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NATO Countries Increase Defense Spending Amid Rising Russia Conflict Threat

NATO Countries Increase Defense Spending Amid Rising Russia Conflict Threat

कोपेनहेगन/वॉशिंगटन5 मिनट पहले

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यूक्रेन में चल रही जंग के बीच यूरोप के नाटो देश रूस से संभावित टकराव की तैयारी में जुट गए हैं। अब नाटो देश हथियार, सैनिक और सुरक्षा ढाचे पर ज्यादा खर्च करेंगें।

रूस लगातार यूरोपीय देशों को चेतावनी दे रहा है। पिछले हफ्ते BRICS समिट के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि अगर यूरोपीय देश यूक्रेन में अपने सैनिक तैनात करते हैं तो यह युद्ध माना जाएगा।

इधर ट्रम्प भी यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा पर ज्यादा खर्च करने के लिए कई बार कह चुके हैं। ऐसे में शुक्रवार और शनिवार को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में नाटो के 32 सदस्य देशों के रक्षा प्रमुख मिले हैं।

नाटो देश GDP का 5% सुरक्षा पर खर्च करेंगें

बैठक की अगुआई इटली के एडमिरल ज्यूसेप कावो द्रागोने ने की है। नाटो देशों ने 2035 तक रक्षा और सुरक्षा पर अपनी GDP का 5% खर्च करने का लक्ष्य रखा है।

इसमें 3.5% पैसा सीधे सेना और हथियारों पर खर्च होगा। बाकी 1.5% सड़कों, कम्यूनिकेशन, साइबर सुरक्षा और ऐसे दूसरे कामों पर लगाया जाएगा, जो युद्ध या बड़े संकट के समय काम आते हैं।

यानी आने वाले सालों में यूरोप के देश सिर्फ ज्यादा हथियार ही नहीं खरीदेंगे, बल्कि सैनिकों की ट्रेनिंग, सैन्य ठिकानों और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर भी खर्च बढ़ाएंगे।

इसी तैयारी के तहत अलग-अलग देशों ने अपने स्तर पर भी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

जर्मनी में पुराने मेडिकल बंकर फिर खोलने की तैयारी

जर्मनी में 1979 में बनाए गए मेडिकल बंकरों को दोबारा इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है। इनका मकसद युद्ध या बड़े हमले की स्थिति में घायलों के इलाज की व्यवस्था करना है।

नॉर्वे भी युद्ध जैसी स्थिति के लिए अपने अस्पतालों की तैयारी बढ़ा रहा है। वहां 7 हजार बेड युद्ध में घायल सैनिकों और आम लोगों के इलाज के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी है।

नॉर्वे में सेना और अस्पताल मिलकर घायल लोगों को निकालने और उनका इलाज करने की तैयारी भी कर रहे हैं।

ट्रम्प ने कहा था- यूरोपीय देश अमेरिका पर ज्यादा निर्भर न रहें

नाटो देशों का रक्षा खर्च बढ़ाने के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दबाव भी एक बड़ी वजह है। ट्रम्प लंबे समय से यूरोपीय देशों से अपनी सुरक्षा पर ज्यादा पैसा खर्च करने की मांग करते रहे हैं।

उनका कहना है कि यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए।

पिछले साल हेग में हुए नाटो सम्मेलन में सदस्य देशों ने 2035 तक GDP का 5% रक्षा और सुरक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य रखा था।

इसके साथ यूक्रेन युद्ध ने भी यूरोप को अपनी सैन्य तैयारी बढ़ाने पर मजबूर किया है। युद्ध के दौरान ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस जैसे क्षेत्रों में यूरोपीय देशों की जरूरतें सामने आई हैं। नाटो अब इन कमियों को दूर करने पर भी जोर दे रहा है।

ब्रिटेन से लेकर पोलैंड तक तैयारी तेज

पोलैंड

2027 से हर साल 1 लाख लोगों को सैन्य ट्रेनिंग देने का लक्ष्य है। कुल 5 लाख लोगों को ट्रेनिंग देने की योजना है।

ब्रिटेन

गोला-बारूद और विस्फोटक बनाने की 6 नई फैक्ट्रियां बनाई जाएंगी। ब्रिटेन देश में बने लंबी दूरी के 7 हजार हथियार खरीदने की योजना भी बना रहा है।

लिथुआनिया

इस साल करीब 5 हजार युवाओं को अनिवार्य सैन्य सेवा के लिए बुलाने की योजना है।

स्वीडन

लोगों से संकट की स्थिति के लिए कम से कम 7 दिन की जरूरी चीजें घर में रखने को कहा गया है।

यूरोप में हथियारों की खरीद तेजी से बढ़ी

यूरोप के नाटो देश अपनी सैन्य जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में दूसरे देशों से हथियार खरीद रहे हैं।SIPRI के मुताबिक, 2016-20 के मुकाबले 2021-25 में यूरोप के 29 नाटो देशों का हथियार आयात 143% बढ़ा। इस दौरान इन देशों के हथियार आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 58% रही।

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यूक्रेन में चल रही जंग के बीच यूरोप के नाटो देश रूस से संभावित टकराव की तैयारी में जुट गए हैं। अब नाटो देश हथियार, सैनिक और सुरक्षा ढाचे पर ज्यादा खर्च करेंगें।

रूस लगातार यूरोपीय देशों को चेतावनी दे रहा है। पिछले हफ्ते BRICS समिट के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि अगर यूरोपीय देश यूक्रेन में अपने सैनिक तैनात करते हैं तो यह युद्ध माना जाएगा।

इधर ट्रम्प भी यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा पर ज्यादा खर्च करने के लिए कई बार कह चुके हैं। ऐसे में शुक्रवार और शनिवार को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में नाटो के 32 सदस्य देशों के रक्षा प्रमुख मिले हैं।

नाटो देश GDP का 5% सुरक्षा पर खर्च करेंगें

बैठक की अगुआई इटली के एडमिरल ज्यूसेप कावो द्रागोने ने की है। नाटो देशों ने 2035 तक रक्षा और सुरक्षा पर अपनी GDP का 5% खर्च करने का लक्ष्य रखा है।

इसमें 3.5% पैसा सीधे सेना और हथियारों पर खर्च होगा। बाकी 1.5% सड़कों, कम्यूनिकेशन, साइबर सुरक्षा और ऐसे दूसरे कामों पर लगाया जाएगा, जो युद्ध या बड़े संकट के समय काम आते हैं।

यानी आने वाले सालों में यूरोप के देश सिर्फ ज्यादा हथियार ही नहीं खरीदेंगे, बल्कि सैनिकों की ट्रेनिंग, सैन्य ठिकानों और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर भी खर्च बढ़ाएंगे।

इसी तैयारी के तहत अलग-अलग देशों ने अपने स्तर पर भी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

जर्मनी में पुराने मेडिकल बंकर फिर खोलने की तैयारी

जर्मनी में 1979 में बनाए गए मेडिकल बंकरों को दोबारा इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है। इनका मकसद युद्ध या बड़े हमले की स्थिति में घायलों के इलाज की व्यवस्था करना है।

नॉर्वे भी युद्ध जैसी स्थिति के लिए अपने अस्पतालों की तैयारी बढ़ा रहा है। वहां 7 हजार बेड युद्ध में घायल सैनिकों और आम लोगों के इलाज के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी है।

नॉर्वे में सेना और अस्पताल मिलकर घायल लोगों को निकालने और उनका इलाज करने की तैयारी भी कर रहे हैं।

ट्रम्प ने कहा था- यूरोपीय देश अमेरिका पर ज्यादा निर्भर न रहें

नाटो देशों का रक्षा खर्च बढ़ाने के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दबाव भी एक बड़ी वजह है। ट्रम्प लंबे समय से यूरोपीय देशों से अपनी सुरक्षा पर ज्यादा पैसा खर्च करने की मांग करते रहे हैं।

उनका कहना है कि यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए।

पिछले साल हेग में हुए नाटो सम्मेलन में सदस्य देशों ने 2035 तक GDP का 5% रक्षा और सुरक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य रखा था।

इसके साथ यूक्रेन युद्ध ने भी यूरोप को अपनी सैन्य तैयारी बढ़ाने पर मजबूर किया है। युद्ध के दौरान ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस जैसे क्षेत्रों में यूरोपीय देशों की जरूरतें सामने आई हैं। नाटो अब इन कमियों को दूर करने पर भी जोर दे रहा है।

ब्रिटेन से लेकर पोलैंड तक तैयारी तेज

पोलैंड

2027 से हर साल 1 लाख लोगों को सैन्य ट्रेनिंग देने का लक्ष्य है। कुल 5 लाख लोगों को ट्रेनिंग देने की योजना है।

ब्रिटेन

गोला-बारूद और विस्फोटक बनाने की 6 नई फैक्ट्रियां बनाई जाएंगी। ब्रिटेन देश में बने लंबी दूरी के 7 हजार हथियार खरीदने की योजना भी बना रहा है।

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