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Tirupati Ghee Scam | 70 Lakh Kg Untested TTD Laddu Scandal

Tirupati Ghee Scam | 70 Lakh Kg Untested TTD Laddu Scandal

हैदराबाद1 घंटे पहले

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आंध्र प्रदेश में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के लड्डू प्रसाद के लिए घी खरीद में गंभीर अनियमितताओं और संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है। एक सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार करीब 70 लाख किलो घी बिना अनिवार्य जांच के खरीदा गया और कई मामलों में लैब रिपोर्ट आने से पहले ही उसे प्रसाद में इस्तेमाल कर लिया गया।

समिति ने बड़े स्तर पर प्रशासनिक विफलताओं, प्रक्रिया के उल्लंघन, संभावित मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। समिति का कहना है कि इन्हीं वजहों से मिलावटी घी की सप्लाई संभव हो सकी।

रिपोर्ट में पूर्व कार्यकारी अधिकारी एवी धर्मा रेड्डी को प्रमुख जिम्मेदार बताया गया है। समिति ने उन पर टेंडर नियमों को कमजोर करने, मिलावट की पुष्टि के बाद भी कार्रवाई न करने, संदिग्ध सप्लायर्स को काम जारी रखने देने जैसे आरोप लगाए हैं।

धर्मा रेड्डी पहले कह चुके हैं कि सभी फैसले खरीद समिति के सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए। कॉन्ट्रैक्ट नियमों के मुताबिक दिए गए।

ऐसे हुआ भक्तों के विश्वास और सेहत से खिलवाड़

मिलावट के सबूत के बावजूद घी का इस्तेमाल हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, 3 अगस्त 2022 की लैब रिपोर्ट में सभी जांचे गए सैंपल में सिटोस्टेरॉल मिला। इसे वनस्पति तेल की मिलावट का संकेतक माना जाता है। इसके बावजूद रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं हुई। सप्लायर्स को ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया। खरीद प्रक्रिया बिना रोकटोक चलती रही।

  • खरीद व्यवस्था ने मिलावट को बढ़ावा दिया: खरीद का ढांचा ही मिलावट को बढ़ावा देने वाला था। असामान्य रूप से कम बोली स्वीकार की गई। कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट आई कि शुद्ध घी की सप्लाई व्यावहारिक नहीं रह जाती। कई मामलों में नियमों के खिलाफ नीलामी के बाद अनौपचारिक बातचीत के जरिए कीमत घटाने की अनुमति दी गई।
  • अनिवार्य नियमों की अनदेखी: समिति ने कहा कि अनिवार्य फूड सेफ्टी नियमों की अनदेखी हुई। 1 जुलाई 2022 से β-सिटोस्टेरॉल की जांच अनिवार्य होने के बाद भी वाईएसआरसीपी कार्यकाल में टीटीडी ने इसे खरीद प्रक्रिया में लागू नहीं किया।
  • ऐसे काम कर रहा था नेटवर्क: संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इसमें एक प्रमुख सप्लायर ने वनस्पति तेल, एडिटिव्स का इस्तेमाल कर मिलावटी घी बनाया। अयोग्य घोषित होने के बाद भी वह बीच की डेयरियों के जरिए सप्लाई जारी रखता रहा।
  • सख्त कार्रवाई, ब्लैकलिस्टिंग, सिस्टम में बदलाव की सिफारिश: समिति ने जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। इसमें वे अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने टेंडर नियमों में कथित ढील को मंजूरी दी। वे भी शामिल हैं, जिन्होंने मिलावट की पुष्टि के बाद भी कार्रवाई नहीं की।
  • टीटीडी के पूर्व चेयरमैन, खरीद समिति भी घेरे में: खरीद समिति की भूमिका भी जांच के दायरे में है। रिपोर्ट में पूर्व वाईएसआरसीपी विधायक चेविरेड्डी भास्कर रेड्डी, भुमना करुणाकर रेड्डी पर आरोप लगाए गए हैं। भुमना करुणाकर रेड्डी टीटीडी के पूर्व चेयरमैन भी रहे हैं। समिति के अन्य सदस्यों के साथ इन लोगों ने ऐसे फैसलों में हिस्सा लिया, जिनसे टेंडर नियम कमजोर हुए, सुरक्षा उपाय ढीले पड़े।

क्या है मामला: आंध्र के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया कि राज्य में 2019 से 2024 के बीच पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल में लड्डू प्रसादम बनाने में मिलावटी घी का इस्तेमाल हुआ। वाईएसआरसीपी ने कहा है कि आरोप राजनीतिक मकसद से लगाए जा रहे हैं।

तीन महीने में जांच रिपोर्ट

यह समिति फरवरी 2026 में बनाई गई थी। इसमें रिटायर्ड आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार शामिल हैं। समिति को टेंडर नियमों में कथित ढील की पहचान करने, घी में मिलावट के लिए जिम्मेदार लोगों को चिन्हित करने, खरीद व्यवस्था में हुई चूक की जांच का काम सौंपा गया था।

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समिति ने बड़े स्तर पर प्रशासनिक विफलताओं, प्रक्रिया के उल्लंघन, संभावित मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। समिति का कहना है कि इन्हीं वजहों से मिलावटी घी की सप्लाई संभव हो सकी।

रिपोर्ट में पूर्व कार्यकारी अधिकारी एवी धर्मा रेड्डी को प्रमुख जिम्मेदार बताया गया है। समिति ने उन पर टेंडर नियमों को कमजोर करने, मिलावट की पुष्टि के बाद भी कार्रवाई न करने, संदिग्ध सप्लायर्स को काम जारी रखने देने जैसे आरोप लगाए हैं।

धर्मा रेड्डी पहले कह चुके हैं कि सभी फैसले खरीद समिति के सभी सदस्यों की सहमति से लिए गए। कॉन्ट्रैक्ट नियमों के मुताबिक दिए गए।

ऐसे हुआ भक्तों के विश्वास और सेहत से खिलवाड़

मिलावट के सबूत के बावजूद घी का इस्तेमाल हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, 3 अगस्त 2022 की लैब रिपोर्ट में सभी जांचे गए सैंपल में सिटोस्टेरॉल मिला। इसे वनस्पति तेल की मिलावट का संकेतक माना जाता है। इसके बावजूद रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं हुई। सप्लायर्स को ब्लैकलिस्ट नहीं किया गया। खरीद प्रक्रिया बिना रोकटोक चलती रही।

  • खरीद व्यवस्था ने मिलावट को बढ़ावा दिया: खरीद का ढांचा ही मिलावट को बढ़ावा देने वाला था। असामान्य रूप से कम बोली स्वीकार की गई। कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट आई कि शुद्ध घी की सप्लाई व्यावहारिक नहीं रह जाती। कई मामलों में नियमों के खिलाफ नीलामी के बाद अनौपचारिक बातचीत के जरिए कीमत घटाने की अनुमति दी गई।
  • अनिवार्य नियमों की अनदेखी: समिति ने कहा कि अनिवार्य फूड सेफ्टी नियमों की अनदेखी हुई। 1 जुलाई 2022 से β-सिटोस्टेरॉल की जांच अनिवार्य होने के बाद भी वाईएसआरसीपी कार्यकाल में टीटीडी ने इसे खरीद प्रक्रिया में लागू नहीं किया।
  • ऐसे काम कर रहा था नेटवर्क: संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इसमें एक प्रमुख सप्लायर ने वनस्पति तेल, एडिटिव्स का इस्तेमाल कर मिलावटी घी बनाया। अयोग्य घोषित होने के बाद भी वह बीच की डेयरियों के जरिए सप्लाई जारी रखता रहा।
  • सख्त कार्रवाई, ब्लैकलिस्टिंग, सिस्टम में बदलाव की सिफारिश: समिति ने जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। इसमें वे अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्होंने टेंडर नियमों में कथित ढील को मंजूरी दी। वे भी शामिल हैं, जिन्होंने मिलावट की पुष्टि के बाद भी कार्रवाई नहीं की।
  • टीटीडी के पूर्व चेयरमैन, खरीद समिति भी घेरे में: खरीद समिति की भूमिका भी जांच के दायरे में है। रिपोर्ट में पूर्व वाईएसआरसीपी विधायक चेविरेड्डी भास्कर रेड्डी, भुमना करुणाकर रेड्डी पर आरोप लगाए गए हैं। भुमना करुणाकर रेड्डी टीटीडी के पूर्व चेयरमैन भी रहे हैं। समिति के अन्य सदस्यों के साथ इन लोगों ने ऐसे फैसलों में हिस्सा लिया, जिनसे टेंडर नियम कमजोर हुए, सुरक्षा उपाय ढीले पड़े।

क्या है मामला: आंध्र के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया कि राज्य में 2019 से 2024 के बीच पिछली वाईएसआरसीपी सरकार के कार्यकाल में लड्डू प्रसादम बनाने में मिलावटी घी का इस्तेमाल हुआ। वाईएसआरसीपी ने कहा है कि आरोप राजनीतिक मकसद से लगाए जा रहे हैं।

तीन महीने में जांच रिपोर्ट

यह समिति फरवरी 2026 में बनाई गई थी। इसमें रिटायर्ड आईएएस अधिकारी दिनेश कुमार शामिल हैं। समिति को टेंडर नियमों में कथित ढील की पहचान करने, घी में मिलावट के लिए जिम्मेदार लोगों को चिन्हित करने, खरीद व्यवस्था में हुई चूक की जांच का काम सौंपा गया था।

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