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अधिकतर इंजेक्शन नसों में ही क्यों लगाए जाते हैं? क्या इससे जल्दी असर होता है या कोई अन्य वजह, डॉक्टर से समझिए

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Why IV Injections Work Faster: जब भी किसी व्यक्ति की तबीयत खराब होती है, तो डॉक्टर दवाएं लेने की सलाह देते हैं. कुछ दवाएं गोली या कैप्सूल की फॉर्म में होती हैं, जबकि कुछ ड्रग्स इंजेक्शन के जरिए दिए जाते हैं. अक्सर आपने देखा होगा कि इमरजेंसी कंडीशन में जब मरीज को अस्पताल में भर्ती किया जाता है, तब डॉक्टर सबसे पहले इंट्रावेनस (IV) ड्रिप लगा देते हैं. इसके जरिए मरीज को दवाएं, सलाइन और ग्लूकोज दिया जाता है. अधिकतर मरीजों का ट्रीटमेंट अब ओरल ड्रग्स के बजाय इंजेक्टिबल ड्रग्स के जरिए किया जा रहा है. यह तरीका इलाज में ज्यादा असरदार माना जा रहा है.

आपने देखा होगा कि कई इंजेक्शन लोगों की नसों में लगाए जाते हैं, जबकि कुछ मसल्स में इंजेक्ट किए जाते हैं. डॉक्टर्स बताते हैं कि नसों में दिए जाने वाले इंजेक्शन को इंट्रावेनस (IV) इंजेक्शन कहा जाता है, जबकि मांसपेशियों में लगाए जाने वाले इंजेक्शन को इंट्रामस्क्युलर कहा जाता है. अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि ज्यादातर इंजेक्शन नसों में ही क्यों लगाए जाते हैं? क्या इससे दवा जल्दी असर करती है या इसके पीछे कोई और मेडिकल कारण होता है? इन सभी सवालों के जवाब लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता से समझने की कोशिश करते हैं.

नसों में इंजेक्शन लगाने की क्या है वजह?

डॉक्टर लोकेंद्र ने News18 को बताया कि नसों में इंजेक्शन इसलिए लगाया जाता है, ताकि दवा का असर जल्दी हो सके. जब दवा सीधे नस के जरिए दी जाती है, तो वह तुरंत ब्लड स्ट्रीम में मिल जाती है और पूरे शरीर में तेजी से पहुंचती है. ओरल टेबलेट्स को पेट और लिवर से होकर गुजरना पड़ता है. इससे दवा का असर होने में काफी वक्त लगता है और कई बार असर कम भी हो जाता है. नस में इंजेक्ट की गई दवा इस पूरी प्रक्रिया को बायपास कर देती है. इससे इमरजेंसी कंडीशन जैसे- हार्ट अटैक, स्ट्रोक, एलर्जी रिएक्शन या गंभीर संक्रमण में जल्द असर दिखता है और मरीज की कंडीशन स्टेबल हो जाती है.

एक्सपर्ट के अनुसार कुछ ओरल दवाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें खाने से उनका असर सही तरीके से नहीं होता है या पाचन तंत्र उन्हें सही से अवशोषित नहीं कर पाता है. कुछ एंटीबायोटिक्स, कीमोथेरेपी की दवाएं और सलाइन या ग्लूकोज जैसे फ्लूड सीधे नस में देने पड़ते हैं. इससे शरीर को जरूरी फ्लूड, इलेक्ट्रोलाइट्स या पोषक तत्व तेजी से मिलते हैं. डिहाइड्रेशन या खून की गंभीर कमी होन पर यह तरीका लाइफ सेविंग साबित हो सकता है. इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए यह तरीका सटीक है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

हर इंजेक्शन नस में क्यों नहीं लगाया जाता?

डॉक्टर गुप्ता ने बताया कि सभी इंजेक्शन नसों में नहीं लगाए जाते हैं. कुछ दवाएं मांसपेशियों में इंजेक्ट की जाती हैं, जिन्हें इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन कहा जाता है. कुछ इंजेक्शन स्किन के नीचे भी दी जाती हैं, जिन्हें सबक्यूटेनियस इंजेक्शन कहा जाता है. यह इस बात पर डिपेंड करता है कि दवा किस तरह की है और उसका असर कितनी तेजी से चाहिए और मरीज की कंडीशन क्या है. नस में इंजेक्शन लगाने के लिए प्रशिक्षित हेल्थ प्रोफेशनल्स की जरूरत होती है, क्योंकि गलत तरीके से लगाने पर सूजन, संक्रमण या नस को नुकसान हो सकता है. गलत तरीके से इंजेक्शन लगाने से कंडीशन बिगड़ सकती है.

डॉक्टर के अनुसार नसों में इंजेक्शन लगाने का उद्देश्य केवल तेजी से असर पाना ही नहीं, बल्कि दवा की सटीक डिलीवरी और बेहतर कंट्रोल भी है. कई बीमारियों में मसल्स में इंजेक्शन लगाना ज्यादा बेहतर होता है, जबकि कुछ परेशानियों में ओरल दवाएं ज्यादा असरदार होती हैं. डॉक्टर मरीज की हालत, दवा की प्रकृति और इलाज की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ही यह निर्णय लेते हैं. इसलिए अगर आपको नस में इंजेक्शन दिया जाता है, तो यह समझिए कि यह चिकित्सकीय दृष्टि से सबसे उपयुक्त और प्रभावी तरीका चुना गया है.

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आपने देखा होगा कि कई इंजेक्शन लोगों की नसों में लगाए जाते हैं, जबकि कुछ मसल्स में इंजेक्ट किए जाते हैं. डॉक्टर्स बताते हैं कि नसों में दिए जाने वाले इंजेक्शन को इंट्रावेनस (IV) इंजेक्शन कहा जाता है, जबकि मांसपेशियों में लगाए जाने वाले इंजेक्शन को इंट्रामस्क्युलर कहा जाता है. अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि ज्यादातर इंजेक्शन नसों में ही क्यों लगाए जाते हैं? क्या इससे दवा जल्दी असर करती है या इसके पीछे कोई और मेडिकल कारण होता है? इन सभी सवालों के जवाब लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल के इमरजेंसी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. लोकेंद्र गुप्ता से समझने की कोशिश करते हैं.

नसों में इंजेक्शन लगाने की क्या है वजह?

डॉक्टर लोकेंद्र ने News18 को बताया कि नसों में इंजेक्शन इसलिए लगाया जाता है, ताकि दवा का असर जल्दी हो सके. जब दवा सीधे नस के जरिए दी जाती है, तो वह तुरंत ब्लड स्ट्रीम में मिल जाती है और पूरे शरीर में तेजी से पहुंचती है. ओरल टेबलेट्स को पेट और लिवर से होकर गुजरना पड़ता है. इससे दवा का असर होने में काफी वक्त लगता है और कई बार असर कम भी हो जाता है. नस में इंजेक्ट की गई दवा इस पूरी प्रक्रिया को बायपास कर देती है. इससे इमरजेंसी कंडीशन जैसे- हार्ट अटैक, स्ट्रोक, एलर्जी रिएक्शन या गंभीर संक्रमण में जल्द असर दिखता है और मरीज की कंडीशन स्टेबल हो जाती है.

एक्सपर्ट के अनुसार कुछ ओरल दवाएं ऐसी होती हैं, जिन्हें खाने से उनका असर सही तरीके से नहीं होता है या पाचन तंत्र उन्हें सही से अवशोषित नहीं कर पाता है. कुछ एंटीबायोटिक्स, कीमोथेरेपी की दवाएं और सलाइन या ग्लूकोज जैसे फ्लूड सीधे नस में देने पड़ते हैं. इससे शरीर को जरूरी फ्लूड, इलेक्ट्रोलाइट्स या पोषक तत्व तेजी से मिलते हैं. डिहाइड्रेशन या खून की गंभीर कमी होन पर यह तरीका लाइफ सेविंग साबित हो सकता है. इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए यह तरीका सटीक है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

हर इंजेक्शन नस में क्यों नहीं लगाया जाता?

डॉक्टर गुप्ता ने बताया कि सभी इंजेक्शन नसों में नहीं लगाए जाते हैं. कुछ दवाएं मांसपेशियों में इंजेक्ट की जाती हैं, जिन्हें इंट्रामस्क्युलर इंजेक्शन कहा जाता है. कुछ इंजेक्शन स्किन के नीचे भी दी जाती हैं, जिन्हें सबक्यूटेनियस इंजेक्शन कहा जाता है. यह इस बात पर डिपेंड करता है कि दवा किस तरह की है और उसका असर कितनी तेजी से चाहिए और मरीज की कंडीशन क्या है. नस में इंजेक्शन लगाने के लिए प्रशिक्षित हेल्थ प्रोफेशनल्स की जरूरत होती है, क्योंकि गलत तरीके से लगाने पर सूजन, संक्रमण या नस को नुकसान हो सकता है. गलत तरीके से इंजेक्शन लगाने से कंडीशन बिगड़ सकती है.

डॉक्टर के अनुसार नसों में इंजेक्शन लगाने का उद्देश्य केवल तेजी से असर पाना ही नहीं, बल्कि दवा की सटीक डिलीवरी और बेहतर कंट्रोल भी है. कई बीमारियों में मसल्स में इंजेक्शन लगाना ज्यादा बेहतर होता है, जबकि कुछ परेशानियों में ओरल दवाएं ज्यादा असरदार होती हैं. डॉक्टर मरीज की हालत, दवा की प्रकृति और इलाज की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए ही यह निर्णय लेते हैं. इसलिए अगर आपको नस में इंजेक्शन दिया जाता है, तो यह समझिए कि यह चिकित्सकीय दृष्टि से सबसे उपयुक्त और प्रभावी तरीका चुना गया है.

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