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Rs 30,000 Cr OFS Likely

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मुंबई1 मिनट पहले

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE ने IPO के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) और BSE के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है। यह IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा, यानी मौजूदा शेयरहोल्डर्स अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।

अनलिस्टेड मार्केट में NSE की वैल्यूएशन करीब 5 लाख करोड़ रुपए है, जिसके आधार पर एक्सपर्ट्स अनुमान लगा रहे हैं कि इस IPO का साइज लगभग 30,000 करोड़ रुपए हो सकता है। अगर ऐया होता है ता ये ये देश का सबसे बड़ा IPO हो सकता है।

2024 में हुंडई मोटर इंडिया के 27,000 करोड़ रुपए का IPO आया था। जो अभी देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू है। वहीं LIC 20,557 करोड़ का IPO लाया था।

पूरी तरह OFS होगा इश्यू, LIC नहीं बेचेगी अपना हिस्सा

NSE का यह IPO पूरी तरह से OFS होगा। इसका मतलब है कि कंपनी कोई नया शेयर जारी करके मार्केट से पैसा नहीं जुटाएगी, बल्कि इसके मौजूदा निवेशक अपनी 6% इक्विटी (हिस्सेदारी) को बेचेंगे।

इस शेयर सेल स्ट्रक्चर में एक खास बात यह है कि देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी LIC, जो कि एक्सचेंज में एक मौजूदा शेयरहोल्डर है, इस IPO में अपने शेयर नहीं बेच रही है। NSE के शेयर BSE पर लिस्ट होंगे, ठीक उसी तरह जैसे BSE के खुद के शेयर NSE पर लिस्टेड हैं।

SBI सबसे बड़ा सेलर, ये सरकारी और विदेशी कंपनियां भी बेचेंगी शेयर

ड्राफ्ट पेपर्स के अनुसार SBI इस IPO में सबसे बड़ा सेलर है, जो करीब 2.47 करोड़ शेयर बेचने जा रहा है। इसके अलावा मॉरीशस बेस्ड कंपनी MS स्ट्रेटेजिक लिमिटेड 1.6 करोड़ शेयर और कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड 1.18 करोड़ शेयर ऑफर कर रहा है।

इस IPO के टॉप 10 सेलर

कंपनी शेयर बेचेगा
SBI 2.47 करोड़
MS स्ट्रेटेजिक लिमिटेड 1.6 करोड़
कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड 1.18 करोड़
अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) 1.12 करोड़
बैंक ऑफ बड़ौदा 1.1 करोड़
स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया: 1.1 करोड़
जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) 1.06 करोड़
द न्यू इंडिया एश्योरेंस 1.05 करोड़
नेशनल इंश्योरेंस 60 लाख
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस 60 लाख

सोमवार को बोर्ड और बुधवार को कमिटी ने दी मंजूरी

DRHP फाइल करने से पहले, NSE की IPO कमिटी की बुधवार को एक बैठक हुई जिसमें फाइलिंग की आखिरी प्रक्रियाओं को पूरा किया गया। इससे पहले सोमवार को ही NSE के बोर्ड ने ड्राफ्ट पेपर्स को हरी झंडी दे दी थी।

NSE के बोर्ड ने इस IPO प्रस्ताव को 6 फरवरी को मंजूरी दी थी, जो कि जनवरी 2026 में SEBI की ओर से मिले नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के बाद संभव हो सका। रेगुलेटर की यह मंजूरी काफी अहम थी क्योंकि इसे को-लोकेशन मामले से जुड़े कुछ पुराने पेंडिंग विवादों के निपटारे से अलग रखा गया था।

2016 से अटका हुआ था मामला, को-लोकेशन विवाद बनी थी वजह

इस DRHP फाइलिंग के साथ ही देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के लिए एक लंबा इंतजार खत्म होने जा रहा है। रेगुलेटरी चिंताओं और खास तौर पर ‘को-लोकेशन विवाद’ के कारण NSE का लिस्टिंग प्लान पिछले करीब 10 साल से अटका हुआ था।

NSE ने सबसे पहले साल 2016 में करीब ₹10,000 करोड़ के OFS के लिए ड्राफ्ट पेपर्स दाखिल किए थे। हालांकि, तब SEBI ने को-लोकेशन मामले में कॉर्पोरेट गवर्नेंस की चिंताओं को देखते हुए NSE को अपना प्रपोजल वापस लेने की सलाह दी थी।

तब से लेकर अब तक एक्सचेंज ने अपने गवर्नेंस और कंप्लायंस में कई सुधार किए हैं और मंजूरी के लिए रेगुलेटर के सामने कई बार अपनी बात रखी थी। इस बार तैयारी के लिए एक्सचेंज ने 20 मर्चेंट बैंकर्स और लीगल एडवाइजर्स को नियुक्त किया है।

₹1,387 करोड़ देकर मामला सेटल करना चाहता है NSE

को-लोकेशन मामले (जिसमें कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को एक्सचेंज के ट्रेडिंग सिस्टम तक पहले एक्सेस देने के आरोप थे) को सुलझाने के लिए NSE ने 20 जून 2025 को एक सेटलमेंट एप्लिकेशन फाइल की थी। इसके तहत एक्सचेंज ने मामले को रफा-दफा करने के लिए 1,387.39 करोड़ रुपए के भुगतान की पेशकश की थी।

हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक SEBI की हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमिटी (HPAC) ने इस केस को करीब 1,880 करोड़ रुपए में सेटल करने की सिफारिश की है। इस रकम में 1,200 करोड़ डिसजॉर्जमेंट , 380 करोड़ ब्याज और बाकी बची रकम सेटलमेंट चार्ज के तौर पर शामिल है। यह सिफारिश फिलहाल SEBI के होल-टाइम मेंबर्स के पैनल के पास विचाराधीन है।

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE ने IPO के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) और BSE के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (DRHP) दाखिल किया है। यह IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा, यानी मौजूदा शेयरहोल्डर्स अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।

अनलिस्टेड मार्केट में NSE की वैल्यूएशन करीब 5 लाख करोड़ रुपए है, जिसके आधार पर एक्सपर्ट्स अनुमान लगा रहे हैं कि इस IPO का साइज लगभग 30,000 करोड़ रुपए हो सकता है। अगर ऐया होता है ता ये ये देश का सबसे बड़ा IPO हो सकता है।

2024 में हुंडई मोटर इंडिया के 27,000 करोड़ रुपए का IPO आया था। जो अभी देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू है। वहीं LIC 20,557 करोड़ का IPO लाया था।

पूरी तरह OFS होगा इश्यू, LIC नहीं बेचेगी अपना हिस्सा

NSE का यह IPO पूरी तरह से OFS होगा। इसका मतलब है कि कंपनी कोई नया शेयर जारी करके मार्केट से पैसा नहीं जुटाएगी, बल्कि इसके मौजूदा निवेशक अपनी 6% इक्विटी (हिस्सेदारी) को बेचेंगे।

इस शेयर सेल स्ट्रक्चर में एक खास बात यह है कि देश की सबसे बड़ी सरकारी बीमा कंपनी LIC, जो कि एक्सचेंज में एक मौजूदा शेयरहोल्डर है, इस IPO में अपने शेयर नहीं बेच रही है। NSE के शेयर BSE पर लिस्ट होंगे, ठीक उसी तरह जैसे BSE के खुद के शेयर NSE पर लिस्टेड हैं।

SBI सबसे बड़ा सेलर, ये सरकारी और विदेशी कंपनियां भी बेचेंगी शेयर

ड्राफ्ट पेपर्स के अनुसार SBI इस IPO में सबसे बड़ा सेलर है, जो करीब 2.47 करोड़ शेयर बेचने जा रहा है। इसके अलावा मॉरीशस बेस्ड कंपनी MS स्ट्रेटेजिक लिमिटेड 1.6 करोड़ शेयर और कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड 1.18 करोड़ शेयर ऑफर कर रहा है।

इस IPO के टॉप 10 सेलर

कंपनी शेयर बेचेगा
SBI 2.47 करोड़
MS स्ट्रेटेजिक लिमिटेड 1.6 करोड़
कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड 1.18 करोड़
अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस) 1.12 करोड़
बैंक ऑफ बड़ौदा 1.1 करोड़
स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया: 1.1 करोड़
जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) 1.06 करोड़
द न्यू इंडिया एश्योरेंस 1.05 करोड़
नेशनल इंश्योरेंस 60 लाख
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस 60 लाख

सोमवार को बोर्ड और बुधवार को कमिटी ने दी मंजूरी

DRHP फाइल करने से पहले, NSE की IPO कमिटी की बुधवार को एक बैठक हुई जिसमें फाइलिंग की आखिरी प्रक्रियाओं को पूरा किया गया। इससे पहले सोमवार को ही NSE के बोर्ड ने ड्राफ्ट पेपर्स को हरी झंडी दे दी थी।

NSE के बोर्ड ने इस IPO प्रस्ताव को 6 फरवरी को मंजूरी दी थी, जो कि जनवरी 2026 में SEBI की ओर से मिले नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) के बाद संभव हो सका। रेगुलेटर की यह मंजूरी काफी अहम थी क्योंकि इसे को-लोकेशन मामले से जुड़े कुछ पुराने पेंडिंग विवादों के निपटारे से अलग रखा गया था।

2016 से अटका हुआ था मामला, को-लोकेशन विवाद बनी थी वजह

इस DRHP फाइलिंग के साथ ही देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के लिए एक लंबा इंतजार खत्म होने जा रहा है। रेगुलेटरी चिंताओं और खास तौर पर ‘को-लोकेशन विवाद’ के कारण NSE का लिस्टिंग प्लान पिछले करीब 10 साल से अटका हुआ था।

NSE ने सबसे पहले साल 2016 में करीब ₹10,000 करोड़ के OFS के लिए ड्राफ्ट पेपर्स दाखिल किए थे। हालांकि, तब SEBI ने को-लोकेशन मामले में कॉर्पोरेट गवर्नेंस की चिंताओं को देखते हुए NSE को अपना प्रपोजल वापस लेने की सलाह दी थी।

तब से लेकर अब तक एक्सचेंज ने अपने गवर्नेंस और कंप्लायंस में कई सुधार किए हैं और मंजूरी के लिए रेगुलेटर के सामने कई बार अपनी बात रखी थी। इस बार तैयारी के लिए एक्सचेंज ने 20 मर्चेंट बैंकर्स और लीगल एडवाइजर्स को नियुक्त किया है।

₹1,387 करोड़ देकर मामला सेटल करना चाहता है NSE

को-लोकेशन मामले (जिसमें कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को एक्सचेंज के ट्रेडिंग सिस्टम तक पहले एक्सेस देने के आरोप थे) को सुलझाने के लिए NSE ने 20 जून 2025 को एक सेटलमेंट एप्लिकेशन फाइल की थी। इसके तहत एक्सचेंज ने मामले को रफा-दफा करने के लिए 1,387.39 करोड़ रुपए के भुगतान की पेशकश की थी।

हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक SEBI की हाई-पावर्ड एडवाइजरी कमिटी (HPAC) ने इस केस को करीब 1,880 करोड़ रुपए में सेटल करने की सिफारिश की है। इस रकम में 1,200 करोड़ डिसजॉर्जमेंट , 380 करोड़ ब्याज और बाकी बची रकम सेटलमेंट चार्ज के तौर पर शामिल है। यह सिफारिश फिलहाल SEBI के होल-टाइम मेंबर्स के पैनल के पास विचाराधीन है।

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