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नेचिरवान बरजानी कौन हैं, जिनके जरिए हुई अमेरिका-ईरान बातचीत:ट्रम्प IRGC चीफ तक नहीं पहुंच पाए, बरजानी के जरिए हुई सीक्रेट बात

नेचिरवान बरजानी कौन हैं, जिनके जरिए हुई अमेरिका-ईरान बातचीत:ट्रम्प IRGC चीफ तक नहीं पहुंच पाए, बरजानी के जरिए हुई सीक्रेट बात

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान मई में दोनों देशों ने बातचीत के लिए एक सीक्रेट चैनल बनाया था। अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस के मुताबिक, इस बातचीत में इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवान बरजानी ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। बरजानी ऐसे नेता हैं, जिन पर अमेरिका और ईरान दोनों भरोसा करते हैं। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर बातचीत शुरू होनी थी। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची बातचीत का नेतृत्व कर रहे थे। ऐसे में अमेरिकी सरकार यह पता करना चाहती थी कि, ईरान की ओर से बातचीत कर रहे इन दोनों नेताओं को IRGC का समर्थन हासिल है या नहीं। इसके लिए बरजानी ने IRGC कमांडर जनरल अहमद वाहिदी से बात की। IRGC चीफ से संपर्क नहीं कर पा रहा था अमेरिका दरअसल, अमेरिका खुद वाहिदी से संपर्क नहीं कर पा रहा था। ईरान में सिर्फ सरकार की सहमति काफी नहीं होती। परमाणु और सुरक्षा मामलों में IRGC की भी बड़ी भूमिका है। इसलिए ट्रम्प टीम जानना चाहती थी कि, बातचीत में जो वादे किए जा रहे हैं, उन्हें IRGC का भी समर्थन हासिल है या नहीं। अमेरिका को बरजानी की जरूरत क्यों पड़ी नेचिरवान बरजानी इराक के उत्तरी हिस्से में मौजूद कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति हैं। यह इलाका इराक का हिस्सा है, लेकिन यहां की अपनी सरकार, विधानसभा और सुरक्षा बल हैं। यानी कई मामलों में यह अपने फैसले खुद लेता है। इसकी राजधानी एरबिल है। कुर्दिस्तान क्षेत्र लंबे समय से अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा है। वहीं, इराक से लगी सीमा होने की वजह से उसके ईरान से भी अच्छे रिश्ते हैं। इसी कारण नेचिरवान बरजानी दोनों देशों के बीच भरोसेमंद नेता माने जाते हैं और कई बार तनाव के दौरान बातचीत कराने की भूमिका निभा चुके हैं। बरजानी के ईरान से पुराने संबंध हैं। ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने ईरान में समय बिताया और तेहरान यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। वह फारसी भाषा बोलते हैं और ईरान के कई बड़े नेताओं से उनके निजी संबंध हैं। इसी वजह से बरजानी दोनों देशों के बीच भरोसेमंद कड़ी बन सके। उन्हें ऐसा नेता माना जाता है, जो बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश करता है। तुलसी गबार्ड ने बरजानी से संपर्क किया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की तत्कालीन राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने करीब 10 मई को बरजानी से पहली बार संपर्क किया। गबार्ड ने उनसे कहा कि अमेरिका को IRGC चीफ जनरल अहमद वाहिदी से संपर्क करने में उनकी मदद चाहिए। गबार्ड ने बरजानी से कहा कि वह राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति वेंस की मंजूरी के बाद उनसे बातचीत कर रही हैं। गबार्ड को यह भी पता करना चाहता था कि IRGC की अमेरिका से कोई अलग मांग तो नहीं है। बरजानी की IRGC चीफ से इन्क्रिप्टेड फोन पर बातचीत बरजानी ने गबार्ड की बात मानकर IRGC से संपर्क किया और वाहिदी तक अपना मैसेज पहुंचाया। वाहिदी ने इसके बाद बरजानी से सीधे बातचीत की इच्छा जताई। इसके बाद 14 मई को IRGC के एक अफसर ने राजधानी एरबिल में बरजानी के ऑफिस में मुलाकात की। अफसर ने बरजानी को एक एन्क्रिप्टेड फोन दिया, ताकि वह सुरक्षित तरीके से वाहिदी से बात कर सकें। इसके बाद ही बरजानी और वाहिदी की अमेरिका को लेकर सीधे बातचीत हुई। बरजानी ने वाहिदी से पूछा कि क्या वह ईरान की ओर से बातचीत कर रहे गालिबाफ और अराघची के साथ हैं। वाहिदी ने इसका जवाब हां में दिया था। वाहिदी का मैसेज व्हाइट हाउस तक पहुंचाया बातचीत के बाद बरजानी ने तुलसी गबार्ड से संपर्क किया और वाहिदी का मैसेज उन्हें बताया। इस बातचीत से ट्रम्प सरकार को यह भरोसा मिला कि ईरान की ओर से बातचीत कर रहे गालिबाफ और अराघची को IRGC का समर्थन हासिल है। इसके बाद ट्रम्प सरकार ने बरजानी से एक और मदद मांगी। अमेरिका चाहता था कि वह एरबिल में अमेरिकी और ईरानी डेलिगेशन की गुप्त बातचीत की मेजबानी करें। हालांकि, यह बैठक नहीं हो सकी। ईरान ने इसे ठुकरा दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी पक्ष को अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता थी।

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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान मई में दोनों देशों ने बातचीत के लिए एक सीक्रेट चैनल बनाया था। अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस के मुताबिक, इस बातचीत में इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवान बरजानी ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। बरजानी ऐसे नेता हैं, जिन पर अमेरिका और ईरान दोनों भरोसा करते हैं। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने को लेकर बातचीत शुरू होनी थी। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की तरफ से संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची बातचीत का नेतृत्व कर रहे थे। ऐसे में अमेरिकी सरकार यह पता करना चाहती थी कि, ईरान की ओर से बातचीत कर रहे इन दोनों नेताओं को IRGC का समर्थन हासिल है या नहीं। इसके लिए बरजानी ने IRGC कमांडर जनरल अहमद वाहिदी से बात की। IRGC चीफ से संपर्क नहीं कर पा रहा था अमेरिका दरअसल, अमेरिका खुद वाहिदी से संपर्क नहीं कर पा रहा था। ईरान में सिर्फ सरकार की सहमति काफी नहीं होती। परमाणु और सुरक्षा मामलों में IRGC की भी बड़ी भूमिका है। इसलिए ट्रम्प टीम जानना चाहती थी कि, बातचीत में जो वादे किए जा रहे हैं, उन्हें IRGC का भी समर्थन हासिल है या नहीं। अमेरिका को बरजानी की जरूरत क्यों पड़ी नेचिरवान बरजानी इराक के उत्तरी हिस्से में मौजूद कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति हैं। यह इलाका इराक का हिस्सा है, लेकिन यहां की अपनी सरकार, विधानसभा और सुरक्षा बल हैं। यानी कई मामलों में यह अपने फैसले खुद लेता है। इसकी राजधानी एरबिल है। कुर्दिस्तान क्षेत्र लंबे समय से अमेरिका का करीबी सहयोगी रहा है। वहीं, इराक से लगी सीमा होने की वजह से उसके ईरान से भी अच्छे रिश्ते हैं। इसी कारण नेचिरवान बरजानी दोनों देशों के बीच भरोसेमंद नेता माने जाते हैं और कई बार तनाव के दौरान बातचीत कराने की भूमिका निभा चुके हैं। बरजानी के ईरान से पुराने संबंध हैं। ईरान-इराक युद्ध के दौरान उन्होंने ईरान में समय बिताया और तेहरान यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। वह फारसी भाषा बोलते हैं और ईरान के कई बड़े नेताओं से उनके निजी संबंध हैं। इसी वजह से बरजानी दोनों देशों के बीच भरोसेमंद कड़ी बन सके। उन्हें ऐसा नेता माना जाता है, जो बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश करता है। तुलसी गबार्ड ने बरजानी से संपर्क किया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की तत्कालीन राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने करीब 10 मई को बरजानी से पहली बार संपर्क किया। गबार्ड ने उनसे कहा कि अमेरिका को IRGC चीफ जनरल अहमद वाहिदी से संपर्क करने में उनकी मदद चाहिए। गबार्ड ने बरजानी से कहा कि वह राष्ट्रपति ट्रम्प और उपराष्ट्रपति वेंस की मंजूरी के बाद उनसे बातचीत कर रही हैं। गबार्ड को यह भी पता करना चाहता था कि IRGC की अमेरिका से कोई अलग मांग तो नहीं है। बरजानी की IRGC चीफ से इन्क्रिप्टेड फोन पर बातचीत बरजानी ने गबार्ड की बात मानकर IRGC से संपर्क किया और वाहिदी तक अपना मैसेज पहुंचाया। वाहिदी ने इसके बाद बरजानी से सीधे बातचीत की इच्छा जताई। इसके बाद 14 मई को IRGC के एक अफसर ने राजधानी एरबिल में बरजानी के ऑफिस में मुलाकात की। अफसर ने बरजानी को एक एन्क्रिप्टेड फोन दिया, ताकि वह सुरक्षित तरीके से वाहिदी से बात कर सकें। इसके बाद ही बरजानी और वाहिदी की अमेरिका को लेकर सीधे बातचीत हुई। बरजानी ने वाहिदी से पूछा कि क्या वह ईरान की ओर से बातचीत कर रहे गालिबाफ और अराघची के साथ हैं। वाहिदी ने इसका जवाब हां में दिया था। वाहिदी का मैसेज व्हाइट हाउस तक पहुंचाया बातचीत के बाद बरजानी ने तुलसी गबार्ड से संपर्क किया और वाहिदी का मैसेज उन्हें बताया। इस बातचीत से ट्रम्प सरकार को यह भरोसा मिला कि ईरान की ओर से बातचीत कर रहे गालिबाफ और अराघची को IRGC का समर्थन हासिल है। इसके बाद ट्रम्प सरकार ने बरजानी से एक और मदद मांगी। अमेरिका चाहता था कि वह एरबिल में अमेरिकी और ईरानी डेलिगेशन की गुप्त बातचीत की मेजबानी करें। हालांकि, यह बैठक नहीं हो सकी। ईरान ने इसे ठुकरा दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी पक्ष को अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता थी।

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