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रिपोर्ट-पुतिन को जंग खत्म करने पर सत्ता जाने का डर:कहा- डोनबास पर कब्जा किए बिना लड़ाई रोका तो मुझे फांसी पर लटका दिया जाएगा

रिपोर्ट-पुतिन को जंग खत्म करने पर सत्ता जाने का डर:कहा- डोनबास पर कब्जा किए बिना लड़ाई रोका तो मुझे फांसी पर लटका दिया जाएगा

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को डर है कि अगर उन्होंने पूरा डोनबास अपने कब्जे में लिए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म कर दिया, तो रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ सकती है। इससे उनकी सत्ता पर भी खतरा आ सकता है। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, क्रेमलिन के एक करीबी सूत्र ने बताया कि युद्ध खत्म करने के नतीजों पर बात करते हुए पुतिन ने एक बार कहा था, “वे मुझे फांसी पर लटका देंगे।” रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन को लगता है कि अपनी बड़ी मांगें पूरी किए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म करना रूस में उनकी कमजोरी मानी जाएगी। उनका मानना है कि अगर रूस का नेता कमजोर दिखता है तो उसके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि वह युद्ध खत्म करने के लिए बड़े समझौते करने से बच रहे हैं। एस्टोनिया के खुफिया प्रमुख काउपो रोसिन ने भी हाल में कहा था कि अगर पुतिन अभी या आने वाले समय में युद्ध रोकते हैं तो उन्हें रूस में कमजोर नेता के तौर पर देखा जा सकता है। पुतिन के सामने अब क्या रास्ता है? रिपोर्ट के मुताबिक, पांच साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध ने पुतिन के लिए स्थिति मुश्किल कर दी है। युद्ध जारी रखने पर यूक्रेन रूस के तेल और ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। इससे रूस पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है और युद्ध का खर्च लगातार बढ़ रहा है। लेकिन युद्ध रोकना भी पुतिन के लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें आम लोगों की नाराजगी से ज्यादा चिंता रूस के उन ताकतवर लोगों की है, जिनके पास पैसा, हथियार और सत्ता तक पहुंच है। एस्टोनियाई खुफिया प्रमुख रोसिन के मुताबिक, इन लोगों के बीच अब पहले की तरह रूस की पूरी जीत की बात नहीं हो रही है। इसके बजाय वे यह सोच रहे हैं कि इस युद्ध को सही तरीके से कैसे खत्म किया जाए। रूस के ताकतवर लोगों में बढ़ रही नाराजगी? द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, रूस के ताकतवर लोगों की चिंता अब सिर्फ अर्थव्यवस्था या युद्ध में सफलता तक सीमित नहीं है। उनमें यह सवाल भी उठने लगा है कि इस युद्ध में करीब पांच साल बर्बाद हो गए और आखिर हासिल क्या हुआ। रिपोर्ट में रूस के एक ताकतवर व्यक्ति के हवाले से कहा गया कि वहां अब यह भावना बढ़ रही है कि “राजा के पास कपड़े नहीं हैं।” आसान भाषा में इसका मतलब है कि सत्ता की कमजोरियां अब पहले की तरह छिपी नहीं रह गई हैं। हालांकि, पुतिन की सत्ता पर पकड़ अभी भी मजबूत है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की राजनीति में लोगों को काफी हद तक हिंसा मंजूर हो सकती है, लेकिन हार या नाकामी आसानी से स्वीकार नहीं की जाती। यही वजह है कि पुतिन को कथित तौर पर लगता है कि अगर वह डोनबास पर पूरी तरह कब्जा किए बिना युद्ध खत्म करते हैं, तो इसे उनकी हार माना जा सकता है। इससे रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ने और उनकी सत्ता को चुनौती मिलने का खतरा पैदा हो सकता है। इसलिए युद्ध खत्म करना पुतिन के लिए बड़ी चुनौती एक तरफ युद्ध जारी रखने से रूस को आर्थिक नुकसान और यूक्रेन के हमलों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, युद्ध रोकने पर पुतिन को अपनी छवि और सत्ता को लेकर खतरा दिखाई दे रहा है। ऐसे में यूक्रेन युद्ध खत्म करने का फैसला पुतिन के लिए सिर्फ रूस की विदेश नीति का मामला नहीं, बल्कि उनकी अपनी सत्ता और राजनीतिक भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।

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