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Pregnancy Gallbladder Stone Symptoms: Reason Precautions

Pregnancy Gallbladder Stone Symptoms: Reason Precautions
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8 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा

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गॉल ब्लैडर शरीर का एक छोटा लेकिन बहुत जरूरी ऑर्गन है। ये पित्त को स्टोर करता है और पाचन में मदद करता है। लेकिन महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में होने वाले हाॅर्मोनल बदलाव गॉल ब्लैडर के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण प्रेग्नेंसी में कुछ महिलाओं में गॉल ब्लैडर स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है।

‘द जर्नल ऑफ ओबेस्ट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी ऑफ इंडिया’ में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में होने वाले हॉर्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव गॉलब्लैडर स्टोन का खतरा काफी बढ़ा देते हैं। ऐसे में ये समझना जरूरी है कि आखिर ऐसा क्यों होता है।

इसलिए आज फिजिकल हेल्थ में जानेंगे-

  • प्रेग्नेंसी के दौरान गॉल ब्लैडर स्टोन क्यों होता है?
  • गॉलस्टोन के लक्षण क्या हैं?
  • इससे कैसे बचा जा सकता है?

एक्सपर्ट- डॉ. पंखुड़ी गौतम, सीनियर कंसल्टेंट, आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर

सवाल- गॉलब्लैडर का हमारे शरीर में क्या काम है?

जवाब- गॉलब्लैडर का मुख्य काम लिवर द्वारा बनाए गए बाइल जूस (पित्त) को जमा करना होता है। यह बाइल जूस खाना पचाने में शरीर की मदद करता है। इसलिए जब हम खाना खाते हैं तो गॉलब्लैडर बाइल जूस रिलीज करता है।

यह खासतौर पर फैट को एनर्जी में बदलने में मदद करता है। कुल मिलाकर गॉलब्लैडर पाचन तंत्र का एक छोटा लेकिन अहम हिस्सा है।

सवाल- गॉलब्लैडर स्टोन क्यों होता है? जवाब- कुछ कंडीशंस में गॉलब्लैडर में जमा हो रहा बाइल जूस बाहर नहीं निकल पाता, जिसके कारण स्टोन की समस्या हो सकती हैं। इसके कई कारण हैं-

  • जब बाइल जूस लंबे समय तक गॉलब्लैडर में जमा रहता है, यह पूरी तरह खाली नहीं हो पाता है।
  • जब बाइल जूस का फ्लो बहुत धीमा हो जाता है।
  • जब शरीर जरूरत से ज्यादा कोलेस्ट्रॉल बनाता है, यह गॉलब्लैडर में जमा हो जाता है।

इन कंडीशंस में बाइल जूस और कोलेस्ट्रॉल आपस में मिलकर छोटे-छोटे ठोस कण बना लेते हैं, जो आगे चलकर पथरी का रूप ले सकते हैं।

सवाल- महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान और बाद में गॉलब्लैडर स्टोन क्यों विकसित होते हैं?

जवाब- प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद महिलाओं में गॉलस्टोन की मुख्य वजह हॉर्मोनल बदलाव हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन का लेवल बढ़ जाता है। ये हॉर्मोन जरूरी होते हैं, लेकिन पित्त का संतुलन प्रभावित करते हैं।

  • एस्ट्रोजेन पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ा देता है।
  • प्रोजेस्टेरोन गॉलब्लैडर की मसल्स को सॉफ्ट कर देता है।
  • इसके कारण गॉलब्लैडर से पित्त निकलने में मुश्किल होती है।
  • लंबे समय तक गॉलब्लैडर में पित्त जमा रहने से ये कोलेस्ट्रॉल के साथ मिलकर क्रिस्टल बनाने लगता है।
  • ये क्रिस्टल धीरे-धीरे सख्त होकर गॉलस्टोन में बदल जाते हैं।

सवाल- महिलाओं में गॉलब्लैडर स्टोन विकसित होने के रिस्क फैक्टर्स क्या हैं?

जवाब- कुछ कंडीशंस महिलाओं में गॉलब्लैडर स्टोन का रिस्क बढ़ा सकती हैं। नीचे दिए ग्राफिक्स से समझिए-

सवाल- प्रेग्नेंसी के दौरान गॉलब्लैडर प्रॉब्लम के क्या लक्षण होते हैं?

जवाब- कई मामलों में गॉलस्टोन होने पर कोई लक्षण नहीं दिखता है। इन्हें ‘साइलेंट गॉलस्टोन’ कहा जाता है। इसके कारण गॉलब्लैडर के कामकाज में बहुत फर्क भी नहीं पड़ता है। लेकिन कुछ मामलों में गॉलब्लैडर में अचानक असहनीय दर्द भी हो सकता है। गॉलब्लैडर स्टोन के सभी कॉमन लक्षण ग्राफिक में देखिए-

ये लक्षण अक्सर तीसरी तिमाही या प्रसव के बाद ज्यादा दिखते हैं। ऐसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

सवाल- प्रेग्नेंसी के दौरान गॉलब्लैडर स्टोन का इलाज कैसे किया जाता है?

जवाब- अगर प्रेग्नेंसी के दौरान गॉलस्टोन डायग्नोज हुआ है, लेकिन कोई लक्षण नहीं दिख रहा है तो आमतौर पर इलाज की जरूरत नहीं होती है। हालांकि, डॉक्टर इसे लगातार मॉनीटर करते हैं, ताकि भविष्य में कोई लक्षण उभरे तो समय पर इलाज किया जा सके। अगर लक्षण गंभीर हैं या किसी कॉम्पलिकेशन का रिस्क है तो तुरंत इलाज जरूरी होता है। अगर दर्द बहुत ज्यादा है तो ‘गॉलब्लैडर रिमूवल सर्जरी’ की जरूरत पड़ सकती है।

सवाल- प्रेग्नेंसी में गॉलब्‍लैडर स्‍टोन होने पर क‍िन बातों का ख्‍याल रखें?

जवाब- प्रेग्नेंसी में गॉलब्लैडर स्टोन होने पर खानपान से लेकर लाइफस्टाइल तक ज्यादा सावधानी रखनी पड़ती है। कुछ छोटे बदलाव करके गॉलब्लैडर स्टोन से जुड़े लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता हैं। पॉइंटर्स से समझते हैं-

ऑयली फूड न खाएं: भारी और ऑयली फूड न खाएं। ज्यादा फैट और तला-भुना खाना गॉलब्लैडर पर दबाव डालता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है।

फाइबर से भरपूर डाइट लें: अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें। फाइबर न केवल पाचन को दुरुस्त रखता है, बल्कि स्टोन की समस्या में भी राहत देता है।

एक साथ ज्यादा न खाएं: पेट भरकर एक बार में खाने की बजाय, दिन भर में छोटे-छोटे मील लें। इससे पाचन तंत्र पर बोझ नहीं पड़ता और दर्द का खतरा कम हो जाता है।

हाइड्रेटेड रहें: शरीर को हमेशा हाइड्रेटेड रखें। पर्याप्त पानी पीने से पित्त (बाइल) पतला रहता है, जिससे गॉलब्लैडर में सूजन और जलन की आशंका कम हो जाती है।

स्ट्रेस मैनेज करें: प्रेग्नेंसी में तनाव हॉर्मोनल संतुलन बिगाड़ सकता है, जिसका असर गॉलब्लैडर पर भी पड़ता है। मन शांत रखने के लिए योग, मेडिटेशन करें।

साथ ही ग्राफिक में दी गई बातों का भी खास ख्याल रखें-

सवाल- प्रेग्नेंसी के दौरान गॉलब्लैडर स्टोन को कैसे रोका जा सकता है?

जवाब- प्रेग्नेंसी के दौरान गॉलस्टोन से बचाव का सबसे अच्छा तरीका हेल्दी लाइफस्टाइल और समय-समय पर हेल्थ चेकअप है।

इससे शुरुआती स्टेज में ही स्टोन का पता चल सकता है। अगर स्टोन पहले से है, तो सिर्फ डाइट बदलने से स्टोन खत्म नहीं होते, लेकिन लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

………………………….

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गॉल ब्लैडर शरीर का एक छोटा लेकिन बहुत जरूरी ऑर्गन है। ये पित्त को स्टोर करता है और पाचन में मदद करता है। लेकिन महिलाओं में प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में होने वाले हाॅर्मोनल बदलाव गॉल ब्लैडर के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं। इसी कारण प्रेग्नेंसी में कुछ महिलाओं में गॉल ब्लैडर स्टोन बनने का खतरा बढ़ जाता है।

‘द जर्नल ऑफ ओबेस्ट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी ऑफ इंडिया’ में पब्लिश स्टडी के मुताबिक, प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में होने वाले हॉर्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव गॉलब्लैडर स्टोन का खतरा काफी बढ़ा देते हैं। ऐसे में ये समझना जरूरी है कि आखिर ऐसा क्यों होता है।

इसलिए आज फिजिकल हेल्थ में जानेंगे-

  • प्रेग्नेंसी के दौरान गॉल ब्लैडर स्टोन क्यों होता है?
  • गॉलस्टोन के लक्षण क्या हैं?
  • इससे कैसे बचा जा सकता है?

एक्सपर्ट- डॉ. पंखुड़ी गौतम, सीनियर कंसल्टेंट, आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर

सवाल- गॉलब्लैडर का हमारे शरीर में क्या काम है?

जवाब- गॉलब्लैडर का मुख्य काम लिवर द्वारा बनाए गए बाइल जूस (पित्त) को जमा करना होता है। यह बाइल जूस खाना पचाने में शरीर की मदद करता है। इसलिए जब हम खाना खाते हैं तो गॉलब्लैडर बाइल जूस रिलीज करता है।

यह खासतौर पर फैट को एनर्जी में बदलने में मदद करता है। कुल मिलाकर गॉलब्लैडर पाचन तंत्र का एक छोटा लेकिन अहम हिस्सा है।

सवाल- गॉलब्लैडर स्टोन क्यों होता है? जवाब- कुछ कंडीशंस में गॉलब्लैडर में जमा हो रहा बाइल जूस बाहर नहीं निकल पाता, जिसके कारण स्टोन की समस्या हो सकती हैं। इसके कई कारण हैं-

  • जब बाइल जूस लंबे समय तक गॉलब्लैडर में जमा रहता है, यह पूरी तरह खाली नहीं हो पाता है।
  • जब बाइल जूस का फ्लो बहुत धीमा हो जाता है।
  • जब शरीर जरूरत से ज्यादा कोलेस्ट्रॉल बनाता है, यह गॉलब्लैडर में जमा हो जाता है।

इन कंडीशंस में बाइल जूस और कोलेस्ट्रॉल आपस में मिलकर छोटे-छोटे ठोस कण बना लेते हैं, जो आगे चलकर पथरी का रूप ले सकते हैं।

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जवाब- प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद महिलाओं में गॉलस्टोन की मुख्य वजह हॉर्मोनल बदलाव हैं।

प्रेग्नेंसी के दौरान एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन हॉर्मोन का लेवल बढ़ जाता है। ये हॉर्मोन जरूरी होते हैं, लेकिन पित्त का संतुलन प्रभावित करते हैं।

  • एस्ट्रोजेन पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ा देता है।
  • प्रोजेस्टेरोन गॉलब्लैडर की मसल्स को सॉफ्ट कर देता है।
  • इसके कारण गॉलब्लैडर से पित्त निकलने में मुश्किल होती है।
  • लंबे समय तक गॉलब्लैडर में पित्त जमा रहने से ये कोलेस्ट्रॉल के साथ मिलकर क्रिस्टल बनाने लगता है।
  • ये क्रिस्टल धीरे-धीरे सख्त होकर गॉलस्टोन में बदल जाते हैं।

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ऑयली फूड न खाएं: भारी और ऑयली फूड न खाएं। ज्यादा फैट और तला-भुना खाना गॉलब्लैडर पर दबाव डालता है, जिससे दर्द बढ़ सकता है।

फाइबर से भरपूर डाइट लें: अपनी डाइट में फल, हरी सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें। फाइबर न केवल पाचन को दुरुस्त रखता है, बल्कि स्टोन की समस्या में भी राहत देता है।

एक साथ ज्यादा न खाएं: पेट भरकर एक बार में खाने की बजाय, दिन भर में छोटे-छोटे मील लें। इससे पाचन तंत्र पर बोझ नहीं पड़ता और दर्द का खतरा कम हो जाता है।

हाइड्रेटेड रहें: शरीर को हमेशा हाइड्रेटेड रखें। पर्याप्त पानी पीने से पित्त (बाइल) पतला रहता है, जिससे गॉलब्लैडर में सूजन और जलन की आशंका कम हो जाती है।

स्ट्रेस मैनेज करें: प्रेग्नेंसी में तनाव हॉर्मोनल संतुलन बिगाड़ सकता है, जिसका असर गॉलब्लैडर पर भी पड़ता है। मन शांत रखने के लिए योग, मेडिटेशन करें।

साथ ही ग्राफिक में दी गई बातों का भी खास ख्याल रखें-

सवाल- प्रेग्नेंसी के दौरान गॉलब्लैडर स्टोन को कैसे रोका जा सकता है?

जवाब- प्रेग्नेंसी के दौरान गॉलस्टोन से बचाव का सबसे अच्छा तरीका हेल्दी लाइफस्टाइल और समय-समय पर हेल्थ चेकअप है।

इससे शुरुआती स्टेज में ही स्टोन का पता चल सकता है। अगर स्टोन पहले से है, तो सिर्फ डाइट बदलने से स्टोन खत्म नहीं होते, लेकिन लक्षणों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

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