Sunday, 14 Jun 2026 | 02:17 AM

Trending :

कॉन्टैक्ट लेंस सुरक्षा: आपकी आँखों में कांटेक्ट लेंस क्या हैं? जान लें कि इसे काफी देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है क्रिकेटर ऋषभ पंत ने किए आदि कैलाश के दर्शन:आईटीबीपी जवानों के साथ मिलकर बढ़ाया हौसला, स्थानीय लोगों और प्रशंसकों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल दुनियाभर में बंद:अमेरिकी सरकार को साइबर हमले का डर, विदेशी नागरिकों तक पहुंच रोकने का आदेश दिया था एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल दुनियाभर में बंद:अमेरिकी सरकार को साइबर हमले का डर, विदेशी नागरिकों तक पहुंच रोकने का आदेश दिया था कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का पारंपरिक इलाज- चॉकलेट से इलाज! 3 लाख करोड़ रुपए का इलाज करा चुके हैं ‘जड़ी-मजबूत की रानी’ पद्मश्री यानुंग जामोह मूंग दाल टिक्की रेसिपी: समोसा-पकौड़ा से भर गया मन, तो कम तेल में बनी टोकरी और कुरकुरी मूंग दाल टिक्की; विधि नोट करें
EXCLUSIVE

Rajasthan Pigeon Racing Smuggling | Illegal Earning Game

Rajasthan Pigeon Racing Smuggling | Illegal Earning Game

मकराना (डीडवाना-कुचामन) में 500 से ज्यादा कबूतरबाज हैं। गैरकानूनी तरीके से यहां बेजुबान कबूतरों के साथ क्रूरता होती है।

ऊपर के दो वीडियो देखिए। पहले वीडियो में कबूतर को जाल में फांसा जा रहा है। दूसरा वीडियो पिछले दिनों राजस्थान के मकराना (डीडवाना-कुचामन) में हुए कबूतरबाजी (कबूतर रेसिंग और फाइट) टूर्नामेंट का है।

.

राजस्थान में तस्करों ने कबूतरों को लाखों की अवैध कमाई का जरिया बना लिया है। पहले इन कबूतरों को पकड़ा जाता है। फिर इन्हें ट्रेंड कर कबूतर दौड़ और फाइट कराई जाती है।

14 फरवरी को जयपुर की विधायकपुरी थाना पुलिस ने 3 युवकों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 2 कार्टन में भरे 42 कबूतर बरामद किए थे। आरोपी दौड़ और फाइट के लिए कबूतरों को टोंक से खरीदकर लाए थे। पंख काट दिए थे ताकि कबूतर उड़ न सकें। ये सच सामने आने के बाद भास्कर ने पूरे मामले की पड़ताल की।

पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

मकराना के कई घरों की छतों पर कबूतरों को फंसाने के लिए ऐसे जाल लगाए जाते हैं।

पड़ताल के लिए भास्कर टीम मकराना शहर के इकबालपुरा और अमनपुरा में पहुंची, जहां सबसे ज्यादा कबूतरबाजी होती है। लोगों ने बताया कि यहां कबूतरबाजी बेहद आम बात है।

यहां 500 से ज्यादा कबूतरबाज हैं। हर एक के पास हजार से दो हजार कबूतर मिल जाएंगे। बेजुबान के साथ क्रूरता करने वाले इन कबूतरबाजों ने ‘पिजन लवर’ क्लब बना रखा है।

कई घरों में कबूतरों को पकड़ने के लिए बनाया हुआ जाल दिख जाएगा। जैसे ही कोई कबूतर स्टैंड पर बैठता है, कबूतरबाज जाल की रस्सी खींच देते हैं और कबूतर फंस जाते हैं। इसके बाद स्टैंड नीचे उतारकर कबूतर को पकड़ लिया जाता है।

मकराना शहर के दूसरे इलाकों की जगह सबसे ज्यादा कबूतर भी यहीं उड़ रहे थे। यह थोड़ा अजीब था। इस पर एक नाबालिग कबूतरबाज ने बताया कि छतों पर कबूतरों के लिए दाना बिखेर कर रखा जाता है। इसी दाने के लिए कबूतर आते हैं और फंस जाते हैं।

हाल ही में जयपुर में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ज्यादातर कबूतरबाजों ने कैमरे पर बात करने से मना कर दिया। ऑफ कैमरा बताया कि अधिकतर कबूतरबाज टोंक, जयपुर, नागौर और यूपी व एमपी के शहरों से कबूतर खरीद कर लाते हैं।

कबूतरों को इस तरह जाल में फंसाया जाता है।

कबूतरों को इस तरह जाल में फंसाया जाता है।

कबूतरों की कीमत 1 से 30 हजार रुपए, सबसे पहले काटते हैं पंख इन कबूतरों की कीमत 1 से 30 हजार रुपए तक होती है। कबूतरों के वजन, पंखों की बनावट व आंख की पुतली से उनकी वैरायटी पता चलती हैं। सोशल मीडिया पर यूपी और एमपी के साथ ही बिहार के लोगों द्वारा इन कबूतरों की खरीद-फरोख्त का बाजार लगाया जाता है।

कबूतरों को हवादार गत्तों के डिब्बों या कार्टूनों में छेद कर के ठूंस-ठूंस कर भर दिया जाता है। इसके बाद ट्रेन, बस और पर्सनल गाड़ियों से तस्करी कर लाया जाता है।

कभी-कभार लापरवाही या कबूतरों की फड़फड़ाहट से तस्करी का खुलासा हो जाता है।

दो साल पहले मथुरा में तस्करी का खुलासा हुआ था दो साल पहले यूपी के मथुरा में रेलवे सुरक्षा बल ने अमृतसर से मुंबई जाने वाली गोल्डन टेंपल मेल ट्रेन में कबूतरों की तस्करी को पकड़ा था। AC कोच में कार्टून में भरे 42 प्रतिबंधित कबूतर बरामद किए थे। आरोपियों ने तब पुलिस को बताया था कि वो इन कबूतरों को राजस्थान और गुजरात में सप्लाई करते थे।

भास्कर पड़ताल में सामने आया कि कबूतरों को मकराना लाने से पहले ही पंख काट दिए जाते हैं। पिंजरों में बंद रखा जाता है। साल भर इन कबूतरों को पहले से ट्रेंड दूसरे कबूतरों के साथ रखकर ट्रेनिंग दी जाती है।

उसकी पुरानी लोकेशन मेमोरी खत्म की जाती है। कबूतरबाज बताते हैं कि एक ट्रेंड कबूतर कभी भी अपने घर की छत को नहीं छोड़ता है। उसे कोई कहीं भी लेकर चला जाए वो वापस अपनी छत पर लौट आता है। यही वजह है कि साल भर तक नए कबूतर को उड़ाया नहीं जाता है।

कबूतरों के दाने-पानी और ट्रेनिंग का पूरा ध्यान रखा जाता है। कबूतर का स्टेमिना बढ़ाने और उसे ज्यादा आक्रामक बनाने के लिए कई तरह की स्टेरॉयड और मेडिसिन भी देते हैं।

इसके बाद ट्रेनिंग का दूसरा फेज स्टार्ट होता है। इन ट्रेंड कबूतरों को सुबह-शाम आसमान में उड़ाया जाता है। लंबी और ऊंची उड़ान भरने के लिए तैयार किया जाता है। इसी ट्रेनिंग के दौरान कबूतरबाजों को सबसे ज्यादा नुकसान भी होता है। कई बार उनके कबूतर वापस ही नहीं लौटते हैं। वो किसी दूसरे कबूतरबाज के जाल में फंस जाते हैं। कई बार इसके चलते बड़े विवाद और मारपीट तक की नौबत आ जाती है।

मकराना किंग पिजन 2025 प्रतियोगिता की फोटो। यहां ऐसी कई अवैध प्रतियोगिताएं होती हैं।

मकराना किंग पिजन 2025 प्रतियोगिता की फोटो। यहां ऐसी कई अवैध प्रतियोगिताएं होती हैं।

कबूतरों की दौड़ का कॉम्पिटिशन, लाखों रुपए के इनाम मकराना शहर में लगभग हर दिन छोटी-बड़ी कबूतर रेसिंग होती ही है। इनमें एक लाख से लेकर 10 लाख रुपए तक के नकद इनाम रखे जाते हैं। कई बार तो इनाम के लिए बुलेट बाइक और दूसरी गाड़ियां भी ऑफर की जाती हैं।

इन प्रतियोगिताओं का भी एक प्रोसेस होता है। इसके लिए बाकायदा पहले अनाउंसमेंट की जाती है। इसमें भागीदारी के लिए कबूतरबाजों से एंट्री फीस ली जाती है।

भास्कर को तीन महीने पहले हुई कबूतरबाजी प्रतियोगिता से जुड़ी एक सोशल मीडिया पोस्ट मिली। पोस्टर पर लिखा था ‘हाजी लियाकत अली भाटी और मोहम्मद सलीम सिसोदिया की सरपरस्ती में आप के शहर मकराना में 16 नवम्बर 2025 को 11 व 15 कबूतरों का टूर्नामेंट करवाया जा रहा है। इसकी एंट्री फीस 1500 रुपए होगी।’ इसी पोस्टर में 8 लड़कों के नाम नंबर के साथ उनकी फोटो लगी हुई थी।

पोस्टर में दिख रही फोटो में से एक सत्तार भाई चौधरी से भास्कर रिपोर्टर ने फोन पर बात की। सत्तार ने बताया- हम ये टूर्नामेंट लोकल लेवल पर ही करवाते हैं। इसमें कोई ज़्यादा भीड़-भाड़ नहीं होती है। ऐसे में हमें कभी कोई परमिशन लेने की जरूरत ही नहीं पड़ी। घरों की छत पर कबूतरों को पकड़ने वाले जाल के बारे में मुझे कुछ भी पता नहीं है।

ऐसी प्रतियोगिताओं में 500 कबूतरबाज तक भाग लेते हैं। 1500 से लेकर 21 हजार रुपए तक एंट्री फीस ली जाती है। प्रतियोगिता में हार-जीत का फैसला करने के लिए बाकायदा कुछ लोगों को ‘जज’ बनाया जाता है। ये कबूतर उड़ाने से पहले टाइम नोट करते हैं। वहीं कबूतरों की पहचान के लिए सभी के नख (नाखून) में उनके मालिक की पहचान से जुड़ा कोड का टैग फंसाते हैं। इसके बाद सुबह 6 से दोपहर 12 बजे तक कबूतर दौड़ होती है।

प्रतियोगिता से पहले सोशल मीडिया पर इस तरह प्रचार किया जाता है।

प्रतियोगिता से पहले सोशल मीडिया पर इस तरह प्रचार किया जाता है।

ऐसे करते हैं जीतने वाले कबूतर की पहचान रेसिंग में सभी कबूतरों को एक साथ उड़ाया जाता है। ये सभी कबूतर उड़कर अपने घर पहुंचते हैं। इनके पैरों में टैग (कई बार 10 रुपए का नोट) का आधा हिस्सा बंधा होता है। बाकी का आधा हिस्सा प्रतियोगिता के जजों के पास होता है, ताकि दोनों में नोट या टैग का नंबर एक हो और मिलान किया जा सके।

कबूतर का मालिक घर की छत पर ही अपने कबूतर के लौटने का इंतजार करता है। कबूतर के घर पहुंचते ही जज कबूतर के पैरों से नोट या टैग का आधा टुकड़ा निकालता है और उसका टाइम नोट कर लेता है।

इस पूरी प्रोसेस के दौरान दोपहर 12 बजे तक का टाइम काउंट ही नहीं किया जाता है। ये शाम 6 बजे तक चलता रहता है। इस दौरान जिसका कबूतर सबसे ज्यादा टाइम उड़ता रहता है और सबसे बाद में वापस आता है, उसे विजेता घोषित किया जाता है। इसके बाद एक फंक्शन कर विजेता कबूतरबाज को नकद इनाम और ट्रॉफी दी जाती है। ऐसा ही एक मकराना किंग पिजन 2025 प्रतियोगिता की अवार्ड सेरेमनी का वीडियो भास्कर को मिला।

एक्सपट्‌र्स बोले- कबूतरों का रेस्क्यू कर दोषियों पर कार्रवाई हो रक्षा संस्थान जयपुर के बर्ड एक्सपर्ट रोहित गंगवाल कहते हैं- पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के तहत किसी भी पक्षी के साथ किसी भी तरह की क्रूरता अवैध है। एक बार किसी कबूतर के पंख कटने के बाद वो साल भर तक नए पंख आने से पहले फ्लाई ही नहीं कर पाता है।

बर्ड एक्सपर्ट गौरव दाधीच ने बताया कि कबूतरों की तस्करी करना, उनके पंख काटकर उन्हें लड़ाई के लिए तैयार करना, सैकड़ों की संख्या में पिंजरे में बंद रखना या स्टेरॉयड देकर उनकी उड़ान क्षमता बढ़ाना पूरी तरह गलत और अमानवीय है।

डीएफओ केतन कुमार ने बताया कि इन मामलों में वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट का मामला नहीं बनता है। ऐसे में इन कबूतरबाजों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। हालांकि इस तरह के केस में लोकल म्युनिसिपालिटी और पुलिस पशु क्रूरता अधिनियम के तहत और गैंबलिंग की धाराओं में सख्त कार्रवाई कर सकती है।

पीटा इंडिया के लीगल एडवाइजर और क्रुएल्टी रेस्पॉन्स के निदेशक मीत अशर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर हैं, जिसके तहत देश में घोड़ा दौड़ के अलावा सभी तरह के जानवरों की दौड़ और उनकी फाइट अवैध है। इतना ही नहीं कबूतरों के पंख काटना बीएनएस एक्ट की धारा 325 के तहत अपराध है। जिला स्तर पर पशु क्रूरता निवारण समिति के अध्यक्ष जिला कलेक्टर होते हैं। उन्हें ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई कर इन कबूतरों का रेस्क्यू कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

बर्ड एक्सपर्ट डॉक्टर अरविन्द माथुर ने बताया कि कबूतरों के साथ इस तरह का मूर्खतापूर्ण कॉम्पिटिशन करवाना तो निर्दयता और अमानवीयता है। इसमें कई बार कबूतरों की मौत तक हो जाती है।

इधर, पुलिस का रटा रटाया जवाब डीडवाना कुचामन जिले के एडिशनल एसपी नेमीचंद खारिया का कहना था कि आपके पास भी ऐसी कोई सूचना हो तो हमें दें। हम पता करवाते हैं। एसएचओ से बात करके इसे दिखवाते हैं। ऐसा हो रहा है तो निश्चित ही सख्त कार्रवाई करेंगे।

————–

कबूतरों की तस्करी की यह खबर भी पढ़िए…

कार्टन में ठूंस-ठूंसकर भरे 42 सफेद कबूतर, उड़ न पाएं, इसलिए पंख काटे

जयपुर में तस्कर कार्टन में सफेद कबूतरों को ठूंस-ठूंस कर भरकर ले जा रहे थे। कबूतरों को दौड़ और फाइट के लिए मकराना (डीडवाना-कुचामन) ले जाया जा रहा था। कबूतरों को पंख काटे हुए थे। पढ़ें पूरी खबर.…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
पन्ना टाइगर रिजर्व में हिरण के शिकार का VIDEO:बाघ के जबड़े में दबा छटपटाता रहा, मोर ने भागकर बचाई जान

March 14, 2026/
1:18 pm

मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) में एक बाघ ने हिरण के शावक का शिकार किया। यह घटना 13...

हिटेजी कंपनी में पदस्थ चालक ने की आत्महत्या:गाड़ी से टकरा गया था बाइक चालक, पुलिस ने दर्ज की थी एफआईआर, डर में खा लिया जहर

March 10, 2026/
7:45 pm

हिटेजी कंपनी जो कि एटीएम मशीन में केस लोड करने का काम करती है। इसी कंपनी में पदस्थ एक वाहन...

तस्वीर का विवरण

May 11, 2026/
9:58 pm

मोरिंगा में प्रचुर मात्रा में आयरन, कैल्शियम और विटामिन पाए जाते हैं, जो शरीर को शक्ति प्रदान करने में मदद...

स्पीड-ब्रेकर पर कार स्लो, पीछे से आ रहा टेंपो टकराया:नीमच शहर में दो युवक घायल, दोनों मनासा के रहने वाले

April 21, 2026/
10:21 pm

नीमच सिटी थाना इलाके के जवासा चौराहे पर मंगलवार देर शाम चौराहे पर बने स्पीड ब्रेकर पर जैसे ही एक...

Mamata Banerjee addresses a press conference, at her Kalighat residence in Kolkata. Party MP Abhishek Banerjee also seen. (IMAGE: PTI/File)

June 10, 2026/
12:18 pm

आखरी अपडेट:10 जून, 2026, 12:18 IST सयोनी घोष ने काकोली घोष दस्तीदार से संपर्क किया और अलग हुए टीएमसी समूह...

राजनीति

Rajasthan Pigeon Racing Smuggling | Illegal Earning Game

Rajasthan Pigeon Racing Smuggling | Illegal Earning Game

मकराना (डीडवाना-कुचामन) में 500 से ज्यादा कबूतरबाज हैं। गैरकानूनी तरीके से यहां बेजुबान कबूतरों के साथ क्रूरता होती है।

ऊपर के दो वीडियो देखिए। पहले वीडियो में कबूतर को जाल में फांसा जा रहा है। दूसरा वीडियो पिछले दिनों राजस्थान के मकराना (डीडवाना-कुचामन) में हुए कबूतरबाजी (कबूतर रेसिंग और फाइट) टूर्नामेंट का है।

.

राजस्थान में तस्करों ने कबूतरों को लाखों की अवैध कमाई का जरिया बना लिया है। पहले इन कबूतरों को पकड़ा जाता है। फिर इन्हें ट्रेंड कर कबूतर दौड़ और फाइट कराई जाती है।

14 फरवरी को जयपुर की विधायकपुरी थाना पुलिस ने 3 युवकों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 2 कार्टन में भरे 42 कबूतर बरामद किए थे। आरोपी दौड़ और फाइट के लिए कबूतरों को टोंक से खरीदकर लाए थे। पंख काट दिए थे ताकि कबूतर उड़ न सकें। ये सच सामने आने के बाद भास्कर ने पूरे मामले की पड़ताल की।

पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

मकराना के कई घरों की छतों पर कबूतरों को फंसाने के लिए ऐसे जाल लगाए जाते हैं।

पड़ताल के लिए भास्कर टीम मकराना शहर के इकबालपुरा और अमनपुरा में पहुंची, जहां सबसे ज्यादा कबूतरबाजी होती है। लोगों ने बताया कि यहां कबूतरबाजी बेहद आम बात है।

यहां 500 से ज्यादा कबूतरबाज हैं। हर एक के पास हजार से दो हजार कबूतर मिल जाएंगे। बेजुबान के साथ क्रूरता करने वाले इन कबूतरबाजों ने ‘पिजन लवर’ क्लब बना रखा है।

कई घरों में कबूतरों को पकड़ने के लिए बनाया हुआ जाल दिख जाएगा। जैसे ही कोई कबूतर स्टैंड पर बैठता है, कबूतरबाज जाल की रस्सी खींच देते हैं और कबूतर फंस जाते हैं। इसके बाद स्टैंड नीचे उतारकर कबूतर को पकड़ लिया जाता है।

मकराना शहर के दूसरे इलाकों की जगह सबसे ज्यादा कबूतर भी यहीं उड़ रहे थे। यह थोड़ा अजीब था। इस पर एक नाबालिग कबूतरबाज ने बताया कि छतों पर कबूतरों के लिए दाना बिखेर कर रखा जाता है। इसी दाने के लिए कबूतर आते हैं और फंस जाते हैं।

हाल ही में जयपुर में तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद ज्यादातर कबूतरबाजों ने कैमरे पर बात करने से मना कर दिया। ऑफ कैमरा बताया कि अधिकतर कबूतरबाज टोंक, जयपुर, नागौर और यूपी व एमपी के शहरों से कबूतर खरीद कर लाते हैं।

कबूतरों को इस तरह जाल में फंसाया जाता है।

कबूतरों को इस तरह जाल में फंसाया जाता है।

कबूतरों की कीमत 1 से 30 हजार रुपए, सबसे पहले काटते हैं पंख इन कबूतरों की कीमत 1 से 30 हजार रुपए तक होती है। कबूतरों के वजन, पंखों की बनावट व आंख की पुतली से उनकी वैरायटी पता चलती हैं। सोशल मीडिया पर यूपी और एमपी के साथ ही बिहार के लोगों द्वारा इन कबूतरों की खरीद-फरोख्त का बाजार लगाया जाता है।

कबूतरों को हवादार गत्तों के डिब्बों या कार्टूनों में छेद कर के ठूंस-ठूंस कर भर दिया जाता है। इसके बाद ट्रेन, बस और पर्सनल गाड़ियों से तस्करी कर लाया जाता है।

कभी-कभार लापरवाही या कबूतरों की फड़फड़ाहट से तस्करी का खुलासा हो जाता है।

दो साल पहले मथुरा में तस्करी का खुलासा हुआ था दो साल पहले यूपी के मथुरा में रेलवे सुरक्षा बल ने अमृतसर से मुंबई जाने वाली गोल्डन टेंपल मेल ट्रेन में कबूतरों की तस्करी को पकड़ा था। AC कोच में कार्टून में भरे 42 प्रतिबंधित कबूतर बरामद किए थे। आरोपियों ने तब पुलिस को बताया था कि वो इन कबूतरों को राजस्थान और गुजरात में सप्लाई करते थे।

भास्कर पड़ताल में सामने आया कि कबूतरों को मकराना लाने से पहले ही पंख काट दिए जाते हैं। पिंजरों में बंद रखा जाता है। साल भर इन कबूतरों को पहले से ट्रेंड दूसरे कबूतरों के साथ रखकर ट्रेनिंग दी जाती है।

उसकी पुरानी लोकेशन मेमोरी खत्म की जाती है। कबूतरबाज बताते हैं कि एक ट्रेंड कबूतर कभी भी अपने घर की छत को नहीं छोड़ता है। उसे कोई कहीं भी लेकर चला जाए वो वापस अपनी छत पर लौट आता है। यही वजह है कि साल भर तक नए कबूतर को उड़ाया नहीं जाता है।

कबूतरों के दाने-पानी और ट्रेनिंग का पूरा ध्यान रखा जाता है। कबूतर का स्टेमिना बढ़ाने और उसे ज्यादा आक्रामक बनाने के लिए कई तरह की स्टेरॉयड और मेडिसिन भी देते हैं।

इसके बाद ट्रेनिंग का दूसरा फेज स्टार्ट होता है। इन ट्रेंड कबूतरों को सुबह-शाम आसमान में उड़ाया जाता है। लंबी और ऊंची उड़ान भरने के लिए तैयार किया जाता है। इसी ट्रेनिंग के दौरान कबूतरबाजों को सबसे ज्यादा नुकसान भी होता है। कई बार उनके कबूतर वापस ही नहीं लौटते हैं। वो किसी दूसरे कबूतरबाज के जाल में फंस जाते हैं। कई बार इसके चलते बड़े विवाद और मारपीट तक की नौबत आ जाती है।

मकराना किंग पिजन 2025 प्रतियोगिता की फोटो। यहां ऐसी कई अवैध प्रतियोगिताएं होती हैं।

मकराना किंग पिजन 2025 प्रतियोगिता की फोटो। यहां ऐसी कई अवैध प्रतियोगिताएं होती हैं।

कबूतरों की दौड़ का कॉम्पिटिशन, लाखों रुपए के इनाम मकराना शहर में लगभग हर दिन छोटी-बड़ी कबूतर रेसिंग होती ही है। इनमें एक लाख से लेकर 10 लाख रुपए तक के नकद इनाम रखे जाते हैं। कई बार तो इनाम के लिए बुलेट बाइक और दूसरी गाड़ियां भी ऑफर की जाती हैं।

इन प्रतियोगिताओं का भी एक प्रोसेस होता है। इसके लिए बाकायदा पहले अनाउंसमेंट की जाती है। इसमें भागीदारी के लिए कबूतरबाजों से एंट्री फीस ली जाती है।

भास्कर को तीन महीने पहले हुई कबूतरबाजी प्रतियोगिता से जुड़ी एक सोशल मीडिया पोस्ट मिली। पोस्टर पर लिखा था ‘हाजी लियाकत अली भाटी और मोहम्मद सलीम सिसोदिया की सरपरस्ती में आप के शहर मकराना में 16 नवम्बर 2025 को 11 व 15 कबूतरों का टूर्नामेंट करवाया जा रहा है। इसकी एंट्री फीस 1500 रुपए होगी।’ इसी पोस्टर में 8 लड़कों के नाम नंबर के साथ उनकी फोटो लगी हुई थी।

पोस्टर में दिख रही फोटो में से एक सत्तार भाई चौधरी से भास्कर रिपोर्टर ने फोन पर बात की। सत्तार ने बताया- हम ये टूर्नामेंट लोकल लेवल पर ही करवाते हैं। इसमें कोई ज़्यादा भीड़-भाड़ नहीं होती है। ऐसे में हमें कभी कोई परमिशन लेने की जरूरत ही नहीं पड़ी। घरों की छत पर कबूतरों को पकड़ने वाले जाल के बारे में मुझे कुछ भी पता नहीं है।

ऐसी प्रतियोगिताओं में 500 कबूतरबाज तक भाग लेते हैं। 1500 से लेकर 21 हजार रुपए तक एंट्री फीस ली जाती है। प्रतियोगिता में हार-जीत का फैसला करने के लिए बाकायदा कुछ लोगों को ‘जज’ बनाया जाता है। ये कबूतर उड़ाने से पहले टाइम नोट करते हैं। वहीं कबूतरों की पहचान के लिए सभी के नख (नाखून) में उनके मालिक की पहचान से जुड़ा कोड का टैग फंसाते हैं। इसके बाद सुबह 6 से दोपहर 12 बजे तक कबूतर दौड़ होती है।

प्रतियोगिता से पहले सोशल मीडिया पर इस तरह प्रचार किया जाता है।

प्रतियोगिता से पहले सोशल मीडिया पर इस तरह प्रचार किया जाता है।

ऐसे करते हैं जीतने वाले कबूतर की पहचान रेसिंग में सभी कबूतरों को एक साथ उड़ाया जाता है। ये सभी कबूतर उड़कर अपने घर पहुंचते हैं। इनके पैरों में टैग (कई बार 10 रुपए का नोट) का आधा हिस्सा बंधा होता है। बाकी का आधा हिस्सा प्रतियोगिता के जजों के पास होता है, ताकि दोनों में नोट या टैग का नंबर एक हो और मिलान किया जा सके।

कबूतर का मालिक घर की छत पर ही अपने कबूतर के लौटने का इंतजार करता है। कबूतर के घर पहुंचते ही जज कबूतर के पैरों से नोट या टैग का आधा टुकड़ा निकालता है और उसका टाइम नोट कर लेता है।

इस पूरी प्रोसेस के दौरान दोपहर 12 बजे तक का टाइम काउंट ही नहीं किया जाता है। ये शाम 6 बजे तक चलता रहता है। इस दौरान जिसका कबूतर सबसे ज्यादा टाइम उड़ता रहता है और सबसे बाद में वापस आता है, उसे विजेता घोषित किया जाता है। इसके बाद एक फंक्शन कर विजेता कबूतरबाज को नकद इनाम और ट्रॉफी दी जाती है। ऐसा ही एक मकराना किंग पिजन 2025 प्रतियोगिता की अवार्ड सेरेमनी का वीडियो भास्कर को मिला।

एक्सपट्‌र्स बोले- कबूतरों का रेस्क्यू कर दोषियों पर कार्रवाई हो रक्षा संस्थान जयपुर के बर्ड एक्सपर्ट रोहित गंगवाल कहते हैं- पशु क्रूरता अधिनियम 1960 के तहत किसी भी पक्षी के साथ किसी भी तरह की क्रूरता अवैध है। एक बार किसी कबूतर के पंख कटने के बाद वो साल भर तक नए पंख आने से पहले फ्लाई ही नहीं कर पाता है।

बर्ड एक्सपर्ट गौरव दाधीच ने बताया कि कबूतरों की तस्करी करना, उनके पंख काटकर उन्हें लड़ाई के लिए तैयार करना, सैकड़ों की संख्या में पिंजरे में बंद रखना या स्टेरॉयड देकर उनकी उड़ान क्षमता बढ़ाना पूरी तरह गलत और अमानवीय है।

डीएफओ केतन कुमार ने बताया कि इन मामलों में वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट का मामला नहीं बनता है। ऐसे में इन कबूतरबाजों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है। हालांकि इस तरह के केस में लोकल म्युनिसिपालिटी और पुलिस पशु क्रूरता अधिनियम के तहत और गैंबलिंग की धाराओं में सख्त कार्रवाई कर सकती है।

पीटा इंडिया के लीगल एडवाइजर और क्रुएल्टी रेस्पॉन्स के निदेशक मीत अशर ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर हैं, जिसके तहत देश में घोड़ा दौड़ के अलावा सभी तरह के जानवरों की दौड़ और उनकी फाइट अवैध है। इतना ही नहीं कबूतरों के पंख काटना बीएनएस एक्ट की धारा 325 के तहत अपराध है। जिला स्तर पर पशु क्रूरता निवारण समिति के अध्यक्ष जिला कलेक्टर होते हैं। उन्हें ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई कर इन कबूतरों का रेस्क्यू कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

बर्ड एक्सपर्ट डॉक्टर अरविन्द माथुर ने बताया कि कबूतरों के साथ इस तरह का मूर्खतापूर्ण कॉम्पिटिशन करवाना तो निर्दयता और अमानवीयता है। इसमें कई बार कबूतरों की मौत तक हो जाती है।

इधर, पुलिस का रटा रटाया जवाब डीडवाना कुचामन जिले के एडिशनल एसपी नेमीचंद खारिया का कहना था कि आपके पास भी ऐसी कोई सूचना हो तो हमें दें। हम पता करवाते हैं। एसएचओ से बात करके इसे दिखवाते हैं। ऐसा हो रहा है तो निश्चित ही सख्त कार्रवाई करेंगे।

————–

कबूतरों की तस्करी की यह खबर भी पढ़िए…

कार्टन में ठूंस-ठूंसकर भरे 42 सफेद कबूतर, उड़ न पाएं, इसलिए पंख काटे

जयपुर में तस्कर कार्टन में सफेद कबूतरों को ठूंस-ठूंस कर भरकर ले जा रहे थे। कबूतरों को दौड़ और फाइट के लिए मकराना (डीडवाना-कुचामन) ले जाया जा रहा था। कबूतरों को पंख काटे हुए थे। पढ़ें पूरी खबर.…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.