Saturday, 18 Apr 2026 | 01:37 AM

Trending :

तमिलनाडु में ट्रैवलर सड़क से उतरी; 8 की मौत:केरलम के 13 पर्यटक सवार थे; हेयरपिन मोड़ पर हादसा; 5 की हालत गंभीर ग्वालियर में तेज रफ्तार ट्रक टैंकर से टकराया:चालक केबिन में फंसा, लोहे की बॉडी काटकर निकाला गया; हाईवे पर लग गया था जाम Gwalior Fort Influencer Controversy | Russian Woman Vulgar Video अपहरण-दुष्कर्म के आरोपी को 20-20 साल की सजा:इंदौर में दो साल पुराने केस में फैसला; अन्य धाराओं में भी 4 साल का कारावास भोपाल में बनी देश की पहली सीमेंट-रहित राख से सड़क:21 दिन में मजबूत बनने वाली नई तकनीक का सफल प्रयोग इंदौर-मुंबई सेंट्रल के बीच चलेगी नई एसी सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन:तेजस बंद होने के बाद यात्रियों को मिली बड़ी राहत, 21 अप्रैल से होगी शुरू
EXCLUSIVE

भोपाल में बनी देश की पहली सीमेंट-रहित राख से सड़क:21 दिन में मजबूत बनने वाली नई तकनीक का सफल प्रयोग

भोपाल में बनी देश की पहली सीमेंट-रहित राख से सड़क:21 दिन में मजबूत बनने वाली नई तकनीक का सफल प्रयोग

भोपाल में कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। CSIR- एडवांस मटेरियल एंड प्रोसेस रिसर्च इंस्टिट्यूट (एम्प्री)ने देश की पहली ऐसी सड़क विकसित की है, जिसमें सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह सड़क बिजली संयंत्रों से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राख) और जियोपॉलिमर तकनीक की मदद से तैयार की गई है। पहले हो गई थी शुरुआत इस परियोजना की शुरुआत 2 फरवरी को एन कलईसेल्वी द्वारा की गई थी, जबकि इसका औपचारिक शुभारंभ विनोद कुमार की उपस्थिति में हुआ। इस नई तकनीक के कई पर्यावरणीय और तकनीकी फायदे हैं। पारंपरिक सीमेंट सड़कों की तुलना में इसमें कार्बन उत्सर्जन लगभग 83% तक कम होता है और निर्माण के दौरान 80% कम ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। सबसे खास बात यह है कि इस सड़क को बनाने के बाद पानी से क्योरिंग (तराई) की जरूरत नहीं होती। मजबूती की बात करें तो यह सड़क केवल 21 दिन में 35 से 40 एमपीए तक की ताकत हासिल कर लेती है, जो सामान्य सीमेंट से बनी सड़कों के बराबर मानी जाती है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
रसोई-गैस-चूल्हे की लौ का रंग बदलने से हो सकती हैं अस्थमा-सिरदर्द जैसी बीमारियाँ, जानिए हेल्थ-टिप्स

February 19, 2026/
8:43 am

बर्नर गैसर स्टूडियो रंग | छवि: एआई घर पर गैस स्टोव बर्नर को कैसे साफ़ करें: घर में रोजाना खाना...

कांग्रेस MLA बोले-पार्टी विधायक चोरी-चोरी CM सैनी से मिलते हैं:हुड्डा के लिए 20 साल तंवर-सैलजा से लड़ा, दिल टूट गया; हाईकमान से बात करूंगा

March 21, 2026/
5:00 am

हरियाणा राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग में नाम आने और नोटिस जारी होने के बाद रतिया से कांग्रेस विधायक जरनैल...

मोहन बड़ोदिया कॉलेज के पास मिला बुजुर्ग का शव:मृतक सिकलीगर समाज के बताए गए, पुलिस ने लाश कब्जे में ली

April 12, 2026/
8:43 pm

शाजापुर जिले के मोहन बड़ोदिया इलाके में रविवार दोपहर एक बुजुर्ग का शव मिला। कॉलेज के पास शव पड़ा होने...

भास्कर अपडेट्स:सोनिया गांधी की तबीयत बिगड़ी, दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया

March 25, 2026/
12:23 am

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मंगलवार देर शाम तबीयत बिगड़ गई। उन्हें दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल में भर्ती...

Sikar NRI Maama Bharat 1 Crore Mayra

March 12, 2026/
10:06 am

सीकर56 मिनट पहले कॉपी लिंक दुबई रहने वाले मामा ने अपने भांजे की शादी में करीब एक करोड़ रुपए का...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

भोपाल में बनी देश की पहली सीमेंट-रहित राख से सड़क:21 दिन में मजबूत बनने वाली नई तकनीक का सफल प्रयोग

भोपाल में बनी देश की पहली सीमेंट-रहित राख से सड़क:21 दिन में मजबूत बनने वाली नई तकनीक का सफल प्रयोग

भोपाल में कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। CSIR- एडवांस मटेरियल एंड प्रोसेस रिसर्च इंस्टिट्यूट (एम्प्री)ने देश की पहली ऐसी सड़क विकसित की है, जिसमें सीमेंट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह सड़क बिजली संयंत्रों से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राख) और जियोपॉलिमर तकनीक की मदद से तैयार की गई है। पहले हो गई थी शुरुआत इस परियोजना की शुरुआत 2 फरवरी को एन कलईसेल्वी द्वारा की गई थी, जबकि इसका औपचारिक शुभारंभ विनोद कुमार की उपस्थिति में हुआ। इस नई तकनीक के कई पर्यावरणीय और तकनीकी फायदे हैं। पारंपरिक सीमेंट सड़कों की तुलना में इसमें कार्बन उत्सर्जन लगभग 83% तक कम होता है और निर्माण के दौरान 80% कम ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है। सबसे खास बात यह है कि इस सड़क को बनाने के बाद पानी से क्योरिंग (तराई) की जरूरत नहीं होती। मजबूती की बात करें तो यह सड़क केवल 21 दिन में 35 से 40 एमपीए तक की ताकत हासिल कर लेती है, जो सामान्य सीमेंट से बनी सड़कों के बराबर मानी जाती है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.