिर्फ एक फैसला नहीं था, बल्कि खुद को बचाने की शुरुआत थी। वे कहती हैं, ‘उस समय मैंने पहली बार समझा कि मुझे हर वह चीज करने की जरूरत नहीं है, जिसकी लोग मुझसे उम्मीद करते हैं। खुद को बचाना भी जरूरी होता है।’ यही वह मोड़ था, जहां ‘ना’ कहना उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। उन्होंने महसूस किया कि हर बार दूसरों को खुश करने की कोशिश में इंसान खुद को खो देता है। कई बार इंकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि खुद के प्रति जिम्मेदारी होती है।

ओसाका ने धीरे-धीरे सीमाएं तय करनी शुरू कीं। उन्होंने उन कामों से दूरी बनानी शुरू की, जिनमें उनका मन नहीं लगता था। मानसिक शांति को प्राथमिकता देना सीखा। मां बनने के बाद उनकी सोच और मजबूत हो गई। अब उनका हर फैसला सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि बेटी के लिए भी था। ओसाका ने बताया, ‘अब जब मैं ‘ना’ कहती हूं, तो अपराधबोध नहीं होता क्योंकि मैं जानती हूं कि मैं अपनी शांति और परिवार की सुरक्षा के लिए ऐसा कर रही हूं।’

28 वर्षीय ओसाका की कहानी सिर्फ सफल खिलाड़ी की कहानी नहीं है। यह उस इंसान की कहानी है, जिसने दुनिया को समझाया कि सफलता सिर्फ हर मौके को पकड़ने से नहीं मिलती। कई बार जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए यह तय करना जरूरी होता है कि हमें क्या नहीं करना है, और शायद इसी वजह से उनका सबसे मजबूत हथियार कोई टेनिस शॉट नहीं, बल्कि सही समय पर कहा गया एक छोटा-सा ‘ना’ बन गया।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
IPL में आज दिल्ली vs कोलकाता:प्लेऑफ की रेस में बने रहने के लिए कैपिटल्स को जीत जरूरी, नाइटराइडर्स ने पिछले तीनों मैच जीते

May 8, 2026/
5:10 am

IPL में आज दिल्ली कैपिटल्स का सामना कोलकाता नाइट राइडर्स से होगा। मैच दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में शाम...

Preet Singh Mumbai Club Assault Claims

April 28, 2026/
9:34 am

12 मिनट पहले कॉपी लिंक टीवी शो स्प्लिट्सविला में नजर आईं प्रीत सिंह ने दावा किया कि मुंबई के एक...

पंजाबी सिंगर करण औजला जयपुर में करेंगे परफॉर्म:5 अप्रैल को JECC ग्राउंड में कॉन्सर्ट; 1999 से लेकर 5.90 लाख तक के टिकट

April 1, 2026/
3:56 pm

पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के सिंगर करण औजला का 5 अप्रैल को कॉन्सर्ट होगा। इसका आयोजन सीतापुरा स्थित जेईसीसी ग्राउंड में...

पिता की सलाह पर क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की धमाकेदार पारी:बोले- दुविधा में था बेटा, हमने कहा- दबाव में मत आओ; टी-20 वर्ल्डकप में अर्धशतक बनाया

March 11, 2026/
9:07 am

भारतीय क्रिकेट टीम की टी20 वर्ल्ड कप जीत में अमृतसर के युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की धमाकेदार पारी ने अहम...

मिडिल-ईस्ट जंग: कांग्रेस के 4 बड़े नेता सरकार के साथ:राहुल गांधी से अलग राय रखी; LPG संकट पर कहा- सिर्फ माहौल बनाया जा रहा है

April 4, 2026/
1:13 pm

कांग्रेस के चार बड़े नेता मिडिल ईस्ट जंग और एलपीजी संकट पर पार्टी लाइन से हटकर बात कर रहे हैं।...

IPL में आज गुजरात vs चेन्नई:प्लेऑफ की रेस के लिए चेन्नई को जीतना ही होगा; गुजरात की नजर टॉप-2 पर

May 21, 2026/
4:30 am

IPL 2026 का 66वां मुकाबला आज गुजरात टाइटंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच खेला जाएगा। मुकाबला अहमदाबाद के नरेंद्र...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

Naomi was criticized for withdrawing from the French Open, Naomi Osaka

Naomi was criticized for withdrawing from the French Open, Naomi Osaka
  • Hindi News
  • Sports
  • Naomi Was Criticized For Withdrawing From The French Open, Naomi Osaka

न्यूयॉर्क13 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

मशहूर टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका।- फाइल फोटो

दुनिया अक्सर कामयाबी को सिर्फ उपलब्धियों में मापती है। कितने मैच जीते, कितने रिकॉर्ड बनाए, कितनी बार लोगों की उम्मीदों पर खरे उतरे। लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि किसी इंसान की असली ताकत सिर्फ उसके किए हुए कामों में नहीं, बल्कि उन चीजों में भी छिपी होती है जिन्हें करने से उसने इनकार किया। दुनिया की मशहूर टेनिस खिलाड़ी नाओमी ओसाका की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने सिर्फ जीतना नहीं सीखा, बल्कि सही समय पर ‘ना’ कहना भी सीखा और शायद यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया।

जापान की ओसाका जैसे-जैसे सफल होती गईं, वैसे-वैसे उनके आसपास उम्मीदों का दायरा भी बढ़ता गया जैसे कि शानदार प्रदर्शन, मुस्कुराहट, इंटरव्यू, हर मंच पर मौजूदगी। ओसाका भी लंबे समय तक हर किसी को खुश रखने की कोशिश करती रहीं। वे बताती हैं, ‘मुझे हमेशा लगता था कि अगर मैंने किसी चीज के लिए मना किया तो लोग निराश हो जाएंगे।’ लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बोझ बनने लगी। लगातार काम, मानसिक दबाव, खुद को हर समय साबित करने की कोशिश ने उन्हें थका दिया। बाहर से वे सफल खिलाड़ी दिखती थीं, लेकिन अंदर एक संघर्ष चल रहा था।

फिर उन्होंने साल 2021 के फ्रेंच ओपन से हटने का फैसला कर लिया। यह फैसला खेल जगत के लिए चौंकाने वाला था। आलोचना भी हुई, सवाल भी उठे। लेकिन ओसाका के लिए यह सिर्फ एक फैसला नहीं था, बल्कि खुद को बचाने की शुरुआत थी। वे कहती हैं, ‘उस समय मैंने पहली बार समझा कि मुझे हर वह चीज करने की जरूरत नहीं है, जिसकी लोग मुझसे उम्मीद करते हैं। खुद को बचाना भी जरूरी होता है।’ यही वह मोड़ था, जहां ‘ना’ कहना उनकी सबसे बड़ी ताकत बन गया। उन्होंने महसूस किया कि हर बार दूसरों को खुश करने की कोशिश में इंसान खुद को खो देता है। कई बार इंकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि खुद के प्रति जिम्मेदारी होती है।

ओसाका ने धीरे-धीरे सीमाएं तय करनी शुरू कीं। उन्होंने उन कामों से दूरी बनानी शुरू की, जिनमें उनका मन नहीं लगता था। मानसिक शांति को प्राथमिकता देना सीखा। मां बनने के बाद उनकी सोच और मजबूत हो गई। अब उनका हर फैसला सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि बेटी के लिए भी था। ओसाका ने बताया, ‘अब जब मैं ‘ना’ कहती हूं, तो अपराधबोध नहीं होता क्योंकि मैं जानती हूं कि मैं अपनी शांति और परिवार की सुरक्षा के लिए ऐसा कर रही हूं।’

28 वर्षीय ओसाका की कहानी सिर्फ सफल खिलाड़ी की कहानी नहीं है। यह उस इंसान की कहानी है, जिसने दुनिया को समझाया कि सफलता सिर्फ हर मौके को पकड़ने से नहीं मिलती। कई बार जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए यह तय करना जरूरी होता है कि हमें क्या नहीं करना है, और शायद इसी वजह से उनका सबसे मजबूत हथियार कोई टेनिस शॉट नहीं, बल्कि सही समय पर कहा गया एक छोटा-सा ‘ना’ बन गया।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.