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इंश्योरेंस सेक्टर में 100% FDI को सरकार की मंजूरी:ऑटोमैटिक रूट से विदेशी निवेश का रास्ता साफ; LIC में लिमिट 20% ही रहेगी

इंश्योरेंस सेक्टर में 100% FDI को सरकार की मंजूरी:ऑटोमैटिक रूट से विदेशी निवेश का रास्ता साफ; LIC में लिमिट 20% ही रहेगी

केंद्र सरकार ने शनिवार (2 मई) को इंश्योरेंस सेक्टर में 100% फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट यानी FDI को मंजूरी दे दी है। अब विदेशी निवेशक ऑटोमैटिक रूट के जरिए भारतीय इंश्योरेंस कंपनियों में पूरी हिस्सेदारी ले सकेंगे, हालांकि LIC के लिए निवेश की सीमा 20% पर ही बरकरार रखी गई है। इंश्योरेंस कंपनियों के लिए क्या हैं शर्तें सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश बीमा अधिनियम-1938 के प्रावधानों के अधीन होगा। निवेश प्राप्त करने वाली कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे बीमा और संबंधित गतिविधियों के लिए इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) से आवश्यक लाइसेंस या मंजूरी प्राप्त करें। इसके साथ ही नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिस भारतीय बीमा कंपनी में विदेशी निवेश होगा, उसके बोर्ड के चेयरपर्सन, मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) या चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) में से कम से कम एक व्यक्ति भारतीय नागरिक होना चाहिए। LIC के लिए अलग नियम और 20% की सीमा इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज को भी मिला फायदा दिसंबर में पास हुआ था बिल वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने फरवरी में ही इस संबंध में जानकारी दी थी। इससे पहले दिसंबर 2025 में संसद ने ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025’ पारित किया था। इस कानून के जरिए बीमा क्षेत्र से जुड़े तीन प्रमुख कानूनों—बीमा अधिनियम 1938, एलआईसी अधिनियम 1956 और IRDAI अधिनियम 1999 में जरूरी बदलाव किए गए हैं। सीमावर्ती देशों के लिए नियमों में ढील सरकार ने मार्च में भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले FDI के नियमों को भी आसान बना दिया है। कैबिनेट ने ‘प्रेस नोट 3’ फ्रेमवर्क में संशोधन किया है। अब सीमावर्ती देशों से 10% तक की नॉन-कंट्रोलिंग हिस्सेदारी (बिना नियंत्रण वाली हिस्सेदारी) के निवेश के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी, यह ऑटोमैटिक रूट के तहत आएगा। क्या है ऑटोमैटिक रूट? इसमें विदेशी निवेशकों को निवेश से पहले सरकार या RBI की पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती। क्या है प्रेस नोट 3? यह नियम उन देशों से निवेश को रेगुलेट करता है जिनकी सीमाएं भारत से लगती हैं (जैसे चीन, पाकिस्तान), ताकि निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। ये खबर पढ़ें… चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए भारत में निवेश आसान: फॉरेन इन्वेस्टमेंट के नियम बदले; 10% से कम हिस्सेदारी पर बिना मंजूरी निवेश कर सकेंगे केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले यानी पड़ोसी देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में ढील दी है। PM मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (10 मार्च) को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई। पूरी खबर पढ़ें…

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केंद्र सरकार ने शनिवार (2 मई) को इंश्योरेंस सेक्टर में 100% फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट यानी FDI को मंजूरी दे दी है। अब विदेशी निवेशक ऑटोमैटिक रूट के जरिए भारतीय इंश्योरेंस कंपनियों में पूरी हिस्सेदारी ले सकेंगे, हालांकि LIC के लिए निवेश की सीमा 20% पर ही बरकरार रखी गई है। इंश्योरेंस कंपनियों के लिए क्या हैं शर्तें सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक, इंश्योरेंस सेक्टर में विदेशी निवेश बीमा अधिनियम-1938 के प्रावधानों के अधीन होगा। निवेश प्राप्त करने वाली कंपनियों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे बीमा और संबंधित गतिविधियों के लिए इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) से आवश्यक लाइसेंस या मंजूरी प्राप्त करें। इसके साथ ही नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिस भारतीय बीमा कंपनी में विदेशी निवेश होगा, उसके बोर्ड के चेयरपर्सन, मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) या चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) में से कम से कम एक व्यक्ति भारतीय नागरिक होना चाहिए। LIC के लिए अलग नियम और 20% की सीमा इंश्योरेंस इंटरमीडियरीज को भी मिला फायदा दिसंबर में पास हुआ था बिल वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने फरवरी में ही इस संबंध में जानकारी दी थी। इससे पहले दिसंबर 2025 में संसद ने ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025’ पारित किया था। इस कानून के जरिए बीमा क्षेत्र से जुड़े तीन प्रमुख कानूनों—बीमा अधिनियम 1938, एलआईसी अधिनियम 1956 और IRDAI अधिनियम 1999 में जरूरी बदलाव किए गए हैं। सीमावर्ती देशों के लिए नियमों में ढील सरकार ने मार्च में भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले FDI के नियमों को भी आसान बना दिया है। कैबिनेट ने ‘प्रेस नोट 3’ फ्रेमवर्क में संशोधन किया है। अब सीमावर्ती देशों से 10% तक की नॉन-कंट्रोलिंग हिस्सेदारी (बिना नियंत्रण वाली हिस्सेदारी) के निवेश के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी, यह ऑटोमैटिक रूट के तहत आएगा। क्या है ऑटोमैटिक रूट? इसमें विदेशी निवेशकों को निवेश से पहले सरकार या RBI की पूर्व अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती। क्या है प्रेस नोट 3? यह नियम उन देशों से निवेश को रेगुलेट करता है जिनकी सीमाएं भारत से लगती हैं (जैसे चीन, पाकिस्तान), ताकि निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। ये खबर पढ़ें… चीन समेत पड़ोसी देशों के लिए भारत में निवेश आसान: फॉरेन इन्वेस्टमेंट के नियम बदले; 10% से कम हिस्सेदारी पर बिना मंजूरी निवेश कर सकेंगे केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत के साथ बॉर्डर शेयर करने वाले यानी पड़ोसी देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में ढील दी है। PM मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार (10 मार्च) को हुई कैबिनेट मीटिंग में प्रेस नोट 3 यानी FDI पॉलिसी के नियमों में बदलाव को मंजूरी दी गई। पूरी खबर पढ़ें…

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