Sunday, 05 Apr 2026 | 04:45 PM

Trending :

दतिया के 25 गांवों में ओले-बारिश से फसल चौपट:रविवार को भी दिनभर बादल छाए रहे, नुकसान के आकलन के लिए सर्वे टीम बनाई क्या आपके शरीर का एक हिस्सा हो रहा सुन्न? बोलने में हो रही है दिक्कत… तो तुरंत हो जाएं सतर्क, यह ब्रेन स्ट्रोक का संकेत हो सकता है जानलेवा महंगी क्रीम छोड़िए, चेहरे पर कुदरती निखार के लिए रोज खाएं गुलाब से बना गुलकंद, गर्मी में शरीर रखता है ठंढा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 4 माह के शावक की मौत:9 महीने में पांचवीं घटना; अफसर बोले- दो बाघों के दहाड़ने की आवाज सुनी धनिया का अधिक मात्रा में सेवन सेहत के लिए हो सकता नुकसानदायक, शरीर में दिख सकते हैं ये इफेक्ट Rashmika Mandannas Intense Mysaa Poster Drops on Birthday
EXCLUSIVE

Social Media Side Effects; Teenager Safety Tips

Social Media Side Effects; Teenager Safety Tips

10 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

सवाल- मैं यूपी की रहने वाली हूं। मेरी 15 साल की बेटी क्लास 9 में पढ़ती है। वह अपने दोस्तों की तरह सोशल मीडिया यूज करना चाहती है। उसका कहना है कि “मेरे सभी दोस्तों के सोशल मीडिया अकाउंट्स हैं, मुझे भी अपना अकाउंट बनाना है।”

वह मोबाइल फोन चलाती है, लेकिन मैंने अभी तक उसे सोशल मीडिया से दूर रखा है, क्योंकि मैं साइबर बुलिंग और प्राइवेसी के रिस्क से डरती हूं। बेटी को लगता है कि मैं पुराने ख्यालों की हूं।

क्या टीनएज बच्चे को सोशल मीडिया यूज करने देना चाहिए। क्या गाइडलाइंस होनी चाहिए ताकि वह रिस्पॉन्सिबल रहे?

एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर

जवाब- मैं आपकी चिंता समझ सकती हूं। आज के समय में बहुत सारे पेरेंट्स इस स्थिति का सामना करते हैं। लेकिन टीनएज वह दहलीज है, जहां बच्चे ‘फोमो’ यानी पीछे छूट जाने का डर महसूस करते हैं। आमतौर पर ऐसा होता है कि जब दोस्त किसी रील या ट्रेंड पर चर्चा करते हैं तो सभी बच्चे उसमें शामिल होना चाहते हैं। ऐसे में जिस बच्चे को इस बारे में कुछ पता नहीं होता, वह अलग-थलग महसूस करता है।

आपका डर जायज है, लेकिन सोशल मीडिया पर पूरी तरह पाबंदी लगाना ठीक नहीं है। इससे बच्चों की जिज्ञासा बढ़ जाती है और वे इसे चोरी-छिपे इस्तेमाल करने लगते हैं। इसलिए ‘पाबंदी’ लगाने की बजाय आपको उसे सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में बताना चाहिए। साथ ही इसके खतरों के बारे में भी। लेकिन इससे पहले ये समझिए कि टीनएज में बच्चे सोशल मीडिया के प्रति क्यों आकर्षित होते हैं।

टीनएज में सोशल मीडिया के प्रति झुकाव

टीनएज में ‘सोशल वैलिडेशन’ बहुत मायने रखता है। वहीं सोशल मीडिया टीनएजर्स को एक ऐसा मंच देता है, जहां वे अपनी पहचान बना सकते हैं और अपनी पसंद की चीजों को दुनिया के साथ साझा कर सकते हैं। यह उनके लिए केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक वर्चुअल दुनिया है, जहां वे अपने अस्तित्व को तलाशते हैं।

साथ ही यहां मिलने वाला इंस्टेंट रिएक्शन (लाइक्स, कमेंट्स और व्यूज) उन्हें यह एहसास कराता है कि लोग उन्हें देख रहे हैं और ये मायने रखता है। टीनएजर्स के सोशल मीडिया के प्रति अट्रैक्शन के कई कारण हो सकते हैं।

टीनएज में सोशल मीडिया यूज के रिस्क

यहां ये समझना भी जरूरी है कि सोशल मीडिया सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि मेंटल और इमोशनल हेल्थ से भी जुड़ा हुआ है। 13-15 साल की उम्र में बच्चों का ब्रेन पूरी तरह विकसित नहीं होता है।

उनमें ‘इम्पल्स कंट्रोल’ (खुद पर नियंत्रण) की कमी होती है। वे अक्सर बिना सोचे-समझे फोटो या जानकारी साझा कर देते हैं, जो उनके लिए मुसीबत की वजह बन सकती है। इसके अलावा लाइक्स और कमेंट्स उनके आत्मविश्वास को प्रभावित करते हैं। ऐसे में टीनएज में सोशल मीडिया यूज करने के कई खतरे भी हो सकते हैं।

बेटी को सोशल मीडिया के खतरों के बारे में बताएं

आप अपनी बच्ची को छोटे-छोटे उदाहरणों के जरिए सोशल मीडिया के रिस्क समझाएं। उसे बता सकती हैं कि सोशल मीडिया से जुड़े रिस्क के कारण ही हाल में ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इसके इस्तेमाल पर बैन लगाया गया।

स्टडीज के हवाले से यह भी समझाएं कि सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों में कई हेल्थ रिस्क पैदा करता है। इसके कारण एंग्जाइटी, आत्मविश्वास में कमी, नींद न पूरी होना, फोकस में कमी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

  • इसके साथ ही आए दिन वायरल होने वाले फोटो, वीडियो, ऑनलाइन चैलेंज और साइबर क्राइम के उदाहरणों पर भी बात करें।
  • उसे समझाएं कि फोटो या चैट का स्क्रीनशॉट लेकर कोई भी उसका दुरुपयोग कर सकता है।
  • उसे बताएं कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर बात सच नहीं होती है।
  • उसे भरोसा दिलाएं कि अगर ऑनलाइन कुछ गलत होता है तो वह बिना डरे आपको बता सकती है।
  • बेटी को समझाएं कि आप उसके खिलाफ नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा के लिए चिंतित हैं।
  • इससे बच्ची बेहतर समझ और जागरूकता के साथ डिजिटल दुनिया को देखेगी।

सोशल मीडिया के लिए जरूरी सेफ्टी टिप्स

अब आते हैं कि बेटी को सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में कैसे बताएं। यहां पेरेंट्स का रोल पुलिसिंग का नहीं, बल्कि गाइड का होना चाहिए। बच्ची को डराने के बजाय उसे संभावित खतरों के प्रति सचेत करना जरूरी है। उसे बताएं कि इंटरनेट पर जो एक बार चला गया, वह हमेशा के लिए वहां रह जाता है। इसके लिए बच्ची को सोशल मीडिया यूज के कुछ बेसिक सेफ्टी टिप्स जरूर बताएं।

पेरेंट्स न करें ये गलतियां

बच्चों को सोशल मीडिया से बचाने की कोशिश में कई बार पेरेंट्स अनजाने में कुछ गलतियां कर बैठते हैं। डराने और पाबंदी लगाने की बजाय बच्चों पर बातचीत का असर ज्यादा होता है।

इससे उनमें बेहतर समझ पैदा होती है और पेरेंट्स के प्रति भरोसा बढ़ता है। बातचीत के अलावा कुछ और बाताें का भी खास ख्याल रखें। जैसेकि–

  • हर वक्त बच्चे की जासूसी न करें।
  • सोशल मीडिया को लेकर डर का माहौल न बनाएं।
  • बच्चे की बात सुने बिना फैसला न थोपें।
  • खुद भी बहुत ज्यादा सोशल मीडिया यूज न करें।
  • गलती पर डांटें या शर्मिंदा न करें।
  • बच्चे की ऑनलाइन दुनिया को पूरी तरह नजरअंदाज न करें।
  • टेक्नोलॉजी से पूरी तरह कट ऑफ न करें।

अंत में मैं यही कहूंगी कि टीनएज में सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह सही या पूरी तरह गलत नहीं होता। फर्क इस बात से पड़ता है कि उसे कितनी समझ, कितने समय और कितनी निगरानी के साथ इस्तेमाल किया जा रहा है। पेरेंट्स का काम रोकना नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित और जिम्मेदार यूजर बनाना है। इसके अलावा जब पेरेंट्स खुद संतुलित और समझदार रोल मॉडल बनते हैं, तभी बच्चे भी सोशल मीडिया को जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना सीखते हैं।

………………..

पेरेंटिंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए

पेरेंटिंग- मम्मी-पापा एथलीट, लेकिन बेटे को स्पोर्ट्स में इंटरेस्ट नहीं:क्या करूं कि वो खेलों में रुचि ले, क्या फोर्स करना सही है

अक्सर माता-पिता अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए उन पर अपनी उम्मीदें थोप देते हैं। इसे साइकोलॉजी में ‘प्रोजेक्शन’ कहते हैं, इसका मतलब है कि पेरेंट्स अपने सपनों को बच्चों के जरिए जीना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
'धाकड़ के साथ धुरंधर भी हैं धामी, 4 साल में किया धुआंधार काम', राजनाथ सिंह ने उत्तराखंड के सीएम की शोभा बढ़ाई

March 21, 2026/
6:22 pm

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री के रूप में चार साल तक चलने वाले भव्य कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह...

DC Vs MI Live Score: Follow latest updates from IPL 2026 match today. (PTI Photo)

April 4, 2026/
2:37 pm

आखरी अपडेट:04 अप्रैल, 2026, 14:37 IST हालांकि हाल के घटनाक्रमों ने राकांपा के भीतर दरार की चर्चा को हवा दे...

authorimg

February 26, 2026/
11:29 am

Why IV Injections Work Faster: जब भी किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होती है, तो डॉक्टर दवाएं लेने की सलाह...

authorimg

March 23, 2026/
4:42 pm

Leftover Rice Risks: रात का बचा हुआ खाना फ्रिज में रखना और अगले दिन उसे गरम करके खा लेना-यह आदत...

हाईकोर्ट ने पूछा-दिव्यांगों के रिक्त पद क्यों नहीं भरे?:जीएडी के प्रमुख सचिव और एमपीडब्ल्यूएलसी के प्रबंध निदेशक को नोटिस, 22 हजार पदों का मामला

February 28, 2026/
8:44 am

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल की एकल पीठ ने दिव्यांगों के रिक्त पदों को लेकर सख्त रुख...

बेंगलुरु के कैफे ने बिल में 5% गैस-संकट चार्ज जोड़ा:₹358 का नींबू पानी मंगाने पर ₹17 एक्स्ट्रा पैसे वसूले; सोशल मीडिया पर वायरल हुई रसीद

March 16, 2026/
4:51 pm

देशभर में जारी LPG संकट का असर अब लोगों की जेब पर सीधे तौर पर दिख रहा है। बेंगलुरु के...

हेल्थ & फिटनेस

राजनीति

Social Media Side Effects; Teenager Safety Tips

Social Media Side Effects; Teenager Safety Tips

10 दिन पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

सवाल- मैं यूपी की रहने वाली हूं। मेरी 15 साल की बेटी क्लास 9 में पढ़ती है। वह अपने दोस्तों की तरह सोशल मीडिया यूज करना चाहती है। उसका कहना है कि “मेरे सभी दोस्तों के सोशल मीडिया अकाउंट्स हैं, मुझे भी अपना अकाउंट बनाना है।”

वह मोबाइल फोन चलाती है, लेकिन मैंने अभी तक उसे सोशल मीडिया से दूर रखा है, क्योंकि मैं साइबर बुलिंग और प्राइवेसी के रिस्क से डरती हूं। बेटी को लगता है कि मैं पुराने ख्यालों की हूं।

क्या टीनएज बच्चे को सोशल मीडिया यूज करने देना चाहिए। क्या गाइडलाइंस होनी चाहिए ताकि वह रिस्पॉन्सिबल रहे?

एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर

जवाब- मैं आपकी चिंता समझ सकती हूं। आज के समय में बहुत सारे पेरेंट्स इस स्थिति का सामना करते हैं। लेकिन टीनएज वह दहलीज है, जहां बच्चे ‘फोमो’ यानी पीछे छूट जाने का डर महसूस करते हैं। आमतौर पर ऐसा होता है कि जब दोस्त किसी रील या ट्रेंड पर चर्चा करते हैं तो सभी बच्चे उसमें शामिल होना चाहते हैं। ऐसे में जिस बच्चे को इस बारे में कुछ पता नहीं होता, वह अलग-थलग महसूस करता है।

आपका डर जायज है, लेकिन सोशल मीडिया पर पूरी तरह पाबंदी लगाना ठीक नहीं है। इससे बच्चों की जिज्ञासा बढ़ जाती है और वे इसे चोरी-छिपे इस्तेमाल करने लगते हैं। इसलिए ‘पाबंदी’ लगाने की बजाय आपको उसे सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में बताना चाहिए। साथ ही इसके खतरों के बारे में भी। लेकिन इससे पहले ये समझिए कि टीनएज में बच्चे सोशल मीडिया के प्रति क्यों आकर्षित होते हैं।

टीनएज में सोशल मीडिया के प्रति झुकाव

टीनएज में ‘सोशल वैलिडेशन’ बहुत मायने रखता है। वहीं सोशल मीडिया टीनएजर्स को एक ऐसा मंच देता है, जहां वे अपनी पहचान बना सकते हैं और अपनी पसंद की चीजों को दुनिया के साथ साझा कर सकते हैं। यह उनके लिए केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक वर्चुअल दुनिया है, जहां वे अपने अस्तित्व को तलाशते हैं।

साथ ही यहां मिलने वाला इंस्टेंट रिएक्शन (लाइक्स, कमेंट्स और व्यूज) उन्हें यह एहसास कराता है कि लोग उन्हें देख रहे हैं और ये मायने रखता है। टीनएजर्स के सोशल मीडिया के प्रति अट्रैक्शन के कई कारण हो सकते हैं।

टीनएज में सोशल मीडिया यूज के रिस्क

यहां ये समझना भी जरूरी है कि सोशल मीडिया सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि मेंटल और इमोशनल हेल्थ से भी जुड़ा हुआ है। 13-15 साल की उम्र में बच्चों का ब्रेन पूरी तरह विकसित नहीं होता है।

उनमें ‘इम्पल्स कंट्रोल’ (खुद पर नियंत्रण) की कमी होती है। वे अक्सर बिना सोचे-समझे फोटो या जानकारी साझा कर देते हैं, जो उनके लिए मुसीबत की वजह बन सकती है। इसके अलावा लाइक्स और कमेंट्स उनके आत्मविश्वास को प्रभावित करते हैं। ऐसे में टीनएज में सोशल मीडिया यूज करने के कई खतरे भी हो सकते हैं।

बेटी को सोशल मीडिया के खतरों के बारे में बताएं

आप अपनी बच्ची को छोटे-छोटे उदाहरणों के जरिए सोशल मीडिया के रिस्क समझाएं। उसे बता सकती हैं कि सोशल मीडिया से जुड़े रिस्क के कारण ही हाल में ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इसके इस्तेमाल पर बैन लगाया गया।

स्टडीज के हवाले से यह भी समझाएं कि सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों में कई हेल्थ रिस्क पैदा करता है। इसके कारण एंग्जाइटी, आत्मविश्वास में कमी, नींद न पूरी होना, फोकस में कमी और डिप्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

  • इसके साथ ही आए दिन वायरल होने वाले फोटो, वीडियो, ऑनलाइन चैलेंज और साइबर क्राइम के उदाहरणों पर भी बात करें।
  • उसे समझाएं कि फोटो या चैट का स्क्रीनशॉट लेकर कोई भी उसका दुरुपयोग कर सकता है।
  • उसे बताएं कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर बात सच नहीं होती है।
  • उसे भरोसा दिलाएं कि अगर ऑनलाइन कुछ गलत होता है तो वह बिना डरे आपको बता सकती है।
  • बेटी को समझाएं कि आप उसके खिलाफ नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा के लिए चिंतित हैं।
  • इससे बच्ची बेहतर समझ और जागरूकता के साथ डिजिटल दुनिया को देखेगी।

सोशल मीडिया के लिए जरूरी सेफ्टी टिप्स

अब आते हैं कि बेटी को सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में कैसे बताएं। यहां पेरेंट्स का रोल पुलिसिंग का नहीं, बल्कि गाइड का होना चाहिए। बच्ची को डराने के बजाय उसे संभावित खतरों के प्रति सचेत करना जरूरी है। उसे बताएं कि इंटरनेट पर जो एक बार चला गया, वह हमेशा के लिए वहां रह जाता है। इसके लिए बच्ची को सोशल मीडिया यूज के कुछ बेसिक सेफ्टी टिप्स जरूर बताएं।

पेरेंट्स न करें ये गलतियां

बच्चों को सोशल मीडिया से बचाने की कोशिश में कई बार पेरेंट्स अनजाने में कुछ गलतियां कर बैठते हैं। डराने और पाबंदी लगाने की बजाय बच्चों पर बातचीत का असर ज्यादा होता है।

इससे उनमें बेहतर समझ पैदा होती है और पेरेंट्स के प्रति भरोसा बढ़ता है। बातचीत के अलावा कुछ और बाताें का भी खास ख्याल रखें। जैसेकि–

  • हर वक्त बच्चे की जासूसी न करें।
  • सोशल मीडिया को लेकर डर का माहौल न बनाएं।
  • बच्चे की बात सुने बिना फैसला न थोपें।
  • खुद भी बहुत ज्यादा सोशल मीडिया यूज न करें।
  • गलती पर डांटें या शर्मिंदा न करें।
  • बच्चे की ऑनलाइन दुनिया को पूरी तरह नजरअंदाज न करें।
  • टेक्नोलॉजी से पूरी तरह कट ऑफ न करें।

अंत में मैं यही कहूंगी कि टीनएज में सोशल मीडिया का इस्तेमाल पूरी तरह सही या पूरी तरह गलत नहीं होता। फर्क इस बात से पड़ता है कि उसे कितनी समझ, कितने समय और कितनी निगरानी के साथ इस्तेमाल किया जा रहा है। पेरेंट्स का काम रोकना नहीं, बल्कि बच्चों को सुरक्षित और जिम्मेदार यूजर बनाना है। इसके अलावा जब पेरेंट्स खुद संतुलित और समझदार रोल मॉडल बनते हैं, तभी बच्चे भी सोशल मीडिया को जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना सीखते हैं।

………………..

पेरेंटिंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए

पेरेंटिंग- मम्मी-पापा एथलीट, लेकिन बेटे को स्पोर्ट्स में इंटरेस्ट नहीं:क्या करूं कि वो खेलों में रुचि ले, क्या फोर्स करना सही है

अक्सर माता-पिता अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए उन पर अपनी उम्मीदें थोप देते हैं। इसे साइकोलॉजी में ‘प्रोजेक्शन’ कहते हैं, इसका मतलब है कि पेरेंट्स अपने सपनों को बच्चों के जरिए जीना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.